मई 31, 2016

बी.ए.पार्ट थर्ड संगीत प्रतिष्ठा फाइनल की परीक्षा शांति पूर्वक संम्पन्न ...

कृष्ण मोहन सोनी की विशेष  रिपोर्ट ; बीते दिन बी.ए.पार्ट.थर्ड की परीक्षा को लेकर परीक्षार्थियों से पूरा  शहर अस्त वयस्त रहा. विभिन्न जगहों के  महाविधालयों से आये छात्र व छात्राओं  से शहर पटा रहा. सड़कों पर  पैदल चलना मुश्किल था. वही रेलवे स्टेशन , बस स्टेण्ड से लेकर होटलों में भारी भीड़ के कारण परीक्षार्थियों को ठहरने के लिए रात भर फुट पाट पर रतजग्गा करना पड़ा जिसमे बाहर के छात्राओं को ज्यादा कष्ट  झेलनी  पडी  है. वैसे तो रमेश झा महिला महा विधालय के संगीत विभाग को छोड़ अन्य दूसरे महा विधालय में शिक्षाको की कमी एवं समुचित व्यवस्था नहीं मिलने के कारण संगीत विषय के परीक्षार्थी अपने को काफी कमजोर महशुस कर रहे थे. दूसरे जिले के विधालयो से  परीक्षा देने आये परीक्षार्थियों ने बताया की उन्हें संगीत विषय में सही सही व्यवस्था व  शिक्षक से इस विषय की पढ़ाई में कमी रही है  बावजूद मिहनत कर परीक्षा देने आया हूँ।
अन्य महाविधालय के अपेक्षा एक मात्र सहरसा शहर के स्थानीय रमेश झा महिला महाविधालय में संगीत विभाग में संगीत विषय की पढ़ाई एवं व्यवस्था से छात्र  खासे खुश दिखे  ..  सहरसा में रमेश झा महिला महा विधालय में  बी ए पार्ट थर्ड  संगीत प्रतिष्ठा तृतीय फाइनल की परिक्षा शांति पूर्वक एवं  विधालय विधि व्यवस्था के साथ संम्पन्न हुआ । इस परीक्षा में सहरसा रमेश झा महिला महा विधालय सहित सुपौल,के भी छात्र छात्राओ ने भाग लिया। परीक्षा केंद्रों पर भारी संख्यां में परीक्षा देने आये परीक्षार्थियों में उत्साह देखे गए। 
इस परीक्षा में सहरसा सहित सुपौल के महिला कॉलेज ,डिग्री कॉलेज ,बनवारी शंकर विधालय , सर्व नारायण सिंह राम कुमार  सिंह , इविनिंग कॉलेज ,लछमी नाथ कॉलेज वनगांव ,लहटन चौधरी कॉलेज पस्तवार,आदि से भारी संख्यां में आये परीक्षार्थियों की जमघट देखी गई।
सबसे ख़ास तो संगीत विभाग की परीक्षा में छात्राओं में उत्साह रहा। रमेश झा महिला महा विधालय में हो रहे परीक्षा केंद्र पर विधालय  विधि व्यवस्था के साथ महा विधालय की प्राचार्या ड़ॉ० रेणु सिंह के की देख रेख व निर्देशन में  परीक्षा संम्पन्न हुआ।   परीक्षा केंद्र पर पर्यवेक्षक प्रो० नरेंद्र प्रसाद यादव के बी कॉलेज मुरलीगंज ,प्रो०जगेंद्र नारायण यादव पूर्णिया वही रमेश झा महिला महा विधालय के संगीत विभाग के डॉ०गिरिधर कुमार श्रीवास्तव ने इस परीक्षा में विधि व्यवस्था के साथ परीक्षा संपन्न कराने में लगे रहे.
हलांकि इस परीक्षा में संगीत विभाग में सिर्फ रमेश झा महिला महाविधालय के संगीत विभाग की विधि व्यवस्था एवं विषय की पढ़ाई हमेशा  से अवल रहा है. म्यूजिक की परीक्षा देने आये बाहरी छात्रों में भी यहां की व्यवस्था से उत्साह देखे गये। दूसरे विधालयों में  समुचित  विभागीय विधि व्यवस्था की  कमी रही जिस कारण परीक्षार्थियों को काफी परेशानियां उठानी पड़ी जिसका मुख्य कारण यह भी  रहा की संगीत विभाग में संगीत शिक्षिकों का आभाव रहना जिससे परीक्षा देने आये परीक्षार्थी को  समुचित विभागीय व्यवस्था नहीं मिल पाना दूसरी ओर संगीत के शिक्षाको  की भी कमी से छात्रों में नाराजगी व मायूसी रहा ,छात्रों ने बताया की अगर हम छात्रों को  अच्छी व्य्वस्था एवं शिक्षक मिले तो निश्चित हम आगे बढ़ेंगे मगर  इसके प्रति  सरकार उदासीन है। इस विभाग में शिक्षाको व व्यवस्था दोनों की कमी है।  
अगर संगीत विभाग में शिक्षक और विभाग में समुचित व्यवस्था दिया जाय तो संगीत के विषय करने वाले छात्रों में काफी इजाफा देखने को मिल सकता है।वहरहाल जो भी विभागीय व्यवस्था दी गई. उस अनुपात में संगीत की परीक्षाओं में छात्रों की भागीदारी अच्छी रही और छात्रों में उत्साह भी इस दिशा में संगीत विभाग में समुचित व्यवस्था  और शिक्षको का होना अति आवश्यक है. सरकार को इस विभाग के प्रति गंभीरता पूर्वक  लेनी चाहिए विभाग और संगीत के विषय के  छात्रों के प्रति संवेदनशील होकर संगीत विभाग की व्यवस्था को मजबूत करने में पहल करनी चहिये.

मई 30, 2016

न जात न पात पर जीत का ताज पहना काम पर ...... वीरगाँव से जिशु सिंह बने मुखिया

सहरसा टाईम्स की रिपोर्ट :- अपने पैतृक गाँव वीरगाँव पंचायत के मुखिया पद से से पुनः शिवेंद्र कुमार जिशु कड़ी मेहनत और विकास के बदोलत दूसरीवार पुन मुखिया पद से विजय हुए है. 
गौरतलब है कि श्री जीशु सिंह अपने विधान सभा क्षेत्र महिषी से २०१५ में बीजेपी के भावी उम्मीदवार थे लेकिन रालोसपा के सिट होने के कारण इन्हें मौका नहीं मिला. वीरगाँव पंचायत से पहलीवार इनकी पत्नी मुखिया के पद पर विराजमान थी. इन्होने अपने कार्यकाल में अपने पंचायत में काफी हद तक कार्य किया जिसका फलाफल आज पुन मुखिया पद का ताज इन्हें पहनाया गया.
मुखियाजी को जीत की हार्दिक बधाई एवं उज्जवल भविस्य की मै भी कामना करता हूँ. 

बिसलरी पानी के शौक़ीन, हो जाइए होशियार....

सहरसा टाईम्स की तस्वीर:
बिसलरी पानी के शौक़ीन, हो जाइए होशियार और खबरदार । अब बाजार में बिसलरी का सौतेला रिस्तेदार बिलसरी मैदान में उतर चुका है ।
अब देखिये इस बिलसरी के बोतल को, बिल्कुल बिसलरी के बोतल के माफिक दिख रहा है । नकलचियों के दिमाग और हौसले की एक तारीफ़ तो बनती है साहेब ।

मई 26, 2016

प्राइवेट स्कूल की कुव्यवस्था की एक नंगी तस्वीर .......


विद्यालय को "शिक्षा का मन्दिर" कहा जाता है, लेकिन आज आप लोगो के सामने एक ऐसी तस्वीर को बानगी बना कर पेश रहा हूँ जो प्राइवेट स्कूलों कि विधि-व्य्वस्था की पोल खोलने के लिए काफी है.
तस्वीर में जो स्कूल वाहन दिख रहा है वो दार्जिलिंग पब्लिक स्कूल का है. स्कूल से छुट्टी होने पर बच्चें घर रवाना होने के लिए स्कूल बस पे बैठ गये, लेकिन शंकर चौक पँहुचने पर स्कूल बस का इंधन समाप्त हो गया. इसके बाद इन्तेहा का आलम तब हुआ जब स्कूल बस के ड्राइवर स्कूली बच्चों से बस को धक्का दे कर साईड करवाने को कहा और चिलचिलाती धुप में कुछ बच्चो ने बस को धक्का देने में लग गए. 
जिस पर स्थानीय लोगो ने ड्राइवर को जम कर डाट--फटकार लगाया और कहाँ स्कूल प्रबंधक को फोन करने को कहा. अभिवाभक बड़े उम्मीद से अपने बच्चों को स्कूल भेजते है कि बच्चे का भविष्य संवरेगा, परन्तु यहाँ तो पूरा इंतेजामात भविष्य से खेलवार का है.
आगे बताना लाजमी होगा की प्राइवेट स्कूलों की सच ये है की सरकार के द्वारा बनाये गये नियमावली (शिक्षा का अधिकार अधिनयम,बिल 2009)में 25% बी० पी० एल० परिवार  बच्चों को मुफ्त पढ़ाई हो या स्कूल का निबंधन अधिकांश स्कूल इस सच से गुरेज करते है. कहे तो अपना सिस्टम ही इनका सब कुछ है.
आखिर कब--तक सच्चाई पे पर्दा गिरा रहेगा. लगातार सहरसा टाईम्स बेबाक और धार--धार रिपोर्टिंग से हर मजलूमों को उसका वाजिब हक दिलावाने का पुरजोर कोशिश करता है और करता रहेगा । 
जाहिरतौर से आज स्कूल प्रबंधक के लापरवाही से जो स्कूली बच्चों के द्वारा सड़क पे हरकत कराया गया वो बड़ी घटना को भी आमंत्रण दे सकता था. साथ ही इनके घर--आँगन को मातमी माहौल में बदलने में भी वक़्त नहीं लगता लेकिन किसी ने सही ही कहा है "जिसका कोई नहीं उसका खुदा है,यारों". खुदा अब तू ही सारे आलम के लोगों को सही सोच से नवाज ।  

मई 23, 2016

अब महापुरुषों की प्रतिमा भी सुरक्षित नहीं ........


** पुलिस--प्रशासन का खौफ हो रहा खत्म ......
** अपराधियों की बल्ले--बल्ले ............
** सुबाष चन्द्र बोस की प्रतिमा को तोड़ा........... 
मुकेश कुमार सिंह की कलम से....... अपराधी और असामाजिक तत्वों के हौसले गर बुलंद हों तो इंसानों की खैर नहीं ।आलम तो अब यह है की आतातायी अब महापुरुषों की प्रतिमा का सर कलम करने से भी गुरेज नहीं कर रहे हैं । 
बीती रात सदर थाना के रिफ्यूजी चौक स्थित नेताजी सुभाष चन्द्र की प्रतिमा को उपद्रवियों ने क्षतिग्रस्त कर दिया। इस घटना से आहत स्थानीय लोगों ने ना केवल NH 106 को जाम कर यातायात को पूरी तरह से बाधित कर दिया है बल्कि प्रतिमा के पुनः स्थापन के साथ--साथ दोषियों की तुरंत गिरफ्तारी और उन्हें फांसी की सजा हो इसकी जिद पर अड़े गए । वहाँ का मंजर का ऐसा था, मानो आक्रोशित लोगों का सैलाब उमड़ा हो ।आगजनी और नारेबाजी से लोग अपने आक्रोश को व्यक्त कर रहे थे । 
लोगों का साफ़ कहना है की जिन उपद्रवियों ने इस घटना को अंजाम दिया है उसकी गिरफ्तारी तुरंत हो और उन्हें फांसी की सजा हो । साथ ही क्षतिग्रस्त प्रतिमा के पुनः स्थापन के साथ उसकी सुरक्षा की पूरी गारंटी हो ।मौके पर लोग बड़े अधिकारियों को बुलाने की जिद पर अड़े थे । सुबह नौ बजे से पूरा चक्का जाम कर लोग आगजनी भी कर रहे थे ।
शुरूआती समय में मौके पर पहुंचे सदर थाना के एसएचओ संजय सिंह कह रहे थे की लोग बेहद आक्रोशित हैं ।उन्हें काम करने का मौक़ा लोग दें । पहले जिन्होनें इस घटना को अंजाम दिया है उसकी गिरफ्तारी वे सुनिश्चित करेंगे ।
आगे प्रतिमा के स्थापन को लेकर स्थानीय लोगों से बात कर समाधान ढूंढा जाएगा ।लेकिन लोगों ने एसएचओ की एक नहीं मानी । लोग बड़े अधिकारी मौके पर आएं इस जिद पर डटे थे ।बाद में मौक़ा ए वारदात पर एसडीओ जहांगीर आलम,एसडीपीओ सुबोध विश्वास और पुलिस कप्तान अश्वनी कुमार पहुंचे और लोगों को समझा--बुझाकर शांत कराया ।
यातायात दिन के दो बजे बहाल किया जा सका ।अधिकारियों ने बड़े--बड़े आश्वासन की घूंटी पिलाकर मामले को  शांत तो करा लिया लेकिन यक्ष प्रश्न यह है की क्या अब महापुरुषों की प्रतिमा और उनका सम्मान भी सुरक्षित रख पाना पुलिस---प्रशासन के लिए मिल का पत्थर है ।आखिर वे कौन लोग हैं जिन्होनें नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की प्रतिमा को तोड़ डाले और इसके पीछे आखिर उनकी मंशा क्या थी ?

मई 16, 2016

आर. रंजन की हत्या के खिलाफ फ्रेंड्स ऑफ़ आनंद का प्रदर्शन

सूबे में चारों तरफ अपराधियों का बोलबाला............  राजन आनंद 

सहरसा टाइम्स की रिपोर्ट :- सीवान में पत्रकार की हत्या के विरोध में फ्रेंड्स ऑफ़ आनंद के कार्यकर्ताओ ने देर शाम स्थानीय थाना चौक पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का पुतला फूंका. हिन्दुस्तान दैनिक के कार्यालय प्रभारी राजदेव रंजन की हत्या के खिलाफ में फ्रेंड्स ऑफ़ आनंद के दर्जनों कार्यकर्ता फ्रेंड्स ऑफ़ आनंद के गंगजला कार्यालय से निकलते हुए पुतला के साथ नारे बाजी करते हुए थाना चौक पहुंच कर बिहार में बढ़ रहे आपराधिक घटनाओ सहित पत्रकार की हत्या के विरोध में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का पुतला फूंका. 
विरोध प्रदर्शन करने वाले कार्यकर्ताओं सहित प्रधान महासचिव "युथ फ्रंट "फ्रेंड्स ऑफ़ आनंद सह युवा प्रेदेश महासचिव हम (से .)राजन आनंद ने कहा कि सूबे में चारों तरफ अपराधियों का बोलबाला हो गया है और प्रशासन नाम की चीज नहीं रह गई है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सिर्फ अपने चाटुकारों से घिरे हुए हैं और सत्ता की कुंजी कहीं और से संचालित हो रही है. |पुतला दहन कार्यक्रम में हम के जिला अध्यक्ष राम-रतन ञृषि देव ,पूर्व वार्ड आयुक्त अनीता कुशवाहा, कुणाल बीरू प्रबक्ता "युथ फ्रंट "फ्रेंड्स ऑफ़ आनंद, मुकेश कुमार ,शतप्रकाश झा ,अनिल कुशवाहा,मुकुल सिंह,विनय यादव,शंभू सिंह ‘मुख्यमंत्री’ ,मणि देवी,अजय झा,सैलेश कुमार बब्बू ,सोनु सिंह,मो० अली भुट्टो,डिग्री सिंह,राजीव सिंह,मुंशी जी,सरोज सिंह,अंकित,अभिषेक कुमार ,नयन सिंह , सहित फ्रेंड्स ऑफ आनंद के दर्जनों कार्यकर्त्ता मोजूद थे |

लोकतंत्र का एक मजबूत स्तम्भ आज पूरी तरह से खतरे में......


सहरसा टाईम्स की रिपोर्ट :- पुरे देश में एक ऐसे पत्रकार की हत्या का विरोध हो रहा है जिसने अपने कलम की ताकत से एक से एक बाहुबलियों के कारनामे को उजागर करने का काम किया। सिवान जैसे क्षेत्रों से निष्पक्ष पत्रकारिता करने की सज़ा राजदेव रंजन को मिली। गाँव से लेकर शहर के गली मुहल्ले में इस घटना का विरोध हो रहा है.  हत्या के दिन से ही पुरे राज्य में मीडिया जगत में शोक छाया हुआ है.
वर्तमान समय ने पत्रकार के लेखनी पर मानो अचानक सा ब्रेक लगा दिया हो. जिले के तमाम मीडिया कर्मी आर. रंजन की हत्या का विरोध करते हुए आज समाहरणालय के मुख्य गेट पर धरना दिया। इनकी मुख्य मांगे हत्यारों को गिरफ्तार करने, परिजन को 50 लाख रूपये का मुआवजा, उनके पुत्र को सरकारी नौकड़ी और जिले के पत्रकारों को हथियार का लाइसेंस देने जैसे अन्य मांगे थी. 
जाहिर तौर से बिहार और झारखण्ड सहित देश के किसी भी हिस्से में पत्रकार सुरक्षित नहीं हैं. पत्रकारों पर ताबड़तोड़ गोलियां  बरसाई जा रही है और उन्हें मौत के घाट उतारा जा रहा है ।लेकिन हर प्रांत में हुक्मरान तमाशबीन है ।सत्ता का अपराधीकरण या फिर तंत्र पर अपराधियों का शिकंजा ।वजह आखिर जो भी हो लेकिन लोकतंत्र का एक मजबूत स्तम्भ आज पूरी तरह से खतरे में है ।पत्रकारों ने समाज के हर वर्ग की सेवा की है ।पत्रकारों की जिंदगी आगे कैसे महफूज रहेगी,इसके लिए समाज को बड़ा और मजबूत हस्तक्षेप करना होगा ।

मई 15, 2016

अलर्ट : बिहार के कोसी क्षेत्र में कहर बरपा सकते हैं 'हैवी चार्ज'

जागरण कटिहार से ली गई ख़बर:  तापमान में परिवर्तन के कारण कोसी क्षेत्र में निम्न दाब का क्षेत्र बन गया है। इस कारण यहां के आसमान पर हैवी चार्ज बादल मंडरा रहे हैं। ये बादल खतरनाक रूप अख्तियार कर क्षेत्र में मौत का कहर भी बरपा सकते हैं। मौसम सूचना केंद्र पटना के वरिष्ठ वैज्ञानिक आरके गिरि के अनुसार कोसी के इलाके में निम्न दाब का क्षेत्र बनने के कारण अगले 72 घंटे खतरे की ओर इशारा कर रहे हैं। नमी व धूल के कारण बादल अधिक उचाई पर बन रहे है. 

हैवी चार्ज बादलों के आपस में टकराने से बज्रपात का ख़तरा कई गुना बढ़ सकता है. सतर्कता से ही जानमाल के नुकसान से बचा  जा  सकता है.
JAGRAN LINK
http://www.jagran.com/bihar/patna-city-alert-heavy-charged-clouds-can-cause-huge-damage-in-kosi-region-14012634.html

मई 13, 2016

रजिस्ट्रेशन के नाम पर स्कूल में मची लूट.........

बिहार में अभी नौवीं कक्षा के छात्र--छात्राओं का ऑन लाईन रजिस्ट्रेशन हो रहा है । आज सहरसा टाईम्स  इस रजिस्ट्रेशन में मची लूट का एक्सक्लूसिव खुलासा करने जा रहा है ।
 सरकार ने रजिस्ट्रेशन फी 200 रूपये तय किये हैं लेकिन सहरसा के हाई स्कूलों में ढाई सौ से लेकर चार सौ रूपये वसूले जा रहे हैं ।सिस्टम में मची इस लूट का जायजा लिया सहरसा टाईम्स के चीफ एडीटर मुकेश कुमार सिंह ने। 
कहते है चोर के लिए ताला और बेईमान के लिए जमीन का केबाला,कोई मायने नहीं रखता है ।सरकार की घोषणा से ईतर सहरसा में नौवीं कक्षा के छात्र--छात्राओं से अवैद्य वसूली की जा रही है ।गौरतलब है की सरकार ने प्रति छात्र--छात्रा रजिस्ट्रेशन फी 200 रूपये तय किया है लेकिन हर स्कूल अपनी सुविधा के मुताबिक़ वसूली कर रहा है ।सहरसा जिले में 52 हाई स्कूल हैं ।
शहरी क्षेत्र में ढाई सौ से,साढ़े तीन सौ और ग्रामीण इलाके में चार सौ रूपये तक फी के नाम पर वसूले जा रहे हैं ।हमने जिला मुख्यालय के चार स्कूल का जायजा लिया जहां बच्चों से ढाई सौ से लेकर 320 रूपये तक लिए जाने के हमें पुख्ता प्रमाण मिले ।अनुग्रह नारायण सिंह स्कूल के बच्चों ने खुलकर बताया की उनसे तीन सौ से लेकर तीन सौ बीस रूपये तक लिए गए ।
रूपवती कन्या हाई स्कूल और राजकीय कन्या उच्च विद्यालय की बच्चियों ने बताया की उनसे ढाई सौ रूपये लिए गए । तय फी से पचास रूपये ज्यादा इनसे साईबर के खर्चे के नाम पर लिए गए । मनोहर स्कूल के बच्चों ने भी बताया की उनसे ढाई सौ रूपये लिए गए ।
रूपवती कन्या उच्च विद्यालय के प्रिंसिपल योगेन्द्र यादव जी कहते हैं की उनके स्कूल में 200 रूपये ही लिए जाते हैं ।वे जांच करवाते हैं ।किसी बच्ची ने उनसे शिकायत नहीं की है ।वैसे फी वसूलने की जिम्मेवारी उन्होनें वर्ग शिक्षक को सौंपी है । बच्चियों के बयान और इनके बयान पर गौर करें तो यह साफ़ जाहिर हो जाता है की ना केवल दाल में कुछ काला है बल्कि पूरी दाल ही काली है ।
मनोहर स्कूल के प्रिंसिपल नवल किशोर झा का कहना है की उन्हें साईबर में खर्चे हो रहे हैं,इसलिए बच्चों से वे पचास रूपये ज्यादा ले रहे हैं लेकिन इसकी वे रशीद बच्चों को दे रहे हैं और आगे देंगे ।हद बात तो यह जानिये की हमें एक भी बच्चा ऐसा नहीं मिला जिसके पास ढाई सौ की रशीद दी गयी हो ।हमारी मौजूदगी में स्कूल में रशीद देना बंद कर दिया गया ।वैसे 50 रूपये ये ज्यादा ले रहे हैं,तो इनकी यह सफाई है लेकिन जहां 300 और उससे ज्यादा लिए जा रहे हैं,वहाँ क्या हो रहा है ।इनके बॉडी लेंग्वेज से ये साफ़ पता चल रहा है की यहां लूट का खेल चल रहा है
हमने इस गंभीर मसले को लेकर जिला शिक्षा पदाधिकारी अब्दुल खालिक से जबाब--तलब करना चाहा लेकिन वे अपने कक्ष में मौजूद नहीं थे ।वैसे साहब अक्सर इसी तरह से गायब रहते हैं ।हमने वहाँ मौजूद लोगों से इस अधिकारी के बारे में जानना चाहा लेकिन साहब किस दिन आएंगे,यह जानकारी भी किसी ने हमें देना मुनासिब नहीं समझा ।
वैसे सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक़ साहब पटना में हैं और अगले हफ्ते सहरसा आएंगे ।वैसे ऐसे मसले पर अधिकारी हम से बात करने से यूँ भी परहेज करते हैं ।
हमाम में सारे नंगे हैं ।लेकिन यहां तो खुले में लूट का नंगा नाच हो रहा है ।शिक्षा मंत्री इस तस्वीर को देखकर,क्या कोई शख्त कदम उठाएंगे ।या फिर बात जांच और आगे कार्रवाई होगी पर आकर ठहर जायेगी ।गरीब बच्चों के साथ हो रहे इस शोषण पर सरकार क्या कार्रवाई करती है,सहरसा टाईम्स की नजर आगे इसपर बनी रहेगी ।

मई 12, 2016

बेमौसम की बारिश से शहर हुआ नरक में तब्दील.......


सहरसा टाइम्स की रिपोर्ट: यूँ तो बरसात के मौसम में बारिश हर साल बिहार की राजधानी पटना के साथ--साथ झारखण्ड की राजधानी रांची के नगर निगम के तमाम इंतजामों की पोल खोलकर रख देती है लेकिन आज हम आपको बेमौसम की एक बारिश में सहरसा का नजारा दिखा रहे हैं.
एक तो पहले से ही यह जिला हर साल कोसी के कहर को झेलता है. इस जिले के कई इलाके ऐसे हैं जो हर साल बाढ़ की चपेट में आकर डूबते और तरते हैं. लेकिन इससे इतर बीती रात महज कुछ लम्हों की झमाझम बारिश में सहरसा जिला मुख्यालय के लगभग तमाम सड़कों से लेकर मुहल्ले तक में सिर्फ पानी ही पानी का नजारा है. चहुँदिश बाढ़ का मंजर है.सड़कों पर पानी है तो लोगों के घरों में भी पानी है.इस शहर को बारिश ने अपनी धमक से ना केवल पानी से तर कर दिया है बल्कि शहर को नरक में तब्दील करके रख दिया है. 

बेमौसम की इस बारिश से सहरसा की लगभग तमाम जगहें पानी से तर हैं.शहर का चप्पा--चप्पा पानी--पानी है.शहर के तमाम मुहल्ले मसलन गौतम नगर, गंगजला, बटराहा, कायस्थ टोला, हटियागाछी सहरसा बस्ती,भवानीनगर,संतनगर,न्यू कोलोनी,रिफ्यूजी कोलोनी सहित तक़रीबन डेढ़ दर्जन मोहल्ले बारिश के पानी से इसकदर लबालब हैं गोया बाढ़ का कहर हो. बानगी भर को सहरसा टाईम्स के चीफ एडीटर मुकेश कुमार सिंह ने गौतम नगर मोहल्ले का जो ग्रामीण कार्य विभाग के अधीक्षण अभियंता कार्यालय के ठीक सामने का जायजा लिया और लोगों की पीड़ा सुनी।  गौतम नगर सहरसा का सबसे महत्व्पूर्ण मोहल्ला है जिधर से जिला सह प्रमंडल के सभी आलाधिकारी गुजरते हैं।
 इस मसले पर हमने जिम्मेवार अधिकारी से जबाब--तलब करना चाहा लेकिन वे अभी पंचायत चुनाव में व्यस्त हैं का हवाला देकर हमें कोई ठोस जबाब नहीं दे रहे हैं.बिना मौसम की बारिश से जे जब आमजन हलकान और परेशान हैं,तो इस बात का सहज अनुमान लगाया जा सकता है की बारिश के मौसम में इस इलाके के लोगों की मुसीबत निश्चित रूप से बढ़ने वाली है.
कोसी के कहर के साथ सहरसा वासी बारिश का कहर भी झेलने को मजबूर हैं.जाहिर तौर पर इस इलाके के लोगों को कुदरत के कहर के साथ--साथ सरकारी लापरवाही का जुल्म भी सहना पर रहा है.इन्हें ना जाने इस मुसीबत से कब और कैसे निजात मिलेगी.

माँ और बेटे की अर्थी एक साथ...........

सहरसा टाइम्स की रिपोर्ट :- सलखुआ प्रखंड के कोपरिया पंचायत के कोपरिया रजक टोला में मंगलवार की रात सोए अवस्था में माँ और बेटे को सर्प दंस से मौत हो गई. 
गौरतलब है कि कोपरिया निवासी हिरेन्द्र रजक की 38 वर्षीय पत्नी मीरा देवी एवं 15 वर्षीय पुत्र राजीव कुमार को मंगलवार की रात एक विषैले सांप ने एक साथ डस लिया. माँ को परिजनो ने आनन फानन में सलखुआ अस्पताल ले गया जहां चिकित्यसक ने बेहतर इलाज के लिए सदर अस्पताल सहरसा रेफर कर दिया. सदर अस्पताल में इलाज के दौरान महिला की मौत हो गई. मीरा देवी गांव के नव प्राथमिक विद्यालय दक्षिण टोला में रसोईया का कार्य कर परिवार का भरण पोषण व बच्चे की पढ़ाई करा रहे थे. 
वहीं पुत्र राजीव को सर्प ने जो डसा तो परिजन को पता नहीं चल सका और सुबह होने पर उक्त बालक की भी मौत हो गई. घटना से परिजन व गांव में मातम छा गई. एक साथ माँ बेटे की अर्थी उठने से पूरा गांव वासी का आॅखे नम होते रहे. जाहिर तौर से कोसी के इस इलाके में गरीबी, बेरोजगारी दानवीय रूप से असहाय लोगों को निगलने के लिए हमेसा मुंह फारे रहती है. कभी बाढ़ तो कभी बज्रपात तो कभी सर्प डस तो कभी असाध्य रोग (पानी के कारण) से इस क्षेत्र लोग असमय काल के गाल में समां रहे है.  

मई 10, 2016

आखिर कब होगी, बिना "दहेज" की शादी....

मो० अजहर उद्दीन के कलम से--- देश में दहेज प्रथा को समाप्त करने के लिए कितने कानून बने लेकिन अब-तक एक भी सरजमी पे कामयाब होते नहीं दिख रहा है.
आये दिनों देहज के कारण सुसराल वाले लड़की को प्रतारित करने के साथ-साथ उसके जान से भी खेल जाते है.जो दहेज प्रथा को रोकने के लिए कानून बनी है उसकी पूरी तरह से पोल खोल रही है.लेकिन इसके विपरीत वर्तमान समय में समाज का जिस तरह का माहौल देखने को मिल रहा है.वो काफी दुःखद है.फिलवक्त समाज में प्रेम-प्रसंग का मामला काफी तेजी से रफ्तार पकड़ रहा है.जो बेहतर समाज के निर्माण में काफी परेशानी बन के सामने आ रही है.जो लव मैरज के नाम से भी सुर्खियों में है.लगता है विवाह की इसी पद्धति से दहेज प्रथा पे अंकुश लग पायेगा.लेकिन ये समाजिक स्तर से गलत है।हर पिता का अरमान होता है की हमारी बेटी के हाथों में भी मेहन्दी लगे और वो डोली में बैठ सुसराल को जाय.लेकिन कई सुसराल में बिन दहेज लाये दुल्हन को मौत के घाट तक उतारा जाता है.एे खुदा अब तू ही हर लोगो को सही सोच से नवाज ताकि किसी गरीब की बेटी के हाथों में भी मेहन्दी लग सके।

मई 07, 2016

जहर का कहर ....


मुकेश कुमार सिंह की रिपोर्ट---- पारिवारिक कलह से तंग आकर एक महिला ने आज अपनी दो मासूम बेटियों के साथ जहर खा लिया ।सदर अस्पताल में इलाज के दौरान जहां महिला की मौत हो गयी है वहीं दोनों मासूम बेटियां एक निजी नर्सिंग होम में भर्ती है । नर्सिंग होम में भर्ती दोनों बच्चियों की स्थिति बेहद नाजुक है ।पुलिस इस मामले की तफ्तीश में जुटी हुयी है ।घटना सौर बाजार थाना के रौता गाँव की है ।मृतिका का पति पुलिस के डर से फरार है। 
सदर अस्पताल में पड़ी यह लाश डेजी देवी की है । पारिवारिक कलह से तंग आकर इसने गेंहूँ में डालने वाली दवा सल्फास ना केवल खुद खा लिया बल्कि अपनी तीन वर्षीय और पांच वर्षीय बेटियों को भी खिला दिया ।सदर अस्पताल में इलाज के दौरान डेजी देवी की मौत हो गयी । दोनों बच्ची भी सदर अस्पताल में ही भर्ती थी लेकिन पत्नी की मौत से डरा पति पवन यादव दोनों बच्चियों को लेकर अस्पताल से भाग निकला ।
लेकिन ग्रामीणों ने दोनों बच्चियों को पवन से छीनकर उसे गायत्री नर्सिंग होम में भर्ती करा दिया है,जहां उसकी स्थिति बेहद नाजुक है। 
पुलिस के अधिकारी भी घटना की वजह पारिवारिक कलह बताते हुए आगे जांच और कार्रवाई की बात कर रहे हैं ।नर्सिंग होम के डायरेक्टर डॉक्टर राजेश कुमार सिंह की मानें तो वे अपनी तरफ से दोनों बच्ची को बचाने की हर सम्भव कोशिश कर रहे हैं लेकिन उन्हें बचा पाना बेहद मुश्किल है । गरीबी,मुफलिसी,बेकारी और फटेहाली ।वजह आखिर जो भी हो लेकिन पारिवारिक कलह और रोज की कीच--कीच ने एक महिला को इतना परेशान किया की उसने अपनी जान तो गंवा ही दी,अपनी दो बच्चियों की जान लेने की भी पुरजोर कोशिश की ।बड़ा सवाल यह है की किसी भी कलह से निजात पाने की जगह लोग अपनी जान क्यों गंवा देते हैं।जीते जी समस्या का समाधान मिल बैठकर क्यों नहीं तलाशते हैं । हमारी समझ से जान देना किसी समस्या का समाधान नहीं है ।

मई 03, 2016

सहरसा में सीएम के जलवे............

मुकेश कुमार सिंह की कलम से:- अपने एक दिवसीय दौरे पर सुबह साढ़े नौ बजे सहरसा पहुंचे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सबसे पहले सहरसा स्टेडियम परिसर में जीविका स्व्यं सहायता समूह की महिलाओं को शराबबंदी को लेकर ना केवल संबोधित किया बल्कि उनके द्वारा बनाये गए सामानों को भी करीने से देखा ।अपने भाषण में नीतीश कुमार ने शराबबंदी को जहां सामाजिक परिवर्तन के लिए आवश्यक बताया वहीं मंच पर खुद नीतीश और उनके मंत्री सोते दिखे जो इतने गंभीर विषय को हल्का बना रहा था ।इस कार्यक्रम के अलावे नीतीश कुमार ने दो अन्य कार्यक्रम में भी शिरकत किया। 
सबसे पहले देखिये सहरसा स्टेडियम में पांडाल के नीचे बैठी जीविका से जुड़ी स्व्यंसेवी समूह की महिलाओं के इस जत्थे को ।कोसी प्रमंडल के तीन जिले मधेपुरा,सुपौल और सहरसा जिले की ये सारी महिलायें हैं ।इन महिलाओं के द्वारा निर्मित सामानों को पहले मुख्यमंत्री ने गंभीरता से देखा और परखा ।स्टेडियम परिसर में स्टॉल बने थे,जहां मुख्यमंत्री ने घूम--घूमकर जायजा लिए ।इसके बाद मुख्यमंत्री मंचासीन हुए ।नीतीश के साथ वित्त सह ऊर्जा मंत्री विजेंद्र यादव,आपदा मंत्री प्रोफ़ेसर चंद्रशेखर और अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री डॉक्टर अब्दुल गफूर भी थे ।मुख्यमंत्री ने दीप प्रज्ज्वलित कर इस कार्यक्रम का आगाज किया ।
मंच पर सहरसा टाईम्स की एक्सक्लूसिव तस्वीर को देखिये ।खुद मंच पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार गहरी नींद में है ।लग रहा है है की वे सभा स्थल की जगह अपने दीवाने ख़ास पर मौजूद हैं और नींद के मजे लूट रहे हैं ।
ऊर्जा मंत्री विजेंद्र यादव भी मुख्यमंत्री का भरपूर सहयोग दे रहे थे और वे भी मंच पर ही नींद का भरपूर आनंद ले रहे थे ।चूँकि शराबबंदी को लेकर यह कार्यक्रम आयोजित हो रहा था,लिहाजा विषय बेहद गंभीर था ।
ऐसे में मुख्यमंत्री के साथ मंत्री का मंच पर सोना,कहीं से भी जायज नहीं कहा जा सकता है ।इस मौके पर नीतीश कुमार ने कहा की शराबबंदी महज एक साधारण सरकारी फैसला नहीं है ।समाज में परिवर्तन के लिए उन्होनें यह फैसला लिया है और परिवर्तन शुरू है ।उन्होनें मजाकिया लहजे में कहा की कुछ अंग्रेजी दा लोग कहते हैं की उनके खाने--पीने का अधिकार हम छीन रहे हैं ।उन्होनें इसलिए कठोर कानून बनाया है की कानून को कठोर होना ही चाहिए ।उन्होनें संविधान का हवाला देते हुए कहा की संविधान में यह लिखा हुआ है की राज्य सरकार यह तय करे की राज्य में शराब पीना है या नहीं ।
सर्वोच्च न्यायालय का भी इस दिशा में शख्त निर्देश है । उन्होनें आगे कहा की झारखण्ड में भी जल्द शराबबंदी लागू होगी ।यही नहीं यूपी,बंगाल सहित पुरे देश में एक दिन शराबबंदी होगी ।और जब शराबबंदी हो जायेगी,तो फिर शराब आएगी कहाँ से ।नीतीश कुमार इस सभा में ग्यारह बजे आये और सवा बजे तक यहां रहे ।इस कार्यक्रम के बाद वे डेढ़ बजे से विकास भवन में जन प्रतिनिधियों के साथ समीक्षा बैठक की ।शाम चार बजे से प्रमंडलीय सभागार में वे प्रमंडल के सभी बड़े अधिकारियों के साथ उन्होनें समीक्षा बैठक की जिसमें सरकार के सात निष्चय को लेकर कई महत्व्पूर्ण टिप्स दिए। 
जीविका से जुड़ी महिलायें काफी खुश हैं और संकल्प के साथ कह रही हैं की पुरे राज्य में घूम--घूमकर शराबबंदी को पूरी तरह से धरातल पर उतार कर रहेंगी ।आने वाले दिनों में शराब पूरी तरह से बिहार से बाहर होकर रहेगा ।
मुख्यमंत्री का संकल्प और महिलाओं के बीच उनका अनुभव बांटना निश्चित रूप से आने वाले दिनों में मील का पत्थर साबित होगा । लेकिन मंच पर नीतीश के साथ--साथ उनके मंत्री का इस तरह से सोना,कई जलते हुए सवाल जरूर छोड़ गए हैं ।

*अपनी बात*

अपनी बात---थोड़ी भावनाओं की तासीर,थोड़ी दिल की रजामंदी और थोड़ी जिस्मानी धधक वाली मुहब्बत कई शाख पर बैठती है ।लेकिन रूहानी मुहब्बत ना केवल एक जगह काबिज और कायम रहती है बल्कि ताउम्र उसी इक शख्सियत के संग कुलाचें भरती है ।