जुलाई 25, 2016

फनगो हॉल्ट स्थित रेलवे ट्रैक के समीप आई कोसी


फनगो हॉल्ट स्थित रेलवे ट्रैक के समीप आई कोसी..... 
रेल परिचालन हुआ ठप्प .........
कोसी इलाके का राज्य मुख्यालय सहित देश के विभिन्य हिस्सों से रेल संपर्क टूटा .........
डीआरएम ने किया स्थल का निरीक्षण ............
हर साल फनगो के समीप कोसी बनाती है दबाब .............
पैसे की मची है लूट लेकिन समाधान कब ?
कोसी की मेहरबानी से हर साल कई लोग बनते हैं करोड़पति............ 
मुकेश कुमार सिंह की दो टूक---  
यूँ तो कोसी नदी सहरसा--मानसी रेलखण्ड के फनगो हॉल्ट के रेलवे ट्रैक पर बीते कई वर्षों से हर साल दबाब बनाती है लेकिन कोसी की मेहरबानी से इसबार से पहले महज दो बार ही रेल का परिचालन ठप्प हुआ है । हर साल यह उम्मीद बंधती रही है की रेलवे महकमा और जल संसाधन विभाग इस बार कालजयी उपाय कर लेगा और इस समस्या का स्थायी समाधान हो जाएगा । लेकिन ऐसा आजतक सम्भव नहीं हो सका। हर साल करोड़ों--अरबों रूपये रेलवे ट्रैक बचाने के नाम पर खर्च होते रहे और नतीजा सिफर निकला। बस कोसी की मेहरबानी से ट्रैक के साथ--साथ हजारों की आबादी बचती रही है। आखिर ये रूपये जाते कहाँ है? बड़ा सवाल है यह जनाब.....हर साल करोडो--अरबों रूपये बोल्डर क्रेटिंग, नायलॉन क्रेटिंग ,परकोपाईन सहित अन्य निरोधात्मक काम पर खर्च किये जाते हैं ।लेकिन आप सच जानिये,की जो आंकड़े कागज़ पर दिखाए जाते हैं,सच में काम उस अनुपात में बहुत कम होता है । फ्लड फाइटिंग के समय का ऑडिट भी नहीं होता है ।पानी में आपने कितने काम किये, वे पानी में बह जाते हैं और सामने बचे रहते हैं कम्प्यूटर और कागज़ में दर्ज थोक में काम के आंकड़े ।इस काले खेल और बाजीगरी में बाबू--हाकिम,ठेकेदार,बिचौलिए से लेकर हमारे देशभक्त नेता भी शामिल रहते हैं । ज़रा सोचिये,जब कोसी नदी में पानी कम या की ना के बराबर रहता है,उस समय आखिर कोई काम क्यों नहीं होता है ?जाहिर सी बात है की उस वक्त अगर काम होगा तो उसका सही लेखा--जोखा देना पडेगा और नंगी आँखों से सच को देखा जा सकेगा ।

अभी की बात करें तो,पूर्व मध्य रेल के सहरसा--मानसी के बीच फनगो हॉल्ट के रेलवे ट्रैक के समीप नदी ट्रैक के बेहद करीब आ गयी है ।ट्रैक पर नदी का भारी दबाब है ।नदी का अगर मिजाज बदला और नदी क्रूर हुयी तो ट्रैक की धज्जी उड़ा डालेगी ।खतरा बेहद बड़ा है जिसे भांपते हुए पूर्व मध्य रेल मंडल समस्तीपुर के डीआरएम सुधांशु शर्मा ने बीते कल शनिवार को खुद से स्थल पर अन्य अधिकारियों के साथ कैम्प किया । डीआरएम ने कोसी के रौद्र रूप को देखते हुए  अभियंताओं को सुरक्षात्मक कार्यों में तेजी लाने का निर्देश दिया है ।डीआरएम ने मोबाइल पर सहरसा टाईम्स से बात करते हुए कहा की ट्रैक के समीप स्थिति काफी भयावह बनी हुयी है ।रेल पटरी पर नदी के बढ़ते दबाब को देखते हुए रेलवे के अधिकारियों को अलर्ट कर दिया गया है । अभियंताओं को स्थिति का अनवरत निगरानी करते रहने का भी उन्होनें शख्त निर्देश दिया है । आगे उन्होने कहा की चूँकि ट्रैक के समीप की स्थिति काफी गंभीर है,इसलिए कोई भी रिस्क लेना मुनासिब नहीं है ।अगले आदेश तक के लिए अभी रेल का परिचालन नहीं होगा ।
आखिर में हम आमलोगों के साथ--साथ अपने पाठकों को खुद से यह समझने का आग्रह कर रहे हैं की हर साल करोड़ों--अरबों रूपये खर्च करने के बाद भी यह भयावह स्थिति आखिर क्यों है ? आखिर जब कोसी में पानी बढ़ता है,तभी बचाव का काम करने का ख्याल क्यों आता है ?आखिर कौन--कौन से लोग इसके लिए जिम्मेवार हैं ?क्या उन्हें चिन्हित कर के दण्डित नहीं किया जाना चाहिए ?

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अपनी बात---थोड़ी भावनाओं की तासीर,थोड़ी दिल की रजामंदी और थोड़ी जिस्मानी धधक वाली मुहब्बत कई शाख पर बैठती है ।लेकिन रूहानी मुहब्बत ना केवल एक जगह काबिज और कायम रहती है बल्कि ताउम्र उसी इक शख्सियत के संग कुलाचें भरती है ।