कृष्ण मोहन सोनी की रिपोर्ट:- बिहार विधान सभा चुनाव २०१५ को लेकर सहरसा विधान सभा सीट के लिए विभिन्न राजनीतिक दलों ने गठ्बन्धन के तहत अपना-अपना उम्मीदवार खड़ा किया है. सहरसा विधान सभा सीट पर जहाँ भाजपा गठ्बन्धन के उम्मीदवार चुनाव में अपनी जित के लिए मसक्कत कर रहे हैं वही महागठ्बन्धन के प्रत्याशी के रूप सहरसा से एक बार फिर राजद के अरुण कुमार यादव को टिकट दिया गया है. पिछले बार भी इस सीट से अरुण कुमार यादव को चुनाव मैदान में राजद ने खड़ा किया था, लेकिन इस सीट को बचा पाने में असफलता हाथ लगी थी और जीत का सेहरा भाजपा के प्रत्याशी आलोक कुमार रंजन ने हासिल किया था. इस हार से राजद खेमे में मायूसी रही थी तब से राजद के कार्यकर्ता इस बार की हो रही चुनाव में जीत सुनिश्चित करने को लेकर जहाँ जनता के बीच संम्पर्क में रहकर कड़ी मेहनत किया वही २०१५ की इस चुनाव में फिर एक बार अरुण कुमार यादव को खड़ा किये जाने से राजद कार्यकर्ता मायूस हो गये हैं. परिणाम यहाँ तक आ पहुंची की सहरसा सीट पर राजद कार्यकर्ता दो खेमे में बंट गये. ![]() |
| राजद के वागी उम्मीदवार रंजती यादव |

इस बात को लेकर एक खेमे के कार्यकर्ता व समर्थक इन्तजार में जरुर हैं की जितना जल्द हो महा गठ्बन्धन के वर्तमान प्रत्याशी को हटाकर नये चेहरे को दे जिसमे रंजित यादव को ही आगे रखा गया है. बैठक में आये समर्थकों व युवाओं की भीड़ ने यह जरुर सावित कर दिया है कि पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच पूर्व में यह आग की तरह सुलग रही थी नये चेहरे का इन्तजार भी हो रहा था. लेकिन इस सीट से महागठ्बन्धन के प्रत्यासी अरुण कुमार यादव को बनाये जाने पर कार्यकर्ता खासे नाराज हैं. यही बजह है की विरोध में जनता की अदालत लगाई गयी.
कयास यह भी लगाई जा रही है कि अगर उम्मीदवार को नही बदला गया तो सहरसा की इस सीट से एक खेमे के लोग अपना उम्मीदवार देकर महागठबंधन को भारी नुकसान पहुंचा सकते है.फैसला जो भी बहरहाल सहरसा सीट के लिए राजद दो भाग में बंट गया है राजद सुप्रीमो अगर समय रहते फेसला नही लेते हैं तो यहाँ महागटबंधन के प्रत्यासी के विरोध में बागी उम्मीदवार भी हो सकता है जिसका नुक्सान महागटबंधन को हो सकता है .

Gathbandhan ki hawa abhi se nikalne lagi hai
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