दिसंबर 28, 2011

देवराज देव हुए राज्य बदर

करीब दस महीने के अल्प कार्यकाल के बाद सहरसा के जिलाधिकारी देवराज देव प़र सरकार की गाज गिरी और उनको इस जिले से ना केवल हटाया गया बल्कि उन्हें राज्य बदर करते हुए उनके पैत्रिक केडर तमिलनाडु वापिस भेज दिया गया.ख़ास बात यह है की उनके कार्यकाल में उनके द्वारा संपादित विभिन्य योजनाओं में से करीब पंद्रह योजनाओं में सरकार ने निगरानी से जांच कराने की अनुशंसा की है.हमारी जानकारी के मुताबिक़ पिछले दो दशक के दौरान किसी भी सरकार ने किसी आई.ए.एस अधिकारी प़र इतनी बड़ी कारवाई नहीं की थी.बताना लाजिमी है की कोसी प्रमंडल के वर्तमान आयुक्त जे.आर.के.राव ने भी इनकी कार्यशैली को लेकर गंभीर टिप्पणी करते हुए कई बार राज्य सरकार को लिखा था.यही नहीं मुख्यमंत्री नीतीश अपनी सेवा यात्रा के दौरान लोक कल्याणकारी योजनाओं में जिलाधिकारी के काम से काफी नाखुश दिखे थे.इसके अलावा मुख्यमंत्री की सेवा यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री से मिलने को आतुर भिखारियों को उनसे मिलने नहीं दिया गया और भिखारियों प़र लाठीचार्ज किये गए.जबाबी कारवाई में भिखारियों ने मुख्यमंत्री के काफिले प़र पीछे से हमला करते हए जमकर पत्थरबाजी भी की.ये तमाम कारणों ने मुकम्मिल तौर प़र डी.एम देवराज को यहाँ से विदा करा दिया.आज सहरसा के नए डी.एम के रूप में मिसबाह बारी ने पदभार संभाल लिया.
12 से 14 दिसंबर की मुख्यमंत्री की सेवा यात्रा के दौरान ही सहरसा के तत्कालीन जिलाधिकारी देवराज देव की बिदाई की पृष्ठभूमि तैयार हो गयी थी लेकिन उन्हें इसतरह से घसीटकर सहरसा से हटाते हुए राज्य से बाहर फेंक दिया जाएगा,इसका किसी को गुमाँ नहीं था.यह सच है की अपने महज दस महीने के कार्यकाल में जिलाधिकारी देवराज देव ना तो जनता को अपने विश्वास में ले सके थे और ना ही उनके दिलों में कोई जगह ही बना पाए थे.उनका जनता दरबार पूरी तरह से जहां फ्लॉप शो साबित होता रहा वहीँ गरीबों की लिए चलाई जा रही योजनाओं को भी सरजमीन प़र उतारने में वे पूरी तरह से नाकामयाब रहे.उनके कार्यकाल में कालाबाजारियों के गोरखधंदे प़र से पर्दा उठते--उठते ही बीच का खेल हो गया.बाढ़ के समय पीड़ितों तक ना तो कभी जिलाधिकारी पहुँचे और ना ही पीड़ितों को समय से फौड़ी राहत मिल सकी.जिलाधिकारी देवराज ने अपने अल्प कार्यकाल के बीच 15 से 20 साल पुराने निर्वाचन से लेकर अन्य विभागों के वे तमाम बकाये (अनुमानित करीब दो करोड़ की राशि)का भुगतान कर दिया जिसे पीछे के तमाम जिलाधिकारियों ने किसी ना किसी कारण से रोके रखा था.जिलाधिकारी देवराज देव के सहरसा से जाने से यहाँ के आमजन काफी खुश हैं.

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अपनी बात---थोड़ी भावनाओं की तासीर,थोड़ी दिल की रजामंदी और थोड़ी जिस्मानी धधक वाली मुहब्बत कई शाख पर बैठती है ।लेकिन रूहानी मुहब्बत ना केवल एक जगह काबिज और कायम रहती है बल्कि ताउम्र उसी इक शख्सियत के संग कुलाचें भरती है ।