दिसंबर 31, 2011

सहरसा में अघोषित कर्फ्यू (Undeclared curfew in Saharsa)

ऊपरवाला ना करे फिर कभी बीते कल का भयानक और रूह को थर्रा देने वाला नजारा सहरसावासियों को देखना पड़े.शरीर के हड्डियों तक में सिहरन पैदा कर देने वाले पुलिस--छात्र संग्राम के बाद अब सहरसा को शांत करने में पुलिस को दिनभर खासी मशक्कत करनी पड़ी.जिला मुख्यालय के सभी मुख्य जगहों प़र जहां थोक में पुलिस के जवान लगाए गए थे वहीँ पुलिस और प्रशासन के आलाधिकारी स्थिति प़र पल--पल ना केवल नजर बनाए हुए थे बल्कि गस्त भी लगा रहे थे.सहरसा,मधेपुरा और सुपौल के एस.पी के साथ--साथ सहरसा के जिलाधिकारी मिसबाह वारी दिनभर मुस्तैद रहे.शहर में एक बार फिर से शान्ति और अमन कायम हो सके इसके लिए 36 मेजिस्ट्रेट की भी तैनाती की गयी थी.एक तरह से सहरसा में अघोषित कर्फ्यू का नजारा दिख रहा था.दिन के ग्यारह बजे से सहरसा बाजार की दुकाने खुलने लगी और लोग दहशत में रहते हुए धीरे--धीरे सामान्य होने लगे.इस पूरे अभियान को दरभंगा रेंज के आईजी राकेश कुमार मिश्रा नेतृत्व दे रहे थे. 
सहरसा में एक तरह से अघोषित कर्फ्यू का माहौल रहा.सहरसा,मधेपुरा,सुपौल,दरभंगा और मधुबनी जिले के 1200 से ज्यादा जवान शान्ति बहाली की इस मुहीम में झोंके गए.इसके अलावे गस्ती दल अलग से दिनभर गस्त लगाते रहे.बाजार खुला और लोग दोपहर बाद धीरे--धीरे सामान्य होने लगे.जाहिर तौर प़र लोगों में दहशत का माहौल अभी भी था.पूछने प़र लोगों का कहना है की भगवान् का शुक्र है की उनकी जान बची.अब कभी ऐसी घटना की पुनरावृति ना हो.
बामुश्किल शान्ति व्यवस्था कायम हो सकी.भगवान् ना करे कभी ऐसी घटना की पुनरावृति फिर से हो.इस घटना से पुलिस--प्रशासन के अधिकारियों के साथ--साथ आमलोगों को भी सबक लेने की जरुरत है.अल्लाह का करम है की सहरसा पूरी तरह से जलकर ख़ाक होने से बच गया.

दिसंबर 30, 2011

पुलिस और छात्रों के बीच मुठभेड़ Saharsa News (Students, Police Clash in Saharsa)



सर्वर व्यस्त होने के कारण विडियो उपलोड नहीं हो रहा है जल्द लोड करूँगा  
बीते कल पूरा सहरसा ऐसे वाकये का गवाह बना जिसकी कल्पना भर से रूहें थर्रा जाए.करीब साढ़े छः घंटे तक पुलिस और छात्रों के बीच ना केवल जमकर पत्थरबाजी हुई बल्कि ताबड़तोड़,हवा में गोलियां चलाने के साथ-साथ आंसू गैस के गोले भी छोड़े गए.अपने साथी की मौत से नाराज छात्रों का गुस्सा जो एक बार फूटा तो फिर थमने की बजाय और फूटता ही चला गया.ग्यारह बजे दिन से छात्रों ने संगठित होकर जिला मुख्यालय स्थित स्कूलों को पहले अपना निशाना बनाया जहां उन्होनें जमकर तोड़फोड़ की.उसके बाद छात्रों का काफिला बाजार में घूम--घूमकर तोड़फोड़ और आगजनी की घटना को अंजाम देने लगा.मौका रहते पुलिस या फिर प्रशासन के अधिकारियों ने तब इन्हें रोकने की कोशिश नहीं की नतीजतन इनका मनोबल बढ़ता गया और बलबे प़र आमदा ये छात्र फिर सदर थाने में घुसकर ना केवल जमकर पत्थरबाजी की बल्कि एस.डी.पी.ओ राज कुमार कर्ण और एस.डी.ओ राजेश कुमार के साथ--साथ पुलिस जवानों को दौड़ा--दौड़ा कर पीटा.इस आक्रमण में एस.डी.पी.ओ और एस.डी.ओ के साथ--साथ कई जवान भी घायल हुए.धीरे--धीरे छात्रों की संख्यां में और इजाफा होता गया और उसी रफ़्तार में इनके उत्पात भी बढ़ते गए.स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी छात्रों को भरपूर समझाने का प्रयास किया लेकिन वे कामयाब नहीं हो सके.छात्रों का कोई नेतृत्वकर्ता नहीं था.हर छात्र खुद नेतृत्वकर्ता था.इन्हें समझाने में पुलिस प्रशासन के अधिकारी भी नाकामयाब साबित हो रहे थे.ग्यारह बजे से तीन बजे दिन तक पूरा जिला मुख्यालय रण-क्षेत्र में तब्दील था.पुलिस अधीक्षक मोहम्मद रहमान अकेले स्थिति को काबू करने में अपना सबकुछ झोंके रहे और पुलिस को नियंत्रण में रखा लेकिन तीन बजे इस मामले की कमान दरभंगा प्रक्षेत्र के आईजी राकेश कुमार मिश्रा ने संभाली.मिश्रा ने फिर आतातायी बने छात्रों को काबू में करने के लिए सुपौल और मधेपुरा के एस.पी और जवानों को बुलाकर इस काम में लगाया.किसी तरह से स्थति को काबू में तो कर लिया गया है लेकिन यह स्थायी साबित होगा की नहीं इसपर संसय बरकरार है.इस संग्राम में जहां दो छात्र गोली लगने से जख्मी हुए हैं वहीँ दर्जनों छात्र पुलिस की लाठी से जख्मी हुए हैं.दो अधिकारी सहित दो दर्जन से ज्यादा जवान भी जख्मी हुए हैं. दो दर्जन से ज्यादा छात्र इस अफरातफरी में जख्मी हुए हैं.दो छात्रों को क्रमशः हाथ और पाँव में गोली लगी है.दो दर्जन से अधिक जवान और दो अधिकारी भी जख्मी हुए हैं.आईजी के कमान संभलते ही पुलिस जवानों का मनोबल और बढ़ गया.पूरा शहर पुलिस छावनी में तब्दील है .बज्रवाहन सहित पुलिस सायरन लगी गाड़ियां फिर थोक में सड़कों प़र दौड़ने लगी.फिर दौड़ा--दौड़ा के छात्रों को पीटने की कारवाई अपने परवान प़र थी.इस दौरान मीडियाकर्मी भी थाने के अंदर एक तरह से नजर बन्द रहे.स्थानीय जनप्रतिनिधि पुलिस के धैर्य की तारीफ़ कर रहे हैं.इनकी मानें तो यह सब प्रशासन की कमजोरी का नतीजा है.नो इंट्री में बड़ी गाड़ी को चलाते रहने से भीड़--भाड़ वाले इलाके में ऐसे हादसे होते ही रहेंगे.रैक पॉइंट और ओवर ब्रिज नहीं होने की वजह से शहर में हमेशा जाम की स्थिति बनी रहती है.ऐसे में सड़कें लोगों से लबालब रहती हैं.जाहिर सी बात है ऐसे माहौल में बड़ी गाड़ियां रफ़्तार में चलेंगी तो दुर्घटना तो होगी ही.

फिलहाल बल प्रयोग से पुलिस ने मामले को शांत तो करा लिया है लेकिन यह शान्ति स्थायी तौर प़र बहाल रह सकेगी कहना नामुमकिन है.जहांतक मेरी समझ जाती है इस घटना के पीछे सिर्फ छात्र तो कतई नहीं थे.छात्रों को आगे करके पीछे ऐसे लोगों के कुनबे के होने की आशंका है जो पुलिस की कार्यशैली से बेहद खफा थे.जाहिर तौर प़र इस भीड़ में आसामाजिक तत्व तो होंगे ही.अगर यह सच है तो भी इस घटना को अगर पुलिस--प्रशासन के अधिकारी छात्र की मौत के वक्त से ही गंभीरता से लेते तो यह संग्राम नहीं देखना पड़ता.पुलिस--प्रशासन की ढिलाई की वजह से छात्रों और गुंडा तत्वों को इकठ्ठा होने का वक्त मिला और वे एक तरह से पूरे शहर प़र कब्ज़ा करके घटना दर घटना को अंजाम देते रहे.

दिसंबर 28, 2011

देवराज देव हुए राज्य बदर

करीब दस महीने के अल्प कार्यकाल के बाद सहरसा के जिलाधिकारी देवराज देव प़र सरकार की गाज गिरी और उनको इस जिले से ना केवल हटाया गया बल्कि उन्हें राज्य बदर करते हुए उनके पैत्रिक केडर तमिलनाडु वापिस भेज दिया गया.ख़ास बात यह है की उनके कार्यकाल में उनके द्वारा संपादित विभिन्य योजनाओं में से करीब पंद्रह योजनाओं में सरकार ने निगरानी से जांच कराने की अनुशंसा की है.हमारी जानकारी के मुताबिक़ पिछले दो दशक के दौरान किसी भी सरकार ने किसी आई.ए.एस अधिकारी प़र इतनी बड़ी कारवाई नहीं की थी.बताना लाजिमी है की कोसी प्रमंडल के वर्तमान आयुक्त जे.आर.के.राव ने भी इनकी कार्यशैली को लेकर गंभीर टिप्पणी करते हुए कई बार राज्य सरकार को लिखा था.यही नहीं मुख्यमंत्री नीतीश अपनी सेवा यात्रा के दौरान लोक कल्याणकारी योजनाओं में जिलाधिकारी के काम से काफी नाखुश दिखे थे.इसके अलावा मुख्यमंत्री की सेवा यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री से मिलने को आतुर भिखारियों को उनसे मिलने नहीं दिया गया और भिखारियों प़र लाठीचार्ज किये गए.जबाबी कारवाई में भिखारियों ने मुख्यमंत्री के काफिले प़र पीछे से हमला करते हए जमकर पत्थरबाजी भी की.ये तमाम कारणों ने मुकम्मिल तौर प़र डी.एम देवराज को यहाँ से विदा करा दिया.आज सहरसा के नए डी.एम के रूप में मिसबाह बारी ने पदभार संभाल लिया.
12 से 14 दिसंबर की मुख्यमंत्री की सेवा यात्रा के दौरान ही सहरसा के तत्कालीन जिलाधिकारी देवराज देव की बिदाई की पृष्ठभूमि तैयार हो गयी थी लेकिन उन्हें इसतरह से घसीटकर सहरसा से हटाते हुए राज्य से बाहर फेंक दिया जाएगा,इसका किसी को गुमाँ नहीं था.यह सच है की अपने महज दस महीने के कार्यकाल में जिलाधिकारी देवराज देव ना तो जनता को अपने विश्वास में ले सके थे और ना ही उनके दिलों में कोई जगह ही बना पाए थे.उनका जनता दरबार पूरी तरह से जहां फ्लॉप शो साबित होता रहा वहीँ गरीबों की लिए चलाई जा रही योजनाओं को भी सरजमीन प़र उतारने में वे पूरी तरह से नाकामयाब रहे.उनके कार्यकाल में कालाबाजारियों के गोरखधंदे प़र से पर्दा उठते--उठते ही बीच का खेल हो गया.बाढ़ के समय पीड़ितों तक ना तो कभी जिलाधिकारी पहुँचे और ना ही पीड़ितों को समय से फौड़ी राहत मिल सकी.जिलाधिकारी देवराज ने अपने अल्प कार्यकाल के बीच 15 से 20 साल पुराने निर्वाचन से लेकर अन्य विभागों के वे तमाम बकाये (अनुमानित करीब दो करोड़ की राशि)का भुगतान कर दिया जिसे पीछे के तमाम जिलाधिकारियों ने किसी ना किसी कारण से रोके रखा था.जिलाधिकारी देवराज देव के सहरसा से जाने से यहाँ के आमजन काफी खुश हैं.

दिसंबर 25, 2011

खुद घर जलाकर पिंटू को फंसाया

बीते 9 दिसंबर को जिले के पतरघट प्रखंड अंतर्गत बेलहा टोले के अल्पसंख्यक समुदाय प़र कोसी इलाके के दुर्दांत अपराधी पिंटू यादव सहित उसके सहयोगियों द्वारा हमला बोलकर घर जलाने और ताबड़तोड़ फायरिंग करते हुए ग्रामीणों के साथ बर्बरता पूर्वक पिटाई करने मामले में अब नए सच सामने आ रहे हैं.इस मामले में पीड़ित मोहम्मद सुभान के आवेदन प़र पिंटू यादव सहित बारह लोगों और कुछ अज्ञात लोगों के विरुद्ध सौर बाजार थाने में प्राथमिकी दर्ज की गयी थी.पुलिस ने तब तेजी दिखाते हुए चार लोगों को ना केवल गिरफ्तार कर लिया था बल्कि घटना के दूसरे दिन ही मुख्य आरोपी पिंटू यादव के खिलाफ अदालत से कुर्की--जब्ती का आदेश भी ले लिया था.हाल में ही जमानत प़र जेल से रिहा हुए पिंटू ने कुर्की-जब्ती के भय से 12 दिसंबर को अदालत के सामने आत्मसमर्पण कर दिया. इसी मामले में बेलहा गाँव से तीस से ज्यादा संख्यां में आये अल्पसंख्यक समुदाय के लोग सहरसा के एस.पी से ना केवल मिलने आये थे बल्कि उन्हें इस घटना की पूरी सच्चाई से भी अवगत कराने आये थे.लोगों ने लिखित आवेदन देकर डी.एस.पी को साफ़--साफ़ बताया की गाँव का सुभान मियाँ काफी दबंग हैं और उसने हाल में ही जेल से छूटे पिंटू यादव को फंसाने के लिए चार लोगों के साथ मिलकर अपने घरों में आग लगाई और इस घटना को अंजाम दिया.सुभान ने ही हवा में फायरिंग की थी जिसके पाँच खोखे पुलिस ने बरामद किये थे.सुभान की पिंटू से पुरानी रंजिश है और यह घटना उसी को लेकर प्रायोजित की गयी थी.घटना के बाद खुद मौके प़र एस.पी पहुँचे थे और मामले की जांच की थी.उस वक्त सुभान ने उनलोगों को इतना डरा दिया था की वे एस.पी साहब को सच नहीं बता पाए.इस घटना के बाबत वे आज पूरी सच्चाई बताने आये हैं.
चूँकि सहरसा में मुख्यमंत्री की सेवा यात्रा का तीन दिवसीय दौरा 12 से 14 दिसंबर का था इसलिए पुलिस अधिकारी कोई जोखिम नहीं लेना चाहते थे.इसलिए इस मामले में आरोपियों की तुरंत गिरफ्तारी और तुरंत मुख्य आरोपी के खिलाफ कुर्की--जब्ती का अदालत से आदेश ले लिया जिससे पिंटू यादव ने बाध्य होकर आत्मसमर्पण कर दिया.एक तरह से पुलिस ने इस मामले का पटाक्षेप कर राज्य मुख्यालय को अपनी कुशल कार्यशैली का सर्टिफिकेट दे दिया.मुख्यमंत्री के सामने भी पुलिस के बेहतर काम का यह मामला नजीर बन गया.लेकिन अब जो नंगा सच सामने आ रहा है यह पुलिस के लिए बड़ी मुसीबत और चुनौती साबित होने वाली है.आगे देखने वाली बात यह होगी की पुलिस अधीक्षक इस मामले को अब कितनी गंभीरता से लेते हैं और उनकी जांच का रुख कैसा रहता है.

दिसंबर 22, 2011

गरीब की मौत पर ठीक से मातम भी नहीं

सच कहते हैं की गरीब की मौत पर ठीक से मातम भी नहीं मनता और अगर कोई गरीब होने के साथ--साथ लावारिश हो तो उसकी  लाश तक को कोई सलीके से ठिकाने तक नहीं लगाता.यह अभागी पहले भूख से तड़पती थी फिर कड़ाके ठंढ और सर्द हवाओं ने उसकी कमजोर काया पर हमला किया और देखते ही देखते उसके प्राण ने उसका साथ छोड़ दिया.सहरसा के रेलवे परिसर में करीब 50 वर्षीय एक अज्ञात महिला ने बीते सुबह ठिठुराती ठंढ के सामने घुटने टेक दिए और करीब दस बजे उसकी मौत हो गयी.लेकिन हद की इन्तहा देखिये की सुबह दस बजे से लेकर रात के नौ बजे तक रेलवे के किसी अधिकारी ने इस अज्ञात महिला की लाश को यहाँ से उठाकर इसका दाह--संस्कार कराना मुनासिब नहीं समझा.GRP और RPF से लेकर रेलवे के तमाम अधिकारियों की नाक के नीचे घंटों लाश कंपकपाती ठंढ को कोसती रही लेकिन किसी के भीतर की इंसानियत नहीं जागी.सहरसा टाइम्स के दखल के बाद GRP के थानाध्यक्ष मौके पर पहुँचे फिर रात के ग्यारह बजे के बाद लाश को यहाँ से उठाया गया.हम कहाँ--कहाँ सरकार के इन सोये और संवेदनहीन तंत्रों को झंकझोड़ते और जगाते रहें.बीते छ सात दिनों के भीतर इस कड़ाके की ठंढ ने सहरसा के विभिन्य इलाकों में कई  लोगों की जान ले ली.ठंढ का कहर बढ़ता ही जा रहा है और सरकारी इंतजामात महज लफ्फाजी तक सिमटा हुआ है.दावे और जमीनी सच में ज़मीन और आसमान का फासला है.सरकार के कोष में कई मद के ठसाठस रूपये भरे--पड़े हैं लेकिन इस करमजली के लिए कफ़न भी मयस्सर नहीं है.स्थानीय लोगों का कहना है की वे इस लाश को सुबह से यहाँ पड़े देख रहे हैं लेकिन रेलवे के कोई अधिकारी इस लाश को यहाँ से नहीं उठा रहे हैं.रेलगाड़ी में पड़े बोड़े और सामान तसीली के लिए इन्हें दिख जाते हैं लेकिन यह लाश किसी को भी नहीं दिख रही है. 
नीतीस बाबु हम इस मौत को आखिर गम और मातम का हम कौन सा नाम दें.आखिर में हम इतना जरुर कहेंगे की यह मौत सरकारी इंतजामात और गरीबों को लेकर तरह--तरह के दावे करनेवाली सरकार और उसके नुमाईनदों की ना केवल कलई खोल रही है बल्कि उन्हें कटघरे में भी खड़े कर रही है.

दिसंबर 21, 2011

ठंढ की आगोश में सहरसा

 कड़ाके की ठंढ झेल रहे उत्तर भारतीय लोगों पर फिलवक्त ठंढ अभी और कहर बरपाने पर आमदा दिख रही है.घने कोहरे और सर्द हवाओं से ठिठुराते-कंपकपाते लोग ऐसे में बस अपने इष्टदेव को याद करने में जुटे हैं.जानलेवा इस ठंढ ने सहरसा के जनजीवन को भी पूरी तरह से चौपट कर डाला है.इसमें कोई शक-शुब्बा नहीं की यहाँ के लोगों के जीवन की रफ़्तार को ठंढ ने ब्रेक लगा दिया है.ठंढ का पारा गिरकर सात सेंटीग्रेट से नीचे जा पहुंचा है.मुश्किल का सामना तो विभिन्य अस्पतालों में पहुँचने वाले मरीज और उनके परिजन कर रहे हैं जिन्हें अस्पताल में कोई पूछने वाला तक नहीं है.अमूमन अस्पताल के बेड बिना मरीज के यूँ ही खाली पड़े हैं.हद की इन्तहा देखिये की बेहिसाब ठंढ के बाद भी सहरसा जिला मुख्यालय से लेकर सुदूर ग्रामीण इलाके में कहीं भी अलाव की व्यवस्था नहीं की गयी है.लेकिन प्रशासन के अधिकारी अपनी आदत के मुताबिक़ अलाव जलाने से लेकर तरह-तरह के दावे करने से बाज नहीं आ रहे हैं.जान की फ़िक्र है इसलिए लोग चाय पी-पीकर या फिर किसी तरह लकड़ी का इंतजाम कर आग सेंक कर अपनी जान की हिफाजत करने में जुटे हैं.
 दोपहर का वक्त है लेकिन कोहरे ने किस तरह से सहरसा को अपनी आगोश में ले रखा है.राह चलते लोग अपने सामर्थ्य के मुताबिक़ उनी कपड़ों में खुद को छुपाकर काम पर जा रहे हैं.जहांतक गरीब तबको से लेकर आमलोगों के लिए अलाव की व्यवस्था का सवाल है तो इस जिले में प्रशासन की तरफ से अभीतक किसी भी जगह पर अलाव की व्यवस्था नहीं की गयी है.लोग खुद से इंतजाम कर अलाव जला रखे हैं जिससे उनकी जान की रक्षा हो रही है.यूँ अपनी आदत से मजबूर जिला प्रशासन के अधिकारी जिला मुख्यालय से लेकर प्रखंड और पंचायत स्तर पर अलाव की व्यवस्था किये जाने के दावे कर रहे हैं.लेकिन यह दावे महज कागजी हैं.आप खुद ही देखिये किस तरह लोग खुद के जलाए अलाव से प्राण रक्षा में जुटे हैं.मछली बेचनेवाला ग्राहक का इन्तजार आग से खुद को सेंक-सेककर कर रहा है.यूँ लोग चाय पीकर भी खुद को गर्म करने में जुटे हैं.
ठंढ से चाय की बिक्री में तेजी
 -जाहिर तौर पर ठंढ ने जीवन के सारे भूगोल और गणित को बिगाड़ कर रख दिया है.जिन्दगी ना केवल थम सी गयी है बल्कि फंस गयी है.लोग कैसे अपनी और अपने परिवार की जान बचा पाएंगे,यह पहाड़ खोदकर दूध निकालने के समान हो गया है.इस साल इस जिले में हमारी जानकारी के मुताबिक़ अभीतक ठंढ से पाँच लोगों की जान जा चुकी है.पूर्वी और पश्चिमी तटबंध या सुदूर इलाके में ठंढ से कितने लोगों की जान अभीतक जा चुकी होंगी,इसकी जानकारी मिलनी भी मुश्किल है.लेकिन प्रशासन इससे भी नहीं जागा है.प्रशासन को दावे की जगह अब आम लोगों की हिफाजत की चिंता करनी चाहिए जो वह नहीं कर रहा है. 

दिसंबर 20, 2011

मासूमों पर बेइंतहा जुल्म


दरिंदगी के शिकार बच्चे
मौका मिलते ही लोग कमजोरों पर अपनी ताकत दिखाने से बाज नहीं आते.सहरसा के बंगाली बाजार में चोरी के आरोप में दो मासूम नौनिहालों को जंजीर में जकड़कर इसतरह रखा गया था मानो वे किसी आतंकी संघटन के बड़े दहशतगर्द और खून चटोरे हों.ऐसा लग रहा था की सैलाब की तरह उमड़े लोग जंजीर में जकड़े इन मासूमों को अपने सामने देखकर एक तरह से अपनी मूछें तरेरकर अपनी ताकत दिखा रहे हों.हद बात तो यह भी थी की इस तमाशे में एक पुलिस वाला भी अपनी बेशर्मी दिखाने के लिए वहाँ मौजूद था.
सहरसा के सदर थाना क्षेत्र के अत्यधिक भीड़--भाड़ वाले इलाके बंगाली बाजार का.यहीं पर गैस सिलेंडर और फल चुराने के आरोप में दो मासूमों को ना केवल जंजीरों में जकड़कर रखा गया है बल्कि उसमें ताले भी जड़ दिए गए हैं.देखिये इन दोनों मासूमों को.आँखें आंसुओं से तर हैं.पाँव में ताले जड़ी बेड़ियाँ और हाथों में बंधी रस्सियाँ,इनपर हुए बर्बर जुल्म की कहानी बयाँ कर रहे हैं.तीन घंटे से ज्यादा इन्हें  इसी तरह से तड़पा-तड़पा के रखा गया. दो बच्चे इस तरह जुल्म झेल रहे हैं और लोग भीड़ की शक्ल में तमाशबीन हैं.पत्थर बने लोगों को इन बच्चों की आँखों से बह रहे मोटे--मोटे आंसू पर भी कोई तरस नहीं आ रहा है.लोगों का कहना है की इन बच्चों ने गैस सिलेंडर और फल चुराएं हैं इसलिए इनके साथ ऐसा सलूक किया जा रहा है.
विजय ठाकुर,पुलिस जवान
सहरसा पुलिस की बेशर्मी की जिन्दा मिशाल हैं.दो बच्चों पर जुल्म ढाए    जा रहे हैं और ये पुलिस का जवान भीड़ का एक हिस्सा बना ना केवल बेशर्मी की सारी दीवारें गिरा रहा है बल्कि यहाँ मौजूद लोगों का हौसला भी बढ़ा रहा है.
सहरसा टाइम्स  की पहल के बाद पहले तो इन मासूमों को सदर थाना ले जाया गया जहां इनसे पूछताछ के बाद उन्हें मुक्त कर दिया गया.आखिर आज भीड़ क्यों कानून को अपने हाथों में लेने को आमदा है.अगर यही आलम रहा तो फिर पुलिस और अदालत की क्या और कैसी जरुरत रह जायेगी.

दिसंबर 14, 2011

फरियाद के अनोखे अंदाज

सेवायात्रा के दुसरे दिन मुख्यमंत्री को लुभाने के लिये जनप्रतिनिधि ने नया तरिका अपनाया.  कराके की ठण्ड में जनप्रतिनिधि ने दंड प्रणाम देके सहरसा में रह रहे अनाथ बच्चे के लिये सूबे के मुखिया से उनकी समस्याओं को लेकर मिले. तो दूसरी तरफ अनाथालय के बच्चे ने इसी कराके की ठण्ड में आपने कन्धों पे कांवर रख कर नीतीस की जाय जाय कार करते जनता दरवार में पहुंचे. वंही दूसरी तरफ पटुआहा के  भिखमंगों ने ढोल मिरदंग के साथ नीतीस के जनता  दरवार पंहुचे. 
ये नजारा नीतीस के जनता दरबार में जाने का है देखिये किस तरह से जनप्रतिनिधि ने नीतीस को लुभाने का नया तरिका अपना लिया है.. इस कराके की ठण्ड में ये भाई साहब रोड पे दंड प्रणाम दे रहे है.लेकिन नीतीस बाबु ऐसे कई खेल देख चुके है उनपर कोई फर्क नहीं परने वाला है. जाहिरतौर पर यंहा के लोगो के पास समस्याओं की कमी नहीं है.राशन कार्ड से लेकर वृधा पेंशन तक की समस्या से यंहा लोग निचले अधिकारी से लेकर उच्च अधिकारी तक की लराई लरते रहते है. आज उनके सामने सूबे के मुखिहा है तो उनके बेसर्बी की बांध टूट चुकी है नीतीस से मिलने को लोगो ने नए नए तरीके अपने....
कुछ भी हो सेवायात्रा इनके हक़ में कितने कारगर होते है ये देखने वाली बात है.. फिलवक्त नीतीस बाबु अपनी जुवा से कुछ भी नहीं कह रहे है. प्रेस से मुखातिब होना ये मुनासिब नहीं समझते.. ये जानते है की यंहा सवाल पे सवाल पूछे जायेंगे.. इस लिए चुप रहने मै ही अपनी भलाई है.

दिसंबर 13, 2011

मत्स्गंधा झील का मुआयना करते नीतीस

आज सुबह साढ़े आठ बजे नीतीश कुमार सहरसा के मत्स्गंधा झील का मुआयना करने पहुँच गए.नीतीश कुमार घूम--घूम--घूमकर ना केवल झील का मुआयना किया बल्कि इस दौरान जिले के बड़े अधिकारियों को झील के जीर्णोधार  और उसको आकर्षक बनाने के लिए कई सख्त निर्देश भी दिए.जिस तरह से बिना समय गंवाए मुख्यमंत्री ने झील का मुआयना किया उस्सेव लग रहा है की इस झील के दिन बाब निश्चित तौर पर बहुरेंगे.मुख्यमंत्री के काफिले में सिंचाई मंत्री विजय चौधरी के साथ कई विधायक भी मौजूद थे. 
देखिये नीतीश कुमार किस तरह से मत्स्यगंधा झील का घूम--घूमकर मुआयना कर रहे हैं.यहाँ पर बता दें की इस झील में चार मौजे की ज़मीन है जिसमें से तीन मौजे के ज़मीन मालिकों को उनका मुआवजा दे दिया गया है लेकिन एक मौजा हकपाड़ा की ज़मीन के मुआवजे का अभीतक भुगतान नहीं हुआ है.एक करोड़ दस लाख रूपये मुआवजे के बांकी हैं.नीतीश कुमार ने जहां ये राशि तुरंत भेजने की बात कही वहीँ इस झील के लिए अलग से बड़ा मैप बनाने का अधिकारियों को निर्देश दिया.यहाँ यह भी बता दें की पिछले एक साल से एक करोड़ रूपये सहरसा जिला प्रशासन के पास झील जीर्णोधार के नाम पर रखे हुए हैं.अब जिस तरह से नीतीश ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं उससे लगता है की इस झील को और आकर्षक बनाने की कोशिश होगी जिसमें जो खर्चे आयेंगे उसे राज्य सरकार वहन करेगी.

मुख्यमंत्रि की सेवा यात्रा

मुख्यमंत्रि की सेवा यात्रा ने कोशीवासी के लोगो में नई सुबह की किरण का एहसास करा दिया है.लोगो की उमरी भीड़  नीतीस के दर्सन मात्र के लिए थे आतुर. मुख्य मंत्री ने सहरसा सेवा यात्रा का पहला दौर जलई से किये जन्हा पे 513 कड़ोर की लागत से कोशी नदी पे पुल बनने का काम चालू है. दो हिस्से मे बटे म्थिलांचल को इस पूल से जोर जायेगा.इतना ही नहीं तटबंध के अन्दर बसे गांव में विकास के रस्ते भी साफ हो जायेंगे. सूबे के मुखिया के स्वागत  के लिए कई  गद्दावर पलके बिछाए उनके आने की बाट जोह रहे थे.
बलुआहा घाट (कोशी नदी पे बनता पूल )
ये नजारा है जलई का जहा सूबे के मुखिया अपने सेवायात्रा चोथे चरण का आगाज करने पहुंचे है. 513 कड़ोर की लागत से बन रहे इस पुल का मुयाना कर इसे 14 जनवरी 2014 को चालू करने  का निर्देस भी दिया. लोगो के  हुजूम  बीच जाके नीतीस ने उनसे रु ब रु हुए. नीतीस ने जब लोगो से मिला तो कई पीरितओं ने सीधे उनके हाथों में ही अपने आवेदन थमा दिए. गौरतलब है की इस क्षेत्र में कोशी नदी हर वर्ष विनाश की नई कहानी को जन्म देती है. लेकिन यंहा के आलाधिकारी के कानो तले जू तक नहीं रेंगती. 
जाहिर तौर पर जिस जगह पे सिर्फ दुखों की इबारत लिखी जाती है उन्हा पे आलाधिकारी कभी गलती से भी दस्तक नहीं देते लेकिन आज उसी जगह  शुबे के मालिक का आना निशित रूप से लोगो में ख़ुशी की लहर देखना लाजमी है.

दिसंबर 12, 2011

हमें सिर्फ बंदरों से मुक्ति चाहिए

नितीश जी,हमें आप से कुछ नहीं चाहिए,हमलोग बंदरों के उत्पात से त्राहिमाम कर रहे हैं,हमें सिर्फ बंदरों से मुक्ति चाहिए ..ये आवाज है बिहार के सहरसा जिले के कहरा और सत्तर कटैया प्रखंड के आधा दर्जन पंचायत के लोगों की. बानगी भर को हम सिर्फ कहरा प्रखंड के एक पंचायत चैनपुर और आसपास की तस्वीर दिखा रहे हैं.बंदरो के उत्पात से इस इलाके के किसानों की खेती पूरी तरह से ठप्प है..मुसीबत बने ये बन्दर भारी तायदाद में एक साथ हमला बोलकर फसलों को पैदा होने  से लेकर उपजने तक नष्ट कर देते हैं.जाहिर सी बात है की खून--पसीना एक कर फसल उगाने की चाह रखने वाले किसानों को दाने -दाने के लिए मोहताज होना पड़ता है ..इसलिए किसानो के लिए यह सुनहरा मौका है की सामने नितीश जी की सेवा यात्रा है जिसे किसान गवाना नहीं चाहते..........और इसी लिए वे एकजुट होकर आज नितीश के कट -आउट के सामने बैठ चुके है.हवन और अनुष्ठान किये जा रहे हैं.जाहिर सी बात है की इस माध्यम से वे अपनी आवाज और दर्द नीतीश कुमार तक पहुँचाना चाह रहे हैं.
.यूँ तो कहरा प्रखंड के चैनपुर,बनगांव पूर्वी और पश्चिमी,मुरली बसंतपुर पंचायत और सत्तर कटैया के पंचगछिया और बहरशेर पंचायत के दर्जनों गाँव बंदरों के आतंक से त्राहिमाम कर रहे हैं लेकिन बानगी भर को हम एक पंचायत चैनपुर और उसके आसपास के इलाके का नजारा दिखा रहे हैं जहाँ के लोग बंदरों से मुक्ति के लिए मुख्यमंत्री के बैनर तले हवन और जाप कर रहे हैं.अवसर है मुख्यमंत्री की सेवा यात्रा ..इस दौरान 12.,13,और 14 दिसम्बर को मुख्यमंत्री सहरसा में रहेंगे . इससे पूर्व इस इलाके के लोग जिला प्रशासन से लेकर मंत्री--नेताओं तक इस समस्या को लेकर कह -कह कर थक चुके हैं. समस्या  के निदान को लेकर अब मुख्यमंत्री की सेवा यात्रा इनके लिए सुनहरा अवसर है और ये सभी हवन और जाप के माध्यम से अपनी आवाज उन तक पहुचाना चाहते है

अगवा बच्ची का सुराग नहीं


बीते तीन दिसंबर को सहरसा जिला मुख्यालय से अगवा हुई श्वेता को सकुशल बरामद करने में पुलिस अभीतक नाकाम रही है. बेटी के गुम होने से जहां परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल है वहीँ पूरे घर में मातमी सन्नाटा है.घर के लोगों का कहना है की श्वेता को पंकज नाम के एक युवक ने अगवा किया है जो उसे किसी दूसरे प्रांत में ले जाकर बेच डालेगा.परिजन पुलिस पर आरोप लगाते हुए कह रहे हैं की आगामी 12 से 14 दिसंबर तक मुख्यमंत्री का सहरसा में कार्यक्रम है जिसमें पुलिस का सारा अमला दिलोजान से लगा हुआ है.कोई भी उनकी फ़रियाद नहीं सुन रहा है.जहांतक पुलिस का सवाल है तो पुलिस के अति व्यस्त बड़े अधिकारी की जगह हमसे रूबरू हुए छोटे अधिकारी का कहना है की सदर थाना में काण्ड दर्ज कर पुलिस अनुसंधान में जुटी हुई है.पुलिस ने इस मामले में आरोपी पंकज के एक मित्र को गिरफ्तार कर जेल भी भेजा है.
अगवा श्वेता
जिला गर्ल्स स्कूल की नवीं कक्षा की छात्रा तीन दिसंबर को सुबह में कोचिंग गयी थी लेकिन वह लौटकर घर वापिस नहीं आई.घर के लोगों ने उसकी खूब खोजबीन की तो पता चला की जिला गर्ल्स स्कूल के चपरासी सिकंदर दास का बेटा पंकज ने उसे अगवा कर लिया है.परिजनों ने इस बात की तुरंत पुलिस को सूचना दी.पुलिस ने थाने में काण्ड दर्ज कर लिया.लेकिन अभी पुलिसवालों की रात की नींद और दिन का चैन हराम है.भाई सूबे के राजा यहाँ पधारने वाले हैं.श्वेता के घर पर मातमी सन्नाटा है.उसकी माँ,नानी और बुआ का रो--रो कर बुरा हाल है.परिजनों का साफ़--साफ़ कहना है की मुख्यमंत्री के आगामी कार्यक्रम की वजह से पुलिस इस मामले को ख़ास महत्व नहीं दे रही हैं.परिजनों की मानें तो उन्हें शक है की पंकज ने श्वेता को बिहार से बाहर ले जाकर उसे कहीं बेच दिया है.घर के लोग किसी बड़ी अनहोनी की आशंका से डरे--सहमे हैं.पुलिस वालों पर कई तरह के आरोप लगाते हुए ये मीडिया से श्वेता को जिन्दा या मुर्दा बरामद कराने की गुहार लगा रहे हैं. 
आरोपी के एक मित्र को जेल भेज कर पुलिस इस काण्ड में काफी गंभीर है,यह जताना चाह रही है लेकिन श्वेता कहाँ और किस हाल में है इसको लेकर उसके पास कोई जबाब नहीं है.जाहिर सी बात है की वे इस मामले में ज्यादा गंभीर होंगे भी तो मुख्यमंत्री के कार्यक्रम के बाद. भगवान् ना करे की इस बीच कोई अनहोनी हो जाए.अभी श्वेता के घर का ना केवल चूल्हा खामोश है बल्कि घर की हर आँख नम और पूरा माहौल गमजदा है.श्वेता की सकुशल बरामदगी के लिए हम भी अल्लाह से दुआ करता है.

दिसंबर 09, 2011

दुर्दांत पिंटू यादव ने मचाया ग़दर


कोसी क्षेत्र का आतंक दुर्दांत पिंटू यादव ने अपने गिरोह के सदस्यों के साथ मिलकर अल्पसंख्यकों के एक टोले पर हमला बोलकर जमकर उत्पात मचाया.घोड़े और मोटरसाईकिल पर सवार इन अपराधियों की टोली ने पहले तो जमकर हवा में फायरिंग की फिर घर में घुसकर लोगों को खींच--खींच कर और दौड़ा--दौड़ा कर पीटा.इस दौरान उसने पेट्रोल छींटकर चार घरों को आग के हवाले भी कर दिया.पीड़ितों ने जब हल्ला मचाया तो लोग जमा होने जिसे देखकर पिंटू अपने साथियों के साथ हवा में हथियार लहराते हुए फरार हो गया.इस ग़दर में जहां चार घर जलकर ख़ाक हो गए जिसमें मामूली संपत्ति का नुकशान हुआ लेकिन चार बकरियां जलकर मर गयीं वहीँ तीन महिला सहित करीब आठ लोग भी जख्मी हुए.घटना की वजह की बात करें बीते पंचायत चुनाव में पिंटू की माँ प्रत्यासी थी जो चुनाव हार गयीं.पिंटू की नजर में इन्हीं अल्पसंख्यकों की वजह से उसकी माँ की हार हुई और बदले की भावना में उसने इस घटना को अंजाम दिया.गाँव में दहशत का माहौल है.घटना की सूचना मिलते ही खुद पुलिस अधीक्षक मोहम्मद रहमान मौका ए वारदात पर आये और स्थिति को नियंत्रण में किया.सौर बाजार थाना में पिंटू यादव सहित बारह लोगों को नामजद और आठ--दस अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है जिसमें से दो आरोपियों को गिरफ्तार भी कर लिया गया है.पुलिस ने घटनास्थल पर से पाँच खोखे भी बरामद किये हैं.पुलिस अधीक्षक की मानें तो सभी आरोपियों की जल्द ही गिरफ्तारी कर ली जायेगी.गाँव में शान्ति और सोहाद्र कायम रह सके इसके लिए उन्होनें गाँव में एक पुलिस अधिकारी के अतिरिक्त डेढ़ दर्जन जवानों की तैनाती कर दी है. 
यह है बेलहा टोला.पिंटू ने इस टोले पर कहर बरपाया है.एक सौ से अधिक परिवारों से ज्यादा अल्पसंख्यकों के इस टोले के सुभान मियाँ से पिंटू की चुनावी रंजिश थी जिसकी वजह से यह घटना घटी.खुद सुभान मियाँ भी इस बात को कबूल रहे हैं.पीड़ितों का कहना है की पिंटू यादव घोड़े और मोटरसाईकिल पर अपने साथियों के साथ आया और जिसे जिधर पाया उधर ही पीटता चला गया.इस दौरान उसने कई फायर भी किये.पेट्रोल छिड़ककर चार घरों को आग के हवाले भी कर दिया.कई औरतों के साथ इज्जत से खेलने की भी कोशिश हुई.हल्ला होने पर लोग तेजी से जमा होने लगे,इसी कारण पिंटू वहाँ से भाग गया वर्ना घटना और बड़ी होती.खासकर के महिलायें अभी भी इस घटना को लेकर काफी सहमी हुई हैं.
मोहम्मद रहमान,पुलिस अधीक्षक,सहरसा.
पुलिस अधीक्षक ने खुद मौके पर पहुंचकर काफी होशियारी दिखाई.घटना को लेकर उन्होनें पूरी जानकारी दी और कहा की दो आरोपियों को दबोच लिया गया है और बांकी की भी जल्द गिरफ्तारी हो जायेगी.शान्ति बहाली के लिए उन्होनें एक अधिकारी सहित पुलिस फ़ोर्स की गाँव में तैनाती कर दी है.
चुनावी रंजिश अभी तक बुरे परिणाम दे रही है.ऐसे हादसों से बचने के लिए पुलिस को अपना ख़ुफ़िया तंत्र बेहतर करने के साथ--साथ बेहतर रणनीति भी बनानी होगी.गाँव में अमन चैन बना रहे और ऐसी घटना की फिर से पुनरावृति ना हो इसके लिए हम भी दुआ करते हैं.
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दिसंबर 06, 2011

ह्त्या की आशंका


सहरसा सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता और कार्यपालक अभियंता के आवास के बीच में अधीक्षण अभियंता के गार्ड दानी यादव की लाश मिलने से जहां परिजनों का रो--रोकर बुरा हाल है वहीँ पूरे इलाके में सनसनी फैल गयी है.लाश की स्थिति को देखकर परिजन ह्त्या कर लाश को फेंके जाने का आरोप लगा रहे हैं.पुलिस ने भी इसी दिशा में काण्ड को दर्ज कर अनुसंधान शुरू किया है.वैसे परिजनों की मानें तो मृतक का किसी से कोई विवाद नहीं था.फिलवक्त सिंचाई विभाग के दोनों अधिकारी सहरसा से बाहर हैं.
सदर थाना क्षेत्र के अति रिहायशी इलाका कोसी प्रोजेक्ट स्थित दो अधिकारियों के सरकारी आवास के बीच का.देखिये यहीं पर फेंकी हुई है दानी यादव की लाश.यहाँ लोगों का मजमा लगा हुआ है.लोग हतप्रभ और किंकर्तव्यविमूढ़ हैं की क्या हो गया.दानी की लाश की स्थिति साफ़--साफ़ बता रही है की किसी ने उसकी हत्या कर लाश को यहाँ पर फेंक दिया है.हम आपको वह जगह भी दिखा रहे हैं जहां रोज दानी सोता था.देखिये मच्छड़दानी लगा हुआ है.बगल में उसकी धोती फेंकी हुई है.यही नहीं ठीक उसके सामने बाहर में दानी के जुते रखे हुए हैं.यह नजारा बता रहा है किसी ने जबरन उसे यहाँ से उठाकर पहले उसकी जान ली है फिर उसकी लाश को वहाँ पर ले जाकर फेंक दी है.परिजन और गाँव के लोगों का कहना है की किसी ने दानी को मारकर लाश वहाँ पर फेंक दिया है.सूचना के बाद जहां घंटों बाद पुलिस मौके पर पहुंची वहीँ सिंचाई विभाग के एक भी अधिकारी ने मौका ए वारदात पर आना मुनासिब नहीं समझा.परिजनों का रो--रोकर बुरा हाल है.
सुरेश सिंह,एस.आई,सदर थाना,सहरसा.
थोरी देर पर पुलिस पहुंची और फिर उसने लाश को कब्जे में लेकर अनुसंधान शुरू किया. घटना के कारण का सही तौर पर पता चल सके अथवा नहीं लेकिन पुलिस के अपराध फाईल में एक मामला का इजाफा जरुर हुआ है.आगे देखने वाली बात होगी की पुलिस इस मामले को किस एंगिल से लेकर अनुसंधान करती है.फिलवक्त जहां आसपास सनसनी फैली हुई है वहीँ मृतक के परिवार में कोहराम मचा हुआ है.

दिसंबर 05, 2011

जेनरल अस्पाताल और ग्रामीण मेडिकल कॉलेज का उदघाटन


डॉक्टर आर.एन.सिंह
अस्वनी चौबे (स्वास्थ मंत्री बिहार सरकार)
सहरसा जिला के गोलमा गावं में राधा बल्लभ फाउंडेशन ट्रस्ट द्वारा गोलमा जेनरल अस्पाताल और ग्रामीण मेडिकल कॉलेज,के वह्यय बिभाग एबं स्वास्थ मेला का उदघाटन करने बिहार सरकार के स्वास्थ मंत्री अस्वनी चौबे पहुचे उन्होंने फीता काट कर बिधिबत स्वास्थ मेला का उदघाटन किये वहीँ इस मोके पर सूबे के राजस्व मंत्री नरेन्द्र नारयण यादव  ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई. इस स्वास्थ मेला में बिहार के नामी गिरामी डॉक्टरों ऩे भी खुल के भागीदारी ली इस स्वास्थ मेला का कमान बिहार के ख्याति प्राप्त हड्डी रोग बिषेस्ग्य डॉक्टर आर.एन.सिंह ऩे संभाली रखी थी . स्वास्थ मेला में पुरुष एबं महिलाओं में स्वास्थ के प्रति सजगता दिखाई दी तो दूसरी तरफ डॉक्टरों ऩे भी सभी मरीजों को मुफ्त में  जाँच कर उचित सलाह एबं दवा दी.
गोलमा गावं में राधा बल्लभ फाउंडेशन ट्रस्ट द्वारा लगाया गया स्वास्थ मेला का देखिये किस तरह से यंहा पे  पुरुष और महिलाओं की भीर उम्र पारी है.आखिर क्यों नहीं भीर उमरे बरी मुद्दत के बाद इस सवास्थ मेला का आयोजन हुआ है.. बताना लाजमी है की ये वही कोशी का क्षेत्र है जन्हा 2008  में बाढ़ की बड़ी त्रासदी ने  लाखो जिंदगियां को अपने आगोश में ले लिया.उसके बाद यंहा पे कई प्रकार की बीमारिया ने पावं पसारना सुरु किया. ये बही भीर है जो वर्षों से इस दिन का इंतजार कर रहा था की एक सवास्थ सिविर लगे जन्हा पे गरीब गुरबा फ्री मै भी इलाज करा सके....सुदूर इलाके से आये मरीज और इनके परिजनों के आखों में एक अजीबो गरीब चमक दिखाई दे रही है.क्यूं न हो इस इलाका में दूर-दूर तक गरीबों के लिये स्वास्थ सुबिधा नहीं हैं एसे में स्वास्थ मेला का लगना और जेनरल अस्पताल का खुलना एक बहुत बड़े सपनों का साकार होना ही हैं. वही दूसरी तरफ स्वास्थ मेले में आये डॉक्टरों का मरीजों के प्रति  उत्साह देखने योग्य हैं.
पूजा कुमारी  बच्चे को जाँच करवाती 
स्वास्थ मेले का उदघाटन करने आये बिहार सरकार के स्वास्थ मंत्री अस्वनी चौबे ऩे खुले मन से लोगों का मन जीत लिया ओर फिर सुरु हो गई फिर अपनी बारे की बाते और कई वादे भी किये ..आइये सुनते है
सब ने हवाई पुल बांधे..बिहार के ख्याति प्राप्त हड्डी रोग बिशेषयग्य एबं राधा बल्लभ फाउंडेशन के ट्रस्टी डॉक्टर आर.एन.सिंह ऩे क्या कहा आईये सुनते हैं
इनके जो भी वादे हो उसमे हमें नहीं परना है.. लेकिन इतना तो जरुर है की गोलमा जैसे सुदूर गावं में राधा बल्लभ फाउंडेशन ट्रस्ट द्वारा जेनरल अस्पाताल का खुलना यंहा के आवाम को जरुर शकुन पंहुचा सकता है यदि इसका दिशा और दशा दुरुस्त रहा तो...

दिसंबर 03, 2011

भूख से हुई मौत

सरकार की किसी योजना का लाभ लिए बगैर ही एक बुजुर्ग सड़क किनारे जिन्दगी से लड़ते--लड़ते आज हार मान गया.अनाज के अभाव में कुलबुलाते पेट ने उसके प्राण को बाहर निकाल फेंका.सदर थाना क्षेत्र के विस्कोमान भवन के समीप वार्ड नंबर एक में दशकों से सरकारी योजना के लाभ की बाट जोहने वाला राम बहादुर भगत आज इस दुनिया को अलविदा कह गया.तीन बेटे पंजाब में रहकर मजदूरी करते हैं. खानाबदोश घर से एक महत्वपूर्ण बुजुर्ग की बिदाई असमय हो गयी.राम के घर में कोलाहल मचा है.महिलायें और मासूम नौनिहाल बस रोये ही जा रहे हैं.बुजुर्ग की बेबा पत्नी अपने पति का हाथ थामे विलाप कर रही है.सबका कहना है की घर में राशन--किरासन के कूपन पड़े हैं लेकिन उन्हें ना तो कभी अनाज मिला और ना की किरासन तेल.वृधा पेंशन के लिए बस पासबुक खुला लेकिन पेंशन एक बार भी नहीं मिला.अन्न के अभाव में इस बुजुर्ग ने तड़प--तड़प कर दम तोड़ दिया.आखिरकार भूख ने एक निरीह की जान ले ही ली.सुशासन में गरीबों के लिए चल रही योजनाओं के काले सच को आईना दिखाती है.
सुशासन की सरकार में सबकुछ ठीक--ठाक चल रहा हो,ऐसा कहीं से भी नहीं है.ताजा वाकया कई तरह के बड़े सवाल खड़े करने वाला है. विस्कोमान भवन के ठीक सामने सड़क किनारे सरकारी जमीन पर टीन--कनस्तर डालकर बसे राम बहादुर भगत के परिवार का.70 वर्षीय राम बहादुर भगत आज इस दुनिया से कूच कर चुके हैं.तीन जवान बेटे घर की गाड़ी खींची जा सके इसके लिए पंजाब में मेहनत--मजदूरी कर रहे हैं.घर की माली हालत ठीक नहीं है.बीपीएल परिवार है.घर के लोगों के लिए राशन-किरासन के लिए वर्ष 2008 से ही इन्हें सरकारी कूपन मिला हुआ है.हद की इन्तहा देखिये की ये इन कूपनों को बस संभालने में ही लगे रहे लेकिन इन्हें कभी भी इन कूपनों से राशन--किरासन नहीं मिल सका.घर के दो बुजुर्गों के नाम का वृद्धा पेंशन पास--बुक भी खुला लेकिन एक बार भी पेंशन की राशि नहीं मिली.महीनों से घर का चूल्हा बड़ी मुश्किल से कभी--कभार जलता था. बुजुर्ग राम बहादुर को पेट भर खाना नहीं मिल पाता था.जाहिर सी बात है की घर में और भी कई छोटे--बड़े सदस्य हैं जिन्हें भोजन की जरुरत थी लेकिन किसी को शायद ही कोई दिन हो जब भर पेट खाना नसीब होता हो.बेसुमार तकलीफों को झेलता यह परिवार बस एक दूसरे के दुखों को  देख कर बस किसी तरह घिसट--पिसट कर जिन्दगी जीने को मजबूर थे.राम बहादुर उम्र के ऐसे पडाव पर थे जहां उन्हें समय पर भोजन के साथ--साथ कई तरह के मौसमी फलों की जरुरत थी.लेकिन जिस घर में गरीबी और मज़बूरी ने अपना डेरा डाल लिया हो वहाँ तो चूल्हे की अंगीठी जलनी मुश्किल होती है.राम बहादुर को खाना ना के बराबर मिलता था.उन्होनें महीनों से अपनी जिन्दगी बचाने की कोशिश की लेकिन भूखे पेट ने उनकी कमजोर काया को साथ देना बन्द कर दिया.महीनों से तड़पते इस बुजुर्ग ने आज दम तोड़ दिया.घर के लोग चीख--चीख कर कह रहे हैं की भूख ने उनके घर का बुजुर्ग लेकिन मजबूत पाए को लील लिया.
---घटना बड़ी है.भूख से मौत का मामला है.जाहिर सी बात है की खासकर के प्रशासन और सरकार के लोग कभी भी भूख की बात को स्वीकार नहीं करेंगे.लेकिन इस मामले में मौके पर आये प्रशासन के अधिकारी ने जहां कूपन की जांच करवाकर डीलर अथवा जो जिम्मेवार अधिकारी हैं पर कड़ी कारवाई की बात की,वह भूख से हुई मौत को एक तरह से स्वीकार रहे हैं.इनकी मानें तो इस परिवार को तत्काल डेढ़ हजार रूपये कबीर अन्तियेष्ठी मद से दिए जा रहे हैं ताकि शव का अंतिम संस्कार किया जा सके.आगे इस परिवार को पारिवारिक लाभ दिया जाएगा. शहरी क्षेत्र में इंदिरा आवास योजना की व्यवस्था नहीं है.अगर यह परिवार चाहे तो ग्रामीण क्षेत्र में भूमि उपलब्ध कराकर इंदिरा आवास का लाभ इन्हें दिलाया जाएगा.भूख से हुई इस मौत पर हमने वार्ड पार्षद से भी जबाब तलब किया.इन्होनें तो इस मौत को पूरी तरह से भूख से हुई मौत बताते हुए डीलर पर कई तरह के आरोप लगाए.इन्होनें तो यहाँ तक कहा की जिस डीलर ने इस परिवार को राशन--किराशन नहीं दिए उसके  खिलाफ उन्होनें तमाम आलाधिकारी से लिखित शिकायत की थी लेकिन कहीं भी कुछ नहीं हुआ और यह बुजुर्ग आज तड़प--तड़प कर मर गया. इन्होनें डीलर को इस मौत के लिए जिम्मेवार ठहराते हुए उनपर कारवाई की मांग की.-भूख से हुई मौत सरकार और प्रशासन के लिए जांच का विषय हो लेकिन यहाँ मृतक के घर के हालात चीख--चीख कर भूख--भूख का सिंहनाद कर रहे हैं.जाहिर सी बात है थोड़ी सी हाय--तौबा के बाद राम बहादुर की मौत पर शोर थम जाएगा और सबकुछ शांत हो जाएगा. लेकिन सरकार की योजनायें किस तरह से सरजमीन पर नहीं उतर पा रही हैं,यह मौत उसकी गर्जना के साथ वकालत करता रहेगा.इस मौत को प्रशासन के साथ--साथ सरकार किस तरह से लेती है इसे आगे देखना दिलचस्प होगा.

*अपनी बात*

अपनी बात---थोड़ी भावनाओं की तासीर,थोड़ी दिल की रजामंदी और थोड़ी जिस्मानी धधक वाली मुहब्बत कई शाख पर बैठती है ।लेकिन रूहानी मुहब्बत ना केवल एक जगह काबिज और कायम रहती है बल्कि ताउम्र उसी इक शख्सियत के संग कुलाचें भरती है ।