फ़रवरी 18, 2015

जरूरतमंद लोगों की सेवा ही असली पूजा है - सुधा गुप्ता

कृष्णमोहन सोनी की रिपोर्ट:- मानव  समाज के हृदय के अंदर हमेशा सेवा भाव होना अति आवश्यक है सेवाभाव से जहाँ समाज के अंदर फैली कुरीतियाँ समाप्त होती हैं वही आपसी सौहार्द, अमन चैन शांति के साथ -साथ समाज का विकास भी होता है. हमे मानवता को भूलना नहीं चाहिए मानव समाज में सबसे कमजोड़ दबे, कुचले, गरीबों और समाज के अंतिम ऐसे जरूरतमंदों लोगों की सेवा ही असली पूजा है. 
 सहरसा शहर के व्यवसायी वर्गों में एक अलग पहचान रखने वाले और  समाजिक कार्यों में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेने वाले व्यवसायी, समाजसेवी स्वर्गीय शंभू गुप्ता के श्राद्ध कर्म लंगर भोज में गरीबों के बीच  खुल कर सेवा करने आयी स्वर्गीय शंभू गुप्ता कि धर्म पत्नी सुधा गुप्ता ने कही उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यों से स्वर्गीय गुप्ता कि आत्मा को शांति मिलेगी उनकी आत्मा कि शांति के लिए यह कार्यक्रम आयोजित किये गए ऐसे कार्यों से खुद को उन्हें भी जहाँ  ख़ुशी मिलती है वही मन को शांति भी.  स्वर्गीय गुप्ता जी हमेशा ऐसे कार्यक्रमों में आगे रहते थे और वे  हमेशा ऐसे कार्यो में भाग लेने के लिए मुझे भी सहयोग करने को कहते रहते थे. यही कारण है कि आज इस तरह के समाज सेवा के कार्यों को करने का मुझे मौका मिला है. इस मौके पर सैकड़ों विकलांगों , गरीबों, कुष्ठ रोगियों, निःशहाय ऐसे सैकड़ों महिला पुरुष और बच्चों को सम्मान के साथ सामने बैठा कर अपने हाथों से भर पेट भोजन कराया और महिलाओं को साड़ी  ब्लाउज, पुरुषों को चादर, बच्चों को भी वस्त्र दान किया।
मानवता की एक और मिसाल यहाँ देखने को मिला है सेवा भाव में इस कदर लीन होना आज तक कम ही  देखने को मिला है अपने हाथों से इन गरीबों के मुँह में रसगुल्ले खिला कर, उसके पैर को पानी से धो कर  पैर छू कर प्रणाम करके विदा किया गया. इस काम को अंजाम देने में उनके बड़े पुत्र शंकर प्रसाद गुप्ता सचिन कुमार गुप्ता, पुत्री अर्चना गुप्ता, स्वीटी, रूबी, मिली सहित परिवार के साथ समाज के अन्य सदस्यों ने भी बढ़ चढ़ कर भाग लिया।  इस मौके पर उनके पुत्र शंकर गुप्ता ने कहा कि ऐसे लोगों की सेवा हर मानव जाती के लोगो को करने के लिए आगे बढ़ना चाहिए ताकि हमारी संस्कृति हमारी सभ्यतायें भी यही रही है और उसे हम सवों  को  मिलकर अक्षुण्ण बनाये रखना है. ऐसे कार्यक्रम करने से जहाँ सामाजिक व्यवस्थाएं पटरी पर रहता है. वहीं लोगों में एक दूसरे के प्रति सदभाव  कायम रहता है। शुधा गुप्ता द्धारा किये गए इस तरह कि कार्यो से लोगों में एक बार फिर सोये हुए  मानवता जगी है।

1 टिप्पणी:


THANKS FOR YOURS COMMENTS.

*अपनी बात*

अपनी बात---थोड़ी भावनाओं की तासीर,थोड़ी दिल की रजामंदी और थोड़ी जिस्मानी धधक वाली मुहब्बत कई शाख पर बैठती है ।लेकिन रूहानी मुहब्बत ना केवल एक जगह काबिज और कायम रहती है बल्कि ताउम्र उसी इक शख्सियत के संग कुलाचें भरती है ।