अप्रैल 04, 2011

कोशी की त्रासदी और सरकार

                                                    कोशी   की त्रासदी और सरकार

 चन्दन सिंह की रिपोर्ट  
 सहरसा      04-04-2011

2008 कोशी   की त्रासदी जिसे कोई अपने दिलो दिमाग से भुला नहीं सकता. सुनामी से भी ज्यादा    दर्दनाक वह मंजर ... मौत के मुँह मै समाता पूरा का पूरा गांव , मौत को करीब से देखने का मंजर , चोट भरी वर्षा की बूंदों मै माँ की गोद मै नंगा बच्चा जिसे माँ बचाने  के लिए कोसो दूर भागती चली जा रही ,  किसी को  मौत से लड़ के  अपने पुर्बजो के धरोहरों को बचाने का ज़िद ......
   जिसे हमने आपने और हमारी लोकतान्त्रिक केंद्र व राज्य की सरकारे भी जाना .. जी हाँ ......... जब केंद्र सरकार ( कांग्रेस )  के भीष्मपिता  ( मनमोहन जी ) बाढ़ ग्रस्त क्षेत्रो का दौरा किया तब इसे आननफानन में इसे राष्ट्रीय आपदा घोषित किया ... लोगो मै नई उम्मीद तो जगी लेकिन...... सारे के सारे अधूरे सपने बनकर रह गए. जितनी भी सरकारे आई सभी ने इसे प्राकृतिक आपदा  बता कर पल्ले झार लिए .... अब जनता किया करे..... सिर्फ व सिर्फ उम्मीद के सहारे समय बीतता चला जा रहा है. कोशी की आक्रामकता हर वर्ष जिंदगियो को तबाह करती है... परन्तु २००८ की आक्रामकता ने उन क्षेत्रो को नस्तानाबुत किया.. जिसने कभी सोचा तक नहीं था ... बाढ़ को देखने और उसका सामना  करने का तजुर्बा  इन्हें नहीं था..... ख़त्म हो गया सब कुछ मिट गया पूरा का पूरा गांव .... कुशहा तटबंध जंहा टूटा वंहा किया कोई बस्ती थी... क्या हमने कभी ऐसा सवाल अपने सरकार से किया ? येनकेन प्रकारेण इससे भुलाया जा रहा है ...... क्या हमने बाढ़ प्रभावित्  क्षेत्रो मै  कभी उन घरो को झाकने का दुष्साहस किया जिनका सब कुछ  बर्बाद हो गया . मुसलाधार बारिस  मै.... कराके की ठण्ड  व  चिलचिलाती धुप मै कैसे रहते है ..... जी नहीं ...हमारी  सरकारे सिर्फ और सिर्फ हवाई पूल का निर्माण किया .... अपने जेबों को भरे ...... जिन दलालों, कर्मचारिओ  व जन पर्तिनिधि को सही से दो वक्त का खाना नसीब नहीं होता  था.... वह आज राजशाही तरीके से रह रहा है बाढ़ आने से तो इनकी बल्ले - बल्ले हो गई. राज्य मै नई सरकार थी..... लोगो को  इस सरकार से काफी उम्मीदे थी , लेकिन आज हकीकत कुछ और है...... जिससे सभी अच्छी तरह से वाकिफ़ नहीं  है.... हमारी सोच का बाजारीकण हो चूका है... हम सिर्फ अपने लिए सोचते है ... हम अंग्रेजो से आजाद तो हुए परन्तु हम और हमारा पिछरा समाज और दलदल मै फंसता चला जा रहा है.... सरकारे कहती है बिहार बदला है..... लेकिन बिहार का परिदृश्य कुछ ओर बयां कर रही है.... सरकार कहती है बहुरास्ट्रीय कंपनियों के आने से बिहार की आर्थिक तंगी दूर हो रही है.... मगर ये सिर्फ दिखाबा है..ये सिर्फ पूंजीपतियो के  हितो मै है जिन्हें न सामाजिक सरोकार व मानवीय सरोकार से मतलब है ......
          वाहवही लूट रही ये राज्य के वर्तमान सरकार जिस तरह विकास का ढोल बजवा रहा है . क्या हमने इस सरकार से सवाल किया... जी नहीं ..... यंहा घंटी बंधने वाली बात हो जाती है.... तानासाह  सरकार के सामने कोई भी अपनी जुबान नहीं चला सकता..... जो हो रहा है होने दो... सब ठीक चल रहा है यंहा खामोश मंजर है..... सब चुप है...... लोकतंत्र की दुहाई देने वाली ये मीडिया भी सरकार की पीछ लग्गू  हो गई है... कुछ लिखा या दिया तो विज्ञापन नहीं मिलेगा.....
         आज भी आप अगर बाढ़ प्रभावित क्षेत्रो का दोरा करेंगे तो आपको यह बिकास का नारा सब बकबास लगेगा..... अपने आपसे सवाल - दर - सवाल करते चले जायेंगे.... मेरा कहना तो सिर्फ इतना है कि हर सूरत मै यंहा कि दशा सुधरनी चाहिए..... इन्हें अच्छी सुविधा प्रदान किया जाय..... जिससे इनके दर्दो को मिटाया जा सके.... ये फिर से अपनी उजरी हुई बस्ती को बसा सके......  

9 टिप्‍पणियां:

  1. you have taken our real problems through website. thank you very much for the same. I wish you all the best and success in your carrier

    Sanjay Sudhanshu

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  2. best of luck for your elegant start.i hope that this will get success and prov that it is the real mirror of our society.

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  3. जी. प्रयास अच्छा है. मेरी जो जरूरत समझें आदेश करें. आपके अच्छे कवरेज के लिए कोटिशः साधुवाद. अगर वे भी जागें जो सोये हैं तो बात कुछ बनेगी.
    खुश रहो और खुश रखने की कोशिश करो!

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  4. Good attempt through nice way. keep it up. But try to edit the matter before upload on site coz here is a lot errors related to language. i hope this is opening only not the end of a grassroot journalism. Best or Luck.

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  7. best of luck for your elegant start.i hope that this will get success and prov that it is the real mirror of our society .TO AGNI PUSTAK BHANDAR SAHARSA ,AMIT ANAND

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  8. नमस्कार

    अमीत आनंद जी बहुत बहुत धन्यवाद आपने कोशी कि चिख़ को देखा और अपना विचार लिखा शुक्रिया

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  9. hello sir apna is site pai mara shop ka v add da dijya agni pustak bhandar d b road saharsa

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*अपनी बात*

अपनी बात---थोड़ी भावनाओं की तासीर,थोड़ी दिल की रजामंदी और थोड़ी जिस्मानी धधक वाली मुहब्बत कई शाख पर बैठती है ।लेकिन रूहानी मुहब्बत ना केवल एक जगह काबिज और कायम रहती है बल्कि ताउम्र उसी इक शख्सियत के संग कुलाचें भरती है ।