फ़रवरी 11, 2013

लीकतंत्र ने जमकर लूटा बच्चों के परिजनों को

नवोदय विद्यालय प्रवेश परीक्षा के प्रश्न पत्र नाम पर लाखों का ठगी।।। 
सहरसा टाईम्स: एक बार फिर शिक्षा माफियाओं के गोरख खेल में प्रश्नों के लीकतंत्र ने बच्चों के परिजनों को जमकर लूटा। बताना लाजिमी है की आयोजित हुयी जवाहर नवोदय विद्यालय प्रवेश परीक्षा के प्रश्न पत्र शनिवार की  रात से ही सहरसा बाजार में बिक रहे थे। यूँ बिक्री का यह दौर कल  सुबह में भी जारी था।हद की इंतहा यह है की बाजार में प्रश्न पत्र बेचे जा रहे थे लेकिन इसकी कोई भनक तक जिला प्रशासन को नहीं थी। 25000 हजार से लेकर 200 रूपये तक में प्रश्न--पत्र बिके। हांलांकि जब  परीक्षा शुरू हुयी और परीक्षा में बच्चों को मिले प्रश्न--पत्र से जब इस लीक हुए प्रश्न--पत्र का मिलान किया गया तो इसका उससे मिलान नहीं हुआ।जाहिर सी बात है की शिक्षा माफियाओं के खेल में बच्चों के परिजन न केवल ठगे गए बल्कि परिजनों को लाखों का चूना भी लगा।
सदर एस.डी.ओ राजेश कुमार
सहरसा टाईम्स ने इस गोरख धंधे की जानकारी जिला प्रशासन को दी,तब जाकर अधिकारियों की नींद टूटी और वे परीक्षा केंद्र पर पहुंचकर लीक  प्रश्न--पत्र का मिलान बच्चों के बीच बांटे गए प्रश्न--पत्र से करने लगे। प्रश्न--पत्र नकली निकले। सहरसा टाईम्स के सवाल का जबाब देते हुए प्रशासन के अधिकारियों ने जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कारवाई का भरोसा दिया है। यूँ बताते चलें की इससे पहले भी सहरसा में प्रश्न--पत्र लीक होने का कई बार गोरख खेल हो चुका है जिसमें जिला प्रशासन किसी भी तरफ की हल्की कारवाई करने तक में भी आजतक कामयाब नहीं हो सका है। 50 सीट के लिए नवोदय की इस प्रवेश परीक्षा में 2777 परीक्षार्थी शामिल हुए थे जिसके लिए जिला मुख्यालय में चार केंद्र बनाए गए थे।
प्रश्न--पत्र का मिलान करते अधिकारी
 परीक्षा केंद्र पर पहुंचे अधिकारी लीक प्रश्न--पत्र का मिलान बच्चों के बीच वितरित प्रश्न--पत्र से किये  ।लेकिन वह नकली साबित हुआ। इस मौके पर सहरसा टाईम्स ने सदर एस.डी.ओ राजेश कुमार से कई तल्ख़ सवाल किये। इन्होनें पिछले साल नवोदय प्रवेश परीक्षा में लीक हुए प्रश्न पत्र को सही बताते हुए कारवाई की अनुशंसा का पर्तिवेदन जिलाधिकारी सहरसा को समर्पित किया था।सहरसा टाईम्स से आज खुलकर उन्होनें इसको लेकर जिक्र भी किया लेकिन उसका परिणाम क्या निकला पूछने पर वे झेंपते दिखे। जाँच करते अधिकारी
सहरसा में शिक्षा माफियाओं की बल्ले---बल्ले है।वे जमकर चांदी काट रहे हैं लेकिन जिला प्रशासन उसपर किसी भी तरह की कारवाई करने में अभीतक समर्थ नहीं दिख रहा है।

फ़रवरी 09, 2013

संविदा पर बहाल न्याय के लिए ANM की भूख हड़ताल

संविदा की अवधि विस्तार के लिए भूख हड़ताल पर 4 फ़रवरी से बैठी ए.एन.एम की हालत बिगड़ी
ए.एन. एम कंचन
सहरसा टाईम्स संविदा की अवधि विस्तार के लिए बीते 4 फरवरी से सिविल सर्जन कार्यालय के परिसर स्थित जिला स्वास्थ्य समिति के बरामदे पर  अनिश्चितकालीन  भूख हड़ताल पर बैठी ए.एन. एम कंचन की हालत बीते दोपहर बाद काफी बिगड़ गयी.पिछले तीन साल से स्वास्थ्य विभाग के बड़े अधिकारियों के साथ कुकृत्य नहीं करने की सजा भोग रही एक अबला के जंग के आज पांचवें दिन कई कर्मचारी संघ के साथ-साथ कई सामाजिक संगठन भी इस महिला के समर्थन में न केवल उतर गए हैं बल्कि इस जघन्य अन्याय के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करने का एलान भी कर दिया है।बताना लाजिमी है की पीड़िता ANM कंचन कुमारी ने न्याय के लिए बीते वर्ष 12 अक्तूबर से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठी थी लेकिन उस वक्त सहरसा टाईम्स की पहल से एक सप्ताह में न्याय का भरोसा दिलाकर 13 अक्तूबर की रात में पीड़िता का अनशन जिला प्रशासन ने खत्म करा लिया था।लेकिन हद की इन्तहा देखिये की उस वक्त भूख हड़ताल खत्म कराने में तेजी दिखाने वाला जिला प्रशासन अपने वायदे पर आजतक खड़ा नहीं उतरा और ठगी और छली गयी कंचन कुमारी को 4 फ़रवरी से एक बार फिर से भूख हड़ताल पर बैठना पड़ा।आज भूख हड़ताल का छठा  दिन है लेकिन निर्लज्ज बने स्वास्थ्य महकमा से लेकर जिला प्रशासन में कहीं से भी संवेदना का स्पंदन नहीं दिख रहा है।
इधर स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के पहले से मिल रहे समर्थन को देख अन्य कर्मचारी संघों ने भी कंचन के अनशन को जायज ठहराते हुए उसे अपना समर्थन दे दिया है.यही नहीं विभिन्य सामाजिक संगठनों ने भी कंचन के पक्ष में उतरकर उसे न्याय दिलाने के लिए पहल शुरू कर दी है.
सहरसा के सिविल सर्जन भोला नाथ झा
कंचन के दुबारा भूख हड़ताल पर बैठने को लेकर हमने सहरसा के सिविल सर्जन भोला नाथ झा से जबाब--तलब किया।हमें 13 अक्तूबर 2012 के सिविल सर्जन और आज के सिविल सर्जन में खासा बदलाव नजर आया.आज सिविल सर्जन साहब कह रहे थे की यह उनके हाथ की बात नहीं है डी.एम साहब ने आगामी 13 फ़रवरी की तिथि कंचन के मामले पर विचार और फैसले के लिए मुक़र्रर कर रखी है.जो भी होगा वह 13 फ़रवरी को ही होगा.लेकिन सिविल सर्जन साहब पर कंचन को भरोसा नहीं है.आखिर उसे भरोसा हो भी तो कैसे.
कंचन को न्याय दिलाने के लिए लामबंदी काफी तेज हो चुकी है.ऐसे में इस मामले को जल्द निपटा लेना ही स्वास्थ्य महकमे की सेहत के लिए बेहतर होगा.वैसे बिना बड़ी घटना के नींद से नहीं जागने की यहाँ पुरानी आदत है.आगे देखना दिलचस्प होगा की इस मामले में स्वास्थ्य महकमा और जिला प्रशासन इसबार कैसी और कितनी ईमानदार तेजी दिखाता है.सहरसा टाईम्स फलाफल पर पूरी तरह नजर जमाये हुए है।

फ़रवरी 08, 2013

आखिर मासूम को न्याय देने में क्यों हो रही है देरी

17 दिसंबर को महज 10 वर्षीय दलित बच्ची की सामूहिक दुष्कर्म के बाद गर्दन मरोड़कर हुयी ह्त्या मामले में अभीतक पुलिसिया जांच का नतीजा ढ़ाक के तीन पात ।।।।।।।।।।। 
बीते 17 दिसंबर को कोसी दियारा इलाके के सिमरी बख्तियारपुर थाना क्षेत्र के बेलवारा पुनर्वास गाँव में दस वर्षीय बच्ची की सामूहिक दुष्कर्म के बाद ह्त्या मामले में सहरसा पुलिस ना केवल हीला---हवाली करती दिख रही है बल्कि इस मामले को पूरी तरह से दबाने और इन्साफ का सर कलम करने में जुटी हुयी है।मृतक बच्ची के परिजन का कहना है की घटना में शामिल गांधी यादव,बालेश्वर मुखिया और लखन मुखिया तीन लोगों का उनलोगों ने नाम भी दिया है लेकिन पुलिस के बड़े अधिकारी पैसे खाकर आरोपियों को बचाने में जुटे हुए हैं।बीते दिनों राज्य अनुसूचित जाति आयोग की टीम विभिन्य मामलों की तफ्तीश में सहरसा पहुंची थी।टीम सहरसा परिसदन में ठहरी थी जहां पीड़ित परिवार ने पहुंचकर आयोग के सामने अपनी पीड़ा से उन्हें अवगत कराया।आयोग ने संज्ञान लेते हुए पीड़ित परिवार को इन्साफ दिलाने का भरोसा दिलाया है।
  हम आपसे एक सवाल करना चाहते हैं।पुरे देश के साथ---साथ दिल्ली की दामिनी के साथ हमें भी सहानुभूति है लेकिन जिसतरह से पूरा देश उसके लिए खडा हो गया,आखिर सुधा के लिए बड़ी भीड़ की बात तो छोडिये, सहरसा टाइम्स को छोड़कर कोई भी सामने क्यों नहीं आया।क्या सुधा दलित परिवार की एक गरीब की बेटी है जहां से सियासतदान वोट दारु के एक बोतल में खरीद लेते हैं,इसलिए किसी के दिल में ना तो कोई हरकत हुयी और ना ही कहीं से कोई आवाज ही आई। मृतक बच्ची के परिजन का कहना है की घटना में शामिल गांधी यादव,बालेश्वर मुख्या और लखन मुखिया तीन लोगों का उनलोगों ने नाम भी दिया है लेकिन पुलिस के बड़े अधिकारी पैसे खाकर आरोपियों को बचाने में जुटे हुए हैं।जाहिर तौर पर परिजन पुलिस को मुकम्मिल कटघरे में खडा कर रहे हैं।
उपाध्यक्ष डॉक्टर योगेन्द्र पासवान
राज्य अनुसूचित जाति आयोग के उपाध्यक्ष डॉक्टर योगेन्द्र पासवान ने इस मामले को काफी गंभीरता से लिया और तुरंत सिमरी बख्तियारपुर के एस.डी.पी.ओ सत्यनारायण प्रसाद को बुलाया और जमकर उनका क्लास लिया। सहरसा टाईम्स को इन्होनें बताया की उन्होनें इस पुलिस अधिकारी को एक माह का समय दिया है जिसमें उनको दोषियों को गिरफ्त में लेकर सलाखों के भीतर भेजना होगा।अगर इसमें कहीं से कोई कोताही हुयी तो वे सेक्शन 4 के तहत उनपर कारवाई की अनुशंसा राज्य सरकार से करेंगे।

हम नहीं सुधरेंगे की तर्ज पर काम करने वाले सहरसा पुलिस अधिकारी के रवैये को लेकर कुछ भी मत पूछिये।इस गंभीर मामले को लेकर सिमरी बख्तियारपुर के एस.डी.पी.ओ सत्यनारायण प्रसाद कहते हैं की पीड़ित के परिजनों ने जिन लोगों के नाम दिए हैं,तफ्तीश में उनके विरुद्ध साक्ष्य नहीं मिल प् रहा है।वैसे वे गहन जांच में जुटे हैं।जल्द ही इस जघन्य मामले पर से पर्दा उठ जाएगा।
असमय परलोक पहुँच चुकी मासूम सुधा हुक्मरानों से लेकर समूचे तंत्र को ना केवल कटघरे में खड़ा कर रही है बल्कि यह सवाल भी करती नजर आ रही है की आखिर उसे मौत की नींद क्यों सुला दिया गया और अब आखिर उसे इन्साफ कौन,कब और कैसे दिलाएगा।सहरसा टाईम्स ने उसे इन्साफ दिलाने की कोशिश शुरू की है।आगे रब जाने।

फ़रवरी 07, 2013

शिकागो में हिन्द का परचम लहरा रही सहरसा की बेटी का हुआ सम्मान

रीता सिंह, शिकागो (अमेरिका)
सहरसा टाईम्स: शिकागो में हिन्द का परचम लहरा रही सहरसा की बेटी रीता सिंह का आज अपने घर आने पर सहरसा में ना केवल उनका भव्य सम्मान हुआ बल्कि कोसी की बेटी को अपने बीच पाकर यहाँ के लोग जद से भाव विह्वल भी हुए।बताना लाजिमी है की सहरसा जिले के भरौली गाँव की रहने वाली रीता सिंह फेडरेशन ऑफ इन्डियन एशोसियेशन शिकागो(अमेरिका)की चुनी गयी पहली महिला अध्यक्षा हैं।शिकागो से अपने पति और बेटी के साथ सहरसा पहुंची रीता सिंह का सहरसा जिला मुख्यालय स्थित विजया होटल में आज शाम भव्य अभिनन्दन किया गया।
-यह नजारा है सहरसा के विजया होटल का। देखिये कोसी की बेटी रीता सिंह का यहाँ पर किस तरह से अभिनन्दन किया जा रहा है।फैशन डिजायनिंग इंजीनियर रीता सिंह अपने सॉफ्टवेयर इंजीनियर पति संजीव कुमार सिंह के साथ मिलकर शिकागो में एस.आर इंटरनेशनल इंक सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट आई.टी इन्फ्रास्ट्रक्चर मैनेजमेंट और आई.टी एजुकेशन के लिए काम करती हुयी आज फेडरेशन ऑफ इन्डियन एशोसियेशन शिकागो(अमेरिका) की पहली महिला अध्यक्षा बनकर अपने देश के साथ--साथ सूबा बिहार और अपने कोसी इलाके का मान बढ़ाया है।जिले के भरौली गाँव की रहने वाली रीता सिंह का भव्य अभिनन्दन देखिये कितनी गर्मजोशी से स्थनीय विजया होटल में किया जा रहा है।
 कोसी प्रमंडल के आयुक्त विमलानंद झा,प्रसिद्ध चिकित्सक गोपाल शरण सिंह,कई वरीय अधिकारी सहित शहर के कई गण्यमान लोग इस अभिनन्दन समारोह के गवाह बने।रीता सिंह और आयुक्त ने दीप प्रज्ज्वलित करके इस कार्यक्रम की शुरुआत की।इस मौके पर रीता सिंह को मखान का माला पहनाया गया और अनगिनत उपहार देकर उन्हें सम्मानित किया गया।इस सभा को आयुक्त सहित कई लोगों के साथ खुद  रीता सिंह ने भी संबोधित किया। 
रीता सिंह से सहरसा टाईम्स ने खास बातचीत की।
रीता सिंह
सहरसा टाईम्स ने उनके पद को लेकर की उसका क्या--क्या फंक्शन हैं और इतनी ऊँचाई पर पहुँचने का श्रेय वह किसे देती हैं और कोसी क्षेत्र के लोगों को क्या सन्देश देना चाहती हैं,जैसे कई सवाल किये जिसका उन्होनें बड़ी बेबाकी से जबाब दिया।रीता ने कहा की अमेरिका में अनगिनत संगठन और कमिटी हैं जिसमें फेडरेशन ऑफ इन्डियन एशोसियेशन शिकागो(अमेरिका),सभी की अम्ब्रेला बॉडी है। भारत और अमेरिका के बीच विभिन्य मुद्दों के लिए यह सेतु का काम करती है। उन्होनें अपनी उपलब्धि को लेकर कहा की उन्होने एक छोटा सा सपना देखा था जिसमें उनके पति,मायके और ससुराल वालों ने भरपूर साथ और मुश्ते ऊर्जा दी। 
उन्होनें कहा की मेरी उपलब्धि का सारा श्रेय सभी को जाता है। रीता सिंह ने अपने इस खैर --मकदम को लेकर कहा की वे हर साल अपनी जन्म भूमि पर आती रही हैं लेकिन इसबार उन्हें इतना मान--सम्मान और प्यार मिलेगा,ऐसा उन्होनें सपने में भी नहीं सोचा था।रीता सिंह ने कोसिवासियों को सन्देश देते हुए कहा की दुनिया में कुछ भी असंभव और नामुमकिन नहीं है। आगे बढ़ने के लिए अगर दिल से ठान लिया तो समझिये शिखर उनके इन्तजार में खड़ा है।बताना लाजिमी है की रीता सिंह के पिता जे.बी सिंह जहां सेवानिवृत सहायक निदेशक इंटेलिजेंस ब्यूरो,गृह मंत्रालय,भारत सरकार अभी ज़िंदा है वहीँ दादा स्वर्गीय शिवजी प्रसाद सिंह स्वतंत्रता सेनानी थे।
जाहिर तौर पर आज सहरसा के लिए गौरव का दिन था,क्यों की आज दूर देश में अपने देश का नाम रौशन कर रही बेटी अपने घर आई थी।सहरसा का कोटि--कोटि आज पुलकित हो रहा था।रीता के नाम का शौर्य और उनकी कीर्ति का डंका चहुँदिश ताकयामत बजता रहे,सहरसा टाईम्स दिल से दुआ करता है।रीता सिंह का पूरा परिवार खुशियों से तर रहकर देश का नाम रौशन करता रहे।दुआ।।।।खालिश ईमानदार दुआ।

फ़रवरी 06, 2013

थाना जाने में डर लगता है साहेब

21 वीं सदी में विभिन्य थानों की पुलिस से अभी भी खौफ खाते हैं गरीब और निरीह लोग.......

21 वीं सदी में एक तरफ जहां लोग चाँद पर जमीन की खरीददारी करने लगे हैं तो दूसरी तरफ ग्रामीण इलाके के निरीह और गरीब लोग इन्साफ के लिए आज भी थाना जाने से डरते और कतराते हैं।सहरसा टाईम्स आज एक ऐसी खबर से आपको रूबरू कराने जा रहा है जिसे देख--पढ़कर एकबार आपको यकीन ना हो लेकिन यह सच की ऐसी कहानी है जो पुलिस की पुरानी और डरावनी छवि को सिद्दत से उजागर कर रही है।सहरसा के बसनही थाना के सह्सोल गाँव के रहने वाले एक गरीब ब्राह्मण को गाँव के ही कुछ दबंग लोगों ने मारपीट कर बुरी तरह से जख्मी कर दिया।बेचारा यह बेबस और लाचार पीड़ित थाने में फ़रियाद करने की बजाय सीधा सहरसा एस.पी के दफ्तर इसलिए चला आया की क्योंकि उन्हें थाना जाने में डर लगता है।इनकी मानें तो थाने में फ़रियाद सुनाने के बाद पुलिसवाले रूपये लेते हैं तब उनकी सुनवाई होती है।एस.पी को अपना दुखड़ा सुनाने और उनसे इन्साफ मांगने आये यह प्रौढ़ पीड़ित एस.पी कार्यालय के बाहर बिस्तर लगाकर इस उम्मीद में लेट गए की बड़े हाकिम को उनपर दया आएगी और वे उन्हें न्याय देने उनके पास आयेंगे।लेकिन यहाँ भी उनकी किस्मत उनको दगा दे गगी।एस.पी साहब किसी काम के सिलसिले में जिला के किसी अन्य जगह पर थे।इधर एस.पी कार्यालय के बाहर सहरसा टाईम्स की मौजूदगी की भनक जैसे ही सदर थाना पुलिस को लगी की उसने तुरंत पीड़ित को यहाँ से उठाया और उन्हें लेकर अस्पताल के लिए चलते बने। 
एस.पी कार्यालय के ठीक सामने सड़क पर बिस्तर लगाए यह जख्मी पीड़ित शिवेन्द्र रॉय हैं। इनके चेहरे और शरीर पर कई गहरे जख्म हैं। सह्सोल गाँव के रहने वाले इस पीड़ित की यह गत गाँव के ही एक दबंग पोस्टमास्टर और उनके गुर्गों ने बनायी है।ये जनाब अपने क्षेत्र के बसनही थाना इन्साफ के लिए फ़रियाद लेकर इसलिए नहीं गए क्योंकि उन्हें थाना जाने में डर लगता है।ये बता रहे हैं की थाना में पीड़ित की हैसियत देखकर पुलिस वाले उनसे  रूपये वसूलते हैं।वे गरीब हैं और उनके पास पैसा नहीं है इसलिए वे इन्साफ के लिए सीधे बड़े हाकिम के पास चले आये हैं।देखिये बिस्तर लगाये इस पीड़ित को।सहरसा टाईम्स को किस तरह से वे अपनी विपदा सूना रहे हैं।
सदर इन्स्पेक्टर सूर्यकांत चौबे
इस वाकये को लेकर सहरसा टाईम्स ने जब सहरसा के सदर इन्स्पेक्टर सूर्यकांत चौबे से बात की तो उन्होनें स्वीकार किया की बसनही थाने की पुलिस के डर से वे यहाँ चले आये।लेकिन उन्होनें इन्हें समझा---बुझाकर थाना भेज दिया है।इनके बयान से यह जाहिर हो रहा है की पुलिस का अभी भी गरीब और निरीह जनता में बड़े पैमाने पर भय व्याप्त है।वैसे इनकी नजर में अंग्रेज के समय की पुलिस का खौफ अब लोगों में नहीं है।
पुलिस लाख दावे कर ले की पुलिस आमलोगों की दोस्त और सदैव उसकी मदद को तत्पर रहती है लेकिन जमीनी सच्चाई अभीतक इससे उलट है।आज भी ग्रामीण इलाके में लोग पुलिस का साया भी उनपर ना पड़े,वे इस जुगात में रहते हैं।जाहिर तौर पर पुलिस की छवि अभी भी मददगीर  पुलिस की जगह वसूली पुलिस की बनी हुयी है।

सहरसा टाईम्स की खबर से तेज हुयी पहल

 पिछले पांच दिनों से अपने ही घर में कैद हुए परिवार को घर से निकलने के लिए रास्ता दिलाने की प्रशासन ने शुरू की कोशिश............
सी.ओ साहब सहरसा टाईम्स के साथ
सहरसा टाईम्स की खबर का असर देखिये पिछले पांच दिनों अपने ही घर में से कैद एक परिवार से मिलने के लिए बीते कल 4 जनवरी  को जहां सियासतदान से लेकर सामाजिक कार्यकर्ताओं का जत्था दिनभर पहुंचता रहा वहीँ आज सुबह से प्रशासनिक पहल भी तेज हुयी है।जिला प्रशासन के आलाधिकारी के निर्देश पर मौके पर सी.ओ ने पहुंचकर सहरसा टाईम्स के साथ मिलकर ना केवल विमर्श किया बल्कि दो विकल्प को सी.ओ ने तलाशकर, पड़ोसियों को अपने में समझौता करने सुझाव भी दिया।सी.ओ ने सामाजिक स्तर से समाधान निकालने के लिए पड़ोसियों को दो दिनों का मौक़ा दिया है।अगर सामाजिक पहल से पीड़ित को रास्ता नहीं मिलता है तो शख्ती बरतते हुए जिला प्रशासन खुद रास्ता निकालकर पीड़ित परिवार को न्याय दिलाएगा।सी.ओ ने खुलकर कहा की सहरसा टाईम्स की वजह से वे ना केवल मौके पर पहुंचे हैं बल्कि इस परिवार को हर हाल में जिला प्रशासन रास्ता दिलाकर रहेगा।
सहरसा टाईम्स सिर्फ ख़बरें नहीं बनाता है बल्कि जिनको इन्साफ की दरकार है उसके साथ हरवक्त सिद्दत से खड़ा भी रहता है।सहरसा टाईम्स की वजह से आज जिला प्रशासन के आलाधिकारी की नींद टूटी और उन्होनें मौके पर कहरा के सी.ओ लम्बोदर झा को भेजा है।सी.ओ साहब सहरसा टाईम्स के साथ घूम-घूमकर पीड़ित परिवार को रास्ता दिलाने के लिए पड़ोसियों के साथ--साथ सहरसा टाईम्स से विमर्श करते रहे।उन्होने साफ़--साफ़ लहजे में कहा की सहरसा टाईम्स की वजह से ही वे यहाँ आये हैं और घटना को पूरी तरह से सच भी पा रहे हैं।तत्काल इन्होनें दो विकल्प निकालकर पड़ोसियों के सामने रखे हैं और आपस में मिल--बैठकर उन्हें समाधान के लिए दो दिनों का वक्त दिया है।प्रशासन हर हाल में बंदी बने इस परिवार को रास्ता दिलाकर रहेगा,सी.ओ साहब ने इसका पक्का भरोसा सहरसा टाईम्स को दिया है।
अभी इन्साफ का आधा रास्ता तैयार हुआ है।पीड़ित परिवार को पूरा इन्साफ दिलाने तक सहरसा टाईम्स उनके साथ खडा रहेगा।सच मानिए,इन्साफ की पूरी खबर के साथ हम एक बार फिर आपके सामने दो दिनों के भीतर हाजिर होंगे।

फ़रवरी 04, 2013

सहरसा टाईम्स की खबर का असर


अपने ही घर में पिछले चार दिनों से कैद एक परिवार से मिलने पहुंचे सत्ताधारी जदयू और भाजपा के कई वरिष्ठ नेता /कई सामाजिक कार्यकर्ता भी पहुंचे
मुकेश कुमार सिंह: सहरसा टाईम्स की खबर का असर देखिये की अपने ही घर में पिछले चार दिनों से कैद एक परिवार से मिलने आज ना केवल सत्ताधारी जदयू और भाजपा के कई वरिष्ठ नेता बल्कि कई सामाजिक कार्यकर्ता भी पहुंचे।बताना लाजिमी है की नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं के आने---जाने का यह दौर आज दिन भर जारी रहा।भाजपा ने तो पूरी स्थिति को परखने के लिए मौके पर एक जांच दल को ही भेज दिया था।नेताओं ने कहा की सहरसा टाईम्स की खबर देखकर वे पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे हैं। यहाँ की स्थिति को देखकर वे ना केवल हतप्रभ हो गए बल्कि हालात को बदतर और विकट बताकर सारे नेता और सामाजिक कार्यकर्ता पीड़ित परिवार को सामाजिक पंचायत से रास्ता दिलाने में तुरंत जुट भी गए।
सहरसा टाईम्स की पहल से अचानक तेज हुयी इस हलचल से पीड़ित परिवार को समाधान की नयी उम्मीद जगी है।एक तरफ जहां मौके पर पहुंचे सारे नेता और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सहरसा टाईम्स को सिद्दत से खबर बनाने---लिखने के लिए धन्यवाद दिया वहीँ पीड़ित परिवार के सदस्य भी सहरसा टाईम्स को तहे दिल से धन्यवाद दे रहे हैं।हांलांकि हम बता दें की समाधान के अभी महज प्रयास ही तेज हुए हैं,अभी बंदी बने इस पीड़ित परिवार को निकलने का रास्ता नहीं मिला है।
एक बार फिर हम आपको अजूबी दुखती और टीस से भरी कहानी की तस्वीर दिखाने और हालात से पूरी तरह रूबरू कराने के लिए सदर थाना के रिहायशी मोहल्ला प्रताप नगर लाये हैं।माँ गायत्री के विशाल मंदिर से ठीक लगे इस परिवार की विपत्ति के यूँ तो महीने बीत गए लेकिन बीते चार दिनों से यह परिवार अपने ही घर में बंदी बना हुआ है।अप्रैल 2012 से ही बांस की सीढ़ी के सहारे इनकी जिन्दगी रेंग रही थी लेकिन बीते चार दिनों से वह सीढ़ी भी छीन ली गयी है जिससे यह परिवार अपने ही घर में कैद होकर रह गया है।
जदयू के जिलाध्यक्ष धनिकलाल मुखिया
देखिये सहरसा टाईम्स की खबर का असर।सत्ताधारी दल जदयू के जिलाध्यक्ष धनिकलाल मुखिया अपने दल--बल के साथ यहाँ पहुंचकर स्थिति का जायजा ले रहे हैं।भाजपा ने तो यहाँ एक जांच दल बनाकर ही भेज दिया है।यही नहीं अलग से सामाजिक कार्यकर्ता भी यहाँ पहुंचे हैं।सभी यहाँ पर सहरसा टाईम्स की पहल के नतीजे के तौर पर पहुंचे हैं।जदयू के जिलाध्यक्ष बड़े साफ़--साफ़ कह रहे हैं की सहरसा टाईम्स पर खबर को देखकर ने वे यहाँ आने को विवश हो गए।इनकी नजर में,यहाँ की स्थिति काफी विकट है।वे कहते हैं की पीड़ित परिवार के साथ अन्याय हुआ है।इन्हें सामाजिक पहल से वे रास्ता दिलाएंगे।
भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष सह
वरिष्ठ नेता कृष्ण मुरारी प्रसाद
भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष सह भाजपा के वरिष्ठ नेता कृष्ण मुरारी प्रसाद ने तो अपनी बात की शुरुआत सहरसा टाईम्स को धन्यवाद देते हुए किया।इनकी मानें तो इस परिवार के साथ जघन्य अपराध हुआ है।लगता है की समाज पूरी तरह से संवेदनहीन हो गया है।इन्होनें सुशासन पर भी हमला किया और कहा की पीड़ित परिवार का मामला महीनों से एस.डी.ओ कोर्ट में लंबित है लेकिन इन्हें अभीतक न्याय नहीं मिला।वे सभी मिलकर इनके साथ इन्साफ करायेंगे।


सामाजिक कार्यकर्ताओं  टीपू झा
यही कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी कहा।सामाजिक कार्यकर्ताओं का नेतृत्व टीपू झा कर रहे थे।अब पीड़ित परिवार के सदस्यों से मिलिए। सहरसा टाईम्स की पहल से हो रही तमाम कवायद से इनलोगों को उम्मीद की नयी किरण नजर आ रही है। महीनों से दर्द में डूबे इस परिवार को अब समाधान की चमचमाती किरण दिखने लगी है।निकलने का रास्ता अभी नहीं मिला है लेकिन तेज हुए प्रयास को देखते हुए घर के लोग सहरसा टाईम्स को लाख---लाख धन्यवाद दे रहे हैं।घर के मुखिया सेवानिवृत शिक्षक कमल नारायण झा और उनकी नतिनी पूजा के धन्यवाद के बोल तो थमने का नाम ही नहीं ले रहे थे।
अभी तो सहरसा टाईम्स ने अपनी खबर से सियासतदानों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को इस समस्या से रूबरू होकर इसके समाधान के लिए प्रेरित किया है।हमारी खबर की पूरी हनक तब और नजर आएगी जब पीड़ित परिवार को आने--जाने का मुकम्मिल रास्ता मिल जाएगा और सहरसा टाईम्स उनकी जिन्दगी की रफ़्तार को कैमरे में कैद कर के एक नयी सुबह की कहानी लेकर आपके सामने एक बार फिर हाजिर होगा।जब तक इस पीड़ित परिवार को पूरा का पूरा इन्साफ नहीं मिल जाता है,सहरसा टाईम्स इस परिवार के साथ सिद्दत से खडा रहेगा।  

अपने ही घर में कैद है एक परिवार

बीते चार दिनों से एक परिवार के सभी सदस्य हैं अपने ही घर में कैद, देखो सरकार समाज का बदरंग चेहरा,अधिकारियों का टालू  रवैया  ......
मुकेश कुमार सिंह की कलम से--------
-इंसानियत अब मर चुकी है।रिश्तों के पाए कब के दरक चुके हैं।आज हम सहरसा के एक परिवार की ऐसी कहानी आपको दिखाने और बताने जा रहे हैं जिसे देख और सुनकर आप अपना कलेजा खुद पीट लेंगे।सहरसा के सदर थाना के रिहायशी मुहल्ला प्रताप नगर में एक परिवार अपने ही घर में पिछले चार दिनों से ना केवल बंदी बना हुआ है बल्कि घर से वह निकले तो आखिर कैसे इस उहापोह में सिसक और सुबकियां ले रहा है।आप यह जानकार हैरान हो जायेंगे की घनी आबादी के बीच में बसे इस परिवार को बाहर निकलने का कोई रास्ता ही नहीं है।पड़ोसियों ने इस परिवार के घर के चारों तरफ या तो घर बना डाले या फिर ऊँची दीवारें खड़ी कर दी है।बताना लाजिमी है की अप्रैल 2012 से ही इस परिवार के सभी सदस्य बांस की सीढ़ी  लगाकर दूसरे की दीवार को लांघकर पढने या फिर किसी और काम के लिए जाते थे।लेकिन हैवानियत की इंतहा देखिये की बीते चार दिन से इन्हें सीढ़ी लगाने पर भी मनाही हो गयी है।यूँ बताते चलें की इस घर के मुखिया घर के एक अदद रास्ते के लिए बीते कई महीनों से अधिकारी से लेकर कोर्ट तक में अर्जी लगाते रहे लेकिन किसी का दिल आजतक नहीं पसीजा है।आज आलम यह है की यह परिवार अपने ही घर में बंदी की तरह है।यह घर सुकून के घर की जगह जेल में तब्दील है।सहरसा टाईम्स की पुरजोर दखल के बाद पुलिस के आलाधिकारी मौके पर जरुर पहुंचे लेकिन वे भी इस समस्या का समाधान मोहल्ले में पंचायत कर निपटाने का निर्देश देकर चलते बने।क्या होगा इस परिवार का।इस दर्द,जुल्म और ज्यादती को देखो सरकार। 
हम आपको लेकर सदर थाना के रिहायशी मुहल्ला प्रताप नगर में आये हैं।देखिये किस तरह से अनेकों घरों और दीवारों के बीच इस पीड़ित का घर छुपा हुआ है।यह घर सेवानिवृत शिक्षक कमल नारायण झा का घर है।इनके दो बेटे हैं।एक बेटा पशुपतिनाथ झा मुहाली में इंजीनियरिंग का छात्र है जबकि दुसरा गणपति झा पटना के ए.एन कॉलेज में स्नातक का छात्र है।गुरूजी को सात बेटियाँ हैं।छः की शादी हो गयी है जबकि एक अभी कुंवारी है।इस घर में गुरूजी अपनी पत्नी,एक कुंवारी बेटी,दो नाती और दो नतिनी के साथ रहते हैं।
गुरूजी ने जब अपने इस घर का निर्माण कराया था उस समय आसपास इतने घर नहीं थे और सब कुछ ठीक--ठाक चल रहा था।लेकिन धीरे--धीरे आसपास घर बनने लगे।आसपास लोग ऊँची---ऊँची दीवार भी बनाने लगे।बीते वर्ष 2012 के अप्रैल माह से गुरूजी की मुश्किल बढ़ गयी।इनके घर के चारों तरफ से लोगों ने घर बना लिया और दीवारें भी खड़ी कर ली।शांत और सौम्य स्वभाव के गुरूजी लोगों से मिन्नत करते रहे की उनको निकलने का रास्ता मिले लेकिन किसी ने उनकी एक ना सुनी और आखिरकार गुरूजी वर्ष 2012 के अप्रैल माह से अपने घर में ही कैद होकर रह गए।उसके बाद गुरूजी ने एस.डी.ओ कोर्ट से लेकर डी.एम और कमिश्नर तक रास्ते के लिए अर्जी लगाई लेकिन वहाँ से बस डेट पर डेट मिलता रहा।इस दौरान गुरूजी का पूरा परिवार बांस की सीढ़ी लगाकर ऊँची दीवार को लांघकर अपना---अपना काम करता रहा।गुरूजी को भरोसा था की एक दिन उनके साफ़ इन्साफ होगा और उन्हें आने--जाने के लिए रास्ता मिल जाएगा।लेकिन सुखद परिणाम सामने अभीतक कुछ भी नहीं आया था लेकिन एक बड़ी मुसीबत और आफत जरुर चली आई।
गुरुजी का परिवार जिधर से पिछले कई महीनों से निकल रहा था उसके स्वामी ने अपना घर बनाना शुरू कर दिया और पिछले चार दिनों से गुरूजी के घर के लोगों के आने जाने पर पाबंदी लगा दी।यानि अपने ही घर में कैद का आज चौथा दिन है।स्कूल--कॉलेज नहीं जा पाने की वजह से जहां बच्चों की पढाई रुक गयी है वहीँ घर में राशन--पानी का भी अभाव है।गुरूजी कमल नारायण झा रो---रोकर तो घर के अन्य लोग गुरूजी की पत्नी बुचनी देवी और गुरूजी की नतिनी पूजा कुमारी कातर स्वर में अपनी व्यथा सुनाते हुए सहरसा टाईम्स से इन्साफ की गुहार लगा रहे हैं।
अब गुरूजी की एक और नतिनी इस नन्हीं सी जान सौम्या को देखिये।जिन्दगी का सही माने भी इसे अभी नहीं पता।धन---दौलत,षड्यंत्र और दुनियावी गणित भूगोल से यह पूरी तरह से बेखबर है।अपनी तुतली आवाज में कहती है की रास्ता बंद हो गया है इसलिए वह स्कूल नहीं जा पा रही है।

सदर एस.डी.पी ओ अशोक कुमार दास
सहरसा टाईम्स की पुरजोर पहल और दखल के बाद मौके पर सदर एस.डी.पी ओ अशोक कुमार दास और इन्स्पेक्टर सूर्यकांत चौबे सहित पुलिस के थोक में कई जवान भी यहाँ पहुंचे और गुरूजी की मुसीबत को अपनी नंगी आँखों से देखा।पुलिस अधिकारी ने गुरूजी की मुश्किल को अपने बयान में स्वीकारा भी लेकिन उन्होनें अपनी तरफ से तत्काल किसी तरह के समाधान के लिए कोई पहल नहीं की।इनकी नजर में गुरूजी वर्ष 2012 से ही  सीढियों के रास्ते अपना काम कर रहे थे।पिछले तीन दिन से सीढ़ी हटा दी गयी है।इस मामले का निपटारा वे सामाजिक पंचायत से करवाएंगे।यानि इनका रवैया टालू और बेहद शर्मनाक था।सच मुंह बाए सामने खडा था लेकिन ये सारे अधिकारी अपनी ड्यूटी बजाकर यह से निकलना ही मुनासिब समझा।
कहते हैं की एक अच्छा पड़ोसी भगवान की तरह होता है।अगर सामने कोई दुर्जन पड़ोसी मिल गया तो वह आपके सुख चैन को डंस लेंगे।यहाँ तो गुरूजी सिर्फ और सिर्फ दुर्जन पड़ोसियों से घिरे दिख रहे हैं।सहरसा टाईम्स ने गुरूजी के परिवार को इन्साफ दिलाने के लिए उनके हक़ में आवाज बुलंद की है।जबतक गुरूजी को घर से निकलने का रास्ता यानि मुकम्मिल इन्साफ उनके परिवार को नहीं मिल जाता है हम उनके साथ सिद्दत से ना केवल खड़े रहेंगे बल्कि उनको इन्साफ दिलाकर रहेंगे।

फ़रवरी 02, 2013

कहरा B.D.O द्वारा छेड़छाड़ और दुष्कर्म के प्रयास मामले में तेज हुयी सियासत

सहरसा टाईम्स: बीते 28 जनवरी को मुरली वसंतपुर की दलित पंचायत समिति सदस्या ने B.D.O केशव कुमार झा पर छेड़छाड़ और दुष्कर्म करने के प्रयास का SC/ST थाना में मामला दर्ज कराकर जहां प्रशासनिक हलक में खलबली मचा दी थी वहीँ पुरे जिले में इस घटना को लेकर सनसनी फ़ैल गयी थी। अब इस मामले में खूब सियासत हों रही है। बताना लाजिमी है की पीड़िता और पीड़िता के पति दोनों अभी जख्मी अवस्था में सदर अस्पताल में भर्ती हैं जहां उनका उपचार हो रहा है।सियासतदान अस्पताल पहुंचकर पीड़ितों से ना केवल मिलकर कुशल--क्षेम पूछ रहे हैं बल्कि इस मामले में निष्पक्ष जांच कर दोषी पर कठोर कारवाई की मांग भी कर रहे हैं।इनकी मानें तो इन्साफ नहीं होने पर आगे वे उग्र आन्दोलन करेंगे। इस मामले में आज एक दिलचस्प मोड़ और आ गया है।किसी दुसरे सिलसिले में आज राज्य अनुसूचित जाति आयोग के उपाध्यक्ष और आयोग के कुछ सदस्य सहरसा पहुंचे थे।ये सभी सहरसा परिसदन में ठहरे थे।पीड़िता वहाँ पहुंचकर आयोग के उपाध्यक्ष से मिली और अपनी पीड़ा से उनको अवगत कराया।उपाध्यक्ष ने पुलिस अधिकारी से 15 दिन के भीतर जांच करके रिपोर्ट मांगी है।आयोग के मुताबिक़ जांच में जो कुछ निकलकर आयेगा,उस अनुसार कारवाई होगी।
सबसे पहले सदर अस्पताल चलिए। देखिये राजद जिलाध्यक्ष मोहम्मद ताहिर और लोजपा नेत्री सरिता पासवान किस तरह से वहाँ पहुंचकर पीड़िता का हाल--चाल और घटना को लेकर जानकारी ले रहे हैं।इनकी मानें तो उचित जांच कर पीड़िता को शीघ्रता से न्याय मिलना चाहिए,वर्ना वे आगे उग्र आन्दोलन करेंगे। इधर अस्पताल में भर्ती पीड़िता और उसके पति सहरसा टाईम्स से फ़रियाद कर रहे हैं की B.D.O पर कोई कारवाई नहीं हो रही है।वे न केवल छुट्टा घूम रहे हैं बल्कि अपना सारा काम आराम से कर रहे हैं।उनलोगों को लग रहा है की उनके साथ इन्साफ नहीं होगा।इस स्थिति में वे आत्मदाह या फिर आत्महत्या कर लेंगे। 
देखिये पीड़िता सहरसा परिसदन में अपना दुखड़ा सुनाने के लिए राज्य अनुसूचित जाति आयोग के उपाध्यक्ष डॉक्टर योगेन्द्र पासवान के पास पहुंची है।आयोग ने इस मामले में संज्ञान लेते हुए मुख्यालय डी.एस.पी कैलाश प्रसाद को 15 दिन के भीतर मामले की तटस्थ और पूरी जांच करके रिपोर्ट आयोग को देने का फरमान दिया है।इनकी मानें तो जांच में जो सच निकलकर आयेगा,उसे देखते हुए उचित कारवाई होगी।
आप भी जानिये इस मामले में अभीतक सहरसा पुलिस पूरी तरह से लापरवाह और सुस्त बनी हुयी है।एक तरफ जहां यह मामला एक दलित महिला जनप्रतिनिधि के मान--सम्मान से जुड़ा हुआ है वही B.D.O केशव कुमार झा के अबतक के जीवन काल की सारी जमापूंजी दाँव पर लगी हुयी है।जाहिर तौर पर पुलिस के बड़े अधिकारियों  को सीधा हस्तक्षेप करते हुए इस मामले के तह में उतरकर त्वरित गति से सच को बाहर निकालना चाहिए।हम बताना चाहते हैं की पीड़िता के साथ हमारी भी सहानुभूति है लेकिन कहरा प्रखंड के सभी प्रखंडकर्मी और आसपास के दूकानदार इस मामले को पूरी तरह से B.D.O को बदनाम करने की साजिश बता रहे हैं।इससे इतर अगर B.D.O के पिछले सामाजिक छवि की बात करें तो इनपर चारित्रिक दुर्गुण के अभीतक कोई दाग नहीं मिले हैं।जाहिर तौर पर पुलिस के बड़े अधिकारियों को इस मामले में पूरी तरह से गंभीरता दिखाने की जरुरत थी। पुलिसिया जांच के बाद ही साजिश अथवा घटना का असल रहस्य क्या है,बेपर्दा हो पायेगा।यूँ बताते चलें की सहरसा पुलिस भीड़ देखकर अभियोग की भाषा समझती है।बड़ी घटना से पहले उसको गहरी नींद से जागने की आदत नहीं है।

सुशासन के टल्ली दारोगा

नशे में धुत्त एक सब इन्स्पेक्टर घंटों सड़क किनारे रहा लुढ़का 
सहरसा टाईम्स: सुशासन में पुलिस वाले जो मर्जी में आये वह करने के लिए पूरी तरह से आजाद हैं। देखिये एक सब इन्स्पेक्टर को किस तरह वह शाम ढलने से पहले ही शराब के नशे में धुत्त होकर अपने कर्तव्य की बलि चढ़ा रहा है।घंटों सड़क किनारे यह अंगूर की बेटी की आगोश में लोट--पोट होते रहे। पुलिस के अन्य अधिकारियों को जब हमारी मौजूदगी का अहसास हुआ तो वे अपने सहयोगी द्वारा इज्जत का कबाड़ा करने वाले उस पुलिस अधिकारी को मौके से उठाकर गाड़ी पर लादा और वहाँ से चलते बने।आप यह् जानकार हैरान हो जायेंगे की यह सारा तमाशा सदर थाना के अति व्यस्ततम कचहरी ढाला के निकट हुआ जहां से एस.पी ऑफिस महज 15 मीटर,डी.एम ऑफिस 50 मीटर और कोसी रेंज के डी.आई.जी का कार्यालय महज 100 मीटर दूर था।जनाब का नाम एम.प्रसाद राम है।हमने यह जानने की बहुत कोशिश की इस हाकिम के जिम्मे आखिर कौन से थाना क्षेत्र के लोगों की सुरक्षा की जिम्मेवारी है।लेकिन दुर्भाग्य हमारा की हम यह पता करने में कामयाब नहीं हो सके।

*अपनी बात*

अपनी बात---थोड़ी भावनाओं की तासीर,थोड़ी दिल की रजामंदी और थोड़ी जिस्मानी धधक वाली मुहब्बत कई शाख पर बैठती है ।लेकिन रूहानी मुहब्बत ना केवल एक जगह काबिज और कायम रहती है बल्कि ताउम्र उसी इक शख्सियत के संग कुलाचें भरती है ।