मार्च 23, 2012

कोसी महोत्सव में बबाल क्यों

दो दिवसीय कोसी महोत्सव के दूसरे दिन 18 मार्च की रात में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण प्रसिद्ध पार्श्व गायक कुमार शानू और उनके साथ आये बाली ब्रम्हभट्ट थे.शाम आठ बजे जैसे की कार्यक्रम का आगाज हुआ की लोग बाबले हो गए.कार्यक्रम की शुरुआत शानू के म्यूजिकल टीम की गायिका अनुराधा ने अपनी मदहोश आवाज से की.थोड़ी देर के बाद जैसे ही कुमार शानू मंच प़र आये और गाना शुरू किया की लोग झुमने और थिरकने लगे.एक से बढ़कर एक गीतों की बारिश होने लगी और लोग अपना आपा खोते गए.20 से 25 हजार की तायदाद में उमड़ी भीड़ धीरे--धीरे अनियंत्रित होने लगी.जाहिर सी बात है की स्थिति हाथों से निकल जाए यानि भीड़ पूरी तरह बेकाबू हो जाए इससे पहले ही प्रशासन और पुलिस के अधिकारियों ने थोक में तैनात पुलिस जवानों के बूते खूब ग़दर मचाया.लोगों को दौड़ा--दौड़ा प़र पिटाई की गयी.पुलिस बल प्रयोग कर रही थी तो लोग भी अपने तरीके से जबाबी कारवाई कर रहे थे.लोगों ने कार्यक्रम के दौरान ना केवल सैंकड़ों कुर्सियां तोड़ीं बल्कि मरकरी भी खूब फोड़े.स्टेडियम परिसर और परिसर के बाहर बने कई तोरण द्वार को लोगों ने तोड़ डाला.यही नहीं पांडाल को भी बुरी तरह से क्षतिग्रस्त कर दिया.इधर शानू जलवे बिखेड़ते रहे उधर भगदड़ मची रही.कहना लाजिमी है की पुलिस की मनमानी और खूब गुंडागर्दी हुई लेकिन मीडिया का कैमरा इस दौरान पूरी तरह से खामोश रहा.मीडिया की खामोसी की वजह यह थी एक तो अनियंत्रित भीड़ को पीछे के हिस्से से खदेड़ा जा रहा था जहां मीडिया का आसानी से पहुंचना नामुमकिन था तो दूसरा मीडिया के लोग कुमार शानू के सामने डी के अंदर कार्यक्रम को कवर करने में थे.आप जान लें की पुलिस--प्रशासन के अधिकारी और पुलिस जवानों की एक बड़ी पलटन डी के बाहर तैनात थी जो मीडियाकर्मी को एक तरह से नजर बन्द किये हुए थी.मीडियाकर्मी को डी के बाहर निकलने ही नहीं दिया गया

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*अपनी बात*

अपनी बात---थोड़ी भावनाओं की तासीर,थोड़ी दिल की रजामंदी और थोड़ी जिस्मानी धधक वाली मुहब्बत कई शाख पर बैठती है ।लेकिन रूहानी मुहब्बत ना केवल एक जगह काबिज और कायम रहती है बल्कि ताउम्र उसी इक शख्सियत के संग कुलाचें भरती है ।