अगस्त 28, 2015

हैवान भाई की दरिंदगी

*भाई--बहन का पाक रिश्ता हुआ शर्मसार........... 
*रिश्ते की भड़भड़ायी दीवार और कमतर हुयी रिश्ते की गर्माहट....

*रक्षा बंधन एक दिन पहले एक भाई ने बहन पर किया जानलेवा हमला.........
*कपड़ा पसारने को लेकर हुए विवाद में घटी घटना .........

*जख्मी महिला की स्थिति नाजुक,सदर अस्पताल में चल रहा है ईलाज .............
*सदर थाना के बटराहा मोहल्ले की घटना............. 
*पैसे की खनक और संपत्ति का लोभ,इंसान को किसी भी हद तक गिरा सकता है.की एक बानगी........... 
सहरसा टाईम्स के लिए मुकेश कुमार सिंह की रिपोर्ट----- कल 29 अगस्त को भाई--बहन का महापर्व रक्षा बंधन है जिसमें बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती है और भाई ताउम्र अपनी बहन की सुरक्षा का उससे ना केवल वायदा करता है बल्कि सिद्दत से कसम भी खाता है.लेकिन इस पवित्र पर्व से ठीक एक दिन पहले सहरसा के एक दरिंदे भाई ने अपनी बहन पर जानलेवा हमले कर के रिश्ते की सारी मर्यादाओं को तार--तार कर के रख दिया है.पैसे की हनक और भौतिकवादी तृष्णा के बीच रिश्ते की भड़भड़ायी दीवार और कमतर हुयी गर्माहट पर,पेश है 
एक बार फिर रिश्ते की दीवार गिरी और इंसानियत पूरी तरह से शर्मसार हो गया.सहरसा के रिहायशी मोहल्ले बटराहा की एक बहन पर उसके सगे भाई ने लोहे के रॉड से ताबड़तोड़ हमले कर के ना केवल उसके सर को फोड़ डाला बल्कि उसके जिश्म पर भी कई गहरे जख्म कर डाले.महज कपड़ा पसारने को लेकर हुए विवाद में गंगा चौधरी नाम के इस दरिंदे भाई ने अपनी बहन मुन्नी देवी को मौत के मुहाने पर पहुंचा डाला.मुन्नी देवी सदर अस्पताल में भर्ती है,जहां चिकित्सक उनकी स्थिति नाजुक बता रहे हैं.
सहरसा टाईम्स ने इस मामले को बेहद गंभीरता से लिया और सदर अस्पताल में उनकी चिकित्सा का हर सम्भव इंतजाम करवाया.मुन्नी देवी ने सहरसा टाईम्स से कहा की उसका भाई उसपर कई बार जानलेवा जुल्म कर चुका है.वह भाई नहीं राक्षस है.मुन्नी देवी कहती है की पैसे के दम पर उसका भाई पुलिस को खरीद लेता है और वह हर बार बेइंसाफ रह जाती है. 
मामले के तह में उतरने पर हमने जाना की मुन्नी देवी के पिता राम शरण चौधरी ने उसे अपने घर के निकट ही एक घर दिया है जिसमें वह सपरिवार रहती है.मुन्नी देवी के पति गणेश चौधरी की मौत 1998 में ही हो गयी थी लेकिन मुन्नी ने अदम्य साहस से अपनी तीन बेटियों की ना केवल परवरिश की बल्कि दो बेटियों की उसने शादी भी कर डाली.एक बेटी सोनिया है जो इंटर में पढ़ाई कर रही है.मुन्नी का भाई संपत्ति के लोभ में अपनी बहन को यह समझकर यातनाएं दे रहा है की वह घर छोड़कर भाग जाए.मुन्नी की बेटी सोनिया घटना के बाबत जानकारी देते हुए कहती है की उसके मामा उन्हें घर से भगाना चाहते हैं.मुन्नी और उसकी बेटी दोनों समवेत स्वर में सहरसा टाईम्स से इन्साफ दिलाने की गुहार लगा रही है.मुन्नी देवी तो सहरसा टाईम्स को ही अपना सगा भाई भाई बता रही है.
जख्मी मुन्नी देवी की हालत को सदर अस्पताल के चिकित्सक डॉक्टर रतन कुमार झा बेहद गंभीर बता रहे हैं.इनकी मानें तो कई तरह के टेस्ट कराने के बाद ही स्थिति साफ़ हो पाएगी.
इस घटना के बाबत हमने पुलिस अधिकारी से भी जानकारी चाही लेकिन हमें कैमरे पर बोलने वाले एक भी अधिकारी नहीं मिले.वैसे एस.पी विनोद कुमार और एस.डी.पी.ओ सुबोध कुमार विश्वास ने दूरभाष पर हमें उचित कार्रवाई का भरोसा जरूर दिलाया है.
पैसे की खनक और संपत्ति का लोभ इंसान को किसी भी हद तक गिरा सकता है,यह घटना उसी की बानगी है.आगे देखना दिलचस्प होगा की इस मामले में पुलिस कितनी तेजी से और कैसी कार्रवाई करती है.आखिर में हम इतना जरूर कहेंगे की रिश्ते की अहमियत हालिये दिनों में काफी कम हुयी है.सामाजिक चिंतकों को इस गंभीर विषय पर भी चिंतन करना चाहिए.

पूर्व भाजपा विधायक भेजे गए जेल..........

*पूर्व भाजपा विधायक संजीव कुमार झा ने आज सहरसा न्यायालय में किया  आत्मसमर्पण.....
*वर्ष 1999 में जबरन डीएम की कुर्सी पर बैठने को लेकर एक मामला था दर्ज ..
*जमानत याचिका हुयी खारिज,भेजे गए जेल......
*राजनीतिक साजिश के हुए शिकार,खुद को बताया बेकसूर......
*कहा न्यायालय पर पूरा भरोसा,फैसले का करते हैं सम्मान ..............

सहरसा टाईम्स के लिए मुकेश सिंह की रिपोर्ट :-सहरसा के पूर्व भाजपा विधायक संजीव कुमार झा ने आज पूर्व से लंबित एक मामले में सहरसा न्यायालय में आत्मसमर्पण किया जहां उनके वकील ने माननीय न्यायालय में जमानत की अर्जी लगाई लेकिन उनकी जमानत को रद्द करते हुए उन्हें जेल भेज दिया गया.
ये हैं सहरसा के पूर्व भाजपा विधायक संजीव कुमार झा. इनके उपर सहरसा समाहरणालय में तोड़फोड़ करने, सरकारी काम में बाधा पहुंचाने और जबरन डीएम की कुर्सी पर बैठने को लेकर एक मामला सदर थाना में वर्ष 1999 में दर्ज कराया गया था. लम्बे समय से यह मामला लंबित था जिसमें आज पूर्व विधायक ने प्रथम श्रेणी न्यायायिक दंडाधिकारी माननीय सतीश कुमार झा के न्यायालय में आत्मसमर्पण किया. पूर्व विधायक के वकील ने विधायक की जमानत के लिए अर्जी लगाई लेकिन सुनवाई के बाद इनकी जमानत को रद्द करते हुए माननीय न्यायाधीश ने उन्हें जेल भेज दिया.
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक़ पूर्व विधायक कोर्ट के शख्त रुख और पुलिस की दबिश की वजह से आत्मसमर्पण को मजबूर हुए. इस मौके पर पूर्व विधायक ने कहा की जंगल राज के समय का यह मामला है.भारतीय जनता पार्टी के युवा मोर्चा के वे जिलाध्यक्ष थे.उन्होनें डीएम कार्यालय के सामने आक्रोश प्रदर्शन किया था.लेकिन उस समय मामला तीन दिन के बाद दर्ज किया गया था.जाहिर तौर पर उस समय राजनीतिक चक्रव्यूह के तहत ही यह मामला दर्ज कराया गया था.लेकिन वे न्यायालय के फैसले का सम्मान करते हैं.न्यायालय सभी के लिए समन है.न्यायालय के आदेश पर हमें कुछ नहीं बोलना है.वे न्यायालय पर प्रश्न नहीं खड़े करना चाहते.

अगस्त 27, 2015

प्याज की बढ़ती कीमत का साईड इफेक्ट...........

* प्याज की चोरी..............
* हीरे--जवाहरात,आभूषण,अन्य कीमती सामान और नकदी की जगह प्याज की हुयी चोरी ..........
* कई क्विंटल प्याज की चोरी ............

* दुकानदार से लेकर आमलोग परेशान .........
* चोरों की सियासतदां को एक बड़ी नसीहत देने की कोशिश ...........
सहरसा टाइम्स के लिए मुकेश सिंह की रिपोर्ट :- चोरों ने अपनी चोरी की फितरत नहीं बदली है लेकिन चोरी की उनकी ख्वाहिश जरूर बदल गयी है.अब चोर हीरे--जवाहरात,आभूषण,अन्य कीमती सामान और नकदी से इतर प्याज की चोरी करने में जुट गए हैं.बीती रात सहरसा के शब्जी मंडी और बंगाली बाजार में एक साथ पांच दुकानों में चोरी की घटना घटी लेकिन चोरों ने अन्य कीमती सामानों की जगह एक दूकान से तीस से चालीस बोड़े प्याज की चोरी कर के इलाके के लोगों के होश उड़ा डाले हैं.फिलवक्त पुलिस पुरे मामले की तफ्तीश में जुट चुकी है और उचित कार्रवाई का भरोसा दिला रही है.प्याज की लगातार बढ़ती कीमत का कहीं यह साईड इफेक्ट तो नहीं ?
पेट की खातिर हम तो कुछ भी कर गुजरेंगे.कहते हैं की मज़बूरी में इंसान के किसी हद तक गिरने की गुंजाईश होती है.कोई चोरी जैसी घटना को तब अंजाम देता है,जब मौजूं जरूरतें उसे मजबूर करती हैं.हांलांकि कम समय में जल्दी से धनवान बनने की ख्वाहिशों में भी चोरी की घटना घटती है. लेकिन तमाम तरह की चोरी में निशाने पर हीरे--जवाहरात,आभूषण,अन्य कीमती सामान और नकदी होते हैं लेकिन सहरसा के सदर थाना के शब्जी मंडी और बंगाली बाजार में चोरों ने कई क्विंटल प्याज की चोरी कर के चोरी का एक नया इतिहास बनाया है.हांलांकि चोरी पांच दुकानों में एक साथ हुयी है लेकिन चोरों ने किसी भी दूकान से कुछ ख़ास नहीं चुराए हैं लेकिन एक दूकान से चोर थोक में प्याज चुरा कर ले गए हैं.सभी दुकानदार चोरी की इस वारदात से हक्के--बक्के हैं.प्याज की बढ़ती कीमत से यूँ भी आमलोग खासे परेशान हैं.अब दुकानदार भाई हलकान और परेशान हैं की वे प्याज को किस तरह से और कैसे संभालकर रखेंगे.जाहिर तौर पर उनके लिए यह एक बड़ी चुनौती है.
सदर थाना एस.एच.ओ. संजय सिंह
पुलिस के अधिकारी भी हक्के--बक्के हैं. सदर थाना एस.एच.ओ. संजय सिंह कह रहे हैं कि अनुसंधान के बाद उचित कार्रवाई होगी.वैसे अभी उनके हाथ में आवेदन नहीं आया है.जैसे ही उनके हाथ में पीड़ित का आवेदन आएगा,उसी आधार पर कार्रवाई होगी.
मारी समझ से प्याज की लगातार बढ़ रही कीमत का यह साईड इफेक्ट है की चोर प्याज की चोरी कर के अधिक मुनाफे की जुगत में हैं.आगे पुलिस कैसे और क्या कार्रवाई करती है के साथ--साथ चोरों का आगे क्या रख होता है,यह दोनों देखना जरुरी है.अभी हम इतना जरूर कहेंगे की चोरों ने सियासतदां को एक बड़ी नसीहत देने की कोशिश की है.

अगस्त 26, 2015

पेट्रोल पम्प से काले कारोबार का खुलासा ..........

** ESSAR बाबा विश्वकर्मा सर्विस स्टेशन पेट्रोल पम्प पर हो रहा था मिलावट .........
** पेट्रोल और डीजल में किरासन तेल मिलाकर बेचा जा रहा था .............
** लोगों की गाड़ियों को बर्बाद कर के मालामाल होने का गोरखधंधा फल--फुल रहा है.............
** पुलिस ने पम्प के दो स्टाफ और लोरी के ड्राईवर को हिरासत में लिया...........
सहरसा टाईम्स की रिपोर्ट :-  पेट्रोल और डीजल में किरासन तेल मिलाकर बेचने का सहरसा पुलिस ने ना केवल खुलासा किया है बल्कि तीन लोगों को हिरासत में लेने के साथ--साथ एक ट्रैंक लोरी को भी जब्त किया है. 
सदर थाना का पटुआहा स्थित ESSAR बाबा विश्वकर्मा सर्विस स्टेशन पेट्रोल पम्प.पर गुप्त सूचना पर सहरसा पुलिस ने आज दिन के दस बजे छापा मारा. छापेमारी में एक ऐसा काला सच सामने आया,जिसे देख--सुनकर,आपके पाँव के नीचे की जमीन खिसक जायेगी. इस पम्प के डीजल और पेट्रोल में "केरोसिन ट्रैंक लोरी" से केरोसिन निकालकर मिलाया जा रहा था. करीब तीन हजार लीटर केरोसिन मिला दिया गया था और साढ़े नौ हजार लीटर केरोसिन ट्रैंक लोरी में बचा था जिसे डाला जा रहा था. ठीक इसी समय सहरसा पुलिस ने रंगे हाथ काले कारोबारियों को काला कारोबार करते हुए धड़ दबोचा. 
पेट्रोल पम्प को एस.डी.ओ. जहांगीर आलम और एस.डी.पी.ओ. सुबोध विश्वास ने सील कर दिया है..सदर थाना में जब्त कर लायी गयी JH 17 E 2126 नंबर की ट्रैंक लोरी में अभी भी साढ़े नौ हजार लीटर केरोसिन बचा हुआ है. 

पुलिस ने पम्प के दो स्टाफ और लोरी के ड्राईवर को हिरासत में लिया है जबकि इस पुरे कारोबार का असली खिलाड़ी, यानि पम्प का मालिक तरुण यादव फरार है.

 गिरफ्त में आया लोरी ड्राईवर शाहजहाँ बता रहा है की वह मिलावट कर रहा था. बतातें चलें की इक्कीस अगस्त को यह लोरी बरौनी से मनीगाछी दरभंगा के लिए चली थी लेकिन यह पहुँच गयी सहरसा. आप बस अंदाजा लगाईये की इस इलाके के लोगों की गाड़ियों को बर्बाद कर के मालामाल होने का गोरखधंधा कैसे फल--फुल रहा है. महज इस कार्रवाई से पुरे इलाके को दुरुस्त समझ लेना बड़ी भूल साबित होगी.
पुलिस और प्रशासन के लिए यह एक बड़ी कामयाबी है लेकिन इस खुलासे ने आम लोगों की चिंताएं और बढ़ा दी है.जाहिर सी बात है की पेट्रोल और डीजल लेने वाले ग्राहकों के मन में असली और नकली को लेकर खलबली सी मच गयी है.सही मायने में उपभोक्ता बाजार में किसी का नियंत्रण नहीं है,जिसका खामियाजा विभिन्य क्षेत्रों में फकत आम लोग भुगत रहे हैं.

अगस्त 24, 2015

बाबा मटेश्वरधाम मंदिर में उमड़ा जन--सैलाब.....

सहरसा टाइम्स की रिपोर्ट: बिहार के बाबाधाम(बैजनाथधाम,देवघर) के नाम से मशहूर कोसी क्षेत्र के सैंकड़ों वर्ष पुराने काठो के प्रसिद्ध बाबा मटेश्वरधाम मंदिर में सावन की अंतिम सोमवारी प़र काँवरियें के साथ--साथ  आस्था का जन--सैलाब उमड़ा है. सिमरी बख्तियारपुर अनुमंडल के काठो में सहरसा के सीमावर्ती जिलों के अलावे देश के विभिन्य हिस्से सहित नेपाल और भूटान क्षेत्र से भी श्रधालुओं का जत्था पहुँचता रहा है. भक्तों को यह भरोसा है की इस धाम में बाबा से जो भी मांगो वह मिल जाता है. यहाँ भक्तों पर बाबा की असीम कृपा बरसती है. भक्तों का कहना है की इस धाम की महिमा अपरम्पार है.यहाँ के शिव लिंग की खासियत यह है की शिव लिंग के चारों ओर से सालो भर जल निकलता रहता है जिसे श्रद्धालु नीर के रूप में ग्रहण करते हैं.
कहा जाता है की शिव लिंग के बगल के हिस्से में पहुँच रहे जल का सीधा संपर्क पाताल से है.जल कहाँ से आता है,यह रहस्य आजतक बरकरार है.सावन में,इस शिव मंदिर की छंटा और महिमा देखते ही बनती है.लेकिन यह बताना लाजिमी है की इस विशिष्ट धाम में श्रधालुओं का सालोभर तांता लगा रहता है. भगवान आशुतोष इस पावन स्थल प़र अपने दोनों हाथों से लोगों प़र अपनी कृपा बरसा रहे हैं.



अगस्त 23, 2015

कोसी विस्थापितों का दर्द..........

*अभीतक एक हजार से ज्यादा घर कोसी में समाये 
*डेढ़ लाख से ज्यादा की आबादी बाढ़ से प्रभावित 

*सैकड़ों परिवार हुए बेघर 
*जान बचाने के लिए गाँव छोड़ लोग सुरक्षित ठिकाने की तलाश में भाग रहे 

*नाव पर झोपडी और कुल जमापूंजी लादकर लोग गाँव छोड़,कर रहे पलायन 
*सैंकड़ों परिवारों ने विभिन्य स्पर और रिंग बाँध पर बनाया ठिकाना 

*राहत और बचाव कार्य अभीतक शुरू नहीं हुआ 
*लोग पानी,पोलीथिन सीट और अन्न के लिए तरस रहे 

*माल--मवेशी को भी बचाना हुआ मुश्किल 

मुकेश कुमार सिंह की कलम से--------विनाशकारी कोसी का कहर अब पूरे परवान पर है. अभीतक कोसी ने अपने रौद्र रूप से हजारों परिवारों का ना केवल बेघर कर दिया है बल्कि उन्हें दाने--दाने के लिए मोहताज भी कर दिया है.लोग किसी तरह जान बचाने के लिए गाँव छोड़ तटबंध के भीतरी इलाके से निकलकर तटबंध के बाहर आ रहे हैं. माल--मवेशी से लेकर जो सामान ये नाव पर लाद सकते थे सबकुछ लादकर ये बाहर तो निकल रहे हैं लेकिन सर छुपाना और मुंह का निवाला इनके लिए मील का पत्थर साबित हो रहा है.ये पीड़ित परिवार थोक में विभिन्य स्पर या फिर रिंग बाँध पर शरण ले रहे हैं.सरकार और प्रशासन की तरफ से इनके खाने--पीने से लेकर किसी तरह की राहत और मदद अभीतक नहीं पहुंचाई गयी है.लोग त्राहिमाम कर रहे हैं.

सहरसा जिले के नवहट्टा, महिषी, सलखुआ, बनमा ईटहरी और सिमरी बख्तियारपुर कुल पाँच प्रखंडों में कोसी कहर बरपा रही है.कोसी की इस तबाही में एक हजार से ज्यादा परिवार पूरी तरह से बेघर हो चुके हैं.कमोबेस डेढ़ लाख से ज्यादा की आबादी इस बाढ़ की चपेट में है.लगातार कोसी विभिन्य गाँवों में ना केवल तेजी से कटाव कर रही है बल्कि घरों को भी लीलती जा रही है.बानगी भर को हम आपको नवहट्टा प्रखंड के सिसई, रामपुर, केदली, बरियाही, छतवन, हाटी, डरहार, नौला, बिरजाईन आदि गावों के साथ--साथ सलखुआ प्रखंड के पिपरा गाँव के पीड़ितों का नजारा दिखा रहे हैं. 

हम इन गाँवों में मची तबाही से बेघर हुए लोगों की दुखती कहानी से आपको दो-चार करा रहे हैं.देखिये अपना सबकुछ गंवाकर किसी तरह जान बचाकर भागने में सफल हुए लोगों का जत्था किस तरह यहाँ स्पर और रिंग बाँध पर शरण लेने की कवायद में जुटा है.नावों पर झोपडी, जमापूंजी और जो कुछ भी उसपर लादा जा सका सबकुछ लादकर ये यहाँ पर आये हैं.अभी ये सर छुपाने की जुगात कर रहे हैं. हद की इंतहा देखिये की सरकार और प्रशासन की तरफ से इन्हें अभीतक किसी भी तरह की  मदद नहीं मिली है.इनलोगों को पीने के पानी से लेकर खाने तक पर लाले पड़े हुए हैं.अभीतक प्रशासन के किसी हाकिम या मुलाजिम ने इनकी कोई खोज-खबर नहीं ली है.यहाँ हाहाकार मचा है, लोग त्राहिमाम कर रहे हैं.कोसी का कहर अपने परवान पर है.कोसी गाँव के गाँव लील रही है.
हम आपको सलखुआ प्रखंड के पिपरा गाँव के उन पीड़ितों का दर्द भी दिखा रहे हैं जिनके घरबार कोसी ने लील लिए.अब ये खानाबदोश और यायावर की तरह कहीं पर आसरा लेकर अपनी जिंदगी बचाने की कवायद कर रहे हैं.ये पीड़ित सलखुआ की एक सड़क के किनारे अपनी झोपड़ी खड़ी करने की जुगत कर रहे हैं जिससे उनके घर के लोग उसमें शरण ले सकें.जाहिर तौर पर इनके ऊपर आफत का पहाड़ टूटा है.इनके पास ना तो खाने का कोई इंतजाम है और ना ही पीने के पानी की कोई व्यवस्था.सरकार का कोई भी तंत्र, अभीतक यहां नहीं पहुंचा है.राहत और मदद के लिए ये तमाम पीड़ित त्राहिमाम कर रहे हैं.
इनकी पीड़ा--व्यथा को जानने के दौरान हमें कोसी की मार झेलने वाली एक दुखियारी माँ बिंदल देवी मिली,जिसका लाडला बेटा सत्रह वर्षीय राजो की मौत कोसी नदी में डूबकर हो गयी है.जीवन की कुल जमापूंजी,घरबार से साथ--साथ इसने अपना बेटा भी खो दिया.बेटा नदी में बह गया जिसकी लाश भी बरामद नहीं हो सकी.जख्म गहरा और सदमा आसमानी है.इन सबके बीच सरकारी लापरवाही और अनदेखी का परचम बेशर्मी से लहरा रहा है.
एस.डी.ओ, जहांगीर आलम,सदर सहरसा का कहना है कि पीड़ितों को ना केवल राहत पहुंचाई जा रही है बल्कि उनके रहने का इंतजाम भी किया जा रहा है.इनकी नजर में प्रशासन पूरी तरह से संजीदा और गंभीर है.
तथाकथित सुशासन की सरकार में अधिकारी अलमस्त होकर काम कर रहे हैं.इन बाढ़ पीड़ितों के आंसू ना तो कोई समय पर पोछने वाला है और ना ही कोई महती मदद करने वाला ही है.जाहिर तौर पर किसी भी तरह की मदद विभागीय फाईलों को मजबूत करने के बाद ही पहुंचाई जा सकेगी.आखिर में हम इतना जरुर कहेंगे की कोसी के इस सैलाब ने दर्द और आंसूओं का भी सैलाब लाया है.इस इलाके में सिर्फ दर्द और टीस ही शेष बच रहे हैं.

अगस्त 22, 2015

कोसी का कहर------

*नवहट्टा,महिषी,सलखुआ,बनमा ईटहरी और सिमरी बख्तियारपुर प्रखंड के दर्जनों गाँव में कोसी का कहर 
 *हजारों की आबादी प्रभावित  
*ना राहत हुयी मयस्सर और ना ही रहने का कोई प्रबंध  
*जिला प्रशासन पीड़ितों की सूचि बनाने में है जुटा हुआ  
*एक पीड़ित परिवार को राहत के नाम पर मिलते हैं 6100 रूपये नकद और एक क्विंटल अनाज 
 *इस इलाके के लोगों की जिंदगी है,एक जंग के समान

मुकेश कुमार सिंह की कलम से-----कोसी तबाही की दास्ताँ बड़ी दर्दनाक और सीने को चाक करने वाली है.पूर्वी कोसी तटबंध के भीतर दर्जनों गाँव के लोग कोसी की प्रलयंकारी बाढ़ के चपेट में आकर ना केवल दाने--दाने को मोहताज हैं बल्कि जान बचाने के लिए किसी तारणहार की बाट भी जोह रहे हैं.सरकार और उनके नुमाईंदों के एसी कमरे में बैठकर हो रही बाढ़ की समीक्षा में जो तस्वीर उभर रही हो,लेकिन जमीनी हकीकत यह है की जो लोग बाढ़ में फंसे हैं,वे सरकारी दावों की पूरी तरह से हवा निकाल रहे हैं.सहरसा टाईम्स आपको ग्राउंड जीरो के सच से आपको रूबरू कराने जा रहा है जिसे देखकर आपकी रूह थर्रा उठेगी.
यूँ तो सहरसा जिले के नवहट्टा,महिषी,सलखुआ,बनमा ईटहरी और सिमरी बख्तियारपुर प्रखंड के दर्जनों गाँव को कोसी लील रही है.लेकिन बानगी के तौर पर हम आपको महज नवहट्टा प्रखंड के सिसई,रामपुर,केदली,बरियाही,छतवन, हाटी, डरहार, नौला, बिरजाईन आदि गावों का नजारा दिखा रहे हैं.नदी की तेज धार से तबाही मची हुयी है.हम आज इस इलाके का सच जानने और समझने के साथ--साथ उसे अपनी नंगी आँखों से देखने निकले हैं.देखिये कोसी किस तरह से गाँव के गाँव को निगल रही है.कमोबेस सभी गाँव की एक ही तड़प,टीस,दर्द,सीलन और चुभन की कहानी है.
अब सरकारी हाकिम की बात करें तो.एसी कमरे में बैठकर साहब खुद को बेहद संजीदा बता रहे हैं.एसडीओ साहब जहांगीर आलम जी कह रहे हैं की उन्हें कटाव की जानकारी मिली है.राहत और बचाव कार्य मुस्तैदी से किये जा रहे हैं.इनके बयान सिर्फ कोरे और सफ़ेद झूठ हैं.जमीनी हकीकत यह है की पीड़ित लोग ना केवल दाने--दाने को मोहताज हैं बल्कि किसी तारणहार की बाट भी जोह रहे हैं.
सहरसा टाईम्स के सच की इस पड़ताल को देखकर यह पता चलता है की इन पीड़ितों की जिंदगी बचाने के लिए सरकार और उसके तंत्र कहीं से भी संजीदा नहीं है.सभी को सियासत और फ्लड लूट की बड़ी चिंता सता रही है.अगर इस इलाके  जिंदगी बच रही है,तो समझिए ऊपर वाला मेहरबान है.आखिर में,मोटे तौर पर हम यही कहेंगे की"कुदरत के कहर के साथ--साथ इस इलाके में सरकारी करतूत का कहर भी जारी है".

अगस्त 21, 2015

तबाही की बारिश............


मुकेश कुमार सिंह की कलम से------यूँ तो बारिश हर साल बिहार की राजधानी पटना के साथ--साथ झारखण्ड की राजधानी रांची के नगर निगम के तमाम इंतजामों की पोल खोलकर रख देती है लेकिन आज हम आपको सहरसा का नजारा दिखा रहे हैं.एक तो पहले से ही यह जिला हर साल कोसी के कहर को झेलता है.इस जिले के कई इलाके ऐसे हैं जो हर साल बाढ़ की चपेट में आकर डूबते और तरते हैं.लेकिन इससे इतर तीन दिन की लगातार झमाझम बारिश में सहरसा जिला मुख्यालय के लगभग तमाम सड़कों से लेकर मुहल्ले तक में सिर्फ पानी ही पानी का नजारा है.चहुँदिश बाढ़ का मंजर है.सड़कों पर पानी है तो लोगों के घरों में भी पानी है.
इस शहर को बारिश ने अपनी धमक से ना केवल पानी से तर कर दिया है बल्कि शहर को नरक में तब्दील करके रख दिया है.आम जनजीवन पूरी तरह से बेहाल है.एक तरह से लोगों की जिन्दगी ठहर सी गयी है.
सहरसा की लगभग तमाम जगहें पानी से तर हैं.शहर का चप्पा--चप्पा पानी--पानी है.शहर के तमाम मुहल्ले मसलन गौतम नगर,गंगजला,बटराहा,कायस्थ टोला,हटियागाछी सहरसा बस्ती,भवानीनगर,संतनगर,न्यू कोलोनी, रिफ्यूजी कोलोनी बारिश के पानी से इसकदर लबालब हैं गोया बाढ़ का कहर हो.बानगी भर को हम आपको हटियागाछी सहरसा बस्ती, न्यू कोलोनी, गंगजला, विद्यापति नगर,कायस्थ टोला और गौतम नगर मुहल्ले का नजारा दिखा रहे हैं.लोग हलकान--परेशान हैं.बारिश में हुए इस जल-जमाव से लोगों का जीना मुहाल है.बच्चे भी हद से परेशान हैं.जिन्दगी में जैसे जंग लग गयी हो.जिन्दगी की रफ़्तार थम सी गयी है.नगर परिषद् पंगु और लाचार है.पानी निकासी की कोई व्यवस्था नहीं है जिसका नतीजा हमारे सामने है.लोगों की पीड़ा को आईये खुद उनकी जुबानी सुनते हैं.घर से लेकर बाहर तक बस पानी ही पानी है.

यह नजारा है सहरसा के डी.बी रोड स्थित मुख्य बाजार का.देखिये बारिश ने इस बाजार की क्या गत बनाकर रख दिया है.लोग परेशान--परेशान हैं.बाजार से लेकर गली--मुहल्ले तक कोई भी ऐसी जगह नहीं है जहां पानी ने अपना रौब ना दिखाया हो. दूसरी सड़क वी.आई.पी रोड है.उसकी क्या गत है उसे भी देखिये.
इस झमाझम बारिश से नगरवासी खासे परेशान और मुसीबत में हैं.इस बारिश में जिला मुख्यालय में तीन दर्जन से ज्यादा ग़रीब--गुरबों के कच्चे और खपरैल मकान क्षतिग्रस्त हो गए हैं.लोगों की जिन्दगी को ग्रहण लग गए हैं.क्या खाएं और कहाँ सोयें,एक बड़ी मुसीबत लोगों के सामने खड़ी है.छोटे---छोटे मासूम नौनिहालों को लेकर ये मजबूर लोग आखिर जाएँ तो जाएँ कहाँ.अली नगर में बारिश ने सबसे ज्यादा घरों को क्षतिग्रस्त किया है.
हमने इस पुरे मसले पर नगर परिषद के अधिकारी दिनेश राम से भी बात करनी चाही लेकिन जनाब जिला से बाहर होने की बात कह के अपनी जिम्मेवारी निभा दी.यूँ सहरसा का नगर परिषद किसी भी सूरत में आजतक जनहित के लिए काम करता नहीं दिखा है.  कोसी के कहर के साथ सहरसा वासी बारिश का कहर भी झेलने को मजबूर हैं.जाहिर तौर पर इस इलाके के लोगों को कुदरत के कहर के साथ--साथ सरकारी लापरवाही का जुल्म भी सहना पर रहा है.इन्हें ना जाने इस मुसीबत से कब और कैसे निजात मिलेगी.

कार्यपालक सहायकों का भूख हड़ताल से कई कार्य ठप

चन्दन सिंह की रिपोर्ट:- सहरसा के सभी कार्यालय में कार्यरत कार्यपालक सहायक का आज भी भूख हड़ताल जारी रहा. अपनी मांगों पर अडिग कार्यपालक सहायक के कारण जिले में कई कार्य ठप परे है. जिले स्तर पर सभी कार्यालय में वैकल्पिक व्यवस्था करने का फरमान जारी कर दिया गया है. परन्तु हडताल के इतने दिनों बाद भी सरकार के सकारात्मक पहल न होने का आक्रोश स्पष्ट दिखाई दे रहा है 
हड़ताली कार्यपालक सहायक आक्रोश में है. इनका कहना है कि एक तरफ जहाँ बिहार सरकार टोला सेवक का सेवाकाल 60 साल और शिक्षक को वेतनमान कर दी वहीँ हम कार्यपालक सहायक इतनी कड़ी मेहनत करते है फिर भी हमारे साथ अन्याय क्यों हो रहा है. सरकार के द्वारा दोहरी नीति क्यों अपनाई जा रही है ? सरकार हमें हमारी जॉब को सिक्यूरिटी क्यों नहीं दे रही है जिससे हमारा भविष्य सुरक्षित हो.सहरसा के दौरे पर आये खगड़िया लोकसभा के लोजपा सांसद मो० महबुब अली केसर को
कार्यपालक सहायकों ने अपनी माँगों को लेकर ज्ञापन सौंपा और अपनी समस्याओं से अवगत कराया. सांसद महोदय ने विभाग को बात करने का आस्वासन दिया.
जाहिरतौर पर सरकार की दोहरी नीति और जातिगत नीति से ये कर्मी हताश है. इनकी जायज माँगों को लेकर सरकार फिलवक्त उदासीन है. यदि सरकार इनकी सेवाकाल ६० वर्ष नहीं करती है तो इनका जॉब सेक्योर्ड नहीं है अपनी भविष्य को लेकर ये चिंतित है. 

राजन आनंद बने "मांझी युवा ब्रिगेड" के महासचिव ..........

* राजनीति की नयी पारी का आगाज......... 
* पूर्व सांसद आनंद मोहन के भतीजे हैं राजन............ 
* राजन भी संभालेंगे आनंद मोहन की राजनीतिक विरासत......... 
* मिली जिम्मेवारी को सिद्दत से निभाने का राजन ने किया वायदा.......... 
मुकेश सिंह के साथ चन्दन सिंह की रिपोर्ट:- पूर्व सांसद आनंद मोहन की राजनीतिक विरासत को संभालने और उसे जद से हवा देने अब राजनीति के मैदान में उतरे उनके भतीजे राजन आनंद ने सहरसा टाईम्स से खास बातचीत की.राजन आनंद ने बातचीत की शुरुआत में ही जानकारी देते हुए कहा की जीतन राम मांझी की नयी पार्टी "हम" ने उन पर भरोसा जताते हुए उन्हें प्रदेश युवा महासचिव के पद पर मनोनीत किया है.जिम्मेवारी बड़ी और प्रदेश की युवा शक्ति को लामबंद करने के साथ-साथ उन्हें उनके हक़ से दो--चार कराने के अलावे उन्हें आदर्श तरीके से निर्देशित करने की है.
जाहिर तौर पर युवाओं की अनदेखी अब किसी भी पार्टी की जड़ कुरेदने के लिए काफी है. प्रदेश के युवा आजतक ठगी और छलावे के शिकार होते रहे हैं लेकिन अब वक्त और हालात बदल चुके हैं. यह एक बड़ा सच है की तमाम राजनीतिक पार्टियां युवाओं को अपने साथ लेने की जुगत में जुटी हुयी हैं. जीतन राम मांझी की प्रदेश और देश भर में एक अलग छवि है. राजन ने बातचीत को आगे बढ़ाते हुए कहा की वे फ्रेंड्स ऑफ आनंद के प्रदेश महासचिव रहते हुए लम्बे समय से युवाओं के बेहद करीब रहे हैं. उन्हें युवाओं की समस्याओं का पूरा भान है. उनका पिछ्ला अनुभव, इस नयी जिम्मेवारी में उनकी भरपूर मदद करेगा.
उन्होंने बड़ी गंभीरता से कहा की वे प्रदेश के तमाम जिलों में घूम--घूमकर युवाओं को ना केवल लामबंद करेंगे बल्कि उनमें आशा और उम्मीद का नया जोश भी भरेंगे.वे अपने काम से शीर्ष नेतृत्व को हमेशा संतुष्ट रखेंगे.आगामी बिहार विधान सभा चुनाव के दौरान युवाओं का बड़ा जत्था मांझी जी के निर्देश पर बिहार के घर--घर तक पहुँचने की ना केवल कोशिश करेगा बल्कि राज्य हित को लेकर सन्देश भी देगा.राजन आनंद बेहद उत्साहित थे और कह रहे थे अभी तो जो जिम्मेवारी मिली है,पहले उसे सिद्दत से निभानी है.आगे देखियेगा "हम' को आसमान की ऊंचाई मयस्सर हो,इसके लिए हम कोई कोर--कसर नहीं छोड़ेंगे.देश मैं अभी जैसे "मोदी--मोदी" के नारे लग रहे हैं,आने वाले दिनों में 'मांझी---मांझी' के नारे लगेंगे.

अगस्त 19, 2015

अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर कार्यपालक सहायक ...........

रिपोर्ट सहरसा टाइम्स:- कार्यपालक सहायक के अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल से RTPS सेवा पूर्णत चरमरा गई है. आज १० वां  दिन कार्यपालक सहायक के हड़ताल से विभाग का कार्य संपादन में काफी कठिनाई हो रही है. संघ के अध्यक्ष का कहना है कि कार्यपालक सहायक द्वारा अपनी माँगों के समर्थन में किये जा रहे आंदोलन की कोई सुधि नहीं ले रही है. जिससे कार्यपालक सहायकों में काफी आक्रोश है. कार्यपालक सहायकों ने कहा कि आंदोलन की सुध नहीं लेना, लोकतंत्र की हत्या है. इनके द्वारा किये जा  रहे कार्य वर्तमान सरकार की सफलता का मुख्य फर्मूला बताया. आज लगातार हो रही तेज बारिश में भी सभी आंदोलन कर्मी अपनी मांगों के समर्थन में डटे रहे. इन्होने कहा कि  कम्प्यूटर पर काम करने वालों कर्मियों की सेवा अनवरत चलने वाली है लेकिन सेवा की निश्चितता नहीं है.
कार्यपालक सहायकों का कहना है कि हमे अपनी सेवा सुरक्षा की गारंटी एवं सम्मानजनक वेतन और  अन्य सरकारी लाभ दिया जाय. जबतक ये माँगे  पूरी नहीं होगा संघर्ष जारी रहेगा. धरना स्थल पर सभी कार्यपालक सहायक डटे हुए है.

अगस्त 17, 2015

सहरसा ग्रुप का मिलन समारोह हुआ संपन्न..........

कृष्ण मोहन सोनी की रिपोर्ट:-  सहरसा में सहरसा ग्रुप का मिलन समारोह व कविता पाठ कार्यक्रम बड़े जोश के से साथ नए अंदाज में आगाज किया गया जिसमे शोशल मीडिया की उपयोगिता पर जम कर चर्चाएँ हुई. इस कार्यक्रम में साहित्यकारों, पत्रकारों व कवियों ने शोशल मीडिया की उपयोगिताओं पर चर्चा की. 
समारोह का विधिवत उदघाटन पटना से आये शहंशाह आलम, राजकिशोर राजन, प्रख्यात कवि श्री अरविन्द श्रीवास्तव, श्री मुक्तेश्वर मुकेश, मधेपुरा टाइम्स के प्रधान संपादक राकेश कुमार सिंह, सहरसा टाइम्स के संपादक चंदन सिंह, सहरसा ग्रुप के एडमिन रवि शंकर जी, अमित आनन्द फ्रीलांसर जर्नालिस्ट, सोनू आनंद, प्रो राम चैतन्य धीरज जी आदि ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।
समारोह में विभिन्न क्षेत्रो से पहुंचकर सहरसा ग्रुप के सदस्यों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई. समारोह में सोशल मीडिया की उपयोगिता पर साहित्यकारों, पत्रकारों व विद्वानो ने ब्याख्यान कर अपने अपने विचार व्यक्त कर सोशल मीडिया के महत्व व इसकी उपयोगिता पर वर्तमान समय में इससे समाज विकास में भागीदारी कितनी है र जम कर बहस कर एक निचोड़ व ठोस  विकल्प भी दिया. जिस में मुख्य रूप से वर्तमान व्यवस्था में सोशल मीडिया से देश की एकता व सौहार्द के साथ शैक्षणिक माहोल, सामाजिक, आर्थिक, आदि क्षेत्रो में इसकी सबसे उपयुक्त बताया गया. इसके बाद  फेशबुक पर कुछ अश्लील तस्वीरों पर परहेज रखते हुए ऐसे फ्रेंड्स को बार बार ऐसा करने पर उसे ब्लॉक कर देने की भी बातें हुई.

इस कार्यक्रम को सफल बनाने में ईस्ट एंड वेस्ट टीचर ट्रेनिंग कॉलेज के चैयरमेन रजनीश रंजन जी सबसे अहम भूमिका रही.श्री रजनीश रंजन [ http://www.enwttc.org/chairmanmessage.html# ] ने सहरसा परिक्षेत्र में मीमांषाक मंडन मिश्र के नाम विश्वविद्यालय खोलने की घोषणा की. विदित हो की बिहार राज्य सरकार के द्वारा 80 के दशक के उत्तरार्द्ध में मंडन मिश्र के नाम विश्वविद्यालय खोलने की मंशा व्यक्त की गयी थी परन्तु साकार नहीं हो सका.  उनके द्वारा शशि सरोजनी सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुति पर 1100 रूपये का चेक गिफ्ट के रूप में प्रदान किया।
इस मौके पर शहर के जानेमाने साहित्यकार मुक्तेश्वर मुकेश के द्धारा एक से एक कविता को सुन लोग भाव विभोर हो गए. 

ही पटना से आये शहनशाह आलम व राजकिशोर राजन की भी कविता को खूब सराहा गया. स्वाति शाकंबरी द्धारा मैथिली कविता, किसलय कृष्ण ने भी कविता पाठ कर लोगो को गुदगुदाया वही कृष्ण मोहन सोनी की रचना सामाजिक व राजनितिक कुरितियों पर कविता दिल को झकझोर दिया. इस मौके पर अन्य रंजन जी ने भी अपने विचार रखा. कार्यक्रम में शशि सरोजनी सांस्कृतिक रंगमंच के कलाकारों द्धारा देश भक्ति गीतों पर बालिकाओ ने नृत्य कर समारोह की रौनकता को कायम रखा। 

18 अगस्त को पी.एम. मोदी सहरसा में कोसीवासियों को करेंगे संबोधित.....................

* 18 अगस्त 2008 को कुशहा त्रासदी की पट कथा कोशी मैया ने लिखी थी.… 
* 18 अगस्त 2015 को कोसी की धरती पर माननीय प्रधानमंत्री मोदी जी का आगवन……
*  क्या नरेंद्र मोदीजी कुशहा त्रासदी पीड़ितों के जख्मों को भर पाएंगे.....  
* अपने पी.एम. के स्वागत को लेकर कोसीवासी है तैयार……… 
कृष्ण मोहन सोनी की रिपोर्ट:- प्रधान मंत्री जी के आगमन पर जिला प्रशासन सुरक्षा को लेकर एड़ी चोटी एक कर दिया है. कोसी की जनता अपने प्रधानमंत्री के आने का इन्तजार कर रही है ख़ास कर इसलिए की यहाँ की संस्कृति ही यही रही है अतिथि देवो भवः और उनके स्वागत के लिए कोसी का यह इलाका भी पूर्व से ही प्रधानमंत्रीजी के आने पर स्वागत करने के लिए तैयार है. वैसे तो इस क्षेत्र के लोगो के मन में कोसी का विकास को लेकर कई सवालो के हल हो जाने की भी उम्मीदे है.    
18 अगस्त का यह दिन कोशीवासियों के लिए कभी भी अपने जेहन से भूलाने वाला दिन नहीं होगा. इसी दिन कुशहा की त्रासदी की पट कथा कोशी मैया ने लिखी थी. 18 अगस्त 2008 में कोसी की त्रासदी ने देश व दुनिया को झकझोर कर रख दिया था तब से आज तक कोसी का यह इलाका विनाश लीला को भुला नही सका. 2008 की त्रासदी के बाद इस इलाका में नई नई बिमारियों ने यहाँ के गरीबों मजलूमों को निगलना शुरू किया. हजारों लोगों ने असमय काल के गाल में समा गया. त्रासदी बाद कोशी के लोगो को हमेशा झूठा आश्वासन ही मिला. जिसने आया उसने ठका. कोशीवासी माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी से उम्मीद कर रहा है कि कोसी में उनके आने से विकास को लेकर नए पैकेज का घोषणा हो सकता है. 
कोसीवासी विकास को लेकर अपने प्रधान मंत्री से आशाए भी रख रहे है देखना यह है कि सामने विधान सभा का चुनाव भी है हर कोई पार्टी के नेता लोक लुभावन नारे दे रहे है. विधानसभा चुनाव को लेकर कुछ भी कायास लगाया जा सकता है. जो भी हो फिलवक्त मोदी जी को लेकर सुरक्षा चाकचौबंद है. 

अगस्त 15, 2015

सहरसा की बेटी का दर्द देखो सरकार.............

मुकेश कुमार सिंह की कलम से------- सरकार और उसके तंत्र जब गूंगे और बहरे हो जाएँ तो इंसाफ कहीं गुम होने लगता है. आज हम अपने इस एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में सहरसा की एक बेटी के ऐसे दर्द से आपको रूबरू कराने जा रहे हैं, जिसे जानकर आपकी ना केवल रूह थर्रा जायेगी बल्कि आपका सीना भी चाक हो जाएगा..........


जब दिल दरक जाए......जब भरी जवानी में हमसफर इस रंग बदलती दुनिया में अकेला छोड़,आसमानी सत्ता के हवाले हो जाए.....जब सारे सतरंगी ख्वाब और अरमानों का जीवन के शुरआती दौर में ही सर कलम हो जाए.......आप समझ सकते हैं उस अभागी का जीवन दोजख में किस तरह से सिसकिया ले रहा होगा....किस तरह से सुबकियां ले रहा होगा.यह कहानी सहरसा जिला मुख्यालय के रिहायशी मुहल्ला बटराहा की रहने वाली अभागी पूजा का है.पूजा की शादी वर्ष 2011 में गुजरात के अहमदाबाद में तैनात कस्टम इंस्पेक्टर राजेश कुमार सिंह के साथ हुयी थी. राजेश कुमार सिंह सहरसा जिले के भरौली गाँव के रहने वाले थे. अपनी ड्यूटी पर अहमदाबाद में तैनात खासे मिलनसार राजेश फुले नहीं समा रहे थे.उन्हें पता था की उनकी पत्नी माँ बनने वाली है.जब प्रसव का समय बिल्कुल निकट आ गया तो वे छुट्टी लेकर 6 अप्रैल को सहरसा चले आये.लेकिन कुदरत को कुछ और ही मंजूर था.11 अप्रैल को पूजा ने बेटे को जन्म दिया.बेटे को गोद में लेकर राजेश बेहद खुश थे.लेकिन यह ख़ुशी कुछ समय की थी.12 अप्रैल 2012 का वह मनहूस दिन.अचानक कुछ लम्हों के लिए बीमार पड़े राजेश कुमार सिंह की मौत ईलाज के दौरान हो गयी.उन्नीस वर्ष की उम्र में शादी हुयी और बीसवें वर्ष में ही पूजा बेबा हो गयी.पूजा अपने पति की मौजूदगी में ही माँ भी बन गयी थी.पेट खोलकर उसे बेटा हुआ था.बेटा महज दो दिन का ही था और वह अस्पताल के बेड पर ही थी की पति गुजर गए.अब आप अनुमान लगाईये की पूजा को मिली यह चोट कितनी गहरी थी और उसका जीवन कितना बोझिल और बेजार हो चुका था.

कहते हैं की जबतक सांस रहती है तबतक आदमजात जीने की कोशिश में जुटा रहता है.पति के गुजरने के बाद,पूजा के रिश्तेदारों ने उससे भरपूर हिम्मत दी और पूजा ने किसी तरह से खुद को सम्भाला.ग्रेजुएट पूजा वर्ष 2012 में ही अहमदाबाद गयी और पति की जगह अनुकम्पा पर नौकरी के लिए विभाग में आवेदन दिया.जाहिर सी बात है की खुद के अकेलेपन को भरने और बेटे के बेहतर भविष्य के लिए नौकरी आवश्यक थी.उस वक्त पूजा को अहमदाबाद में नौकरी मिलने का विभागीय अधिकारियों के द्वारा आस्वासन भी मिला. लेकिन आपको यह जानकार हैरानी होगी की वर्ष 2012 से लेकर अबतक पूजा कई बार अहमदाबाद और दिल्ली का चक्कर लगा चुकी है लेकिन उसे अभीतक नौकरी नहीं मिली है. गुजरात में वह तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने का प्रयास भी किया लेकिन उसे मोदी जी से मिलने नहीं दिया गया.विभागीय अधिकारियों ने उसे फिर से कोरा आस्वासन देकर पहले तो उसका मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी लिया और कहा की आपके फाईल को दिल्ली भेज दिया गया है.अधिकारियों ने पूजा से बड़े तल्ख़ लहजे में यह भी कहा की खाली सीट पर पहले स्थानीय गुजरात के लोगों की बहाली की जायेगी, फिर जब जगह बचेगी तब आपको नौकरी मिलेगी. पूजा को एक तो किस्मत ने पहले ही दगा दिया अब नियम--कायदे,उसे सरकारी तोहफे में तकलीफ परोस रहे हैं. रोटी--बिलखती पूजा सहरसा टाईम्स से गुहार लगा रही है की हम कुछ ऐसी पहल करे,जिससे उसे नौकरी मिल जाए.वह चाहती है की वह अपने पाँव पर खुद से खड़ी हो सके और अपनी बेटे यशस्वी का बेहतर तरीके से परवरिश भी कर सके.पूजा अभी अपने माँ--बाप के साथ रह रही है.आगामी अठारह अगस्त को नरेंद्र मोदी जी की सहरसा के पटेल मैदान में रैली है.पूजा चाहती है की माननीय प्रधानमन्त्री उसकी चिंता करें और उसे फिर से जीने के लिए एक नौकरी दें.इसके रोदन को और इसके अथाह दर्द को देखकर हमारी आँखें भी नम हो गयी.
पिता संजय सिंह
एक बेटी के दर्द से उसके पिता संजय सिंह और माँ रंजना देवी भी आहत और गहरे सदमे में हैं.पेशे से ठेकेदार पिता भी घटना को लेकर तफसील से बताते हुए कहते हैं की अपनी बेटी के जीवन में फिर से खुशियाँ भरने के लिए वे लगातार अपनी बेटी के साथ अहमदाबाद और दिल्ली जाते रहे.लेकिन हद की इंतहा देखिये की उनके दर्द के पारावार के बाबजूद हुक्मरानों से लेकर अफसरानों तक का दिल नहीं पसीजा और वे अभीतक ठगे से हैं.जाहिर तौर पर तमाम प्रयास का नतीजा सिफर निकला.आगामी अठारह अगस्त को नरेंद्र मोदी जी की सहरसा के पटेल मैदान में रैली है.वे कहते हैं की सहरसा टाईम्स कोई ऐसी पहल करे की नरेंद्र मोदी जी मंच से ही पूजा को नौकरी देने की घोषणा कर दें.
पूजा अभी अपने मायके में है.माँ--बाप और भाई का उसे भरपूर प्यार मिल रहा है लेकिन जीवन में पति का एक अलग महत्व होता है.कम उम्र में ही सदियों का सितम यह मासूम झेल रही है.उसे नौकरी लग जाती तो हो सकता है की वक्त के साथ--साथ उसके गहरे और हरे जख्म भर जाते.साथ ही उसकी जिंदगी में भी कुछ ख्वाहिशों और कुछ सपनों को सिद्दत से जगह मिल जाती. बेटियों की हिफाजत और उसके बेहतर भविष्य को लेकर बेहद गंभीर रहने वाले माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी,क्या सहरसा की इस अभागी बेटी की सुधि लेंगे?क्या पूजा की अँधेरी जिंदगी में फिर से उम्मीद के दिए टिमटिमाएंगे?क्या पूजा की बेपटरी जिंदगी फिर से पटरी पर आकर रफ़्तार पकड़ सकेगी?सहरसा टाईम्स इस बेटी के दर्द को मोदी जी तक पहुंचाने का हर सम्भव प्रयास करेगा.आगे रब जाने इसका क्या होगा.

सुरक्षा को लेकर एसपीजी का कब्ज़ा...........

डी.एम विनोद सिंह गुंजियाल
एसपीजी,आई.जी. वाई.के.जेटुआ
सहरसा टाईम्स की रिपोर्ट------आगामी अठारह अगस्त को माननीय प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी की सहरसा के पटेल मैदान में होने वाली परिवर्तन रैली को लेकर सुरक्षा की कमान आज एसपीजी ने अपने जिम्मे ले लिया है.एसपीजी के आईजी सहित अन्य अधिकारियों के साथ--साथ सहरसा के अधिकारियों ने सहरसा हवाई पट्टी और पटेल मैदान का ना केवल गंभीरता से जायजा लिया बल्कि दोनों जगहों को एसपीजी ने पूरी तरह से अपने कब्जे में भी ले लिया. आप खुद देखिये किस तरह से अधिकारी इस मैदान का जायजा ले रहे हैं.सुरक्षा को लेकर एसपीजी के आई.जी. वाई.के.जेटुआ ने तो मीडिया से कुछ भी शेयर नहीं किया लेकिन सहरसा डी.एम विनोद सिंह गुंजियाल ने हमें तमाम जानकारी जरुर दी

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अगस्त 13, 2015

हमारा भी दर्द सुनो सरकार........

 हड़ताल से R T P S सेवा चरमरायी …
*  सरकार की वैकल्पिक व्यवस्था भी फ़ैल  
*  6 वें दिन हड़ताल को अभी तक किसी राजनीतिक दल का समर्थन नहीं ..
* कार्यपालक सहायक के हड़ताल से विभागीय कार्य बाधित.....
*  मांगे नहीं मानी गई तो सभी संविदा कर्मी करेगा वोट का बहिस्कार....

कृष्ण मोहन सोनी की रिपोर्ट:- लगातार आज 6 वें दिन अपनी मांगो को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर कार्यपालक सहायको  के रहने के कारण सरकार के विभिन्न विभागों में ऑफिसियल कामकाज पर बुरा प्रभाव पड़ा है, बिहार राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ गोपगुट से संबंद्ध जिला इकाई सहरसा व विभिन्न कार्यालयों में कार्यरत नियोजित कार्यपालक सहायको का संयुक्त संगठन  बिहार राज्य कार्यपालक सहायक सेवा संघ के बैनर तले सभी सहायकों ने आंदोलन को तेज कर दिया है.
आज 6 वाँ दिन भी कार्यपालक सहायक का हड़ताल रहा जिससे कार्यालयों में इसका  प्रभाव पड़ा है. जाति,आवासीय, आय बनाने के लिए प्रखंड कार्यालय के RTPS काउंटर बन्द होने के कारण लोगों को काफी परेशानी हो रही है.  नए आवेदन बनाने के बदले पुराने आवेदन दे कर लोगो भीड़ कम करने का इंतजाम किया गया है. इस हड़ताल से सबसे अधिक लोक सेवा का अधिकार आर.टी.पी.एस. से संबंधित सारे कार्य ठप्प है. सहरसा जिले के कहरा, सत्तरकटैया, नवहट्टा, सोनवर्षा, सौरबाजार, महिषी, सिमरी बख्तियारपुर अनुमंडल के बनमा इटहरी, सलखुआ आदि प्रखंडो में इस हड़ताल से विभागीय कामो पर प्रभाव पड़ा है.हड़ताली कर्मियों ने सरकार के विरोध में आक्रोशपूर्ण प्रदर्शन भी निकाला. अपने मुख्य मांगों में वेतनमान में नियमित नियुक्ति, साठ वर्ष की सेवा की गारंटी संविदा, नीति की समाप्ति, नए एकरारनामे आदेश की वापसी, हटाये गए कार्यपालक सहायको की पुनर्नियुक्ति, सरकार द्धारा कम्प्यूटर सिस्टम आपूर्ति देने व अनुबंध समाप्ति करने की धमकी पर रोक की मांग कर रहे थे. कर्मियों ने रोषपूर्ण प्रदर्शन करते हुए जिला समाहरणालय पहुंच कर नारे बाजी भी किया एवं स्थानीय स्टेडियम के निकट धरना दिया.
जो कार्यपालक सहायक हड़ताल में शामिल नहीं होकर कार्यालय के बाबुलोग का चम्चागिरी कर रहे है उनसे निवेदन है कि हड़ताल में शामिल होकर संघ को मजबूती प्रदान करे. आप डरिये मत संघ आपके साथ है. अन्यथा जो कार्यपालक अभी भी सरकारी कार्य कर रहे है उनके विरुद्ध संघ कठोर कार्रवाही करेगी. कुंदन कुमार - अध्यक्ष, बेएसा- सहरसा. 
हड़ताल एवं धरना प्रदर्शन में राकेश कुमार, मनोज कुमार झा, नेता PHED अजित कुमार, संध्या कुमारी,सालू कुमारी, अफसाना प्रवीन, संजीत कुमार, सुनील कुमार, विश्वजीत कश्यप, संतोष रजक, अमित कुमार, अरविन्द कुमार, विजय भूषण,,मृतुन्जय मिश्र, नीरज कुमार,विनोद कुमार,अंकित कुमार, प्रिंस कुमार,एवं राहुल जी (जिला अल्पसंख्यक) उपस्थित रहे. 

अगस्त 11, 2015

कार्यपालक सहायकों का हड़ताल जारी...........

* पटना में आंदोलनकारियों पर पुलिसिया बर्बरता के खिलाफ बढ़ा आक्रोश .......   
* नियमितिकरण को लेकर अनिश्चितकालिन हड़ताल……… 
*  सहरसा में सरकार से भेजे गये एकरारनामे को आंदोलनकारियों ने जला कर जताया विरोध.......     
 हड़ताल से R T P S सेवा ठप …
*  सरकार की मंशा संविदाकर्मियों के आंदोलन को कमजोर करना........... 
कृष्णमोहन सोनी की रिपोर्ट:- विभिन्न विभागों में कार्यरत नियोजित कार्यपालक सहायकों ने अपनी सेवा सुरक्षा गारंटी ,नियमितीकरण सम्मानजनक वेतन एवं अन्य मांगो  को लेकर चरणबद्ध आंदोलन को तेज  कर दिया है. धरना प्रदर्शन के अलावे अब ये डीएम का घेराव करेंगे और अपनी मांगो को सामने रखेंगे. सहायको ने बिहार राज्य कार्यपालक सहायक सेवा संघ एवं बिहार राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ गोपगुट से संबध जिला इकाई सहरसा द्धारा  एक प्रेस ब्यान जारी कर कहा  गया है।
एकरारनामे को आंदोलनकारियों ने जलाया 
बिहार राज्य के सभी विभिन्न कार्यालयों में कार्यरत नियोजित कार्यपालक सहायको का संयुक्त संगठन के द्धारा यह लड़ाई लड़ी जा रही है जिसमे यह भी कहा गया है कि बिहार प्रशासनिक सुधार मिशन सोसाइटी बिहार सरकार पटना के विभिन्न विभागों में सहायक कार्यरत हैं लेकिन सरकार के नुमाइंदो ने कई बार हमारी मांगो  को अनसुनी कर ठन्डे बस्ते में डाल कर इस पर कभी विचार तक नही किया है. जारी ब्यान में संघ के जिला सचिव संजीव कुमार सिंह ने कहा है कि संघ द्धारा सरकार से कई बार काला  बिल्ला लगाकर सांकेतिक हड़ताल कर धरना, प्रदर्शन कर अपनी मांग को रखता रहा हूँ. लेकिन सरकार के नुमाइंदे इस पर किसी भी प्रकार का कोई नोटिस नही लिया. उन्होंने कहा कि हर बार चुनावी समय नजदीक आने पर आनन फानन में एक उच्च स्तरीय कमिटी का गठन कर संविदा कर्मिओं के नियमितीकरण करने हेतु अनुसंशा तीन माह के अंदर करने को कहा गया था. सरकार की मंशा संविदाकर्मियों के आंदोलन को कमजोर करना है लेकिन हम सभी हारने वाले नही है अब यह और आंदोलन तेज किया जायेगा अब डीएम का घेराव कर अपनी मांगो  को रख कर अधिकार लेना है.इस आंदोलन का फलाफल जो भी हो फिलवक्त बिहार सरकार का सभी  R T P S  काउंटर से लेकर विभाग के तमाम कार्यालय में कंप्यूटर से होने वाले कार्य ठप है. 

*अपनी बात*

अपनी बात---थोड़ी भावनाओं की तासीर,थोड़ी दिल की रजामंदी और थोड़ी जिस्मानी धधक वाली मुहब्बत कई शाख पर बैठती है ।लेकिन रूहानी मुहब्बत ना केवल एक जगह काबिज और कायम रहती है बल्कि ताउम्र उसी इक शख्सियत के संग कुलाचें भरती है ।