दिसंबर 11, 2012

एलजेपी का विशाल प्रदर्शन

रिपोर्ट चन्दन सिंह: लोजपा सुप्रीमो राम विलास पासवान के निर्देश पर  सहरसा में एलजेपी ने न केवल विशाल प्रदर्शन किया बल्कि प्रदर्शन के दौरान जिला प्रशासन और पुलिस के साथ--साथ बिहार सरकार पर भी जमकर बरसे। लोजपा के सैंकड़ों कार्यकर्ताओं ने जिला मुख्यालय के शंकर चौक पर पहले लामबंदी की फिर वहाँ से शहर के विभिन्य मार्ग से मार्च करते हुए जिला समाहरणालय पहुंचे जहां उन्होने पहले तो जमकर नारेबाजी की फिर भाषण का दौर चला। इस प्रदर्शन में वक्ताओं ने सरकारी योजनाओं का लाभ गरीबों तक नहीं पहुँचने और लगातार बिगडती कानून व्यवस्था को लेकर जिला पुलिस--प्रशासन और सरकार को खूब कोसा।लोजपा के इस लामबंदी का आगे क्या फलाफल आयेगा यह तो बाद की बात है लेकिन लोगों का विरोध सड़कों पर खुले तौर पर दिख रहा है,इसे सरकार के लिए कहीं से भी शुभ संकेत नहीं माना जा सकता है।   
यूँ तो लोजपा सुप्रीमों के निर्देश पर राज्य के सभी जिला मुख्यालय पर ऐसा प्रदर्शन चल रहा है लेकिन यहाँ का प्रदर्शन कुछ हटके और खास है।सरकार की विभिन्य योजनाओं का लाभ गरीब--गुरबों तक नहीं पहुँच रहा है। इंदिरा आवास,मनरेगा और लगभग सभी कल्याणकारी योजनायें वाजिब लाभुकों की जगह अधिकारी,बाबू--हाकिम से लेकर बिचौलियों को फायदा पहुंचा रहे हैं। कानून--व्यवस्था पूरी तरह से लचर है। यहाँ पर प्रदर्शनकारियों ने इन तमाम मुद्दों के अलावे खासकर के सहरसा पुलिस के रवैये पर बड़े--बड़े प्रश्न खड़े किये। सहरसा में हत्या,लूट सहित बड़े अपराधों का दौर लगातार है लेकिन पुलिस उसे रोक पाने में पूरी तरह से विफल है। प्रदर्शनकारी नेता विगत दिनों सहरसा में हुयी चार हत्याओं पर खूब उबले जिस मामले में पुलिस के हाथ अभीतक खाली हैं। डॉक्टर संतोष भगत,करोड़पति विधवा महिला सहनी देवी, पान व्यवसायी शम्भू चौरसिया और इंजीनियरिंग छात्र दीपक कुमार की ह्त्या की गुत्थी,ह्त्या के महीनों बाद भी पुलिस आजतक नहीं सुलझा सकी है। जाहिर तौर पर प्रदर्शनकारी जिला पुलिस--प्रशासन और सरकार पर एक साथ हमला बोल रहे थे।

दिसंबर 10, 2012

दबंगों ने बरपाया कहर

रिपोर्ट चन्दन सिंह: बीते शाम सदर थाना के सपटियाही बस्ती में दबंगों ने नंगा नाच करते हुए जहां महादलित परिवार की एक झोपड़ी को आग में झोंककर ख़ाक कर दिया वहीँ महादलितों पर जमकर पत्थरबाजी भी की। पीड़ितों का कहना है की जमीन विवाद में दबंगों ने करीब पचास की संख्या में यहाँ पहुंचकर जमकर उत्पात मचाये और लूटपाट भी की। पीड़ित परिवार का कहना है की जमीन विवाद में गाँव के दबंग राधे भगत,अरुण भगत,संतोष भगत सहित करीब पचास की संख्यां आये गुंडों ने यहाँ पर जमकर उत्पात मचाये। इनलोगों ने न केवल जमकर लाठियां बरसाई बल्कि पत्थरबाजी भी की। यह सारा उपत्पात उस समय हो रहा था जब घर के लगभग पुरुष गाँव में मौजूद नहीं थे। पीड़ितों का कहना है की उपद्रवी तत्व उनका सारा सामान,कपड़े और कम्बल भी अपने साथ लेकर चले गए। अब उनका इस जाड़े में भगवान जाने क्या होगा।
पुलिस कहती है--- पुलिस के अधिकारी इस पुरे मामले को साजिश बता रहे हैं। इनकी माने तो जिनलोगों ने उक्त जमीन पर झोपड़ी बनाए हैं वह बिलकुल गलत है। इस जमीन पर महादलितों का मालिकाना हक़ नहीं है। जिनलोगों पर इस घटना को अंजाम देने का आरोप लग रहा है उन्हें इस जमीन का मालिकाना हक़ प्राप्त है। 1953 में ही उनलोगों को यह जमीन भूदान से मिली हुयी है। यानी ये साफ़--साफ़ लहजे में कह रहे हैं की खुद इनलोगों ने अपने घर में आग लगाकर इस घटना की पूरी पटकथा लिखी है। वैसे इस घटना की तह से जांच होगी फिर आगे जो उचित होगा,वैसी कारवाई होगी।
अब इस मामले का असल सच क्या है यह तो बड़े अधिकारियों की हस्तक्षेप और उनकी जांच से ही स्पष्ट हो पायेगा। लेकिन अभी ये महादलित डरे--सहमे दिख रहे हैं। आप यह जानकार हैरान हो जायेंगे की इन महादलितों के पास भी भूदान से जमीन हासिल के कागजात हैं। अब ये कागजात इनके पास कैसे आये और इन महादलितों को पीछे से कौन उकसा रहा है इसे खंगालना भी पुलिस के लिए चुनौती होगी।

दो मुन्ना भाई हुए गिरफ्तार

रिपोर्ट चन्दन सिंह: केन्द्रीय चयन पर्षद पटना के द्वारा आज पुरे बिहार में आयोजित हुयी सिपाही भर्ती लिखित परीक्षा में एक तरफ जहां गेटिंग--सेटिंग और कदाचार का बोलबाला रहा वही कई फर्जी परीक्षार्थी और फर्जी वीक्षक भी दबोचे गए। सहरसा में भी ऐसे ही दो मुन्ना भाई दबोचे गए। एक मुन्ना भाई अपने मौसरे भाई की जगह परीक्षा में शामिल हो कांपी पर अपने जौहर दिखा रहा था तो दुसरा मुन्ना भाई वीक्षक बनकर अपने संपर्क के परीक्षार्थियों की नैया पार लगाने में जुटा था। धर्मेन्द्र कुमार वीक्षक की भूमिका में तो नीरज कुमार परीक्षार्थी की भूमिका में रंगे हाथ दबोचे गए। ये दोनों सहरसा के इवनिंग कॉलेज से गिरफ्तार किये गए। इस तरह के कदाचार से बिहार में आयोजित होने वाले कई परीक्षा को रद्द तो कर दिया जाता है लेकिन जो विद्यार्थी कड़ी मेहनत कर के सफलता को प्राप्त करना चाहता है उस विद्यार्थी के लिए यह दुर्भाग्य है। सहरसा जैसे परीक्षा केंद्र पर इस तरह की घटना को अंजाम देनेवाले ये मुन्ना भाई यंहा के विधि व्यवस्था को अंगूठा दिखा रहा है।गिरफ्त में आये ये दोनों मुन्ना भाई पटना के रहने वाले हैं। पुलिस अधिकारी का कहना है की इनपर विधि सम्मत कारवाई की जायेगी।
थोड़े से लालच में लोग अपने भविष्य को दाँव पर लगा देते हैं। ना जाने फर्जीवाड़े के इस जड़वत खेल से कब निजात मिलेगी।

दिसंबर 09, 2012

मेरा बाप बेकसूर है चेतन आनंद

आनंद मोहन के बेटे चेतन आनंद
रिपोर्ट मुकेश कुमार सिंह,सहरसा टाइम्स:  मेरा बाप बेकसूर है।तत्कालीन गोपालगंज डी एम जी कृष्णैया ह्त्या मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे पूर्व सांसद आनंद मोहन के बेटे चेतन आनंद ने आज जनता की अदालत में न केवल अर्जी लगाई बल्कि मंच से सभा को संबोधित करते हुए नीतीश कुमार के खिलाफ जमकर हुंकार भी भरी। सहरसा के सोनवर्षा राज के महाराजा हरिवल्लभ नारायण उच्च विद्यालय प्रांगण में प्रतिपक्षी दलों की संयुक्त सभा के बैनर तले चेतन आनंद ने अपनी माँ पूर्व सांसद सह कौंग्रेस नेत्री लवली आनंद के साथ एक महती सभा को संबोधित किया।अपने भाषण में उसने कहा मेरा बाप बेकसूर है,उन्हें बिहार के मुखिया नीतीश कुमार ने साजिश के तहत फंसाकर सजा कराई है।आगे वह पढाई करके या फिर कुछ भी ऐसा करेगा जिससे वह अपने बाप को न्याय दिलाकर रहेगा।इस दौरान लवली आनंद ने भी नीतीश कुमार पर जमकर भड़ास निकाली और कहा की आनंद मोहन और उन्होनें मिलकर नीतीश को लोकसभा तक पहुंचाया।यही नहीं उन्हें बिहार की गद्दी पर भी बिठाया।लेकिन नीतीश कुमार दगाबाज निकले और उन्होने पटना हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक अपने वकीलों को खड़ा करके आनंद मोहन जी को सजा कराई जिससे आनंद मोहन का बिहार में वर्चस्व ही खत्म हो जाए।लवली आनंद ने बिहार को विशेष राज्य के दर्जे पर भी नीतीश को घेरा और कहा की नीतीश जी पहले कोसी क्षेत्र को विशेष क्षेत्र का दर्जा दें फिर बिहार को विशेष राज्य के दर्जे की बात करें।अपने भाषण के आखिर में आनंद मोहन के बेटे ने आगामी 23 जनवरी को सहरसा के पटेल मैदान में आनंद मोहन के लिए आयोजित न्याय मार्च में शामिल होने का लोगों को न्योता दिया।बताना लाजिमी है की आनंद मोहन की सर्वोच्च न्यालय से आजीवन कारावास की सजा बरकरार रखे जाने के बाद अब पुनः विचार का एक मौक़ा बच  रहा है जिसे आनंद मोहन के परिजन और समर्थक हर--हाल में भुनाना चाहते हैं।जाहिर तौर पर इस बहाने एक और युवराज के राजनीति में प्रवेश का संकेत मिल रहा है।
 सबसे पहले देखिये सोनवर्षा राज की सड़कों पर बाहुबली आनंद मोहन के समर्थकों के कारवां को।देखिये यह है सहरसा के सोनवर्षा राज के महाराजा हरिवल्लभ नारायण उच्च विद्यालय प्रांगण का नजारा।हाथी पर शाही अंदाज में आनंद मोहन का बेटा चेतन आनंद सवार होकर सभा स्थल की और बढ़ रहा है।इसी प्रांगण में प्रतिपक्षी दलों की संयुक्त सभा के बैनर तले पूर्व सांसद बाहुबली आनंद मोहन के बेटे चेतन आनंद और उनकी पत्नी पूर्व सांसद सह कौंग्रेस नेत्री लवली आनंद एक महती सभा को संबोधित कर रहे हैं।
 सभा में काफी भीड़ है जो गंभीरता से माँ--बेटे को सुन रही है।  आगामी 23 जनवरी को आनंद मोहन को न्याय मिल सके इसके लिए न्याय मार्च होगा।आगे देखना दिलचस्प होगा की जनता के सामने गुहार लगाने पहुंचे माँ--बेटे की फ़रियाद का कितना असर बिहार सरकार और न्यायपालिका को होता है।साथ ही न्याय मार्च का कैसा फलाफल आता है।अभी तो हम इतना जरुर कर सकते हैं की एक बेटे की बाप के लिए कितनी तड़प होती है इस को जनता के बीच उद्देलित कर रहे चेतन आनंद का राजनीति में प्रवेश का यह श्री गणेश है।आगे जनता उसपर कितना भरोसा करती है और उसे जनता का कितना प्यार मिलता है,यह देखना लाजिमी होगा।

सुशासन में शराब पीकर टुन्न मासूम बच्चे

रिपोर्ट चन्दन सिंह  : अब छुपके शराब पीने का ज़माना ना केवल लद गया है बल्कि अब लोग आपको हर गली और चौक--चौराहे पर दिन के उजाले से लेकर रात के अँधेरे में नशे में टुन्न कहीं भी पड़े मिल जायेंगे।बात इतने पर ही खत्म नहीं होती,अब तो आपको नौजवान और बुजुर्गों के अलावे छोटी उम्र के मासूम बच्चे भी शराब पीकर नशे में मस्त और बेहोश दोनों हालात में मिल जायेंगे। जी हाँ,हम कोई फ़िल्मी डायलॉग नहीं बोल रहे बल्कि सच की एक काली और ऐसी स्याह तस्वीर आपको दिखाने जा रहे हैं जिसे देखकर आपका कलेजा मुंह को आ जाएगा। सहरसा जिले का बिल्कुल रिमोट इलाका बसनही थाना के मंगल बाजार में एक नाबालिग बच्चा शराब के नशे में सड़क पर बेहोश पडा था जिसे ग्रामीणों ने उठाकर एक बांस के मचान पर लिटा दिया। जाहिर तौर पर यह तस्वीर इस बात की पुष्टि करती है की सुशासन में मासूम बच्चे भी छंककर शराब पी रहे हैं। यह नाबालिग बच्चा शराब के नशे में टुन्न हो कर व्यवस्था को तमाचा लगा रहा है।
सहरसा के सुदूर ग्रामीण इलाके मंगला बाजार की तस्वीर। देखिये इस मासूम बच्चे को।बामुश्किल इसकी उम्र दस वर्ष की होगी। इस बच्चे ने जीभर के शराब पी रखी है। पहले यह बीच सड़क पर नशे में धुत्त होकर पडा था। ग्रामीणों को इसपर तरस आया तो इसे यहाँ पर लिटा दिया गया है। देखिये इस बच्चे की हालत को। लगता है की अब इसकी जान निकलने वाली है। अभीतक यह पता नहीं चल सका है की यह किस गाँव का रहने वाला है और इसने किस दूकान से शराब लेकर पी है। ग्रामीण इतना जरुर कह रहे हैं की इस स्थिति के लिए सरकार जिम्मेवार है। गाँव--गाँव में शराब की दूकान खुल गयी है। बड़ों को पीता देख बच्चे भी पियक्कड़ हो रहे हैं।
सुशासन के शराब शास्त्र को लेकर हम कुछ भी नहीं कहेंगे।इस तस्वीर को देखकर आप खुद ही तय करें की यह क्या हो रहा है।जिन मासूम नौनिहालों के हाथों कल का हिन्दुस्तान होगा वे मदिरा में इस कदर डूबे जिन्दगी से खेल रहे हों,तो आगे सबकुछ फकत भगवान के हाथों है।

दिसंबर 08, 2012

थाना इन्साफ के मंदिर की जगह माल--चुआऊ मंडी में तब्दील

मुकेश कुमार सिंह,सहरसा टाइम्स:
नवहट्टा थानाध्यक्ष के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते लोग
वर्षों से बदनामी का सेहरा बांधे सहरसा पुलिस एक बार फिर कटघरे में खड़ी दिख रही है।यूँ तो दाग पुरे पुलिस कुनबे को लगे हुए हैं लेकिन गुरुवार के दोपहर बाद नवहट्टा थाना के थानाध्यक्ष के खिलाफ लोगों का ना केवल गुस्सा फूटा बल्कि लोग सड़क पर उतरकर उनके खिलाफ पहले तो जमकर नारेबाजी की और फिर एस.पी ऑफिस के सामने धरने पर बैठ गए।धरना स्थल पर भी लोग नवहट्टा थानाध्यक्ष के खिलाफ घंटों जमकर नारेबाजी करते  रहे।लोग अगिया--बेताल थे और थानाध्यक्ष पर पैसे लेकर निर्दोष लोगों पर झूठा मुकदमा दर्ज करने और कोई मामला दर्ज करवाने और उस मामले में  वाजिब धाराएं लगाने के लिए पैसे मांगने का गंभीर आरोप लगा रहे थे।एक बजे दिन से लोग एस.पी ऑफिस के सामने बबाल काट रहे थे।एस.पी किसी कार्य से जिला मुख्यालय से बाहर थे।ऐसे में मामले की तहकीकात करने और लोगों की शिकायत सुनने एस.डी.पी.ओ मौके पर पहुंचे और लोगों को जांच कर न केवल उचित कारवाई का भरोसा दिया बल्कि पूरा का पूरा इन्साफ होगा इसकी भी गारंटी दी। आंदोलित लोग पुलिस की कार्यशैली पर बड़े--बड़े प्रश्न खड़े कर रहे हैं।थाने में पैसे दो और किसी पर झूठा मुकदमा करवा लो। थाने में दफा के लिए बोली लगती है। थाना इन्साफ के मंदिर की जगह एक माल--चुआऊ मंडी में तब्दील है। सत्ताधारी जदयू के नवहट्टा प्रखंड अध्यक्ष  बता रहे हैं की थाना में पैसे लेकर गलत मुकदमा दर्ज किया जाता है। अगर किसी पार्टी की मज़बूरी में बिना पैसे का काण्ड दर्ज हो जाता है तो उस मामले में वाजिब धाराएं नहीं लगाई जाती हैं।
सहरसा पुलिस मनमौजी है।उसे किसी का कोई डर--भय नहीं है।यहाँ की पुलिस के कामकाज का तरीका गुंडे और मवाली जैसा है।आगे देखने वाली बात यह होगी की इन पीड़ितों के साथ कैसा न्याय और आरोपी नवहट्टा थानाध्यक्ष पर कैसी कारवाई होती है।

मुहब्बत में अंधी हुयी दो लडकियां

मुकेश कुमार सिंह,सहरसा टाइम्स :
संध्या कुमारी, दीपिका कुमारी
यह नजारा है सहरसा के आलिशान आदर्श थाने का।थाने के ये दोनों लडकियां गुमला जिले की अलग--अलग जगहों की है।दोनों लड़कियों में से पहली दीपिका कुमारी गुमला जिले के गिरिरा कुम्हार टोली की तो दूसरी सध्या कुमारी केसीपाड़ा की रहने वाली है।अब हम कहानी को तफसील से बताने जा रहे हैं।संध्या के मोबाइल पर एक दिन एक मिस कॉल आया।यह मिस कॉल मधेपुरा जिले के आलमनगर के रहने वाले मोहम्मद राजू का था।मिस कॉल ने गुल खिलाया और संध्या न चाहते हुए भी मोबाइल पर राजू से बात करने लगी।धीरे--धीरे प्यार हिचकोले लेने लगा।सीने के भीतर आग सुलग चुकी थी।छः महीने तक बातचीत का सिलसिला चला।दोनों मोबाइल पर जीने मरने की कसमें खाने लगे।फिर क्या था दोनों ने शादी करने की ठान ली।इसी समय दीपिका की इंट्री होती है।एक दिन अचानक गुमला के एक बाजार में दीपिका संध्या से टकराती है।दोनों के बीच पहली मुलाक़ात में ही ढेर सारी बातें हुयीं।ये दोनों भी आपस में दोस्त हो गए और अपने दिल की बातें एक दुसरे को बताने लगे। दीपिका कुछ दिनों के लिए दिल्ली गयी थी जहां एक घर में वह काम करती थी।उसी दौरान उसकी पहचान विजय नाम के एक युवक से हुयी जो दिल्ली के खानपुर का रहने वाला है और वहीँ पर काम करता है।दीपिका वापिस गुमला लौट आई थी लेकिन उसके पास विजय का मोबाइल नंबर था।फिर शुरू हुआ बातचीत का सिलसिला।दीपिका भी मुहब्बत में बाबली हो चुकी थी।इधर जब संध्या मिली तो दोनों सखियों ने फैसला लिया की वे दोनों अपने--अपने प्यार को पाकर रहेगी।फिर दोनों ने मिलकर मास्टर प्लान बनाया और गुमला अपने घर से भाग निकली और सहरसा पहुँच गयी।गुमला से भागने से पहले संध्या ने इसकी सुचना राजू को दे दी थी की वह मधेपुरा से सहरसा पहुँच जाए।
मोहम्मद राजू
सहरसा में मोहम्मद राजू पहले से मौजूद था।यहाँ से ये लोग दिल्ली रवाना होते लेकिन पुलिस बीच में विलेन बनकर खड़ी हो गयी।अब इधर संध्या प्यार की सारी कहानी तो बता रही है लेकिन वह यह भी कह रही है की वह अपने घर जाना चाहती है।संध्या अब राजू से शादी करना नहीं चाहती है।उसका कहना है की राजू के घर वाले तैयार नहीं हैं इसलिए वह उससे शादी नहीं करेगी।दीपिका की बिमारी संध्या से  अलग है।उसकी मानें तो वह विजय से ही शादी करेगी।विजय उससे शादी करने के लिए तैयार है।संध्या के शादी के इनकार की एक बड़ी वजह हमारी समझ से राजू का मुस्लिम होना और उसका कद---काठी बेहतर नहीं होना भी प्रतीत होता है।वैसे अब तो सब कुछ पुलिस के अनुसंधान पर निर्भर करता है।इस मामले में एक ख़ास बात यह भी है की दोनों लड़कियां कह रही हैं की वे घर से भागी नहीं है बल्कि अपने घर वालों से पूछकर आई हैं।
मामला दुसरे राज्य से भागकर आई लड़कियों का है।पुलिस इस मामले को काफी गंभीरता से ले रही है।लड़कियों के परिजनों से पुलिस ने बातचीत की है जिसमें भागी हुयी लड़कियों के परिजनों ने लड़कियों के घर से भागने की पुष्टि की है।दोनों लड़कियों के परिजन गुमला से सहरसा के लिए कूच कर चुके हैं।पुलिस अधिकारी का कहना है की लड़की को शादी का झांसा देकर बुलाया गया है।सदर थाना में काण्ड दर्ज कर पुलिस अनुसंधान करने की बात कर रही है।जाहिर सी बात है की पुलिस अधिकारी इस मामले को लड़की के खरीद फरोख्त की नजर से देख रहे हैं।
प्यार में कुछ भी संभव है।इतिहास गवाह है की प्यार में बिकने और लुटने के अनेकों ऐसे अनगिनत किस्से हैं जो रूह को थर्रा जाते हैं।इस मामले में लड़कियों के परिजनों के सामने आने के बाद कुछ और राज पर से पर्दा उठेगा।अभी किसी तरह के अंजाम का कयास लगाना जल्दबाजी होगी।

गोली मारकर पति ने पत्नी की ह्त्या की

 एक सरफिरे पति ने मायके में रह रही अपनी पत्नी को तीन गोली मारकर उसकी ईहलीला खत्म कर दी।घटना गुरुवार के सुबह साढ़े आठ बजे की है।सोनवर्षा राज थाना के बेला गाँव का रहने वाला सरफिरा पति कैलू यादव हथियार से लैस होकर अपनी पत्नी के मायका सोनवर्षा कचहरी थाना के दुधैला गाँव पहुंचा और घर में घुसकर अपनी 30 वर्षीय पत्नी बिन्जू देवी को ताबड़तोड़ तीन गोली मार दी और वहाँ से फरार हो गया।गंभीर रूप से जख्मी बिंजू को ग्रामीणों ने ईलाज के लिए अस्पताल लाया जहां इलाज शुरू होने से पहले ही उसकी मौत हो चुकी थी।मृतका के परिजन बताते हैं की कैलू ने दो शादी कर रखी थी।बिन्जू उसकी दूसरी पत्नी थी जिसको दो बेटे हैं।पिछले एक साल से कैलू और बिन्जू के बीच झगडा चल रहा है जिस कारण दोनों अलग--अलग रह रहे थे।बिन्जू दिल्ली में रहकर काम करती थी।वह छठ में अपने मायका आई थी जहां उसके दोनों बेटे रहकर पढ़ते हैं।पुलिस इस मामले में एक तरफ जहां लाश का पोस्टमार्टम करवा रही है वहीँ थाना में ह्त्या का मामला दर्ज कर आरोपी की जल्द गिरफ्तारी की बात कह रही है।
सुबोध यादव,जांच अधिकारी,सदर थाना,सहरसा  मृतका के परिजनों का बयान लेने में जुटे हैं।वे पहले लाश का पोस्टमार्टम करा रहे हैं।ह्त्या के कारण को लेकर भी वे बता रहे हैं।उनकी मानें तो ह्त्या का मामला दर्ज कर आरोपी को जल्द से जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा।बिन्जू इस दुनिया से कूच कर चुकी है।भगवान् जाने हत्यारे कैलू की कब गिरफ्तारी होगी और बिन्जू के दो मासूम बच्चों का क्या होगा।    

दिसंबर 05, 2012

एक रोते---बिलखते झील का दर्द देखो सरकार


क्रिकेट पिच में तब्दील झील 
मुकेश कुमार सिंह,सहरसा टाइम्स : यह है सहरसा का मत्स्यगंधा झील.वर्ष 1996 में इस झील का निर्माण तत्कालीन जिलाधिकारी,सहरसा टी.एन.लाल दास के महती प्रयास से कराया गया था.करीब एक करोड़ के सरकारी धन और लाखों रूपये के जन सहयोग से इसका निर्माण हुआ था.तब बिहार के मुख्यमंत्री रहे लालू प्रसाद ने इस झील का उदघाटन बड़े तामझाम से दो मार्च 1997 को किया था.अपने शुरूआती समय में यह झील इस क्षेत्र सहित पुरे राज्य में आकर्षण का केंद्र बना हुआ था.यहाँ कोसी प्रमंडल और सीमावर्ती कई जिले के लोगों के साथ--साथ पड़ोसी देश नेपाल सहित देश के विभिन्य प्रान्तों से भी थोक में पर्यटक आते थे.इस झील में सुबह से लेकर देर शाम तक लगातार नौका विहार होता था.प्रेम पंछियों की किलकारियां गूंजती थी.क्या बच्चे,क्या बूढ़े,और क्या जवान.महिलायें भी यहाँ आकर एक तरह से उत्सव का आनंद उठाती थीं.पानी से लबालब रहने वाले इस झील की छंटा देखते ही बनती थी.लेकिन आज आलम यह है की सभी सुहाने दिन गुजरे समय की बात बनकर रह गयी है.यह झील पूरी तरह से मजाक बनकर रह गयी है।इलाके के बच्चे और नौजवान इस झील के अन्दर क्रिकेट पिच बनाकर न केवल क्रिकेट खेलते हैं बल्कि टूर्नामेंट तक करवाते हैं।यानी यह झील,झील तो नहीं बनी रह सकी लेकिन यहाँ पर कई तरह के काम जरुर हो रहे हैं।
बड़ी कम उम्र महज 8 वर्ष में ही इस झील की मौत हो गयी.वर्ष 2004 से ही यहाँ मुरघती सन्नाटा है.झील के बीच बने पानी उगलने वाले झरने का मुंह बन्द है.नक्काशीदार बनी पत्थर की मूर्तियाँ क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं.बैठने वाले चबूतरे जमींदोज हो रहे हैं.नौकाएं टूट-फुटकर कराह रही हैं.अब पानी का एक कतरा भी नहीं हैं इस झील में.चारों तरफ जंगल उग आये हैं.यहाँ बेख़ौफ़ होकर पशु विचरण करते हुए लजीज चारा का तुत्फ़ उठा रहे हैं.लोग यहाँ आकर पुराने सुनहरे और हंसी दिन को याद कर महज उदास होते हैं और सरकार के साथ-साथ जिला प्रशासन को जमकर कोसते हैं.बताना लाजिमी है की इस झील के दिन बहुरे इसके लिए सहरसा टाइम्स ने लाख जतन किये हैं।कई बार इस झील को लेकर प्रमुखता से खबर इस उम्मीद में लिखी है की सरकार इसे गंभीरता से लेगी और इसे सजाने---संवारने की पहल करेगी।लेकिन हमारी कोशिशों का नतीजा भी आजतक सिफर ही निकला है।बताना लाजिमी है की पिछले साल 13 दिसंबर को मुख्यमंत्री कई मंत्रियों और आला अधिकारियों के साथ खुद मत्स्यगंधा झील का निरीक्षण करने पहुंचे थे।मुख्यमंत्री ने उस वक्त इस झील को न केवल पहले से बेहतर बल्कि देश स्तर का मनोरम झील बनाने की घोषणा की थी।लेकिन उनकी घोषणा के साल भर बाद भी यह झील रोता---बिलखता अपने पुराने बदनुमा शक्ल में है जो लोगों को ना केवल मुंह भर चिढ़ा रहा है बल्कि लोगों को जद से डरा भी रहा है।
प्रशासन के हाकिम विगत कई वर्षों से लोगों को बस इस झील के जल्द जीर्णोधार किये जाने की घूंटी पिला रहे हैं.वे अभी मुख्यमंत्री के दौरे के बाद झील को लेकर बहुत काम किये जाने का प्रलाप कर रहे हैं।इनकी माने तो इस झील में चार मौजे की जमीन है।तीन मौजे की जमीन के मुआवजे का भुगतान हो चुका है।एक मौजे की जमीन के मुआवजे के लिए बिहार सरकार से राशि प्राप्त हो चुकी है।छः महीने के भीतर झील को बेहतर बना लिया  जाएगा।अधिकारी यह भी बता रहे हैं की इस झील की जिम्मेवारी अब राज्य पर्यटन विभाग के जिम्मे है।विभाग ने इस झील का डीपीआर तैयार कर लिया है।यानी आगे सबकुछ बेहतर करने के उनके और सभी तरह के प्रयास जारी हैं।
 एक मनोरम और लोगों को अपनी ओर खींचने वाला झील आज लोगों को डरा रहा है.तकलीफों से सने जीवन में दो पल सुकून के बटोरने यहाँ लोगों का हुजूम उमड़ता था लेकिन यहाँ तो अब सब कुछ फ़ना हो गया है.बस इस झील की यादें ही शेष रह गयी हैं.जाहिर तौर पर मुख्यमंत्री की झील के मामले में घोषणा पूरी तरह से डपोरशंखी और लफ्फाजी साबित हुआ है।इस खबर से सहरसा टाइम्स एक बार फिर इस झील की तस्वीर आमजन से लेकर सूबे के मुखिया नीतीश कुमार को इसलिए दिखा रहा है की एक तो उनको अपनी घोषणा के हस्र का पता चल सके और दुजा इस झील के दिन बहुरें,इसके लिए पुख्ता इंतजाम भी हो सके।बांकी सब रब के हाथों है।

दिसंबर 01, 2012

लालू के आने की धमक

 रिपोर्ट चन्दन सिंह: परिवर्तन यात्रा के दौरान आगामी 2 दिसंबर को सहरसा में आयोजित होने वाली लालू की सभा को लेकर राजद नेता--कार्यकर्ता में ना केवल खासा उत्साह है बल्कि वे इस यात्रा को हर हाल में बेमिसाल और एतिहासिक बनाने में दिन---रात एक किये हुए हैं।पुरे जिले की बात करें तो एक तरह से लालू के आने की धमक हर तरफ साफ--साफ  सुनाई दे रही है।गाँव--देहात से लेकर चौक---चौराहे पोस्टर,बैनर और तोरणद्वार से पटे हुए हैं।यहाँ का नजारा देखकर लगता है की राजद कार्यकर्ताओं ने चहुँदिश पोस्टर वार छेड़ दिया है।इसमें कोई शक नहीं है की इस कार्यक्रम में राजद कार्यकर्ता किसी तरह की कोई कोताही बरतने के मुड में नहीं है।जाहिर तौर पर लालू की सभा में भारी भीड़ उमड़ने की संभावना है।लेकिन इन तमाम ताम--झाम और कवायद को लेकर बड़ा सवाल यह है की सभा में उमड़ने वाली भीड़ आगामी चुनावों में वोट में किस तरह और कितनी तब्दील होती है।गाँव--देहात से लेकर जिला सह प्रमंडलीय मुख्यालय सहरसा के हर चौक--चौराहे पर बैनर--पोस्टर चारों तरफ पटे पड़े हैं।राजद ने यहाँ एक तरह से पोस्टर वार छेड़ रखा है।सहरसा के शहरी क्षेत्र की बात करें तो गंगजला चौक,महावीर चौक,रिफ्यूजी चौक,तिवारी टोला,सहरसा बस्ती,मीर टोला,शंकर चौक,थाना चौक,गांधी पथ,कुंवर सिंह चौक,अम्बेडकर चौक,दहलान चौक,चांदनी चौक से लेकर कमोबेस सारा इलाका पोस्टर वार की चंगुल में है।विभिन्य तरह के स्लोगन के साथ बैनर--पोस्टर में क्षेत्रीय नेता अपने बड़े नेताओं के साथ जनता से अपील करते दिख रहे हैं।
सारा आलम बता रहा है की यहाँ पर सभा को एतिहासिक और बेमिसाल बनाने की पुरजोर कवायद चल रही है।राजद नेताओं का समवेत कहना है की जनता नीतीश सरकार से अब उब चुकी है और परिवर्तन चाह रही है।लोग स्वस्फूर्त लालू की सभा में आ रहे हैं।जाहिर तौर पर आने वाले समय में बिहार में लालू--राबड़ी की सरकार बनेगी।
इसमें कोई शक नहीं है की कोसी का यह इलाका राजद का गढ़ रहा है।अभी भी सहरसा के महिषी विधानसभा से अब्दुल गफूर राजद के विधायक हैं।जाहिर तौर पर सत्ता सुख से दूर रह रहे लालू प्रसाद इस परिवर्तन यात्रा के बहाने न केवल अपनी खोयी हुयी राजनीतिक जमीन तलाशना चाह रहे हैं बल्कि नए सिरे से अपनी राजनीति की दमदार पारी का आगाज भी करना चाह रहे हैं।इसमें कोई शक नहीं है की आगामी 2 दिसम्बर की उनकी सभा में भारी भीड़ उमड़ेगी लेकिन यह भीड़ आगामी चुनावों में वोट में कितना तब्दील होगी,यह देखना दिलचस्प होगा।वैसे हम आपसे यह कहना चाह रहे हैं की सूबे की जनता लगातार सरकारी और गैर सरकारी यात्राओं का दंश झेल रही है।इन यात्राओं से जनता का कहीं से भी भला होता नहीं दिख रहा है।रब जाने की इन यात्राओं से सूबे की जनता को कब निजात मिलेगी।

*अपनी बात*

अपनी बात---थोड़ी भावनाओं की तासीर,थोड़ी दिल की रजामंदी और थोड़ी जिस्मानी धधक वाली मुहब्बत कई शाख पर बैठती है ।लेकिन रूहानी मुहब्बत ना केवल एक जगह काबिज और कायम रहती है बल्कि ताउम्र उसी इक शख्सियत के संग कुलाचें भरती है ।