अगस्त 19, 2012

सहरसा में ट्रैफिक नियम है ठेंगे प़र

मेरी मर्जी मै चाहे जो करू .........
रिपोर्ट चन्दन सिंह : आखिर उस नियम का क्या करेंगे जिसको लोग ठेंगे प़र रखते हैं.तमाम नियम--कायदों को ना केवल धता बताकर बल्कि पूरी तरह से जान को जोखिम में डालकर यहाँ प़र लोग मोटरसाईकिल का सफ़र कर रहे हैं.सुनसान गलियों या सड़कों की बात तो छोड़िये सबसे भीड़ वाले इलाके से मोटरसाईकिल प़र तीन चार नहीं बल्कि छः--छः लोगों को लादकर लोग सफ़र कर रहे हैं.आप यह जानकार हैरान--परेशान हो जायेंगे की लोग एक मोटरसाईकिल को टेम्पो बनाकर पूरा परिवार उस प़र लादकर बेधड़क सफ़र कर रहे हैं लेकिन उसे रोकने वाला कोई नहीं है.ऐसा नहीं है की यहाँ ट्रैफिक व्यवस्था नहीं है.यहाँ प़र हर चौक-चौराहे प़र ट्रैफिक पुलिस और अधिकारी मौजूद हैं लेकिन सबकुछ टाँय--टाँय फिस्स.जाहिर तौर पर यहाँ लोग जिन्दगी को खुद मुसीबत में डाल रहे हैं और हादसों को खुला निमंत्रण दे रहे हैं.
 
डॉक्टर पंडित नागेश्वर झा,चालक,
देखिये यहाँ लोग किस तरह से ना केवल खुद अपनी जिन्दगी भर को बल्कि कई जिंदगियों को एक साथ जोखिम में डालकर सफ़र कर रहे हैं.मोटरसाईकिल पर लोग महिलाओं को और सामान को इस कदर लादकर चल रहे हैं गोया यह मोटरसाईकिल ना होकर टेम्पो या कोई और बड़ा वाहन हो.सुनसान गलियों या सड़कों की बात तो छोड़िये सबसे भीड़ वाले इलाके से मोटरसाईकिल प़र तीन चार नहीं बल्कि छः--छः लोगों को लादकर लोग सफ़र कर रहे हैं.आप यह जानकार हैरान--परेशान हो जायेंगे की लोग एक मोटरसाईकिल को टेम्पो बनाकर पूरा परिवार उस प़र लादकर बेधड़क सफ़र कर रहे हैं लेकिन उसे रोकने वाला कोई नहीं है.हमने जोखिम से भरे इस सफ़र की कई तस्वीरें उतारीं हैं जिसमें से कुछ खास तस्वीरों से आपको रूबरू करा रहे हैं.जब इस साहब की बीबी से सहरसा टाइम्स ने बात की तो उनके जबाब ने हमारे ज्ञान चक्षु खोल डाले.मोहतरमा बता रही हैं की वे सभी लम्बे समय से इसी तरह से यात्रा कर रही हैं.उन्हें कभी डर नहीं लगता.भगवान के ये शुक्रगुजार हैं की अभीतक सबकुछ शुभ रहा है.
मैं चाहे ये करूँ,मैं चाहूँ वो करूँ---मेरी मर्जी.सबकुछ ताख पर और जानलेवा सफ़र बीच बाजार में जारी.ये सरफिरे खुद की जिन्दगी के साथ--साथ औरों की जिन्दगी को भी मुसीबत में डालकर सफ़र कर रहे हैं.जबतक ट्रैफिक नियम को कड़ाई और शख्ती से पालन कराते हुए कठोर दंड नहीं दिए जायेंगे ऐसे नज़ारे बड़ी घटना को बदस्तूर खुला निमंत्रण देते रहेंगे.

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें


THANKS FOR YOURS COMMENTS.

*अपनी बात*

अपनी बात---थोड़ी भावनाओं की तासीर,थोड़ी दिल की रजामंदी और थोड़ी जिस्मानी धधक वाली मुहब्बत कई शाख पर बैठती है ।लेकिन रूहानी मुहब्बत ना केवल एक जगह काबिज और कायम रहती है बल्कि ताउम्र उसी इक शख्सियत के संग कुलाचें भरती है ।