अगस्त 15, 2013

कितने आजाद हुए हैं हम


मुकेश कुमार सिंह: 15 अगस्त 1947 को जब देश आजाद हुआ था तो उस वक्त जहां वर्षों की गुलामी से निजात पाने का का सुकून था वहीँ खुली हवा में साँसे लेकर सतरंगी सपनों को साकार करने का जलजला था.लेकिन आजादी के 6 दशक से ज्यादा गुजर जाने के बाद एक तो लोगों की हालत बद से बदतर हुई है वहीँ आजादी कब और कैसे मिली और आजादी क्या होती है तक को लोग भुला बैठे हैं.बताना लाजिमी है की कोसी के इस इलाके में गरीबी,भुखमरी, अशिक्षा,बेरोजगारी,बिमारी और तरह--तरह की मुश्किलें कुलाचें भरती हैं.यहाँ दो रोटी के लिए लोग रोजाना जिन्दगी से जंग लड़ते हैं.जाहिर तौर पर सीलन,टीस और दर्द के रहबसर में आजादी के मायने कहीं गुम हो गए हैं.यही वजह है की इस इलाके में आजादी आज ना केवल बेस्वादी है बल्कि बेमानी साबित हो रही है.
मजदूर तबके के लोग जो रोज कड़ी मेहनत करके अपना और अपने परिवार का पेट पालते हैं,उन्हें आजादी और गुलामी में क्या फर्क नजर आएगा.उन्हें तो रोज जिन्दगी से जंग लड़नी है.उन्हें क्या पता की आजादी कब और कैसे मिली या फिर आजादी कहते किसे हैं.इस इलाके में रोजगार का टोंटा है.हजारों की तायदाद में लोग इस इलाके से दुसरे प्रांत रोजी--रोजगार के लिए पलायन कर रहे हैं.घर का चुल्हा रोज जल सके यह मिल का पत्थर साबित हो रहा है.एक तरफ बच्चे भूख से कुलबुला रहे हैं तो दूसरी तरफ बुजुर्गों को निवाला मिल पाना नामुमकिन साबित हो रहा है.बच्चों का जीवन पतझड़ में धूल--धूसरित हो रहा है.हर तरफ हताशा और निराशा का मंजर है.
आजाद भारत की जो तस्वीर सामने है वह निशित रूप से बदहाली का परचम है.यहाँ गुलामी और आजादी में फर्क करना मुश्किल है.ना जाने कब इस देश को आजादी का अहसास होगा और कब यह देश मुकम्मिल खुशहाल होगा.

बिजली विभाग में हंगामा


कहरा प्रखंड के सैंकड़ों लोगों ने बिजली विभाग में जमकर किया हंगामा /विभाग छोड़कर भागे अधिकारी और कर्मचारी
कहरा प्रखंड के सैंकड़ों लोगों ने बिजली विभाग में ना केवल जमकर  हंगामा किया बल्कि विभाग के अधिकारी और कर्मी के खिलाफ आसमानी नारेबाजी भी की.लोगों की उमड़ी भीड़ और हंगामे को देखकर विभाग के अधिकारी और कर्मचारी विभाग छोड़कर भाग निकले.इधर गुस्साए लोगों ने विभाग सभी कक्षों में ताला जड़कर विभाग का सारा काम--काज ठप्प कर दिया.एक तो महीनों से लोगों को बिजली नहीं मिल रही है दूजा हर माह उन्हें बिजली बिल जरुर मिल जाते हैं. इन लोगों का कहना है की जदयू के क्षेत्रीय सांसद शरद यादव के कोष से नए ट्रांसफार्मर आये हैं.कहरा प्रखंड के कई गांवों में पिछले दो वर्षों से ट्रान्सफार्मर जले हुए हैं.इनलोगों ने जले हुए ट्रान्सफार्मर को बदलवाने की अर्जी महीनों पूर्व से लगा रखी है. लेकिन बिजली विभाग के अधिकारी और कर्मी जदयू के नेताओं के साथ मिलकर अट्ठारह,बीस से पच्चीस हजार रूपये एक ट्रान्सफार्मर के लिए घुस मांग रहे हैं.यही नहीं बिना बिजली जलाए ही उनके यहाँ लगातार बिजली बिल भी आ रहे हैं.वे लोग धरने पर बैठे हैं जबतक उन्हें ट्रान्सफार्मर नहीं मिलेंगे वे यहाँ से नहीं जायेंगे.ग्यारह बजे दिन से तीन बजे दिन तक तमाशा चलता रहा तब मौके पर पुलिस पहुंची.ट्रान्सफार्मर महीनों से जले हुए हैं जिन्हें बदलवाने के लिए उनसे बीस से पच्चीस हजार रूपये घुस की मांग की जा रही है.इसी घुस की मांग ने लोगों को आक्रोशित कर दिया जिस वजह से लोग आज हंगामा करने को विवश हो गए.मौके पर पुलिस ने पहुंचकर तहकीकात शुरू कर दी है. जदयू के नेताओं की मिली भगत से बिजली विभाग के अधिकारी और कर्मी लूट की दरिया में गोते लगा रहे हैं.यह आरोप हम नहीं बल्कि आक्रोशित जनता लगा रही है. नीतीश बाबू देखिये आपके निचले स्तर के नेता क्या गुल खिल रहे हैं.

अगस्त 13, 2013

सहरसा टाईम्स की पहल से बुजुर्ग महिला को मिला जीवन दान


10 अगस्त को अस्पताल के बेड से नाले में फेंकी गयी महिला के स्वास्थ्य में तेजी से हो रहा सुधार /सहरसा टाईम्स ने आज इस महिला को नहलवाकर पहनवाए नए कपड़े /बुजुर्ग महिला सहित आमलोग सहरसा टाईम्स को दिल से दे रहे सौ--सौ दुआएं//// मुकेश कुमार सिंह- सहरसा टाईम्स 
बीते 10 अगस्त को सदर अस्पताल सहरसा के बेड से नाले में फेंकी गयी बुजुर्ग महिला जिसका इलाज सहरसा टाईम्स ने सिद्दत से आवाज बुलंद करके शुरू करवाई थी उसके स्वास्थ्य में ना केवल तेजी से हो रहा सुधार है बल्कि सहरसा टाईम्स ने आज इस महिला को नहलवाकर नए कपड़े भी पहनवाए.अब यह महिला खुद से चल--फिर भी रही है.आमलोग खुलकर कह रहे हैं की आसाम से भटक कर सहरसा आई इस लावारिश बुजुर्ग महिला के लिए सहरसा टाईम्स के द्वारा आवाज बुलंद करने के परिणाम स्वरूप ही बुजुर्ग महिला को जीवन दान मिला है.बुजुर्ग महिला सहित आमलोग सहरसा टाईम्स को दिल से सौ--सौ दुआएं दे रहे हैं.
सदर अस्पताल में आज का आलम कुछ बदला--बदला और खुशनुमा है. देखिये इस बुजुर्ग महिला शाईना को जो आसाम से भटककर सहरसा पहुँच गयी है.यह बीमार थी और किसी मेहरबान ने बीते सात अगस्त को इसे सदर अस्पताल में लाकर भर्ती करा दिया था.लेकिन अपनी लापरवाही और बदइन्तजामी के लिए लम्बे समय से खासा बदनाम रहने वाले इस अस्पताल के हाकिम--मुलाजिमों ने इसे दस अगस्त को अस्पताल के बेड से उठाकर नाले में फेंक दिया था.सहरसा टाईम्स को तब इस बात की खबर लगी और हमने अपने सामाजिक फर्ज के लिए सिद्दत से आवाज बुलंद की और हमारे प्रयास के बाद मौके पर पहुंचे स्वास्थ्य विभाग के बेशर्म अधिकारियों से हमने जबाब--तलब भी किया।हमारी पहल से इस महिला का तब गंभीरता से इलाज शुरू हुआ और उसका नतीजा है की जिस महिला की लगभग मौत हो गयी थी वह आज पूरी तरह से ठीक होने की स्थिति में है.आज सहरसा टाईम्स ने इस बुजुर्ग महिला को कुछ सामाजसेवी के साथ मिलकर ना केवल नहलवाया बल्कि इस बुजुर्ग महिला को नए कपड़े भी पहनवाए.अब यह बुजुर्ग महिला खुद से चल--फिर भी रही है.सहरसा टाईम्स की पहल की वजह से मौत को मात देकर जिन्दगी का दामन थामने वाली इस महिला को देखकर अस्पताल में मौजूद लोग सहरसा टाईम्सको सौ--सौ दुआएं दे रहे हैं और साफ़ लहजे में कह रहे हैं की यह चमस्त्कार सहरसा टाईम्स की पहल का नतीजा है.
मल--मल कर इस बुजुर्ग महिला को समाजसेवी नहला--धुला रहे हैं.सहरसा टाईम्स की तरफ से दिए कपड़े को नजाकत के साथ इस बुजुर्ग महिला को पहनाया जा रहा है.अब यह अपने पाँव के सहारे चल कर अस्पताल के बेड पर खुद से जा रही है.यह बिल्कुल एक चमत्कार सरीखा है.बुजुर्ग महिला शाईना इस पहल के लिए सहरसा टाईम्स को धन्यवाद देने के साथ--साथ गीत गाकर भी सूना रही है.हम तूफां से लाये हैं किस्ती निकाल के और ऐ मालिक तेरे बन्दे हम गीत गाकर इन्होनें हमें सुनाया.वह बहुत खुश है की उसे जीवन दान मिला है और वह भी सिर्फ और सिर्फ सहरसा टाईम्स की वजह से.
आज मौके पर मौजूद डॉक्टर से हमने इस महिला के स्वास्थ्य को लेकर जब सवाल किये तो उनका कहना था की महिला बिल्कुल ठीक होने की स्थिति में है,इसे दो--तीन दिन में अस्पताल से छुट्टी मिल जायेगी।
बुजुर्ग महिला सहित अस्पताल में मौजूद लोग सहरसा टाईम्स को धन्यवाद देते--देते अघा नहीं रहे हैं.लेकिन हम बता दें की हमने ना तो कोई चमत्कार किया है और ना ही कोई एहशान.हमने आपने सामाजिक सरोकार के फर्ज को बस निभाया है.जिसके साथ भी हमें हकमारी होती दिखेगी,अन्याय होता दिखेगा,हम इसी तरह से ना केवल उसके लिए सिद्दत से आवाज बुलंद करेंगे बल्कि उसे उसका हक़ दिलाने तक मजबूती के साथ उसके साथ खड़े भी रहेंगे।हमें पता है की इसके लिए हम शासन---प्रशासन से लेकर सरकार की आँखों की किरकिरी बने रहेंगे।

चोर सरगना गिरफ्त में,लाखों का सामान बरामद : सहरसा पुलिस को मिली बड़ी कामयाबी

चन्दन सिंह सहरसा टाईम्स: विगत कई महीनों से चोरी की बढ़ी घटनाओं से आमलोगों के साथ--साथ हलकान और परेशान सहरसा पुलिस ने आज चैन और सुकून की लम्बी सांस ली है. बताना लाजिमी है की लम्बे समय से अपने लापरवाह और बिगडैल कार्यशैली के साथ--साथ अपनी दलाली की छवि से सुर्ख़ियों में रहने वाली सहरसा पुलिस ने आज जरुर चौंकाने वाला काम किया है.जाहिर तौर पर कम से कम आज सहरसा पुलिस की हौसला आफजाई के साथ--साथ उसकी पीठ थप--थपायी जानी चाहिए.सहरसा पुलिस ने आज सदर थाना के सराही मोहल्ले से चोर गिरोह के सरगना के साथ--साथ लाखों का सिगरेट,जर्दा--पत्ती और पान मशाला बरामद किया है.
सदर थाना सहरसा में आज जश्न का माहौल है.लकीर का फ़क़ीर बनी यहाँ की पुलिस ने आज चोर गिरोह के सरगना राजेश साह को करीब पंद्रह लाख के सामान के साथ गिरफ्तार किया है.बताते चलें की तीन दिन पूर्व सहरसा के महावीर चौक स्थित एक कारोबारी ने थाना में रपट लिखाई थी की उनकी होल--सेल की दूकान से लाखों का सामान चोर ने शटर और ताला काटकर चुरा लिए हैं.सदर थाना के नवस्थापित युवा थानाध्यक्ष चन्दन कुमार ने इस घटना को चुनौती के रूप में लिया और इस मामले के पटाक्षेप में दिन--रात एक कर दी.आज नतीजा सामने है की अपने सूचनातंत्र के दम पर उन्हें कामयाबी मिली जिसमें उन्होनें ना केवल चोर गिरोह के सरगना राजेश साह को दबोच लिया बल्कि सराही के एक घर से चोरी किये गए लाखों का सामान भी बरामद कर लिया.ख़ुशी से फुले नहीं समा रहे थानाध्यक्ष ने कहा की पुलिस के लिए चोरों को पकड़ना एक बड़ी चुनौती बनी हुयी थी.इस गिरफ्तारी से चोरी की घटना में काफी कमी आएगी.इन्होनें यह भी बताया की इस गिरोह के कुछ और सदस्य हैं जिन्हें जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा। 
इधर गिरफ्त में आया चोर राजेश साह बता रहा है की वह पहले दूकान में नौकरी करता था लेकिन उसके मालिक ने उसे नौकरी से हटा दिया.इसी बीच उसके संपर्क में शंकर,प्रकाश और गोपाल नाम के चोर आये और वह इस धंधे में जुट गया.अभी शंकर,प्रकाश और गोपाल पूजा करने के बहाने चोरी के कुछ माल लेकर बाबाधाम गए हैं.जब वे वहाँ से लौटते तब इन बरामद माल को भी बाजार में खपाया जाता.सुनिए इसे.सहरसा पुलिस की वर्दी पर ढेरों पुराने दाग हैं जिसे यह कामयाबी संजीवनी की तरह धोने का काम करेगी.किसी ने सच कहा है की अगर पुलिस चाह ले तो अपराध करना किसी के बूते में नहीं है लेकिन असल बात तो यह है की पनपते अपराध और जड़ जमाये अपराध को कहीं ना कहीं पुलिस का ही संरक्षण प्राप्त है.पुलिस के ऐसे कारनामों का अवाम के साथ--साथ हम भी तलबगार हैं.आगे देखना दिलचस्प होगा की पुलिस ऐसे और कितने चौंकाने वाले काम करने में समर्थ साबित होती है.

अगस्त 12, 2013

किलर है सोसल साईट: मासूम रिशु राज की ह्त्या की नहीं सुलझ रही गुत्थी :

ह्त्या के तीन सप्ताह हैं गुजरने वाले लेकिन पुलिस पानी पर डंडा मारने में है जुटी हुयी......
सहरसा टाईम्स विशेष रिपोर्ट: बिहार में पुलिस के ढुलमुल और अलमस्त रवैये के वाकये अब आम बात हो गयी है.ताजा वाकया सहरसा पुलिस से जुड़ा है जो अपने बिगडैल कार्यशैली को लेकर विगत कई वषों से खासा बदनाम रही है.सहरसा पुलिस के बदमिजाज रवैये से तंग आकर एक परिवार ने इंसाफ के लिए अब जान देने की धमकी तक दे दी है.मामला सहरसा जिला मुख्यालय का है जहाँ हत्या के करीब तीन सप्ताह के बाद भी एक मासूम की ह्त्या का मुजरिम ना केवल पुलिस की पकड़ से बाहर है बल्कि पुलिस की जांच भी शिथिल और मरियल है.
सबसे पहले चलिए उस घर में जिसने अपने घर के इकलौते चिराग को खोया है.इस घर का जर्रा--जर्रा आसूओं से तर और मातम में डूबा हुआ है.इस रोती--बिलखती माँ को देखिये इनकी तो दुनिया ही उजर गयी.इनका इकलौता बेटा अब इस दुनिया में नहीं है.बीते 20 जुलाई की शाम को इस घर के इकलौते चिराग रिशुराज की ह्त्या जिला सह कमिशनरी मुख्यालय में डीआईजी,एस.पी ऑफिस से महज आधा किलोमीटर की दुरी पर कर दी गयी थी,लेकिन हत्या के करीब तीन सप्ताह बीतने को हैं लेकिन पुलिस अब तक ना तो वारदात में इस्तेमाल हथियार को बरामद कर पाई है और ना ही दो नामजद अभियुक्तों में से एक को गिरफ्तार ही कर पाई है.पुलिस की इस लापरवाही से तंग आकर पीड़ित परिवार ने अब जान देने की धमकी दी है वो भी सहरसा एस.पी ऑफिस के सामने. मृतक बच्चे के पिता दीपक मिश्रा के जीवन का लक्ष्य खत्म हो चुका है.घर का दीपक ही बुझ गया है.
इधर मामले के लगभग तीन सप्ताह हो चले हैं और पुलिस अगले एक हफ्ते के भीतर छानबीन मुकम्मिल कर लेने की बात कर रही है.इस काण्ड की जांच की जिम्मेवारी एक खास अधिकारी दिलीप मिश्रा,A.S.P को सौंपी गयी है जो अभीतक जांच को दो कदम भी आगे नहीं ले जा पाए हैं लेकिन आदतन दावों की बौछार वे जरुर कर रहे हैं.
पुलिस ने मामले में नामजद दो आरोपियों में से एक को गिरफ्तार 
किया है जो मृतक का फेसबुक पर बना दोस्त लक्की सिंह है.लेकिन मृतक के पिता ने लक्की के पिता मुरारी सिंह जो पहले से अपराधिक चरित्र का रहा है उसे भी नामजद आरोपी बनाया है.मुरारी सिंह अभीतक फरार है और पुलिस के आलाधिकारी अजीत कुमार सत्यार्थी,एस.पी लक्की सिंह को लेकर यह कह रहे हैं की लक्की सिंह ने अपना अपराध भी कबूल कर लिया है.उसपर धारा 302 के तहत मुकदमा चलेगा. अब इस मामले के असली पेंच की तरफ चलिए.आत्मसमर्पण के बाद पुलिस की गिरफ्त में आया आरोपी लक्की सिंह नाबालिक है और पुलिस की हिरासत में वो एक विधायक नीरज कुमार बबलू जो की सुपौल जिले के छातापुर के जदयू विधायक हैं की कोशिशों के बाद आया था लेकिन पुलिस इसके लिए भी अपना पीठ थपथपा रही है.लेकिन इस मामले का दूसरा आरोपी जो उस आरोपी बच्चे का पिता है वो पुलिस की पकड़ से अभीतक बाहर है.ऐसे में पुलिस की जांच पर सवाल उठाना लाजिमी है की पहला आखिर घटना के करीब तीन सप्ताह गुजर जाने के बाद भी पुलिस ह्त्या में इस्तेमाल किये गए हथियार को अभीतक बरामद क्यों नहीं कर पाई.दूसरा इतने दिनों के बाद भी आखिर किन कारणों से पुलिस दुसरे आरोपी को गिरफ़्तार नहीं कर पायी.तीसरा अगर मासूम कातिल विधायक की पहल पर सरेंडर हुआ तो क्या पिता के सरेंडर या गिरफ़्तारी नहीं होने के पीछे खेल कुछ और तो नहीं … 
प्राथमिकी में दर्ज रिपोर्ट के मुताबिक बच्चों के बीच कुछ दिनों पहले हुई लडाई का यह नतीजा था.मृतक बच्चे को कई बार धमकी भी दी गयी थी लेकिन पुलिस ने इस पहलू पर पर भी अभी तक जाँच नहीं की है और हत्या का कारण भी अभीतक साफ नहीं हुआ है.पीड़ित परिवार पुलिस पर जिस तरह से मामले को रफा -दफा करने का आरोप लगा रहे हैं इसके पीछे भी दम है.पुलिस की पहुँच से फरार आरोपी का अपराधिक रिकॉर्ड रहा है और गैर लाइसेंसी हथियार रखने के जुर्म में उसे पहले गिरफ्तार भी किया जा चुका है.इधर मृतक नाबालिक बच्चे की कहानी तो और भी हैरान करने वाली है और ये कहानी बयां होती है उसके फेसबुक एकाउंट से.फेसबुक पर उसने पिछले माह जुलाई में दो रिवाल्वर की एक तस्वीर पोस्ट की थी जिसमे लिखा था …. THIS IS MY GUN ..सवाल बड़ा है की दशवीं कक्षा में पढने वाले रिशु राज को हथियार प्रेम कैसे और क्यों हुआ.सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक़ इंटरमिडीएट में पढने वाले मासूम हत्यारे लक्की सिंह से रिशु राज की दोस्ती फेसबुक के माध्यम से हुयी थी.रिशु राज का घर स्थानीय रहमान चौक पर है जबकि लक्की का घर उसके घर से महज कुछ दुरी पर ही तिरंगा चौक पर.वैसे यह बताना भी जरुरी है की मृतक के पिता दीपक मिश्रा का भी पुराना इतिहास बेहतर नहीं रहा है.
पुलिस की जांच में अभीतक जो तस्वीर निकल कर आई है उसके मुताबिक़ हथियार देखने--दिखाने में गोली चल गयी जिसमें रिशुराज मारा गया.लेकिन आखिर वह हथियार कहाँ गया जिससे गोली चली.इस मामले में कई पहलू हैं जिसपर पुलिस को गौर करना चाहिए.कहीं इस ह्त्या के पीछे कोई रंजिश तो नहीं.इस ह्त्या के पीछे कहीं कोई लड़की वजह तो नहीं.किसी तरह का लेन--देन,नशा प्रेम या फिर कोई और कारण तो नहीं.लेकिन पुलिस इन बिन्दुओं पर जांच करने से परहेज करती दिख रही रही है.
इस खबर में हम आपको घटना की रात यानि 20 जुलाई की रात की की  जानकारी भी देना चाह रहे हैं.घटना की शाम घटनास्थल से पेंथर जवान अरुण सिंह ने गोली लगने से घायल हुए रिशुराज को मोटरसाईकिल पर लादकर सदर अस्पताल लाया था.इनकी वर्दी खून से लथ--पथ थी.सदर अस्पताल में घायल रिशुराज के इलाज को लेकर सहरसा के भाजपा विधायक आलोक रंजन ने अपने समर्थकों के साथ मिलकर जमकर बबाल भी किया था.विधायक ने मौके पर मौजूद डॉक्टर एस.के.आजाद को ना केवल जमकर फटकार लगाई थी बल्कि उनको धकियाते हुए एम्बुलेंस पर भी चढ़वाया था.रिशुराज को बेहतर इलाज के लिए PMCH रेफर किया गया था लेकिन रास्ते में ही सुपौल के समीप उसकी मौत हो गयी थी.
बहरहाल अब आगे यह देखना काफी दिलचस्प होगा की पुलिस कितने दिनों में मामले के दुसरे मुख्य आरोपी मुरारी सिंह की गिरफ़्तारी करती है और ह्त्या में इस्तेमाल हथियार कब बरामद होता है.यही नहीं पुलिस की जांच बस खेल--खेल में हुयी ह्त्या का मामला बनकर खत्म हो जाता है या फिर ह्त्या के पीछे के कुछ अन्य रहस्यों पर से भी पर्दा उठता है.इस पुरे मामले में पुलिस की जांच आखिर जहां पर भी खत्म हो लेकिन हम फेसबुक की दोस्ती मंहगी पड़ सकती है इसका एलान करते हैं. सहरसा टाईम्स कम उम्र के नौनिहालों से लेकर हर उम्र के लोगों लोगों को खबरदार करता है की फेसबुक की दोस्ती जानलेवा और बड़ी तबाही वाली साबित हो सकती है.फेसबुक पर दोस्ती करें लेकिन ज़रा संभल के.

अगस्त 11, 2013

जानलेवा अस्पताल का बेशर्म सच

 मुकेश कुमार सिंह: कोसी इलाके का PMCH कहा जाने वाला सदर अस्पताल इन दिनों ना केवल पूरी तरह से जानलेवा बना हुआ है बल्कि मानवता को मुकम्मिल तौर पर शर्मसार करने की नयी ईबारत भी लिख रख रहा है।आप यह जानकार हैरान हो जायेंगे की इस अस्पताल से ना केवल सहरसा जिले के बल्कि सुपौल और मधेपुरा जिले के साथ--साथ नेपाल इलाके के तक़रीबन पचास लाख से ज्यादा लोगों की काफी उम्मीदें हैं।आज इस अस्पताल की हम आपको ऐसी तस्वीर दिखाने जा रहे हैं जिसे देखकर एक तरफ जहां इस अस्पताल का बेशर्म सच बेपर्दा हो जाएगा वहीँ आपका कलेजा मुंह को आ जाएगा।एक बुजुर्ग महिला जिसके हाथ में स्लाईन चढाने के लिए हाथ में इंट्राकैट लगा हुआ है लेकिन वह अस्पताल के बेड पर नहीं बल्कि खुले आसमान के नीचे एक नाले के बगल में पड़ी कराह रही है।इंसानियत को शर्मशार करने वाली और अस्पताल की बेशर्मी की इन्तहा को आज सहरसा टाईम्स बेपर्दा करने जा रहा है।  
अस्पताल परिसर का एक बेहद खास हिस्सा जहां पर ना केवल अस्पताल के महत्वपूर्ण वार्ड हैं बल्कि जहां पर मरीजों के लिए भोजन का इंतजाम होता है ठीक उसके बगल में एक नाले के पास पड़ी इस बुजुर्ग महिला को देखिये। यह महिला दर्द और अपने मर्ज की वजह से कराह रही है।इसके हाथ में स्लाईन चढाने के लिए हाथ में इंट्राकैट लगा हुआ है लेकिन यह यहाँ पर पड़ी हुई व्यवस्था और तमाम सरकारी इंतजामात का मुंह नोंच रही है। हम शाम से इस महिला के करीब रहे लेकिन हमारी मौजूदगी के घंटों बाद भी अस्पताल का कोई आला से लेकर कोई मुलाजिम तक यहाँ नहीं पहुंचा।थक--हारकर हमने सहरसा के डी.एम शशि भूषण कुमार और सिविल सर्जन डॉक्टर भोला नाथ झा का फोन किया लेकिन ये शाही अधिकारी हमारे इतल्ला करने के डेढ़ घंटे बाद तक मौके पर नहीं पहुंचे।
इस बीच किसी ने छातापुर(सुपौल)जदयू विधायक नीरज कुमार बबलू जिनका निजी आवास सहरसा जिला मुख्यालय में है को खबर कर दी।विधायक जी मौके पर आये और खुद अपनी नंगी आँखों से सुशासन के असल यानि नंगे सच को देखा।हमने इनसे खूब जबाब--तलब किया जिसपर विधायक जी जांच और कारवाई का तकिया--कलाम पढ़ते रहे।यहाँ नौकरशाहों के अलमस्त रवैये की पोल--पट्टी खुल रही है। अस्पताल में सहरसा टाईम्स की मौजूदगी का जैसे ही अहसास कुछ समाजसेवियों और जनप्रतिनिधियों को हुआ वे भी यहाँ आ धमके और जिले के अफसरानों को खरी--खोटी सुनाने लगे।इनलोगों ने जहां सहरसा टाईम्स की पहल को काबिले तारीफ़ बताया वहीँ जिलाधिकारी और स्वास्थ्य अधिकारी को निकम्मा होने के साथ--साथ खुद उन्हें ही लावारिश बताया।इनकी प्रवीण आनंद,समाजसेवी,लुकमान अली,सामाजिक कार्यकर्ता और रितेश रंजन,उपाध्यक्ष,जिला परिषद्,सहरसा की मानें तो ऐसे अधिकारियों पर मुकदमा होना चाहिए।इनलोगों ने ऐसा रोष जाहिर किया जिससे सच की तस्वीर और बदरंग तरीके से साफ़--साफ़ दिखने लगी। 
सूचना की बड़ी देरी बाद सिविल सर्जन सह चीफ मेडिकल ऑफिसर डॉक्टर भोला नाथ झा की नींद टूटी और वे मौके पर आये और नाले के किनारे पड़ी महिला को देखने लगे।अब साहब आये हैं इनका अपना मिजाज और काम करने का अपना तरीका है।सहरसा टाईम्स ने जब उनसे पूछा की आखिर अस्पताल में यह क्या चल रहा है का जबाब उन्होनें यह कहकर दिया की वे पहले जांच करेंगे की इस अस्पताल में यह मरीज भर्ती थी की कहीं इसे बाहर से किसी ने लाकर यहाँ पर फेंक तो नहीं दिया है।इस महिला को ईलाज की दरकार है और हुजुर को जांच की पड़ी है।हम भी कहाँ मानने वाले थे।हमने मौके पर तैनात डॉक्टर से भर्ती पंजी को खंगलवाया।पीड़ित बुजुर्ग महिला पिछले तीन दिनों से इस अस्पताल में भर्ती थी।पीड़ित महिला आसाम की रहने वाली है और भटक कर सहरसा चली आई है।
 मौके पर एक अधिकारी अस्पताल के प्रबंधक विनय रंजन साहब हमें मिल गए।हमने जब इस मरीज को लेकर उनसे सवाल किया तो उन्होनें बताया की यह मरीज उनके द्वारा ही तीन दिन पूर्व यहाँ भर्ती कराई गयी थी।इसका इलाज आपातकालीन कक्ष में चल रहा था।अब यह महिला कैसे नाले के पास चली गयी इसका उन्हें कुछ पता नहीं है।इनको यह भी अंदेशा है की महिला को नाले के पास कोई असामाजिक तत्व भी हो सकता है की पहुंचाया हो।साहब ने इतना तो स्वीकारा की महिला इसी अस्पताल में भर्ती थी लेकिन सिविल सर्जन साहब का बयान तो कुछ और ही था।आप ही दोनों अधिकारियों के बयान का मिलान कीजिये और सच समझने और देखने की कोशिश कीजिये।
इस अनदेखी,लापरवाही,बदइन्तजामी और बेशर्मी को कहिये की हम क्या नाम दें।इस अस्स्पताल में गरीबों की जिन्दगी लीलने का पूरा इंतजाम है साहेब,अगर आप यहाँ से ज़िंदा बच निकलते हैं तो समझिये अल्लाह मेहरबान है।बाबू--हाकिम और मुलाजिम यहाँ सुविधा देने के लिए आ रही अकूत धन राशि को दोनों हाथों से एक तरफ जहां लूट रहे हैं तो वहीँ दूसरी तरफ मौत बाँट रहे हैं।

अगस्त 10, 2013

घूसखोरी के खिलाफ भूख हड़ताल

मुकेश कुमार सिंह : बीते सात अगस्त से डी.एम,सी.डी.पी.ओ सहित सम्बद्ध विभाग के अधिकारियों के विरुद्ध जनप्रतिनिधियों ने ना केवल हल्ला बोला है बल्कि उनके खिलाफ जबरदस्त मोर्चा भी खोल दिया है।सत्तर कटैया प्रखंड में नए आंगनबाड़ी केंद्र के निर्माण और उसमें हुए नियोजन में व्याप्त धांधली और नियोजन प्रक्रिया को रद्द करने के लिए स्थानीय वीर कुंवर सिंह चौक पर सत्तर कटैया प्रखंड प्रमुख पूनम सिंह,जिला पार्षद प्रवीण आनंद सहित चार लोग अनिश्चितकालीन सामूहिक भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं।बताना लाजिमी है की इस आन्दोलन की शुरुआत सात अगस्त से धरने के माध्यम से ही हुआ था लेकिन जब जिला प्रशासन पर धरने का कोई असर नहीं हुआ तो अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल का आगाज हुआ है।खास बात यह की जनप्रतिनिधि खुलकर इन अधिकारियों पर घुस लेने का गंभीर आरोप लगा रहे हैं। सैंकड़ों की तायदाद में लोग इस भूख हड़ताल के समर्थन में धरने पर बैठे हैं।खास बात यह है की इस आन्दोलन को तमाम विरोधी पार्टियों का समर्थन भी मिल रहा है।
आरोप ?
सभी का समवेत स्वर में यही कहना है की आंगनबाड़ी के केंद्र स्थापन और नियोजन प्रक्रिया में व्यापक पैमाने पर धन उगाही हुयी है।नीचे से लेकर ऊपर तक कमीशन का बंटवारा हुआ है।खासकर के सहरसा के वर्तमान डी.एम शशि भूषण कुमार के खिलाफ इनका आक्रोश है। आन्दोलनकारियों का कहना है की यह डी.एम शशि भूषण कुमार सहरसा को लूटने आया है।इन्हें यहाँ से अविलम्ब हटाया जाना चाहिए।आन्दोलनकारियों का साफ़ लहजे में कहना है की जिस केंद्र को जनसंख्याँ के आधार पर मिनी होना चाहिए उसे अतिरिक्त और जिसे अतिरिक्त होना चाहिए उसे मिनी केंद्र बना दिया गया है।सत्तर कटैया प्रखंड के पूर्व सी.डी.पी.ओ शिप्रा भारद्वाज पर सारे गंभीर आरोप लगाए गए हैं जिन्हें अब इस जिले से रिलीव कर दिया गया है।आप जान लें की शिप्रा भारद्वाज के स्थानान्तरण के बाद भी जिलाधिकारी ने इन्हें डेढ़ महीने से ज्यादा समय तक जिले में रोककर केद्र के सारे काम को निपटाया था।इनकी मानें तो शिप्रा भारद्वाज जिलाधिकारी का एक मोहरा भर थी,असली खिलाड़ी खुद जिलाधिकारी हैं।

अगस्त 08, 2013

खोनहा गाँव में भीषण डकैती

सहरसा टाईम्स: बीती रात बिहरा थाना के खोनहा गाँव में डकैतों ने एक सेवानिवृत सरकारी अमीन के घर ना केवल जमकर लूटपाट की बल्कि घर की एक महिला सहित तीन लोगों को बुरी तरह से पिटाई करके जख्मी भी कर दिया।  डकैतों ने आलमारी तोड़कर उसके भीतर रखे एक लाख नकदी,तमाम जेवरात और कीमती सामान उड़ाये । डकैती के दौरान डकैतों ने ना केवल कई चक्र गोलियां चलायीं बल्कि बम के धमाके भी किये।हम आपको बम के अवशेष के एक्सक्लूसिव तस्वीर भी दिखा रहे हैं।यही नहीं डकैतों ने दीपनारायण यादव के साथ---साथ उनके छोटे बेटे मनटुन यादव और उनकी पत्नी सावित्री देवी की जमकर पिटाई भी की।मनटुन यादव और उनकी पत्नी सावित्री देवी को गंभीर चोटें आई हैं जिन्हें पहले तो ईलाज के लिए सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया लेकिन उनकी स्थिति नाजुक देख उन्हें बेहतर ईलाज के लिए PMCH रेफर कर दिया गया।
इस पुरे मामले में पुलिस का रवैया काफी गैर जिम्मेवाराना रहा।एक तो समय से पुलिस ना तो मौक़ा ए वारदात पर पहुंची और ना ही सुबह होने के बाद अस्पताल पहुंचकर जख्मियों का हाल--चाल पूछना ही मुनासिब समझा। पुलिस अधिकारी दिलीप मिश्रा,A.S.P का कहना है की पुलिस छानबीन में जुटी हुयी है।तीन लोगों को शक के आधार पर हिरासत में लिया गया है जिनसे पूछताछ की जा रही है।
अधिकारी घटना को लेकर तफसील से जानकारी दे रहे हैं लेकिन वे महज दो चक्र गोली चलने की बात ही स्वीकार रहे हैं जबकि गोली बारह चक्र से ज्यादा चली है।बताते चलें की बीते तीन वर्ष के दौरान सहरसा जिले में डकैती की करीब पंद्रह घटनाएं घटी हैं लेकिन पुलिस को एक भी मामले के पटाक्षेप में आजतक सफलता नहीं मिली है।डकैती के मामले में पुलिस के हाथ बिल्कुल खाली हैं।ऐसे में डकैती की इस घटना का पुलिस आगे उद्दभेदन कर लेगी,कहना और कयास लगाना फिलवक्त नामुमकिन है।

*अपनी बात*

अपनी बात---थोड़ी भावनाओं की तासीर,थोड़ी दिल की रजामंदी और थोड़ी जिस्मानी धधक वाली मुहब्बत कई शाख पर बैठती है ।लेकिन रूहानी मुहब्बत ना केवल एक जगह काबिज और कायम रहती है बल्कि ताउम्र उसी इक शख्सियत के संग कुलाचें भरती है ।