अगस्त 18, 2011

दिल्ली में अन्ना की हुई गिरफ्तारी का विरोध सहरसा में




दिल्ली में अन्ना की हुई गिरफ्तारी का विरोध देश के कोने--कोने में हो रहा है.इसी कड़ी में अन्ना की इस गिरफ्तारी को लेकर सहरसा के लोग खासे आंदोलित होकर लामबंद हो रहे हैं.बीते काल दिनभर सहरसा में तेज बारिश होती रही और इस झमाझम बारिश में यहाँ के युवाओं ने विरोध जुलूस निकाला.अन्ना तुम मत घबराना के गगनभेदी नारों के साथ युवाओं की टोली शहर की मुख्य सड़कों से होते हुए गली-मुहल्ले होकर गुजरी जिसमें युवाओं ने केंद्र सरकार की तीखी भर्त्सना करते हुए लोगों से अन्ना के समर्थन में सड़कों पर उतरकर आन्दोलन करने का आह्वान किया.
     यह नजारा है सहरसा के कुंवर सिंह चौक का.शाम के चार बजने वाले हैं.तेज बारिश हो रही है लेकिन इस बारिश को धता बताते हुए युवाओं का जत्था यहाँ मोटरसाईकिल पर सवार होकर अन्ना की गिरफ्तारी के विरोध में नारेबाजी कर रहा है.युवाओं का काफिला सुबह से ही जिला मुख्यालय के विभिन्य मार्ग से गुजरते हुए गली--मुहल्लों तक घूम--घूमकर लोगों से अन्ना के पक्ष में सड़क पर उतरकर आन्दोलन करने की अपील करता रहा.इन आन्दोलनकारी युवाओं का कहना है की केंद्र में बैठी सरकार अंग्रेजी हुकूमत की याद ताजा कर रही है.अगर अन्ना को जल्द रिहा नहीं किया गया तो वे ऐसा आन्दोलन शुरू करेंगे जिसे केंद्र सरकार संभाल नहीं पाएगी. 
       अन्ना को लेकर पूरा देश खौल और ऊबल रहा है.अन्ना की गिरफ्तारी से अन्ना के आन्दोलन का दमन तो कतई संभव नहीं है हाँ,इससे अन्ना के मसूबे को और बल ही मिलेगा और जो लोग इस आन्दोलन से छूट रहे थे वे भी अब खुद को अन्ना के साथ शामिल कर लेंगे.बाबा रामदेव की तरह सरकार के लिए यह सौदा आसान नहीं होगा.बाबा रामदेव आध्यात्म के चोला में राजनीति के छद्दम से पछाड़ खा गए लेकिन अन्ना राजनीति और कूटनीति का हर दाँव जानते हैं.

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अपनी बात---थोड़ी भावनाओं की तासीर,थोड़ी दिल की रजामंदी और थोड़ी जिस्मानी धधक वाली मुहब्बत कई शाख पर बैठती है ।लेकिन रूहानी मुहब्बत ना केवल एक जगह काबिज और कायम रहती है बल्कि ताउम्र उसी इक शख्सियत के संग कुलाचें भरती है ।