नवंबर 16, 2016

सहरसा टाईम्स की खबर का हुआ बड़ा और साबूत असर


दिल्ली से वरिष्ठ पत्रकार मुकेश कुमार सिंह की रिपोर्ट----
सहरसा टाईम्स की खबर का हुआ बड़ा और साबूत असर
बार--बार नोट बदलने वाले पर सरकार ने कार्रवाई के दिए निर्देश
अब नोट बदलने के समय,अंगुली पर लगेगी अमिट स्याही
वरिष्ठ संवाददाता मुकेश कुमार सिंह ने अपनी पड़ताल में यह खुलासा किया था की कालाधन वाले आधार कार्डधारी मजदूर,ग्रामीण विभिन्य गिरोहों के सदस्यों और रिश्तेदारों को रोजाना विभिन्य बैंकों में खड़ा करके 500 रूपये पारिश्रमिक देकर नोट बदलवाने का खेल रहे हैं गोरख खेल ।यही नहीं एक व्यक्ति दिन में कई बैंकों में जाकर रूपये बदलवा रहा है,जिसे कोई देखने--सुनने और रोकने वाला नहीं है ।
हमने 14 नबम्बर को "मोदी का नोट के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राईक,निश्चित रूप से है मास्टर स्ट्रोक" शीर्षक से स्टोरी लिखी थी जिसमें सच्चाई की हर परत को हमने उधेड़ डाला था ।हमारी उस पड़ताल का नतीजा अब सामने है ।हमारी खबर का यह इम्पैक्ट है की लोगों की अंगुली पर अमिट स्याही लगेगी ।सरकार की तरफ से मिली जानकारी के मुताबिक़ सरकार ने यह कदम नोटों की अदला--बदली करवाने में आम गरीबों इस्तेमाल से लेकर कई गिरोहों के सक्रिय होने की रपटों के बाद उठाया है ।ऐसी रपटें हैं की ऐसे गिरोहों के सदस्य बार--बार कतारों में लगकर नोट बदलवा रहे हैं ।जाहिर तौर पर इससे काली कमाई वाले फिर से मालामाल हो रहे हैं और जरूरतमंद अपना नोट नहीं बदलवा पा रहे हैं ।
आर्थिक मामलों के सचिव शक्तिकांत दास ने बताया कि नोटिश आई है की अनेकों जगहों पर एक ही व्यक्ति बार--बार नोट बदलवाने आ रहे हैं ।अब जो व्यक्ति पैसे बदलवाने बैंक जाएंगे,तो, उनकी ऊँगली में अमिट स्याही लगाई जायेगी । फिर आगे से वे किसी भी बैंक में जाने की हिम्मत और कोशिश नहीं करेंगे ।
हम अपनी रपट पर सरकार की इस ससमय पहल से बेहद खुश हैं और इससे भी ज्यादा ख़ुशी हमें इस बात की है की जरूरतमंद अब समय से अपने रुपयों को बदलवा सकेंगे ।
हम अपने पाठकों को विश्वास दिलाते है की सरकार और तंत्र को सच से दो--चार कराने का हमारा यह सिलसिला बदस्तूर जारी रहेगा ।वाकई सच दिखाने की भूख है हमें और इमां का कुदरती दम भी खूब रखते हैं हम ।


14 नवंबर को हमारी पड़ताल  



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अपनी बात---थोड़ी भावनाओं की तासीर,थोड़ी दिल की रजामंदी और थोड़ी जिस्मानी धधक वाली मुहब्बत कई शाख पर बैठती है ।लेकिन रूहानी मुहब्बत ना केवल एक जगह काबिज और कायम रहती है बल्कि ताउम्र उसी इक शख्सियत के संग कुलाचें भरती है ।