नवंबर 30, 2016

कहते हैं इश्क में कुछ भी कर गुजरते हैं प्यार के पंछी



प्यार ने गिराई रिवायत की दीवार.........
पति को छोड़ नवयुवती प्रेमी के साथ हुयी फरार........
पुलिस ने सकुशल लड़की को किया बरामद........
कहते हैं इश्क में कुछ भी कर गुजरते हैं प्यार के पंछी........
महज तीन महीने पहले हुयी थी शादी नेहा की...........
प्रेमी हेमंत पुलिस की पकड़ से अभीतक बाहर............

मुकेश कुमार सिंह की सहरसा से दो टूक---->>
कहते हैं प्रेम अंधा होता है और वह किसी भी सामाजिक बंधन,रिवायत,मर्यादा,संस्कार और मेड़ को नहीं स्वीकारता और सभी कुछ को धराशायी करने का माद्दा रखता है ।ऐसा ही कुछ किया बिहार के सहरसा जिले के गोलमा गाँव के दो पागल प्रेमी ने ।गोलमा गाँव की रहने वाली 18 वर्षीय कमसिन नेहा की शादी बगल के ही गाँव के राजेश सिंह से महज तीन माह पहले हुयी थी । लेकिन नेहा शादी से पहले से ही अपने गाँव के ही युवक हेमंत झा से प्यार करती थी ।शादी से पहले नेहा ने अपने पिता भूषण सिंह से काफी आरजू--मिन्नत की थी की उसकी शादी हेमंत से करायी जाए ।वह हेमंत को मन ही मन पति मान चुकी है ।लेकिन सामाजिक प्रतिष्ठा और जातीय बंधन में जकड़े भूषण सिंह ने वही किया जो एक आम पिता करता है ।तीन माह पूर्व नेहा की शादी राजेश से कर दी गयी ।लेकिन दिल के अंदर बैठा हेमंत नेहा को लगातार मजबूर कर रहा था ।इधर पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक राजेश शराब का शौकीन था लेकिन शराबबंदी के कारण गांजे और भांग का सेवन करता था ।पति के इस चरित्र ने नेहा की हेमंत के प्रति उसकी दीवानगी को और बढ़ा दिया ।जबकि पुलिसिया तंत्र से जानकारी यह भी मिल रही है की हेमंत अपराधिक चरित्र का युवक है ।
इधर प्रेम अगन में जल रही नेहा लगातार हेमंत के संपर्क में थी ।आखिरकार प्यार में सारी दीवारें गिराकर नेहा 18 नवम्बर को हेमंत के साथ फरार हो गयी ।जाहिर तौर पर गाँव के एक सम्मानित परिवार की लड़की भागी थी ।नेहा के पिता और पति पतरघट ओपी पहुंचे ।पति राजेश के आवेदन पर हेमंत के खिलाफ अपहरण का एफआईआर दर्ज किया गया ।जिला मुख्यालय में भी बड़े पुलिस अधिकारियों पर दबाब बनाया जा रहा था । नेहा के मायके और ससुराल के साथ--साथ हेमंत के घर में कोहराम मचा हुआ था ।पुलिस हेमंत के परिवार पर भारी दबाब बनाये हुयी थी ।पतरघट ओपी प्रभारी कमलेश कुमार एड़ी-चोटी का जोर लगाए हुए थे ।मोबाइल से दोनों प्रेमी युगल का लोकेशन लिया जा रहा था लेकिन सफलता नहीं मिल रही थी ।इस दौरान नेहा और हेमंत अपने प्यार को और जवां करते रहे ।लेकिन आज दोपहर बाद नेहा खुद सकुशल थाने आकर आत्मसमर्पण कर दिया ।पुलिस अब नेहा का मेडिकल टेस्ट के साथ--साथ कोर्ट में धारा 164 में बयान कराने में जुटी है ।मासूम और निहायत कोमल दिखने वाली नेहा के इस कदम ने उसके जीवन में एक ऐसा दाग लगाया है,जो इस जीवन में तो छूटने से रहा । आरोपी हेमंत पुलिस की पकड़ से अभी बाहर है ।
नेहा बालिग है और अब वह फिर से अपने पति के साथ रहने को तैयार है ।आखिर नेहा का यह कैसा प्यार था ?हेमंत के साथ जिस्मानी भूख मिटाकर वह वापिस लौटी है ।क्या पिता भूषण सिंह का खोया सम्मान वापिस होगा ?क्या पति राजेश फिर से नेहा को निर्मल प्यार दे पायेगा ?क्या दोनों परिवारों के सदस्य नेहा को वह प्यार दे सकेंगे,जिसकी वह हकदार थी ?
नेहा का प्यार अगर सच्चा होता,तो,वह हेमंत को छोड़कर कभी वापिस नहीं आती ।देह पर रेंगने वाले प्यार का यह साबूत उदाहरण है ।पुलिस और अदालत इस मामले में जैसी भी कार्रवाई करे, हमारी समझ से नेहा के जीवन में ग्रहण लग चुका है ।माता--पिता को शिक्षा देते समय सामाजिक परिवेश,उंच--नीच और नैतिकता का पाठ अपने बच्चों को जरूर पढ़ाना चाहिए ।
इस समय मुझे आलोक धन्वा की एक कविता की पंक्ति बड़ी सिद्दत से याद आ रही है""घर की बेड़िया कितनी कमजोर थी,इसका पता तब चलता है,जब कोई लड़की घर से भाग जाती है ।वैसे गालिब ने भी क्या खूब कहा है""इश्क ने कर दिया निकम्मा,वर्ना हम भी आदमी थे काम के""।
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नवंबर 29, 2016

शिक्षा मंत्री जी विद्यालय भवन निर्माण कब पूरा होगा

शिक्षा मंत्री जी विद्यालय भवन निर्माण कब पूरा होगा ------दिनेश चंद्र यादव
सिमरी बख्तियारपुर से निरंजन
बिहार विधानसभा में सत्र के दौरान ताराकित प्रश्नकाल के दौरान प्रश्न संख्या शिक्षा 27 में पूर्व सांसद सह विधायक दिनेश चंद्र यादव ने शिक्षा मंत्री अशोक चौधरी से सवाल किया कि सहरसा जिले के उच्च माध्यमिक विद्यालय  घोघसम एवं महिषी प्रखंड के उच्च माध्यमिक विद्यालय  मागरोनी एवं क्षारा भवन निर्माण कार्ड बिहार राज्य शैक्षणिक आधारभूत संरचना विकास निगम लिमिटेड द्वारा वर्ष 2013 _14 में शुरू किया गया था लेकिन सिर्फ प्लिंथ लेवल तक कार्य करा कर छोड़ दिया गया जबकि उक्त कार्य को 1 साल में पूर्ण  किया जाना था यदि हां है तो सरकार कब तक विद्यालय भवन का निर्माण कार्य पूर्ण करा कर छात्रों की पढ़ाई नियमित कराने का विचार रखती है प्रश्न का जवाब में शिक्षा मंत्री अशोक चौधरी ने जवाब दिया कि मध्य विद्यालय झारा का निर्माण कार्य पूर्ण करा कर हस्तगत कराया जा चुका है बिहार राज्य शैक्षणिक आधारभूत संरचना विकास निगम लिमिटेड मे प्रतिवेदन दिया गया कि महिषी प्रखंड अंतर्गत उच्च माध्यमिक विद्यालय मागरोनी का निर्माण कार्य कराया जा रहा है जो वर्तमान में प्लिंथ स्तर तक हुआ है कार्यो के इसके लिए इसके संवेदक को निगम द्वारा कार्य समाप्ति तक अगली निविदा में भाग लेने के वंचित किया जा चुका है धीमी गति के लिए संवेदक के एकारनामे को विखंडित करने की करवाई की  जा रही है सिमरी बख्तियारपुर के उच्च माध्यमिक  विद्यालय घोघसम  का निर्माण कार्य अभी प्लिंथ स्तर तक हुआ है इस विद्यालय का कार्यस्थल पर सुरक्षा बांध के अंदर रहने के  कारण एवं अधिकांश समय तक जल जमाव रहने एवं पहुंच  पथ नहीं रहने के कारण परेशानी हो रहे हैं छह माह में कार्य पूरा कर लिया जाएगा

नवंबर 23, 2016

रेप के आरोपी राजवल्लभ की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में फैसला सुरक्षित

फाईल फोटो -- राजद विधायक राजबल्लभ यादव
सहरसा टाईम्स की रिपोर्ट ---- नाबालिग से दुष्कर्म के आरोपी नवादा के राजद विधायक राजबल्लभ यादव की जमानत याचिका पर आज सुप्रीम कोर्ट में अंतिम सुनवाई पूरी हो गई. कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है.   
क्या था मामला ---
नालंदा जिले के रहुई थाने के सुल्तानपुर की 15 वर्षीय नाबालिग लड़की ने नालंदा महिला थाने में 9 फरवरी को दुष्कर्म की शिकायत दर्ज कराई थी। दर्ज प्राथमिकी में नाबालिग ने आरोप लगाया है कि 6 फरवरी को बिहार शरीफ के धनेश्वर घाट मुहल्ले की सुलेखा देवी उसे एक जन्मदिन की पार्टी में ले जाने के बहाने गिरियक ले गई। आरोप है कि सुलेखा ने नाबालिग को नवादा के विधायक राजबल्लभ के हवाले कर दिया और विधायक ने उसके साथ दुष्कर्म किया। 
बिहार सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की----
बिहार सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया है इस केस में जबतक गवाहों के बयान पूरे नहीं हो जाते, तबतक राजबल्लभ को जेल में ही रहने का आदेश दिया जाए। राज्य सरकार बार-बार कह रही है कि जेल से बाहर आने के बाद आरोपी गवाहों को प्रभावित कर सकता है। 
  

नवंबर 16, 2016

सहरसा टाईम्स की खबर का हुआ बड़ा और साबूत असर


दिल्ली से वरिष्ठ पत्रकार मुकेश कुमार सिंह की रिपोर्ट----
सहरसा टाईम्स की खबर का हुआ बड़ा और साबूत असर
बार--बार नोट बदलने वाले पर सरकार ने कार्रवाई के दिए निर्देश
अब नोट बदलने के समय,अंगुली पर लगेगी अमिट स्याही
वरिष्ठ संवाददाता मुकेश कुमार सिंह ने अपनी पड़ताल में यह खुलासा किया था की कालाधन वाले आधार कार्डधारी मजदूर,ग्रामीण विभिन्य गिरोहों के सदस्यों और रिश्तेदारों को रोजाना विभिन्य बैंकों में खड़ा करके 500 रूपये पारिश्रमिक देकर नोट बदलवाने का खेल रहे हैं गोरख खेल ।यही नहीं एक व्यक्ति दिन में कई बैंकों में जाकर रूपये बदलवा रहा है,जिसे कोई देखने--सुनने और रोकने वाला नहीं है ।
हमने 14 नबम्बर को "मोदी का नोट के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राईक,निश्चित रूप से है मास्टर स्ट्रोक" शीर्षक से स्टोरी लिखी थी जिसमें सच्चाई की हर परत को हमने उधेड़ डाला था ।हमारी उस पड़ताल का नतीजा अब सामने है ।हमारी खबर का यह इम्पैक्ट है की लोगों की अंगुली पर अमिट स्याही लगेगी ।सरकार की तरफ से मिली जानकारी के मुताबिक़ सरकार ने यह कदम नोटों की अदला--बदली करवाने में आम गरीबों इस्तेमाल से लेकर कई गिरोहों के सक्रिय होने की रपटों के बाद उठाया है ।ऐसी रपटें हैं की ऐसे गिरोहों के सदस्य बार--बार कतारों में लगकर नोट बदलवा रहे हैं ।जाहिर तौर पर इससे काली कमाई वाले फिर से मालामाल हो रहे हैं और जरूरतमंद अपना नोट नहीं बदलवा पा रहे हैं ।
आर्थिक मामलों के सचिव शक्तिकांत दास ने बताया कि नोटिश आई है की अनेकों जगहों पर एक ही व्यक्ति बार--बार नोट बदलवाने आ रहे हैं ।अब जो व्यक्ति पैसे बदलवाने बैंक जाएंगे,तो, उनकी ऊँगली में अमिट स्याही लगाई जायेगी । फिर आगे से वे किसी भी बैंक में जाने की हिम्मत और कोशिश नहीं करेंगे ।
हम अपनी रपट पर सरकार की इस ससमय पहल से बेहद खुश हैं और इससे भी ज्यादा ख़ुशी हमें इस बात की है की जरूरतमंद अब समय से अपने रुपयों को बदलवा सकेंगे ।
हम अपने पाठकों को विश्वास दिलाते है की सरकार और तंत्र को सच से दो--चार कराने का हमारा यह सिलसिला बदस्तूर जारी रहेगा ।वाकई सच दिखाने की भूख है हमें और इमां का कुदरती दम भी खूब रखते हैं हम ।


14 नवंबर को हमारी पड़ताल  



नवंबर 14, 2016

मोदी का नोट के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राईक निश्चित रूप से है मास्टर स्ट्रोक


मोदी का नोट के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राईक निश्चित रूप से है मास्टर स्ट्रोक
कालाधन सड़क पर छितराये और पकड़ में भी आने लगे
लेकिन कुछ अनसुलझे सवाल के जबाब तलाशने होंगे 
दिल्ली से मुकेश कुमार सिंह की एक्सक्लूसिव पड़ताल---->>
.इंडिया 
सबसे पहले हम अपने पाठकों को बैंक में तीर्थ वाली भीड़ की सच्चाई से रूबरू करा रहे हैं ।बैंक में अभी जो लाईन में लगे लोग हैं वे अधिकतर डॉक्टर्स,इंजीनियर्स,ऑफिसर्स और धन्ना सेठ के स्टॉफ,उनके ग्रामीण और रिस्तेदार लोग हैं ।यही नहीं इस काम में आधार कार्डधारी मजदूर भी लगे हैं ।पहले चार हजार,अब साढ़े चार हजार बदलने के लिए ये लाईन में लगे हैं ।इसके बदले 500 रूपये बतौर पारिश्रमिक मिल रहे हैं ।पैसे वाले मजदूर और ग्रामीण इलाके से आधार कार्डधारी को या तो गाँव के बैंकों में ही भेज रहे हैं,या फिर उन्हें लादकर शहर ला रहे हैं ।गौरतलब है की शहरी इलाके से लेकर ग्रामीण इलाके में यह खेल चल रहा है ।हद की इंतहा तो यह है की एक ही व्यक्ति कई बैंकों में जाकर रूपये बदल रहा है लेकिन बैंक अधिकारी इसपर ध्यान नहीं दे रहे हैं ।हमारी समझ से काम के बोझ की वजह से बैंक अधिकारी से यह चूक हो रही है ।लेकिन यह चूक कतई नहीं होनी चाहिए थी ।यानि की कालाधन किसी तरह सफेद हो जाए इसके लिए भगीरथ कोशिश युद्ध स्तर पर चल रहा है ।

हमने ऊपर अपने पाठकों को एक्सक्लूसिव जानकारी दी ।अब कुछ अनसुलझे सवाल हैं जिसके बारे में सरकार की तरफ से कोई जानकारी नहीं आई है की आखिर उसके लिए सरकार ने क्या सोचा है ?
कई बड़ी लूट की घटनाओं के बाद पुलिस ने करोड़ों रूपये की बरामदगी भी की ।वे रूपये पुलिस थाने के मालखानें में हैं ।निगरानी ने जो ट्रैप किये वे रूपये भी जमा हैं ।आईबी,सीबीआई, इनकम टैक्स और सेल टैक्स के छापे में जो अरबों रूपये की बरामदगी हुयी है ।आखिर उन रुपयों का क्या होगा ?सरकार की तरफ से इसको लेकर अभीतक कोई बयान नहीं आया है ।
मुद्रास्फ्रीति या मुद्रा अवमूल्यन में इन रुपयों की क्या हैसियत होगी ?इसके बारे में भी मोदी जी को अपना रुख साफ करना चाहिए ।


वैसे मोदी की इस नोट क्रान्ति ने पुरे देश में भूचाल ला दिया है ।निश्चित रूप से नरेंद्र दामोदर मोदी ने वह कारनामा किया है जिससे देश में दबे काले धन को बाहर आने से कोई नहीं रोक सकता है । मोदी के इस प्रयास से लोगों को सफेद धन की समझ भी आएगी और सरकार को टैक्स देने की आदत भी लगेगी ।निश्चित रूप से देश नयी ऊर्जा के साथ'नयी राह पर चलेगा ।एक नए भारत के निर्माण का शंखनाद हो चुका है ।आने वाले दिनों में भारत के पेड़--पौधे,पशु--पक्षी भी नए स्वर में गीत गाते नजर आएंगे ।

नवंबर 12, 2016

बिहार प्रेस मेंस यूनियन ने सरकार को दिया अल्टीमेटम


सुधांशु कुमार सतीश की खास रिपोर्ट---->>

सासाराम के पत्रकार धर्मेंद्र सिंह की गोली मारकर हत्या मामला
बिहार प्रेस मेंस यूनियन ने सरकार को दिया अल्टीमेटम
Indian Federation of Working Journalists (IFWJ) ने अपराधियों की जल्द गिरफ्तारी की मांग की

आगे होगा आंदोलन तेज
सासाराम मुफस्सिल थाने के अमरा तालाब के पास अपराधियों ने आज सुबह दैनिक भास्कर अखबार के पत्रकार धर्मेन्द्र सिंह की गोली मार कर हत्या कर दी ।पत्रकार धर्मेंद्र सिंह आज सुबह  सासाराम से 7 किलोमीटर दूर अमरा तालाब के लिए निकले थे और रास्ते में उनकी कुछ लोगों से नोकझोक भी हुई थी ।वह एक चाय की दुकान में रूककर चाय पी रहे थे ।इसी बीच तीन अपराधी पल्सर बाईक से आकर उन्हें गोली मारकर फरार हो गए ।धर्मेंद्र सिंह को पेट में गोली लगी थी ।उन्हें ईलाज के लिए तुरंत सदर अस्पताल ले गए जहां उनकी  गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें वाराणसी रेेफर कर दिया गया ।लेकिन वाराणसी ले जाने के दौरान उनकी मौत हो गई।
मिल रही जानकारी के मुताबिक मौत से पहले धर्मेंद्र ने उन अपराधियों के नाम भी अपने परिजनों को बताया है,जिन्होंने इस घटना को अंजाम दिया है ।दिवंगत धर्मेन्द्र को दो बेटे और एक बेटी है ।धर्मेंद्र आई इलेवन के फुटबॉलर भी रहे हैं और आज भी वह फुटबॉल की प्रैक्टिस के लिये जा रहे थे ।धर्मेन्द्र जिले के अच्छे फुटबॉलर भी थे ।उनकी उम्र 36 वर्ष के करीब थी ।सासाराम शहर से 7 किलोमीटर दूर अमरा गांव में उनका पैतृक आवास था जबकि जहानाबाद के इचिपुर में उनकी ससुराल था ।धर्मेन्द्र के पिता अवधेश सिंह हैं ।
गौरतलब है की धर्मेन्द्र सिंह लगातार पत्थर माफियाओं के खिलाफ लिख रहे थे ।उनकी कई रिपोर्ट के आधार पर प्रशासन ने पत्थर  माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई भी की थी ।
जिस कारण पत्थर माफिया धर्मेन्द्र से काफी नाराज थे ।हत्या के बाद लोगों को शक है कि पत्थर माफियाओं ने ही धर्मेंद्र की हत्या करायी है । वैसे बताना लाजिमी है की धर्मेंद्र को पत्थर माफिया से धमकी भी मिल रही थी ।
इस घटना के बाद पत्रकारों में काफी आक्रोश व्याप्त है ।
पुलिस SIT गठन कर मामले की छानबीन के साथ अपराधियों के गिरफ़्तारी को लेकर जगह-जगह छापेमारी कर रही है ।
इस घटना को लेकर Indian Federation of Working Journalists (IFWJ) के राष्ट्रीय महासचिव श्री परमानन्द पाण्डेय और राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री हेमंत तिवारी ने पुरजोर निंदा कर सरकार से अपराधियों की जल्द से जल्द गिरफ़्तारी की मांग की है ।

साथ ही IFWJ से संबद्ध बिहार प्रेस मेंस यूनियन के अध्यक्ष श्री एस एन श्याम, प्रदेश उपमहासचिव श्री सुधांशु कुमार सतीश, प्रदेश सचिव आशु राजा, प्रदेश पदाधिकारी मुकेश कुमार सिंह के साथ यूनियन के सुपौल जिला अध्यक्ष आर. सी. मेहता, सहरसा जिला अध्यक्ष संजीव श्रीवास्तव,मधेपुरा जिला अध्यक्ष प्रदीप झा सहित अन्य पदाधिकारियों ने इस घटना की घोर निंदा कर सरकार से यथाशीघ्र अपराधियों की गिरफ़्तारी कर पीड़ित परिवार को उचित सुरक्षा के साथ समुचित न्याय की मांग की है ।

एक अदद जानकारी
धर्मेन्द्र ह्त्या मामले में डीआईजी मोहम्मद रहमान से बिहार प्रेस मेंस यूनियन के प्रदेश अधिकारी मुकेश कुमार सिंह की लंबी बातचीत हुयी ।उन्होनें अपराधियों को चिन्हित कर लेने का दावा किया और SIT के गठन की बात की ।अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापामारी की भी उन्होनें बात की । मोहम्मद रहमान की भाषा से लग रहा था की पुलिस इस मामले को लेकर गंभीर है लेकिन वह अँधेरे में तीर चला रही है ।डीआईजी मेरे मित्र हैं ।उन्होनें शीघ्रता से बड़ी कारवाई का भरोसा दिलाया है । लेकिन पुलिस आखिर पुलिस है ।कम से कम हम यह कतई नहीं भूल सकते ।

बिहार में पत्रकार अब महफूज नहीं

पत्रकार की ह्त्या से दहला बिहार,बिहार में बंदूक राज का नंगा नाच,बारूद के सामने नतमस्तक है सिस्टम
बंदूक के पुजारी ने लीला कलम के सिपाही को,बिहार में पत्रकार अब महफूज नहीं ,पहले राजदेव अब धर्मेन्द्र
खुद मैं भी हूँ निशाने पर

सासाराम से मुकेश कुमार सिंह की दो टूक---->>
बेखौफ और बेलगाम अपराधियो ने एक हिंदी दैनिक अखबार के पत्रकार धर्मेन्द्र सिंह को गोली मार कर उनकी ईहलीला खत्म कर दी ।घटना मुफस्सिल थाना के अमरा तालाब की है । जानकारी के मुताबिक़ आज सुबह धर्मेन्द्र अपने घर के पास ही चाय दूकान पर चाय पी रहे थे की एक बाईक पर सवार तीन अपराधियों ने उन्हें नजदीक से सीने में गोली दाग दी ।हांलांकि शुरू में धर्मेन्द्र ने अपनी जान बचाने की कोशिश की । अपराधियों से उनकी हाथापाई भी हुयी ।लेकिन अपराधी ह्त्या करनी है,यह ठान कर आये थे । अपराधियों ने बिल्कुल निकट से उनके सीने में गोली मारी ताकि उनकी मौत हो जाए ।स्थानीय लोगो नें  आनन--फानन में जख्मी धर्मेद्र को सासाराम के सदर अस्पताल में भर्ती कराया ।जहाँ प्राथमिक उपचार के बाद उनकी स्थिति को नाजुक देखते हुए उन्हे वाराणसी रेफर कर दिया गया ।लेकिन धर्मेन्द्र वाराणसी नहीं पहुँच सके ।रास्ते में ही उनकी मौत हो गयी ।पुलिस अब इस मामले की छानबीन में जुटी है और अपराधियों को चिन्हित कर लेने का ना केवल दावा कर रही बल्कि उनकी गिरफ्तारी के लिए छापामारी भी कर रही है ।घटना के बाद पत्रकारो में भारी क्षोभ और आक्रोश है ।हमारे पास जो जानकारी उपलब्ध हो पा रही है,उसके मुताबिक़ धर्मेद्र पत्थर माफिया के खिलाफ खूब लिख रहे थे ।कयास लगाया जा रहा है की पत्थर माफियाओं ने ही इस हत्या की घटना को अंजाम दिया है ।वैसे पुलिस अधिकारी, इस हत्या के बाबत अपना मुंह ही नहीं खोल रहे हैं ।सबके मुंह फेविकोल से चिपके हुए हैं ।इस ह्त्या ने सासाराम सहित पुरे बिहार में सनसनी फैला दी है ।
सुनो सरकार----
राजदेव के बाद अब धर्मेन्द की ह्त्या ।हम पत्रकार बिरादरी के लोग अब खामोश नहीं रहेंगे ।सिस्टम से लड़ने के साथ--साथ अब अपराधियों से भी हम लड़ेंगे ।हमारी हिफाजत की चिंता नौकरशाह और हुक्मरान को नहीं है ।पुलिस अधिकारी सहित सभी विभागों के अधिकारी हमें देखकर यूँ बिदकते हैं जैसे लाल कपड़ा देखकर सांढ़ ।उन्हें हमसे बदबू आती है ।हमें एकजुट होकर अब पुख्ता और साबूत रणनीति बनानी होगी ।मैं अपने बारे में भी बता दूँ की बहुत पहले से ही मैं नेता,कुछ दलाल,माफिया, अधिकारी और अपराधियों के राडार पर हूँ ।कई बार मुझे धमकियां भी मिल चुकी है ।ऐसे में किसी ने मेरी कोई सुध नहीं ली ।हो सकता है राजदेव और धर्मेन्द्र की तरह मुझे भी ठिकाने लगाने की कोशिश हो ।मैंने ठान लिया है की लड़ाई अब आरपार की होगी ।जरूरत पड़ी तो कुछ को खुलकर लुढ़कायेंगे हम ।माननीय न्यायालय भी खुलकर हम पत्रकारों की चिंता नहीं कर रही है ।हम अब यूँ ही मरते नहीं रहेंगे ।अब वक्त कुछ को मार गिराने का है ।लेकिन दुःख तो इस बात का भी है की हमारे कुछ पत्रकार भाई भी अपराधियों के साथ--साथ सड़े लोगों की ना केवल रोटी खाते हैं बल्कि उनके तलवे भी चाटते हैं ।कुछ पत्रकार, जिन्हें पत्रकार कहना भी नहीं चाहिए,वे हर तरह की लीला में सिद्धस्त हैं जिसका खामियाजा भी हमें भुगतना पड़ता है ।पत्रकार के कई संघ चल रहे हैं लेकिन पत्रकार का कहीं भला होता नहीं दिख रहा है ।हमारी समझ से पत्रकार के कुछ फर्जी संघ भी चल रहे हैं ।ऐसे संघों को चिन्हित कर,उन्हें बंद कराना भी जरुरी है ।कुछ तथाकथित पत्रकारों की वजह से अक्सर फजीहत तो झेलनी ही पड़ती है ।
सरकार सुरक्षा की गारंटी ले
सरकार को चाहिए की वह पत्रकारों की सुरक्षा के लिए ना केवल आगे आये बल्कि सुरक्षा के लिए कोई कानून भी बनाये ।एक तो पत्रकार जहां-जहां काम कर रहे हैं,वहां अपने--अपने संस्थानों के मालिक और ओहदेदारों से खासे परशान रहते हैं । लेकिन सरकार क्या करे,उनके मंत्री लोग तो खुद अपराधियों को ना केवल संरक्षण देते हैं बल्कि उसी बिरादरी से आये हैं ।गुर्गे पालने के पुराने शौकीन हैं नेता जी ।फिर भी माननीय नीतीश जी की छवि अच्छी है ।उन्हें अपने पत्रकार समाज के हित के लिए आगे आना चाहिए ।
सीवान में राजदेव ह्त्या मामले का अभी तक खुलासा नहीं हो पाया है ।उस मामले की जांच सीबीआई कर रही है ।जब राजदेव की हत्या की वजह के खुलासे और उनकी ह्त्या किसने की,का खुलासा इतनी मिहनत के बाद भी नहीं हो पा रहा है,तो फिर धर्मेन्द्र को कितना न्याय मिल पायेगा,हम समझ रहे हैं ।
लिक से हटकर हम अपनी राय रख रहे हैं की जिस नेता,अपराधी,अफसर या माफिया ने हमें मार गिराने का मन बनाया है,आगे बढ़कर उसे टपकाना जरुरी है ।हमें अपनी सुरक्षा के लिए कुछ हटकर करना बेहद जरुरी है ।वैसे आपसभी अपनी मर्जी से जो उचित समझें करें ।यह जाहिर सी बात है की बिहार में गुंडा राज है ।जय बोलो सरकार की ।जय बोलो गुंडा राज की ।




बिहार में एक और पत्रकार की हत्या ..

सहरसा टाईम्स की रिपोर्ट  ---- बिहार में अपराधी बेखौफ हैं. सीवान में पत्रकार राजदेव रंजन की हत्या की गुथी पूरी तरह सुलझी भी नहीं थी की आज सुबह सासाराम में एक प्रमुख दैनिक अखबार के पत्रकार को तीन बाईक सवार आग्यात अपराधियों ने हिंदी दैनिक भास्कर के पत्रकार धर्मेन्द्र सिंह को गोली मार दी. जिसे उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया लेकिन उपचार के दौरान हीं मौत हो गई. घटना मुफस्सिल थाना के अमरा तालाब की है. 



नवंबर 09, 2016

क्या B.N.M.U. मधेपुरा के नाम पर चल रहा है फर्जी वेब साईट...

सहरसा टाईम्स की रिपोर्ट  : आज सहरसा टाईम्स आपको पुनः  भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्दालय के नाम पर चलाये जा रहे फर्जी वेब साईट http://bnmuinfo.org/ से सावधान कराने जा रहे है. विगत कुछ दिन पूर्व हमने इस कारनामे पर खबर पोस्ट की थी जिसपर वेब पेज के एडमिन ने अपनी टिपण्णी यूनिवर्सिटी के फर्जी साईट पर  की थी और लिखा था की एलुमनाई के द्वारा इस साईट को चलाया जा रहा है. आप दोनों तस्वीर को देखिये की एक सरकारी संस्थान के नाम से जो साईट चल रहा है उसपर किस तरह का कंटेंट पोस्ट किया जाता है. आप खुद सोचिये की क्या आपको इस साईट पर विश्वविद्दालय से सम्बंधित सही जानकारी मिल सकती है.  
छात्र संगठन N.S.U.I. के प्रदेश महासचिव, मनीष कुमार ने कहा कि BNMU के अधिकारिक वेबसाईट के नाम पर फर्जी कर दूर दराज में रह रहे छात्र को गुमराह किया जा रहा है. सरकारी किसी भी संस्थान के नाम पर किसी निजी व्यक्ति को वेब पोर्टल चलाने अधिकार नही है. इससे विश्वविद्दालय के वेब साईट को भी खतरा है.

जाहिर तौर से BNMU प्रशासन को इस साईट के सम्बन्ध में स्पष्ट मंतव्य देना चाहिए की क्या ये वेब साईट http://bnmuinfo.org/ विश्वविद्यालय प्रशासनिक पहल से चलाया जा रहा है और इस विश्व विद्यालय का कौन सा साईट सही है.   

नवंबर 08, 2016

प्रेमी के साथ मिलकर रची अपहरण की गहरी साजिश

प्रेम में अपनों से साजिश.....

एमडी कर रही छात्रा ने प्रेमी के साथ मिलकर रची अपहरण की गहरी साजिश........

रिहाई के बदले पहले एक करोड़,फिर 70 लाख की मांगी फिरौती....
अपराधियों की जगह स्वार्थ में,खुद दे रहे अपराध को अंजाम......
पुलिस की जितनी भी तारीफ की जाए कम है.......

भागलपुर से मुकेश कुमार सिंह की दो टूक----बिहार के भागलपुर में मेडिकल छात्रा के अपहरण की घटना में एक बेहद शर्मनाक मोड़ आ गया है । बीते शुक्रवार को मेडिकल छात्रा शाश्वती के अपहरण का मामला सामने आया था ।पुरे बिहार में एक तरह से भूचाल आ गया था ।कयास यह लगाया जाने लगा था की बिहार में एक बार फिर से अपहरण उद्योग चलने लगा है ।पैसे वाले,कोई बड़े पदधारक और रसुखवाले अब कोई सुरक्षित नहीं हैं ।बिहार में अपराधियों का नंगा नाच हो रहा है ।शाश्वती के मामले में परिजन पहले तो चुप्पी साधे थे ।फिर पारिवारिक सूत्रों से जानकारी मिली की बच्ची की रिहाई के बदले अपहर्ता एक करोड़ की मांग कर रहे हैं ।फिर परिजनों पर दबाब बढ़ा और उन्होने साफ़--साफ़ कहा की छात्रा को रिहा करने के लिये 70 लाख रुपये फिरौती की मांग की गयी है ।अब पुलिस ने इस पूरे मामले का बड़े नाटकीय ढंग से खुलासा कर लिया है ।भागलपुर एसएसपी मनोज कुमार की माने तो यह पूरा मामला सोची-समझी साजिश के तहत एक फर्जी अपहरण की साजिश के रूप में फ़िल्मी स्टाईल में रची गयी थी ।पुलिस के मुताबिक मेडिकल की छात्रा शाश्वती ने अपने पिता के अकूत पैसे पर हाथ साफ़ करने के लिये अपने प्रेमी के साथ मिलकर एक झूठे अपहरण की साजिश रची थी । बताना लाजिमी है की शाश्वती कर्नाटक के बेलगाम से एमडी की डिग्री हासिल कर रही है और छठ में घर आई थी ।आस्था के महापर्व में शाश्वती की साजिश नाकामयाब हो गयी और उसका सुन्दर चेहरा कई तरह के दागों से पलभर में लवरेज हो गया ।
आपको जानकार बेहद हैरानी होगी की शाश्वती  का प्रेमी दिल्ली के एक नामी अस्पताल में डॉक्टर है ।उसका नाम केतन आनंद है ।घटना के दिन वह दिल्ली से भागलपुर आकर कचहरी चौक के राजहंस होटल में ठहरा हुआ था ।

आखिर कैसे हुआ साजिश का खुलासा ?
पुलिस अधिकारियों की माने तो मोबाइल के लोकेशन ने इस पूरे प्रकरण को उजागर करने में मुख्य भूमिका निभायी ।पुलिस ने अपनी जांच को जैसे ही आगे बढ़ाया तो पाया की शाश्वती के मोबाइल लोकेशन भागलपुर और पटना के बीच कई स्थानों पर मिले ।इतना ही नहीं उसके  व्हाट्सएप एकाउंट का टुडे लास्ट सीन का विवरण भी शुक्रवार शाम का दिखा रहा था । गौरतलब है की अपहृता के परिजनों ने बताया था कि उन्होंने उसी शाम शाश्वती को अपने मामा के लड़के के साथ भागलपुर के पुलिस लाईन के पास रिक्शे से जाते हुए देखा था ।शाश्वती के परिजनों द्वारा दी गयी इस सूचना के बाद पुलिस ने अपने तरीके से जांच शुरू की ।जांच में यह साफ हो गया कि मामला प्रेम प्रसंग और झूठी अपरहण की साजिश से जुडी हुयी है ।पुलिस ने शाश्वती के प्रेमी डॉ. केतन को होटल से अपने कब्जे में ले लिया और जब उनसे सख्ती से पूछताछ की गयी तो पूरा मामला आईने की तरह साफ हो गया ।
क्या करते है शश्वती के पिता ?
जानकारी के मुताबिक शाश्वती के पिता अजय रॉय भागलपुर में आर्यभट्ट इंस्टिट्यूट चलाते हैं और लॉ कॉलेज में टीचर भी हैं ।मोटे तौर पर आमदनी अच्छी है और बैंक अकाउंट में भी मोटी राशि जमा है ।इस घटना में भागलपुर में आरोपी डॉक्टर के ठहरने के लिये उसके मित्र ने कमरा बुक कराया था ।
अब क्या होगा इनका ?डॉक्टर केतन आनंद और शाश्वती दोनों पुलिस की हिरासत में हैं ।अब इस मामले में पुलिस अधिकारी आगे क्या करते हैं,यह देखना बेहद जरुरी है ।वैसे यह मामला बेहद हाई प्रोफाइल है । सरकार में बने कई लोग और कई अधिकारी अजय रॉय से जुड़े हुए हैं ।इससे यह कह देना की अब अपराधियों की तरह इनके साथ सलूक होगा,यह कतई सम्भव नहीं है ।

वैसे बिहार में गुंडाराज संभव है हो लेकिन भागलपुर पुलिस ने निसंदेह चमत्कार किया है । उसकी जितनी तारीफ़ की जाए वह कम है ।इस मामले में हर किसी को पुलिस को पीठ थप--थपानी चाहिए और उसकी हौसला आफजाई करनी चाहिए ।हम भी तहे दिल से पुलिस का शुक्रिया अदा करते हैं ।

लेकिन इस घटना ने इतना तो साफ कर दिया है की '"बाप बड़ो ना भइयो,सबसे बड़ो रूपयिओ" । पैसा हो तो रिश्ता भी अब खरीदा जा सकता है । वैसे रूपये के दम से कुकर्म और भोग-विलास तो होते ही रहते हैं ।

नवंबर 03, 2016

पूर्व सैनिक की आत्महत्या बेहद दुःखद

पूर्व सैनिक की आत्महत्या बेहद दुःखद
लेकिन राजनीतिक तमाशा होने से बचा
मौका देखकर मगरमच्छी आंसू बहाना बंद करें राजनेता
खून की दलाली से भी बाज नहीं आते ये नेता

दिल्ली से मुकेश कुमार सिंह की दो टूक---->> 
हरियाणा के रहने वाले पूर्व सैनिक राम किशन ने वन रैंक वन पेंशन के मामले पर नाराज़ हो कर जान दे दी ।जहर खाकर उन्होने अपनी ईहलीला खत्म कर ली ।यह सारा कुछ हुआ देश की राजधानी दिल्ली में ।वह भी इंडिया गेट पर ।अपने और अपने साथियों के हक़ और हकूक के लिए रामकिशन ने सल्फास की गोली खा ली ।
फिलवक्त भारत के सम्बन्ध पाकिस्तान से बेहद खराब हैं ।एक तरह से भारत अभी युद्ध के मुहाने पर खड़ा है ।ऐसे नाजुक समय में देश के एक पूर्व सैनिक का यूँ जान गंवा देना देशवासियों के साथ--साथ मोर्चे पर डटे हमारे वीर जवानों को भी जद से हिलाकर रख दिया है ।सच में यह घटना देश के सैनिकों का मनोबल तोड़ने वाली घटना है ।सबसे मजाकिया और हास्यास्पद यह बात है की इस देश के बड़े--बड़े नेता राम किशन को इंसाफ़ दिलाने के लिए फ़ौरन अस्पताल के बाहरी दरवाज़े से ही लाइनें लगा कर खड़े हो गए ।हांलांकि राहुल गांधी,मनीष सिसोदिया सरीखे और कई कद्दावर नेता को सेना और पुलिस ने भीतर दाखिल नहीं होने दिया ।इतना ही नहीं एक तरह से इन्हें हिरासत में ले लिया ।इन नेताओं ने सोचा चलो लोहा गर्म है,इसपर जमकर सियासी रोटी सेंक लें । लेकिन हुआ ठीक इसका उलटा ।अब लगे हाथ ये नेता लोग देश के प्रधानमन्त्री को गाली दे रहे हैं । शुरूआती समय में आप और कांग्रेस के नेता ही अस्पताल पहुंचे थे लेकिन उनका जो स्वागत वहाँ हुआ,उसे देखकर किसी दल के नेता ने वहाँ जाना गंवारा नहीं किया ।या यूँ कहें की मुनासिब नहीं समझा ।
बहुत दिन नहीं हुए ।हम हालिया दिनों की ही बात करते हैं ।कुरूक्षेत्र के अंटेहड़ी गांव के रहने वाले मंदीप के शरीर को पाकिस्तानी फौज ने गोलियों से क्षत--विक्षप्त कर दिया था ।तिरंगे में लपेट कर मंदीप का शव उसके गांव लाया गया था ।जो बड़े नेता अस्पताल के बाहर लाईन लगा कर आज  रामकिशन की आत्महत्या पर शोक जता रहे हैं और जिन्हें बेहद दुःख भी हो रहा है ।उनमें से एक नेता को भी मंदीप के घर जाने की फुर्सत नहीं मिली थी ।तभी किसी ने वहाँ जाकर मातमपुर्सी की जरुरत नहीं समझी थी ।
पिछले कुछ दिनों की बात करें तो,एक के बाद एक शहीद सैनिक के पार्थिव शरीर,ऐसे ही तिरंगे में लपेट कर उनके घर भेजे गए हैं ।राजकीय सम्मान के साथ अंतिम उनका संस्कार किया गया है ।हो सकता है की किसी के यहां गाहे--बगाहे कोई सांसद या मंत्री पहुंच गए हों लेकिन जहां तक हमें याद है एक भी नाम वाला नेता वहां नहीं पहुंचा । अपने वीर लाडले को गंवाकर गांव वालों ने नम आंखों से उन्हें श्रद्धांजलि दे दी ।गौरतलब और बड़ी सच्चाई है को जो बड़े नेता लाईन लगा कर राम किशन की आत्महत्या पर गुस्सा दिखा रहे हैं, उनमें से एक को भी किसी सैनिक के अंतिम संस्कार में जाने का समय आजतक नहीं मिला ।
राम किशन ग्रेवाल का अंतिम संस्कार हो चुका है ।अंतिम संस्कार में अरविंद केजरीवाल,राहुल गांधी सहित कई नामी-गिरामी नेता शामिल हुए ।अरविन्द केजरीवाल ने मृतक के परिजनों को दिल्ली सरकार की तरफ से एक करोड़ रूपये आर्थिक मदद की घोषणा की है ।काश !ऐसा कुछ पहले हुआ होता ।

आखिर घटनास्थल पर राम किशन को बचाने की कोशिश क्यों नहीं हुयी ?
रामकिशन जी के बेटे के साथ फोन पर उनकी आखरी बातचीत टीवी चैनलों पर चल रही थी ।क्या रामकिशन जी के साथ एक भी ऐसा आदमी नहीं था जो उन्हें जहर खाने से रोक लेता ?क्यों  उनमें से किसी ने इतना अपनापन नहीं दिखाया कि समय रहते उनको अस्पताल ही पहुंचा देता ? क्या ये सारे लोग एक जगह इकट्टा हुए थे की आज राम किशन का मरना जरुरी है ?शायद उनकी तैनाती ही इस लिए हुई थी कि आत्महत्या ‘सक्सेसफुल’ हो जाए ?हमारी समझ से यह भी एक बेहद गंभीर पहलू है और इसकी जांच भी हाई लेवल से होनी चाहिए ।
दिल्ली के बाहर राजनीतिक ज़मीन तलाश रहे अरविंद केजरीवाल की बेसब्री समझ में आती है । उनकी पार्टी के बड़े--बड़े नेताओं के सामने गजेंद्र सिंह ने खुद को फांसी लगा ली और भाषण चलते रहे थे ।लेकिन कांग्रेस ? वो क्या लोगों को ये समझाने के लिए मैदान में कूद पड़ी कि ‘खून की दलाली’ असल में क्या होती है ?आजादी के बाद से अपनी अलग राजनीतिक बिरादरी बनाकर देश को हांकने का कांग्रेसियों का अपना तरीका रहा है ।देश के लोग धीरे---धीरे जाग रहे हैं ।वे नरेंद्र मोदी से लेकर किसी घराने को बख्सने वाले नहीं है । शायद भारत पहला देश है जहां के कई बड़े नेता आतंकी की भाषा बोलते हैं और हर बड़े और गंभीर मामले में इनको सर्टिफिकेट की तलाश रहती है । सर्जिकल स्ट्राइक से लेकर सिमी के आतंकियों के एनकाउंटर तक और ऐसे सभी मामले में ये बड़े नेता भौंक--भौंक कर साक्ष्य मांगते है ।आखिर इस देश में कहाँ के लोग आकर बस गए हैं ।ऐसे नेताओं पर नकेल कसना जरुरी है जो देश में रहकर विदेशी आत्मा और दिमाग रखते हैं ।

नवंबर 02, 2016

काली पूजा में दिखा सर्जिकल स्ट्राईक का असर.....

 सहरसा टाईम्स के लिए चन्दन सिंह की रिपोर्ट ----- काली पूजा के अवसर पर मधेपुरा जिले के मुरलीगंज प्रखंड के विभिन्न पंचायतों में मेला का आयोजन किया गया. जिसमे कई जगहों पर संस्कृति कार्यक्रम के साथ साथ खेल प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया. प्रखंड के भातखोड़ा पंचायत के मुशार्नियारही गावं में इस वर्ष काली पूजा कुछ अलग अंदाज मे मनाया गया.  इस गावं में सदीयों से बड़े, बुजुर्ग और युवाओं द्वारा नाटक का मंचन किया जाता है जो की काफी चर्चित है. हजारों की संख्या में दर्शक  दूर दराज से आ कर नाटक देखते है. 
बताना लाजमी है कि दो दिवसीय मेले में सांस्कृति कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमे एक रात आजाद नाट्य कला परिषद् के बैनर तले नाटक "उठा लो बन्दुक मिटा दो दुश्मनों को"  का मंचन किया गया. यह नाटक सर्जिकल स्ट्राईक और नक्सली मूवमेंट पर आधारित था. इस नाटक में वर्तमान भारत और पाकिस्तान की स्थिति को दर्शाया गया.
आजाद नाट्य कला परिषद के निर्देशक श्री बालेश्वर प्रसाद सिंह ने कहा की इस नाटक में हमने वर्तमान भारत में नक्सली मूवमेंट के साथ साथ पाकिस्तान के दोगिली नीति को दर्शाया है. खास कर हमने ये दिखाने का कोशिश किया है कि कैसे कोई मज़बूर महिला नक्सली मूवमेंट से जुड़ती है. उसकी परिस्थियों को हमने इस नाटक के जरिये दर्शाया है.    
मेला कमिटी के सचिव श्री सोहन प्रसाद सिंह ने कहा की छोटा गावं होने के कारण बढ़ते महगाई में मेला का आयोजन करने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है लेकिन माँ काली के कृपा से हम सभी ग्रामवासी बहुत बेहतर तरीके से माँ की पूजा अर्चना के साथ साथ सांस्कृति कार्यक्रम भी कर लेते है.
जाहिर तौर से सर्जिकल स्ट्राइक और नक्सली मूवमेंट पर मंचन किया गया यह नाटक नई पीढ़ियों के लिए शिक्षाप्रद है. इस तरह के कार्यक्रम से सामाजिक स्तर पर पिछड़े वर्गों के लिए काफी सराहनीये कोशिश है.       

उड़ी दादा सहरसा के महिला कॉलेज में पुरुषों का दाखिला .........

सहरसा टाईम्स की रिपोर्ट --- हमेशा विवादों में रहने वाला भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्धायला मधेपुरा इस बार फिर से विवादों के घेरे में घिर चूका है. बीएड में दाखिला के लिए कॉलेजों की सूची निकलते ही छात्र संगठन ने हंगामा खड़ा कर दिया है. यह विवाद सहरसा के रमेश झा महिला कॉलेज के बीएड में पुरुषों का नाम सूची में आने से हुआ है. 
बिहार के सक्रिय छात्र संगठन NSUI के प्रदेश महासचिव मनीष ने कहा कि कोसी का चर्चित रमेश झा महिला कॉलेज में पुरुषों का नामांकन बीएड में होना इस कॉलेज की स्वतंत्रता पर बड़ा हस्तक्षेप है. इसे विश्विद्यालय प्रशासन अविलम्ब इस पर संज्ञान ले अन्यथा छात्र संगठन फिर से आन्दोलन का बिगुल फुकेगा.
अखिल विद्यार्थी परिषद कार्यकर्ताओं ने विवि के इस निर्णय को अनुचित और हास्यास्पद करार देते हुए कहा कि इससे छात्राओं की हकमारी होगी और यह सामाजिक ²ष्टिकोण से भी उचित नहीं है।
जाहिर तौर से रमेश झा महिला कॉलेज में पुरुषों का किसी भी विभाग में नामांकन होना ये बड़ी दुर्भाग्य की बात है. आगे अब देखिये की भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्धायला के आलाधिकारी क्या निर्णय लेते है. 


   

BPSC LASTE DATE EXTENDED

CAREER NEWS UPDATE ON BPSC- 
Recruitment 2016 – Apply Online for 60, 61 & 62 Combined Competitive Exam: Bihar Public Service Commission (BPSC), Patna has published notification for the recruitment of 642 Bihar Administrative Service, Bihar Police Service, Bihar Finance Service, District Commandant & Other vacancies by conducting of 60, 61 & 62 Combined Competitive Exam.
Eligible candidates may apply online from 27-09-2016 to 03-11-2016                              (Extended to 14-11-2016). 
Last Date for Online Registration--- 31-10-2016 (Extended to 10-11-2016)
Last Date for Download Challan &
Depositing the Fee in State Bank of India ---  31-10-2016 (Extended to 10-11-2016) 
Last Date to Payment of Online Registration     07-11-2016
Last Date to Apply Online              -----   03-11-2016 (Extended to 14-11-2016)


*अपनी बात*

अपनी बात---थोड़ी भावनाओं की तासीर,थोड़ी दिल की रजामंदी और थोड़ी जिस्मानी धधक वाली मुहब्बत कई शाख पर बैठती है ।लेकिन रूहानी मुहब्बत ना केवल एक जगह काबिज और कायम रहती है बल्कि ताउम्र उसी इक शख्सियत के संग कुलाचें भरती है ।