जनवरी 17, 2017

साइकिल पर निकले बड़े हाक़िम ......

नहीं पिएंगे और नहीं पीने देंगे शराब के नारों से गूंजता रहा सहरसा.....
यह नारा अगर संकल्प में बदला,तो बदलेगा बिहार....... 
सहरसा से मुकेश कुमार सिंह की दो टूक--- 

नशा मुक्ति अभियान के दूसरे चरण की तैयारी और 21जनवरी को आयोजित होने वाले मानव शृखला में अधिक से अधिक लोगों को जोड़ने की जागरूकता के अभियान को बल देने के लिए सहरसा के जिलाधिकारी विनोद कुमार गुंजियाल, एसडीओ जहांगीर आलम,एसडीपीओ सुबोध विश्वास ने मंगलवार को अपने लाव-लशकर के साथ अहले सुबह शहर के विभिन्न मार्गो पर साइकिल की सवारी की। इनके साथ जिले के कई और वरीय पदाधिकारी भी शामिल हुए ।

ये यात्रा जिले के समाहरणालय से शुरू हुयी जो शहर के विभिन्न मार्गों से होते हुए पुनः समाहरणालय पहुंची। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में अधिकारियों के साथ--साथ विभिन्य स्कूल के सैंकड़ों बच्चे और बच्चियां भी शामिल हुयी ।
आज का नजारा यह बता रहा था की सहरसा शराब मुक्त बिहार का संकल्प ले चुका है ।बताते चलें की आगामी 21 जनवरी को मुख्य कार्यक्रम होना है । बच्चे और बच्चियों के उत्साह से लवरेज नारे कानों को बेहद सुकून दे रहे थे और बिहार शराब मुक्त प्रांत होकर रहेगा, इसके सपने भी दिखा रहा था। लेकिन इस बीच में हम यह जरूर कहना चाहेंगे की जिस शपथ को पुलिस और प्रशासन के अधिकारी नौकड़ी में आने से पहले लेते हैं फिर उसकी धज्जियां उड़ाते नहीं थकते। क्या ऐसे आलम और मंजर में बिहार शराबमुक्त प्रांत हो सकेगा? अगर संकल्प ईमानदार हो तो, सूरत बदलनी तय है ।लेकिन हम यह ताल ठोंककर कहते हैं की थोक में नेता और अधिकारी रोजाना घर में शराब की चुस्कियां लेते हैं। आम आदमी को बदलने के साथ--साथ अधिकारियों को भी पूरी तरह से बदलने की जरूरत है। वैसे लगातार भारी मात्रा में शराब की हो रही बरामदगी, सिस्टम को अलग से मुंह चिढ़ा रहा है। अरे अधिकारियों नशे की आदत छोड़ो, यह सूबे की मांग है ।

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*अपनी बात*

अपनी बात---थोड़ी भावनाओं की तासीर,थोड़ी दिल की रजामंदी और थोड़ी जिस्मानी धधक वाली मुहब्बत कई शाख पर बैठती है ।लेकिन रूहानी मुहब्बत ना केवल एक जगह काबिज और कायम रहती है बल्कि ताउम्र उसी इक शख्सियत के संग कुलाचें भरती है ।