दिसंबर 03, 2014

सहरसा पुलिस की बेशर्मी देखो सरकार

मुकेश कुमार सिंह की कलम से----- विगत कई वर्षों से अपनी बिगड़ैल और काली करतूतों के लिए खासा बदनाम रही सहरसा पुलिस ने एक बार फिर हैरतअंगेज और चौंकाने वाली घटना को अंजाम दिया है.ताजा वाक्या सहरसा जिले के नवहट्टा थाना का है, जहां के पुलिस अधिकारी ने जमीन विवाद के एक मामले में चार मासूम बच्चे और एक सौ वर्ष के बीमार और अपाहिज बने बुजुर्ग के खिलाफ 107 का नोटिस भेजा है.पुलिस के अधिकारी को इस बुजुर्ग और इन मासूमों से ना केवल बलवा का अंदेशा है बल्कि उन्हें लग रहा है की ये सभी मिलकर बड़ी से बड़ी घटना को अंजाम दे सकते हैं.इस वाकये से पीड़ित परिवार जहां सदमें में और परेशान हाल है वहीँ सहरसा टाईम्स की दखल के बाद पुलिस के आलाधिकारी इस बड़ी गलती की सुधार का भरोसा दिला रहे हैं.
मामला नवहट्टा थाना के बेहद करीब पश्चिमी टोला का हैं.मुहम्मद जुबेर का अपने गोतिया से जमीन का विवाद है.इसी मामले में नवहट्टा पुलिस अधिकारी एस.आई मनोज शर्मा ने चार मासूम नौनिहाल और एक बुजुर्ग के खिलाफ धारा 107 का नोटिस भेजा है.पुलिस अधिकारी ने चार नौनिहालों को मुजरिम समझकर नोटिस भेजा है.ये बच्चे पढ़ना चाहते हैं लेकिन पुलिस का खौफ इन्हें सता रहा है.रात में इन्हें नींद नहीं आती है और ये डरे--सहमे रहते हैं

.इन बेबसों में तीन बच्चियां शाजदा खातून,जुरेदा खातून और रिफत खातून हैं जिनकी उम्र सात से दस साल के भीतर है.एक लड़का मोहम्मद परवेज है जिसकी उम्र करीब दस साल है.हद की इंतहा तो यह है की पुलिस अधिकारी ने सौ वर्ष के मोहम्मद इदरीस को भी नहीं बख्सा है.लाचार और बेबस बुजुर्ग बिना सहारे के चल भी नहीं पाते हैं.पुलिस अधिकारी को इनसे भी बड़ा खतरा है.हद की इंतहा है और सारे बच्चे और बुजुर्ग अब सहरसा टाईम्स से इन्साफ की गुहार लगा रहे हैं. घर का मुखिया मोहम्मद जुबेर भी खासा परेशान है.पूरी घटना को तफ्सील से बताते हुए वह कह रहे हैं की पुलिस के अधिकारी उनकी एक नहीं सुन रहे हैं.उनके परिवार के सभी लोग डरे--सहमे हैं.पुलिस के खौफ से रात में कोई सोता नहीं है.सहरसा टाईम्स से ये मदद और इन्साफ की गुहार लगा रहे हैं.
पुलिस के बड़े अधिकारी मृत्युंजय कुमार चौधरी,ए.एस.पी,सहरसा इस गंभीर मसले को बड़ी चूक मान रहे हैं.सहरसा टाईम्स को ये इस वाकये पर अपनी सफाई देने के साथ--साथ इस भूल को सुधारने का भी भरोसा दिला रहे हैं. 
जाहिर तौर पर यह हैरतअंगेज और चौंकाने वाली घटना है.इसमें कोई शक नहीं है पुलिस के अधिकारी मौक़ा ए वारदात पर जाने की जगह अपने कार्यालय,या फिर अपने आवास से तफ्तीश करते हैं,यह उसी की बानगी है.आगे देखना दिलचस्प होगा की पुलिस के बड़े अधिकारी इस बड़ी भूल का किस तरह से सुधार कराते हैं और जांच अधिकारी पर कैसी कार्रवाई करते हैं.वैसे सहरसा टाईम्स इस मामले में पीड़ित को इन्साफ मिलने और जांच अधिकारी पर कार्रवाई होने तक,इस मामले को सिद्दत से उठाता रहेगा.

4 टिप्‍पणियां:

  1. नवहटा अंचल के शाहपुर पंचायत मैं सरकारी गेहूँ की काला बजारी खुले आम हो रहा हैं सरकारी गेहूँ चावल
    को खाघ की बोरी मैं पलटकर बजार मैं जाकर बेच देता हैं

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  2. सघन आबादी वाले सड़क पर गाड़ियाँ तेजी से चलाते हैं बच्चे बाल बाल बच जाते है

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  3. नवहटा अंचल के शाहपुर पंचायत मैं सरकारी गेहूँ की काला बजारी खुले आम हो रहा हैं सरकारी गेहूँ चावल
    को खाघ की बोरी मैं पलटकर बजार मैं जाकर बेच देता हैं

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  4. देवनारायन मिस्रि ने देखा गेहूँ चावल का काला बजारी

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