मार्च 15, 2016

पंचायत चुनाव का जलवा.. जीत से पहले - जीत का जश्न......

मुकेश कुमार सिंह की रिपोर्ट : नौ चरण में होने वाले पंचायत चुनाव का जलवा देखते ही बन रहा है। एक तरफ जहां विभिन्य पदों के प्रत्यासी गाड़ियों के काफिलें में आ रहे हैं तो वहीँ दूसरी तरफ जीत से पहले ही थोक में ना केवल माले पहन रहे हैं बल्कि अबीर और गुलाल भी लगा--उड़ा रहे हैं। इस चुनावी मौसम में माला और अबीर बेचने वाले की भी बल्ले--बल्ले हैं और वे कह रहे हैं की लगता है की इसबार की बिक्री से उनके परिवार का पेट निश्चित रूप से साल--डेढ़ साल तक आसानी चल जाएगा।
सहरसा में 10 प्रखंड,151 पंचायत और 2 नगर पंचायत है जिसमें मुखिया,जिला परिषद,पंचायत समिति और वार्ड सदस्य को लेकर चुनाव हो रहे हैं।चुनाव नौ चरण में हो रहे हैं। हम आपको कहरा प्रखंड का नजारा दिखा रहे हैं जहां गाड़ियों के काफिले के साथ प्रत्यासी अपना नामांकन करने पहुँच रहे हैं।
ये हैं सीमा कुमारी।सितानाबाद क्षेत्र से ये मुखिया प्रत्यासी हैं।राजनीति के समर में पहली बार ये उतरी हैं और कह रही हैं की अपने क्षेत्र की गंदगी को साफ़ करने और विकास की दरिया बहाने के लिए वे मुखिया बनना चाहती हैं। पति अमित कुमार भी इनके हैं। इनका कहना है की वे अपनी पत्नी को इसलिए मुखिया बनाना चाहते हैं की गरीबों के साथ न्याय हो सके। गरीबों का हक़ मुखिया से लेकर बिचौलिए और बाबू--हाकिम खा जाते हैं।वे चाहते हैं की विकास की रौशनी घर--घर पहुंचे और सरकारी योजनाओं के लाभ से कोई भी महरूम ना रहे।    
अब यह ख़ास नजारा देखिये।विभिन्य पदों के प्रत्यासियों के अलावे उनके समर्थकों के लिए यहां माला और अबीर का भी ख़ास इंतजाम है। समर्थक अपने प्रत्यासी को नामांकन के समय ही ना केवल माला से लाद रहे हैं बल्कि जमकर अबीर और गुलाल भी उड़ा रहे हैं।  जीत से पहले ही एक तरह के जीत का जश्न यहां पर मनाया जा रहा है।माला और अबीर बेचने वाले कह रहे हैं की माला और अबीर की बम्पर बिक्री हो रही है। लग रहा है की इसबार की कमाई से वे साल--डेढ़ साल अपने परिवार की गाड़ी आसानी से खींच लेंगे। 
अब इस चुनावी समर में जीत का सेहरा किस--किस के सर बंधेगा,फिलवक्त कयास लगाना बेमानी है।लेकिन इस नामांकन के बहाने कुछ लोगों की जरूर चल निकली है।इस नामांकन के मेले में माला और अबीर बेचकर इन मामूली फुटकर दुकानदारों को लग रहा है की घर--परिवार के कई सपने को वे एक साथ पुरे कर डालेंगे।रब इनके अरमानों को पूरा करने में अपनी मेहरबानी की खूब बरसात करे। 

मार्च 14, 2016

नकली स्टाम्प का खुलासा ........

मुकेश कुमार सिंह की रिपोर्ट :- आज शाम पुलिस और प्रशासन को एक बड़ी कामयाबी हाथ लगी ।अधिकारियों ने गुप्त सूचना के आधार पर जिला समाहरणालय के दक्षिणी छोड़ पर स्थित कुछ गुमटियों में छापामारी की जहां लाखों के नकली शपथ पत्र स्टाम्प बरामद किये गए ।इस कामयाबी के साथ--साथ पुलिस ने एक वकील सहित तीन को इस काले कारोबार को चलाने के आरोप में गिरफ्तार भी किया है ।पुलिस गिरफ्त में आये इन तीनों से सघन पूछताछ कर रही है 
जिला समाहरणालय के दक्षिणी छोड़ और एसडीओ कार्यालय के ठीक बगल में एसडीओ जहांगीर आलम और एसडीपीओ सुबोध विश्वास ने संयुक्त रूप से विभिन्य गुमटियों में छापामारी कर रहे थे।
खासकर पंचायत चुनाव में विभिन्य पदों के लिए नामांकन करने वाले प्रत्यासियों को जो शपथ पत्र स्टाम्प दिए जाते हैं,उसी नकली स्टाम्प का खुलासा हुआ है । वैसे बताते चलें की सभी तरह के शपथ पत्र में इसी स्टाम्प की जरुरत पड़ती है ।वैसे अभी मौसम पंचायत चुनाव का है,इसलिए बड़ी मात्रा में इन नकली शपथ पत्र स्टाम्प को उसी मद में खपाया जा रहा था ।लाखों के नकली स्टाम्प के साथ तीन लोग गिरफ्तार किये गए हैं जिसमें एक वकील भी शामिल हैं । 
इनलोगों से सघन पूछताछ की जा रही है ।गिरफ्तार लोगों से पूछताछ में मिली जानकारी पर सदर थाना के भेड़धरी गाँव में पुलिस की छापामारी में नकली स्टाम्प छापने वाली मशीन,कम्प्यूटर,प्रिंटर मशीन सहित कई अन्य उपकरण बरामद हुए हैं ।सबसे अहम जानकारी यह मिल रही है की वहाँ सात लाख रूपये भी बरामद किये गए हैं।कुछ और लोगों की गिरफ्तारी की भी सूचना मिल रही है।वैसे छापामारी लगातार जारी है और कयास यह लगाया जा रहा है की पुलिस और प्रशासन की कामयाबी का ग्राफ अभी और बड़ा होगा ।

मार्च 10, 2016

रूपये दो, फिर होगा ईलाज ... इसी क्रम में जच्चा---बच्चा दोनों की हो गयी मौत

मुकेश कुमार सिंह की कलम से :- रूपये दो फिर होगा ईलाज ।बिना रूपये के यहां नामुमकिन है ईलाज ।रूपये नहीं हैं तो आपके मरीज की चली जायेगी जान ।यह कोई फ़िल्मी डायलॉग नहीं बल्कि कोसी इलाके के  पीएमसीएच कहे जाने वाले सदर अस्पताल की हकीकत है ।बीती देर रात एक गर्भवती महिला का ईलाज ठीक से इसलिए नहीं हुआ,क्योंकि उसके परिजनों ने दस हजार रूपये नहीं दिए ।ईलाज के अभाव में आज सुबह जच्चा---बच्चा दोनों की मौत हो गयी ।घटना से आहत परिजनों ने अस्पताल में जमकर हंगामा किया ।
देखिये अस्पताल का मंजर ।मेले की शक्ल में यहां भीड़ मौजूद है ।नवहट्टा के रहने वाले चन्दन दास की पत्नी गायत्री देवी और उसके पेट में पल रहा बच्चा दोनों काल के गाल में समा चुके हैं ।चन्दन अपनी पत्नी को बीती रात दो बजे डिलेवरी के लिए सदर अस्पताल लेकर आये ।लेकिन मौके पर मौजूद नर्स और महिला चिकित्सक ने उससे दस हजार रूपये मांगे ।लेकिन तत्काल चन्दन के पास इतने रूपये नहीं थी ।रूपये नहीं होने की वजह से चन्दन की पत्नी के ईलाज की जगह दुत्कार और फटकार मिलती रही ।नतीजतन आज सुबह बच्चा--जच्चा दोनों की मौत हो गयी। 
सदर अस्पताल में हंगामे की खबर सुनकर सदर थाना के एसएचओ संजय सिंह दल--बल के साथ अस्पताल पहुंचे और सख्ती दिखाते हुए मामले को शांत करा लिया ।मृतका को एम्बुलेंस से नवहट्टा भेजने की तैयारी आनन्---फानन में कर ली गयी ।लेकिन सहरसा टाईम्स के कड़े हस्तक्षेप के बाद पुलिस अधिकारी ने इस मामले में पीड़ित के आवेदन के आधार पर जांच और कार्रवाई की बात की है।इधर सिविल सर्जन डॉक्टर अशोक कुमार सिंह ने भी जांच कर कठोर कार्रवाई का भरोसा दिलाया है ।
सदर अस्पताल में पैसे के दम पर ईलाज का यह कोई पहला वाकया नहीं है ।सहरसा टाईम्स के हस्तक्षेप से आज से पहले भी कई अस्पताल कर्मी निलंबित किये जा चुके हैं ।वैसे सबसे अहम् बात यह है की सदर अस्पताल में आखिर गरीब अपनी जान कबतक यूँ ही और बेजा गंवाते रहेंगे ।जाहिर तौर पर पहले से मुफलिसी और फटेहाली की मार झेल रहे इन गरीबों को सरकारी अस्पताल में भी भगवान् की जगह यमराज से सामना होता है ।सिस्टम आखिर कब ईमानदारी से इन गरीबों के लिए खड़ा होगा ।आजादी से लेकर आजतक गरीबों की सियासी चिंता और उनकी अल्फाजी वकालत खूब हुयी है।लेकिन ये गरीब आजतक ना केवल ठगे गए हैं बल्कि बेहतर कल की उम्मीद पाले इस दुनिया को अलविदा भी कहते रहे हैं।



एक शख्स को मारी गोली ......


सहरसा टाम्स की रिपोर्ट :-  बीती रात करीब नौ बजे मोटरसाईकिल सवार दो अज्ञात अपराधियों ने अनिल गिरी नाम के शख्स को गोली मार दी ।घटना सदर थाना के गांधीपथ की है। गंभीर स्थिति में जख्मी को एक निजी नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया है जहां डॉक्टर उसकी जिंदगी को फिलवक्त खतरे में बता रहे हैं।
सदर एसडीपीओ सुबोध विश्वास
सूर्य अस्पताल के डायरेक्टर डॉक्टर विजय शंकर ने कहा की इंटरनल ब्लड निकल रहा है, जिसे रोकने के लिए ऑपरेशन किया जा रहा है। गोली पेट में फांसी हुयी है। पुलिस अधिकारी का कहना है की अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए सदर इंस्पेक्टर के नेतृत्व में छापामारी की जा रही है ।
वैसे घटना के कारण का ना तो पता चल सका है और ना ही अपराधियों को ही चिन्हित किया जा सका है ।अहम बात यह रही है की हमलावर जिस मोटर साईकिल से आकर घटना को अंजाम दिया था, वह मौक़ा ए वारदात पर ही छूट गयी। घटनास्थल और निजी नर्सिंग होम दोनों जगह जिले के पुलिस कप्तान अश्वनी कुमार खुद पहुंचे और कमान संभाल ली। 
एसपी के निर्देश पर सदर एसडीपीओ सुबोध विश्वास लगातार खुद से इस घटना के पटाक्षेप में जुटे हुए हैं।  

मार्च 02, 2016

कानून का राज स्थापित करें.... लवली आनंद, पूर्व सांसद

नए पुलिस अधीक्षक के  साथ पूर्व सांसद लवली आनंद 
सहरसा टाईम्स की रिपोर्ट :- सहरसा की बिगड़ती कानून व्यवस्था को लेकर पुर्व सांसद लवली आनंद ने बितेदिन सहरसा के नव पदस्थापित पुलिस कप्तान अश्वनी कुमार से मिल कर कहा कि कोशी प्रमंडल का मुख्यालय सहरसा में आज के समय में अपराधियों और उग्रवादियों का सुरक्षित अभयारण बन गया है. आज के समय मे हत्या, अपहरण, रंगदारी, बलात्कार, अवैध कब्ज़ा, चोरी, डकैती रोजमर्रा की बात हो गई है. पुर्व सांसद श्रीमति आनंद ने ये भी कहा कि पैसे के बल पर आज अपराधी खुले आम घूम रहे है और निर्दोष सलाखों के पीछे भेजे जा रहे है. 
उन्होंने नये पुलिस अधीक्षक को कहा की सहरसा की हालात ऐसा पहले कभी था. उन्होंने नव पदस्थापित पुलिस कप्तान को बधाई देते हुए सांकेतिक शब्दों में ये भी इशारा कर दिया की किसी पूर्वाग्रह या पैरवी से दूर रहते हुए कानुन का राज बनाए रखने का शसक्त प्रयास करें. ऐसा करने से मौजुदा स्थिति को बदलने में समय नहीं लगेगा। पुर्व सांसद के साथ राजन आनंद, युवा प्रदेश महासचिव (हम), सोनू कुमार सिंह, मुकुल सिंह, अनिल कुशवाहा, राजीव कुमार सहित फ्रेंड्स ऑफ़ आनंद के अन्य कार्यकर्ता मौजूद थे.

मार्च 01, 2016

अब हथियार की नोंक पर होगा मरीजों का ईलाज

मुकेश कुमार सिंह की कलम से-----सहरसा देश का पहला ऐसा जिला होगा जहां के डॉक्टर्स एक साथ हथियार की लायसेंस लेने की जिद पर अड़े हैं ।हद तो यह है की बेहतर सुरक्षा इंतजाम और हथियार के लायसेंस के लिए ये सभी डॉक्टर्स बीते 22 फ़रवरी से लगातार पांच दिनों तक हड़ताल पर भी थे।बताना लाजिमी है की इस हड़ताल के दौरान कोसी प्रमंडल के मरीज त्राहिमाम करते रहे।यह दीगर बात है की डॉक्टर्स की सुरक्षा एक अहम् मुद्दा है।लेकिन बड़ा सवाल यह है की कोसी इलाके में क्या आगे मरीजों का इलाज हथियारों की नोंक पर होगा ।क्या खौफ और संगिनियों के साये में होगा मरीजों का इलाज। पांच दिनों के सरकारी और गैर सरकारी डॉक्टर की हड़ताल ने कोसी इलाके में त्राहिमाम मचा दिया था।मरीज बिना इलाज के चीख--पुकार मचाये हुए थे।

हड़ताल के दौरान सभी नर्सिंग होम में अलीगढ़ के ताले लटक रहे थे।कोसी का पीएमसीएच कहा जाने वाला सदर अस्पताल बुरी तरह से प्रभावित था।हर तरफ मरीज परेशान हाल और बस ऊपर वाले की नियामत के भरोसे थे।सहरसा के डॉक्टर्स के समर्थन में सुपौल के सभी डॉक्टर्स और मधेपुरा और पूर्णिया के आंशिक रूप से डॉक्टर्स भई हड़ताल पर थे।आईएमए के बैनर तले यह हड़ताल चल रही थी।इन डॉक्टर्स को राज्य मुख्यालय संघ का आशीर्वाद भी प्राप्त था।जाहिर तौर पर ये डॉक्टर्स अपनी सुरक्षा की मांग को लेकर हड़ताल पर थे।लेकिन अब इन डॉक्टर्स का भरोसा पुलिस और प्रशासन पर से पूरी तरह से उठ गया है।इनकी मांग है की एक साथ सभी डॉक्टर्स को हथियार के लायसेंस दिए जाएँ,जिससे वे अपनी सुरक्षा खुद कर सकें ।
हमारी जानकारी के मुताबिक़ पुराने और नए दो सौ से 
ज्यादे डॉक्टर्स ने हथियार लाइसेंस के लिए आवेदन दिए हैं ।धरती  के भगवान् अब हथियार के दम पर लोगों की जान बचाने की कसम उठा चुके हैं ।हड़ताल के आखिरी दिन 26 फ़रवरी को कोसी रेंज के नवोदित डीआईजी चंद्रिका प्रसाद और सहरसा के  डीएम विनोद सिंह गुंजियाल से डॉक्टर्स का एक प्रमंडलीय प्रतिनिधि मंडल मिला ।अधिकारियों के साथ हुयी वार्ता और हथियार लायसेंस की जिद को लेकर पूरी चर्चा और अधिकारियों के ठोस भरोसे के बाद यह हड़ताल खत्म हो सकी। 
देश के इस चौंकाने वाले वाकये की हथियार का लायसेंस दो,तब करेंगे मरीजों का इलाज को लेकर सहरसा टाईम्स ने सहरसा के डीएम विनोद सिंह गुंजियाल से एक्सक्लूसिव बातचीत की ।डीएम ने बड़े साफ़ लहजे में कहा की लायसेंस देने की एक विधि सम्मत प्रक्रिया होती है ।किसी को भी हथियार के लायसेंस देने से पहले यह जानना भी जरुरी है की उन्हें किसी ने धमकी दी है या फिर उनकी जान को खतरा है ।यानि बिना प्रक्रिया के हथियार का लायसेंस नहीं दिया जा सकता है ।वैसे वे डॉक्टर्स की मांग पर कानून सम्मत विचार कर रहे हैं।

*अपनी बात*

अपनी बात---थोड़ी भावनाओं की तासीर,थोड़ी दिल की रजामंदी और थोड़ी जिस्मानी धधक वाली मुहब्बत कई शाख पर बैठती है ।लेकिन रूहानी मुहब्बत ना केवल एक जगह काबिज और कायम रहती है बल्कि ताउम्र उसी इक शख्सियत के संग कुलाचें भरती है ।