अक्टूबर 05, 2013

कांग्रेस से कई मुद्दों पर हमारा मतभेद- शरद यादव

कांग्रेस से कई मुद्दों पर हमारा मतभेद/कांग्रेस से गठबंधन का नीतीश अकेले नहीं ले सकते फैसला--
सहरसा टाईम्स अपने संसदीय क्षेत्र मधेपुरा के ग्यारह दिवसीय दौरे पर आये जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव वापिस दिल्ली लौट गए.जाते--जाते शरद ने जबर्दस्त बयान दिए.सहरसा टाईम्स से खास बातचीत में पूछे गए एक सवाल के जबाब में शरद यादव ने कहा की कांग्रेस से कई मुद्दों पर उनका मतभेद है और कांग्रेस से गठबंधन का नीतीश अकेले कभी भी फैसला नहीं ले सकते हैं.यह फैसला पार्टी करेगी.शरद ने अपने वर्तमान संसदीय क्षेत्र मधेपुरा से आगामी चुनाव लड़ने की ईच्छा जताई और कहा की ना केवल चारा मामले में बल्कि सभी मामले में नीतीश कुमार पूरी तरह से बेदाग़ हैं.शरद ने लालू प्रसाद पर आये फैसले पर दुःख जताते हुए कहा की उन्हें लालू को सजा मिलने का अफ़सोस है.सहरसा टाईम्स के साथ बेबाकी से अपनी राय रख रहे शरद ने आगे कहा की मेरा कहना है जैसे--जैसे देश में आबादी बढ़ी वैसे--वैसे भ्रष्टाचार भी बढ़ा.राजनीति से लेकर सभी क्षेत्रों में भ्रष्टाचार बढ़ा.इस फैसले का यही मतलब है की देश में कानून है.और जिनलोगों पर जनता बड़ी जिम्मेवारी सौंपती है वो सेवा के लिए सौंपती है.इस फैसले से दिल्ली से लेकर गाँव तक लोगों को सबक लेना चाहिए.शरद ने आगे कहा की कर्पूरी ठाकुर की मौत के बाद पार्टी हमारे हाथ में थी.हमने बड़ी मिहनत करके लालू जी को अपोजिशन लीडर बनाया फिर मुख्यमंत्री बनाया और नीतीश जी को वहाँ राज्य मंत्री बनाया.उस समय के राजनीतिक वेक्यूम को भरने के लिए इनदोनों को हमने आगे बढ़ाया लेकिन नीतीश जी पर तो कोई ऊँगली आजतक नहीं उठी लेकिन लालू जी ने अपना रास्ता बदल लिया और सरकार में जो सतर्कता बरतनी चाहिए वह नहीं बरती.आज लालू पर जो चार्ज लगे हैं वह बेहद अफसोसनाक हैं.सभी को इससे सबक लेने की जरुरत है.कोर्ट के इस फैसले का बिहार की राजनीति पर क्या प्रभाव पड़ेगा  के जबाब में उन्होने कहा की अभी यह वक्त इस सवाल के जबाब का नहीं है.

चार शातिर अपराधी गिरफ्तार

सहरसा टाईम्स तीन देशी कट्टा,तेरह कारतूस,एक लूट की बाईक और एक मोबाइल बरामद ह्त्या,लूट,अपहरण सहित डेढ़ दर्जन से ज्यादा संगीन अपराधों में शामिल अपराध सरगना संजय यादव आखिरकार अपने तीन साथियों के साथ गिरफ्तार हो ही गया.इनके पास से पुलिस ने तीन देशी कट्टा,तेरह कारतूस,एक लुट की बाईक और एक मोबाइल बरामद किया है.मधेपुरा और सहरसा जिले के सीमावर्ती क्षेत्र में आतंक का पर्याय समझे जाने वाले इन अपराधियों की गिरफ्तारी से एक तरफ जहां पुलिस ने राहत की सांस ली है वहीँ यह आमलोगों के लिए भी सुकून की बात है.इनकी गिरफ्तारी एक टास्क फ़ोर्स के गठन के बाद संभव हो पायी.
पुलिस अधीक्षक अजीत कुमार सत्यार्थी के कक्ष में खड़े ये चारों बड़े अपराधी हैं.ह्त्या,लूट,अपहरण जैसे अपराध करना इनकी आदत बन चुकी थी.संजय यादव मुख्य सरगना है जिसपर बीस मामले दर्ज हैं.संजय के साथ उसका खासमखास विलास यादव,सूरज यादव और मृत्युंजय यादव भी गिरफ्तार किये गए हैं.पुलिस अधीक्षक ने इस कामयाबी को एक बड़ी कामयाबी बताते हुए कहा की संजय यादव गिरोह के छः सदस्य तीन महीने पहले ही गिरफ्तार किये गए थे.अब इनकी गिरफ्तारी से यह गिरोह टूट चुका है इसलिए अपराध में आगे निसंदेह कमी आएगी.इनकी गिरफ्तारी एक टास्क फ़ोर्स के गठन के बाद संभव हो पायी है.सभी पुलिस अधिकारियों और जवानों को पुरस्कृत किया जाएगा.
अपराध की मार से कराह रहे सहरसा वासियों को इन अपराधियों की गिरफ्तारी से जरुर थोड़ी राहत मिलेगी.आगे पुलिस और कितने अपराधियों को वह भी त्वरित गति से पकड़ने में सफल हो पाती है,आगे देखना दिलचस्प होगा.

ओवर ब्रिज निर्माण के लिए अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल

समाजसेवी प्रवीण आनंद के नेतृत्व में चार लोग बैठे भूख हड़ताल पर

काल्पनिक ओवर ब्रिज
चन्दन कुमार सिंह :- बीते सत्रह साल से तीन शिलान्यास का तोहफा लिए और पूरी तरह से सियासी ठगी के शिकार बने सहरसा वासी अब ओवर ब्रिज निर्माण के लिए पूरी तरह से आर--पार की लड़ाई के लिए कमर कस चुके हैं.इसी कड़ी में आज समाजसेवी प्रवीण आनंद के नेतृत्व में चार लोग अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं. अनशनकारियों का साफ़ कहना है की इसबार किसी बात से समझौता नहीं होने वाला.या तो ओवर ब्रिज का निर्माण कार्य शुरू होगा या फिर अनशन स्थल पर ही उनकी समाधि बनेगी.कोसी क्षेत्र के स्थापित कलाकारों ने भी इस अनशन को अपना समर्थन देते हुए बड़े नायाब अंदाज में विभिन्य तरह के गीत गायन करके इस अनशन का आगाज किया.
स्थानीय कुंवर सिंह चौक के समीप देखिये शामियाना गिराकर समाजसेवी प्रवीण आनंद के नेतृत्व में चार लोग अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं.क्षेत्रीय कलाकार देशभक्ति गीत गाकर जहां अनशनकारियों में भरपूर ऊर्जा भरने की कोशिश कर रहे हैं वहीँ गीतों के माध्यम से ये कलाकार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भी ललकार रहे हैं.इस ओवर ब्रिज की थोड़ी कहानी जानिये.विगत कई वर्षों से जिला मुख्यालय के बंगाली बाजार में रेलवे ओवर ब्रिज के निर्माण के लिए अनवरत आंदोलनों का दौर बदस्तूर जारी है.पिछले आन्दोलन का जरुर असर हुआ और नतीजतन रेलवे ने ओवर ब्रिज निर्माण की ना केवल अपनी सहमति दे दी बल्कि ब्रिज निर्माण में व्यय होने वाली आधी राशि लेकर भी वह खड़े हैं.आधी राशि जो करीब चालीस करोड़ है वह बिहार सरकार को देनी है.लेकिन बिहार सरकार ना जाने किस दबाब और राजनीति के तहत उक्त राशि नहीं दे रही है और इस ब्रिज का निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पा रहा है.इसी बात से खफा लोगों ने अब आरपार की लड़ाई का मन बना लिया है. चारो अनशनकारी हैं प्रवीण आनंद,आस्कर त्यागी,मोहन मंडल और सुभाष गांधी.
बिना ओवर ब्रिज का निर्माण कार्य शुरू हुए यह भूख हड़ताल इस बार खत्म होने वाली नहीं है.सरकार को तुरंत पूर्वाग्रह से मुक्त होकर ऐसा करना चाहिए जिससे ओवर ब्रिज का निर्माण कार्य शुरू हो जाए.सरकार ने अबकी अगर लापरवाही बरती तो इसका खामियाजा उसे निसंदेह भुगतना पडेगा.चार जन तो भूख हड़ताल पर हैं और सैंकड़ों की संख्यां में लोग अलग से समर्थन में धरने पर हैं.स्थिति विकट और नाजुक है.आगे क्या होता है इसपर हमारी नजर सिद्दत से बनी रहेगी.

अक्टूबर 01, 2013

मौत के मुहाने पर खड़े भोला को बचाओ सरकार

EXCLUSIVE REPORT:
मुकेश कुमार सिंह : --- भूख से जंग लड़ते--लड़ते नाथो स्वर्णकार तो आखिरकार तड़प--तड़प कर मर गए लेकिन अब भूख से तड़प--तड़प के मरने के कगार पर है अस्सी वर्षीय भोला मिंयाँ।महीनों से अनाज के लिए तरसते इस बुजुर्ग का कोई अपना सगा नहीं है।पेट भीतर धंसा हुआ और जिश्म बेजान सुखी लकड़ी में तब्दील है।जाहिर तौर पर अकेला अपनी जिन्दगी से लड़ता हुआ अब यह दुनिया को अलविदा कहने वाला है।शासन और प्रशासन को सहरसा टाईम्स एक बड़े सच से आज रूबरू करा रहा है। नाथो स्वर्णकार की भूख से हुयी मौत पर पर्दा डालने में एड़ी चोटी का जोर लगाने वाले ये सरकारी लोग सरकारी योजनाओं के लाभ से महरूम नाथो के ही गाँव बैजनाथपुर के रहने वाले भोला मियाँ के मामले में कैसे संजीदगी दिखाते हैं और भोला मियाँ बच पाते है की नहीं यह आगे देखना बड़ा दिलचस्प होगा।

हम आपको वही बैजनाथपुर गाँव लेकर आये हैं जहां बीते चौबीस सितम्बर को भूख से तड़प--तड़प पचपन वर्षीय नाथो स्वर्णकार की मौत हुयी थी।गाँव वही है लेकिन तस्वीर आज हम बिल्कुल उलट लेकर हाजिर हुए हैं।आज हम अपने सामाजिक दायित्व के निर्वहन की ज़िंदा तस्वीर लेकर हाजिर हो रहे हैं।आज हम आपको एक ऐसे बुजुर्ग के दर्द से रूबरू करा रहे हैं जो सरकारी योजनाओं के लाभ से ना केवल महरूम हैं बल्कि कई महीनों से दाने--दाने को तरसते हुए मौत के मुहाने पर खड़े हैं।देखिये अस्सी वर्षीय भोला मियाँ को।इनका पूरा शरीर सुखी लकड़ी की तरह हो गया है।पेट पूरी तरह से भीतर धंसा हुआ है।पत्नी,बेटा और पुतोहू सभी की मौत हो चुकी है।अकेले जीवन के बचे दिन को किसी तरह से खींच रहे हैं।घर में महीनों से अनाज नहीं है।नाम का एक घर है जिसके भीतर अनाज रखने के लिए एक कोठी भी है लेकिन उसमें अनाज नहीं है।एक चुल्हा भी जो जलने की बजाय अक्सर खामोश ही रहता है।घर में कुछ बर्तन भी हैं जो बिना इस्तेमाल के भोला की बेबसी पर मायूस दिख रहे हैं।भोला बता रहे हैं की महीनों से उनके पास अनाज नहीं है।कहीं से मांग कर कुछ मिला तो खाते हैं वर्ना भूखे ही सो जाते हैं।भूख की वजह से उनका पेट मरोड़ता हैं।लगता है की वे बच नहीं पायेंगे।आँख दर्द के आंसूओं से तर और कलेजा मुंह को आ रहा है।
पड़ोस के लोगों  का कहना है:
पड़ोस के लोग खुलकर बता रहे हैं की भोला मियाँ का कोई अपना सगा नहीं है।इनके घर में महीनों से अनाज नहीं है।कभी किसी का दिल दरिया हुआ तो लोग उनको कुछ खाने के लिए दे दते हैं.लेकिन कई दिनों से ये अक्सर भूखे ही सो रहे हैं।भोला मियाँ के पास पैसे भी नहीं हैं।पड़ोसियों का कहना है की इन्हें कोई सरकारी मदद भी नहीं मिल रही है।लगता है की ये ज्यादे दिनों तक जी नहीं सकेंगे।
बीडीओ का कहना है:
मौत के मुहाने पर खड़े इस बुजुर्ग को लेकर हमने सौर बाजार प्रखंड के बीडीओ जगदीश झा से जबाब--तलब किया।उनको सहरसा टाईम्स से ही जानकारी मिल रही थी।उनका कहना है की भोला को अनाज के साथ--साथ और मदद पहुंचाई जायेगी,उन्हें मरने नहीं दिया जाएगा।हमने बीडीओ साहेब से यह भी पूछा की कहीं प्रशासन भोला की मदद की जगह उसके दाह--संस्कार की तैयारी में तो नहीं जुट जाएगा।
नाथो की मौत भूख से हो चुकी है लेकिन इस मामले की प्रशासन ने एक तरह से लीपा--पोती में भगीरथी चतुराई और कोशिशें की है।लेकिन इस बार हम अपने सामाजिक सरोकार और सामाजिक दायित्व को निभाते हुए एक बुजुर्ग की वेदना दिखा रहे हैं की भूख से वे किस तरह से लड़ रहे हैं।हम इस खबर के माध्यम से शासन--प्रशासन को खबरदार कर रहे हैं की समय रहते वह जागें और भोला को बचाने लिए आगे आयें।डर बना हुआ है की कहीं भोला मियाँ,नाथो की तरह भूख से तड़प--तड़प कर इस दुनिया को अलविदा ना कह दे।

दोहरे हत्याकांड का अभीतक नहीं हुआ खुलासा : सुस्ती भरी पुलिस की मुर्दा तफ्तीश

अमित अमर की रिपोर्ट-------
17 अगस्त की सुबह सहरसा वासियों के लिए दहशत भरी एक काली सुबह बनकर आई थी.16 अगस्त की रात में सदर थाना के बेंगहा गाँव के एक आवसीय परिसर में दो दोस्तों की बेरहमी से गर्दन रेतकर ह्त्या कर दी गयी थी.पौ फटते ही जब इस बात की भनक आसपास के लोगों लगी तो लगा की आसमान फट पडेगा.धीरे---धीरे इस नृशंस ह्त्या की खबर जंगल में आग की तरह इलाके में फ़ैल गयी.फिर हत्यास्थल के आसपास हजारों की भीड़ जमा हो गयी जो अपने---अपने तरीके से घटना की भर्त्सना और घटना के कारणों को लेकर कयासबाजी करने लगी.लोगों ने इस बड़ी वारदात की सूचना पुलिस को दी.मौके पर पुलिस के अधिकारी पुरे आव--लस्कर के साथ पहुंचे और दोनों लाश को अपने कब्जे में लेकर तफ्तीश की शुरुआत की.ह्त्या दो दोस्तों की हुयी थी.मरनेवालों में एक विष्णु प्रभाकर उर्फ़ युगल किशोर यादव सहरसा जिले के सलखुआ थाना क्षेत्र के अफजलपुर गाँव का रहने वाला था जबकि दुसरा शम्भू साह बेंगहा गाँव का ही रहने वाला था.घटना की शुरूआती जानकारी के मुताबिक़ मृतक युगल किशोर यादव मैकनिकल इंजीनियर था लेकिन उसने नौकरी नहीं की.जिले के बसौना गाँव में मृतक युगल की इंट भट्ठे की चिमनी है.इसके अलावा वह करोड़ों के ठेके का काम भी करता था.यही नहीं उसे प्रापर्टी डीलिंग का भी शौक था और वह जमीन खरीद--बिक्री का भी धंधा करता था.दूसरा मृतक शम्भू साह बेंगहा गाँव का रहने वाला था और उसे भी जमीन--खरीद बिक्री का चस्का लगा हुआ था.लेकिन शम्भू की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी और यही वजह थी की युगल से उसकी मित्रता हुयी.युगल की एक बहन की शादी बेंगहा गाँव हुयी है जिस कारण युगल अक्सर बेगहा गाँव आता था.अब जबकी मौत हो चुकी थी तो सबसे पहले थाने में मामला दर्ज करना आवश्यक था.मृतक युगल के पिता रामदेव यादव के लिखित बयान पर सदर थाना में कमलेश यादव,किशोर शर्मा,मदन शर्मा,मोहम्मद वासिम,रामचंद्र यादव और उमेश साह कुल 6 लोगों के खिलाफ नामजद काण्ड अंकित किया गया.पुलिस ने इन आरोपियों में से दो कमलेश यादव और किशोर शर्मा को घटनास्थल पर से ही गिरफ्तार कर के जेल भेज दिया जबकि मोहम्मद वासिम की गिरफ्तारी बाद में हुयी.बांकी के तीन आरोपी अभीतक फरार हैं.पुरे घटनाक्रम की तटस्थ पड़ताल में सबसे पहले दोनों मृतकों की पारिवारिक पृष्ठभूमि को जान लेना आवश्यक है.जिले के अफजलपुर गाँव का रहने वाला विष्णु प्रभाकर उर्फ़ युगल किशोर यादव की शादी करीब डेढ़ वर्ष पूर्व खगड़िया जिले के चौथम थाना अंतर्गत सिसवार गाँव में दिवंगत विजय यादव की पुत्री निधि कुमारी से हुयी थी.निधि से युगल को आठ माह की एक बच्ची भी है.
युगल के स्वसुर विजय यादव अपने इलाके के दबंद माने जाते थे.वर्ष 2007 में जिला पुलिस और एस.टी.एफ के संयुक्त इनकाउंटर में विजय यादव मारे गए थे.मृतक विजय यादव पूर्व में मुखिया थे और अभी उनकी बेबा लीला देवी मुखिया हैं.युगल किसान परिवार से आता है और वह दो भाई था.उसके बड़े भाई खेतीबाड़ी करते हैं.बेंगहा का रहने वाला शम्भू साह साधारण परिवार का था.उसे छः बेटियाँ हैं जो अभीतक क्वांरी हैं.शम्भू इलाके में बिक्री की जमीं तलाशता था और उस जमीन को सहरसा के प्रापर्टी डीलरों के माध्यम से बिक्री करवाता था.इस धंधे में उसे जीने लायक कमीशन मिल जाता था.हालिया दिनों में वह जो बिक्री की जमीन तलाशता था उसकी खरीददारी में युगल पैसे लगाता था.सूत्र बताते हैं की इस जमीन बिक्री में शम्भू की सक्रियता की वजह से इलाके की जमीन की कीमत भी आसमान छूने लगी थी जिससे बहुतों को चिढ थी.इधर जिस आवासीय परिसर में दोनों  दोस्तों की ह्त्या हुयी है वह आवासीय परिसर मुंगेर के एस.पी नवीन चन्द्र झा की है.नवीन चन्द्र झा जिले के दिघिया गाँव के रहने वाले हैं.बताना लाजिमी है की उस आवासीय परिसर को लेकर भी बड़ा विवाद था लेकिन कुछ माह पूर्व सहरसा पुलिस की भागीरथी मदद और उसकी मौजूदगी में उस विवादित जमीन की चाहरदीवारी डाली गयी थी और उसके भीतर दो छोटे--छोटे कमरे बनाए गए थे.यहाँ आपको यह भी बताना जरुरी है की इस आवासीय परिसर का मृतक शम्भू साह केयर टेकर भी था.
सुस्त पुलिस पानी पर मार रही है डंडे
विभिन्य मामलों में लकीर का फ़क़ीर बनी और हवा में तीर मारने वाली सहरसा पुलिस की कारस्तानी की लम्बी फेहरिस्त है.सहरसा पुलिस के बारे में कहा जाता है की वह सनसनीखेज हत्याकांडों की फायलों को ठन्डे बसते में डालने में माहिर है.बेंगहा के दोहरे हत्याकांड मामले में वक्त बीतते चले जा रहे हैं लेकिन पुलिस की जांच दो कदम भी आगे नहीं बढ़ पायी है.पुलिस ने अभीतक ना तो शम्भू साह की बेबा और उनकी बेटियों के बयान लिए हैं और ना ही अफजलपुर गाँव जाकर मृतक युगल की बेबा निधि,युगल के बड़े भाई और अगल--बगल के लोगों का बयान लेना ही मुनासिब समझा है.खासकर के युगल का पूरा परिवार अभी तक सदमे में और असुरक्षित है लेकिन उसकी सुरक्षा को लेकर भी पुलिस कहीं से भी गंभीर नहीं है.पुलिस इस मामले में कितना गंभीर और मुस्तैद है यह इस बात से जाहिर हो जाता है की अभीतक इस मामले में महज तीन आरोपियों की गिरफ्तारी हो पायी है लेकिन तीन अन्य आरोपी अभीतक फरार हैं.गौरतलब है की पुलिस की गिरफ्त में आये तीन आरोपियों में से दो आरोपी पुलिस की गिरफ्त में घटना के के दुसरे दिन ही आये हैं वे घटना की सुबह मौके पर ही मिल गए थे.पुलिस की जांच की रफ़्तार ना केवल अत्यंत धीमी है बल्कि पुलिस इस मामले के पटाक्षेप में उदासीन बनी दिख रही है.
काहिल पुलिस की अलमस्त तफ्तीश
पुलिस ने अभीतक इस हत्याकांड में इस्तेमाल हथियार को बरामद करने में भी सफलता नहीं पायी है.ह्त्या की रात हत्यास्थल से महज कुछ फलांग पर और्केस्टा का आयोजन किया गया था.और्केस्टा के आयोजन के पीछे किसका हाथ था.कहीं और्केस्टा का आयोजन इसलिए तो नहीं किया गया था की अपराधी शोर के बीच आसानी से ह्त्या की इस घटना को अंजाम दे सकें.मृतक युगल के पिता रामदेव यादव कहते हैं की पुलिस की कार्यशैली से वे हैरान--परेशान हैं.अगर पुलिस फरार तीन आरोपियों को गिरफ्त में ले पाती तो उनसे पूछताछ के बाद ह्त्या का खुलासा हो जाता.लेकिन कुछ भी नहीं हो रहा है.पुलिस पर से उनका भरोसा उठता जा रहा है.बेटे की ह्त्या से पूरी तरह से टूट चुके रामदेव यादव यह भी बताते हैं की मृतक युगल बसौना के पास चिमनी चलाता था.युगल का कई लोगों के पास करीब पंद्रह लाख इंट का बकाया भी था.
कुछ बिंदु जिसपर पुलिस की तफ्तीश जरुरी
इस दोहरे हत्याकांड में पुलिस को कुछ खास विन्दुओं पर भी गौर करने चाहिए। (पहला)----युगल के द्वारा इंट की उधारी देना कहीं ह्त्या की वजह तो नहीं ?
(दूसरा)----इस ह्त्या के पीछ प्रेम--प्रसंग या नारी देह तो नहीं ?
(तीसरा)-----जमीन खरीद--बिक्री में इलाके की जमीन की अप्रत्यासित बढ़ रही कीमत कहीं ह्त्या की वजह तो नहीं ?
(चौथा)------रूपये का उलट--फेर,लेन--देन कहीं हत्या की वजह तो नहीं ?
(पांचवां)----युगल के ससुराल पक्ष की विरासत और युगल की पारिवारिक पृष्ठभूमि कहीं इस ह्त्या की वजह तो नहीं ?
(छठा)-----मुंगेर एस.पी का विवादित आवासीय परिसर कहीं ह्त्या की वजह तो नहीं ?
जाहिर तौर पर दो दोस्तों की ह्त्या अचानक आक्रोश का प्रतिफल नहीं है.इस ह्त्या के पीछे जमा हुआ आक्रोश है.इस ह्त्या के तरीके से यह साफ़ जाहिर हो रहा है की इस ह्त्या की तैयारी पहले से थी और ह्त्या के लिए बस बेहतर मौके का इन्तजार था.ह्त्या के कई दिन बीत जाने बाद भी पुलिस के हाथ अभीतक खाली हैं.पुलिस की जांच पूरी तह से मंथर और सुस्त है.आखिर यहाँ की पुलिस को कितनी बड़ी घटना का इन्तजार है जिसमें उसकी जांच  त्वरित गति से वह भी पारदर्शिता के साथ होगी.इस घटना के बाबत सहरसा के पुलिस अधीक्षक अजीत सत्यार्थी का कहना है की इस हत्याकांड के पटाक्षेप के लिए अनुसंधान की दिशा में काम हो रहा है.पटना से आई ए.एफ़.एस.एल की टीम घटनास्थल से फिंगर प्रिंट लेकर गयी है.वैज्ञानिक अनुसंधान के साथ स्थानीय पुलिस भी इस हत्याकांड की गुत्थी सुलझाने में जुटी हुयी है.बहुत जल्द हत्याकांड के रहस्य पर से पर्दा उठ जाएगा.
लोगों का भरोसा खोकर,कटघरे में खड़ी पुलिस
लगातार कई सनसनीखेज ह्त्या मामलों की फाईलों को ठंडे बस्ते में डालकर जम्हाई लेने में माहिर सहरसा पुलिस पर अब लोगों को मुकम्मिल तौर पर भरोसा कर पाना लगभग नामुमकिन हो गया है.आगे हम इस खबर के माध्यम से कुछ हत्याकांड का जिक्र कर रहे हैं जिस मामले में पुलिस आजतक ना केवल बस हवा में तीर मार रही है बल्कि मामले का पटाक्षेप करने में पूरी तरह से नाकामयाब साबित हुयी है.
(पहला)----25 दिसम्बर 2011 की रात अगवा करके पान व्यवसायी शम्भू चौरसिया की ह्त्या.इस मामले में नो क्लू करके पुलिस ने अपनी जांच पूरी करके अपराध फाईल को बंद कर दिया है.
(दूसरा)----21 दिसंबर 2012 को महिषी थाना के बेलवारा गाँव की बारह वर्षीय सुधा की सामूहिक दुष्कर्म के बाद गर्दन मरोड़कर निर्शंस ह्त्या।.इस मामले में आजतक किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है.
(तीसरा)----21 जून 2012 को डॉक्टर संतोष भगत को अगवा कर उसकी ह्त्या कर लाश को मानसी के रेलवे ट्रैक पर फेंकने मामले में आज तक किसी भी दोषी को चिन्हित करने तक में भी यहाँ की पुलिस कामयाब नहीं हुयी.
(चौथा)-----6 फ़रवरी 2013 को सदर थाना के महावीर चौक स्थित एक घर में करोडपति विधवा सहनी देवी की गर्दन में फंदा लगाकर बेरहमी से ह्त्या मामले में अपराधियों को आजतक ढूंढ पाने में पुलिस कामयाब नहीं हो सकी.
(पांचवां)----5 जून 2013 को सदर थाना के हक़पाड़ा गाँव के रहने वाले तीस वर्षीय अनिल यादव की बेरहमी से ह्त्या कर लाश को रेलवे ट्रैक के समीप फेंकने मामले में भी पुलिस ने आजतक किसी की भी गिरास्फ्तारी नहीं की है.
बानगी के तौर पर पुलिस की सुस्ती के ये कुछ उदाहरण भर हैं.यूँ पुलिस की सुस्ती की मोटी फाईल है जो पुलिस को नकारा और बेजा साबित करने के लिए काफी हैं.इतने के बाद भी हम पुलिस से ये उम्मीद कर रहे हैं की पिछली नाकामियों से पुलिस सबक और सीख लेते हुए आगे त्वरित जांच और उचित कारवाई की नयी पटकथा लिखेगी जिसमें उसकी उपयोगिता पर कम से कम प्रश्न खड़े होंगे.

सितंबर 30, 2013

नाथो की मौत भूख से हुयी : सहरसा टाईम्स के खबर का असर

28.09.2013 मुकेश कुमार सिंह: चौबीस सितम्बर को पचपन वर्षीय बुजुर्ग की मौत की वजह आखिरकार भूख ही निकली. सहरसा टाईम्स ने मौत के दिन से ही भूख से हुयी इस मौत की खबर को सिद्दत और संजीदगी से दिखाया था. सहरसा टाईम्स ने खबर के माध्यम से उन तमाम परिस्थितियों की ना केवल तस्वीर उतारी थी बल्कि थोक में लोगों के बयान भी लिए थे जो भूख से हुयी मौत की चीख--चीख कर गवाही दे रहे थे.आज सुप्रीम कोर्ट के फ़ूड सेफ्टी कमिश्नर के सलाहकार रुपेश के नेतृत्व में आठ सदस्यीय टीम ने बैजनाथपुर गाँव में जांच कर इस बात का पुरजोर तरीके से खुलासा कर दिया की नाथो की मौत की वजह कोई बिमारी नहीं बल्कि भूख थी.
देखिये सुप्रीम कोर्ट के फ़ूड सेफ्टी कमिश्नर के सलाहकार रुपेश के नेतृत्व में आठ सदस्यीय टीम बैजनाथपुर गाँव नाथो की मौत किस वजह से हुयी इसकी जांच के लिए पहुंची है.जांच टीम के सभी सदस्यों ने परिवार के सदस्य,मेले की शक्ल में जमा लोग,मुखिया सहित साथ आये अधिकारियों से जमकर पूछताछ की.पूछताछ पूरी करने के बाद खुद रुपेश कुमार और जांच टीम के प्रमुख सदस्य डॉक्टर शकील ने खुले लहजे में कहा की नाथो की मौत की वजह भूख थी.यही नहीं इन्होनें यह भी कहा की नाथो के लाश का पोस्टमार्टम कराया जाना चाहिए था.अपने बयान में इन्होनें यह भी साफ़ किया की मृतक के पुत्र से सादे कागज़ पर हस्ताक्षर लिए गए और मृतक के पुत्र को यह जानकारी नहीं दी गयी की कागज़ पर क्या लिखा हुआ है.जिले के PDS सिस्टम को पूरी तरह से फेल बताते हुए इन्होनें यह भी कहा की इतने गंभीर मामले में जिलाधिकारी का घटनास्थल पर नहीं आना काफी दुखद है.जाहिर तौर पर इनलोगों ने अपनी जांच में थोक में गड़बड़ी पायी जिसकी रिपोर्ट सर्वोच्च न्यालय के कमिश्नर को सौंपी जायेगी.कयास लगाया जा सकता है की इस मामले पर जिले के कई बड़े अधिकारियों पर गाज गिर सकती है.यह जांच टीम दिन के तीन बजे सहरसा पहुंची जहां सबसे पहले सहरसा परिसदन में इस घटना को लेकर अधिकारियों से बातचीत की.लेकिन यह खुलासा नहीं हो पाया की अधिकारियों से क्या बातचीत हुयी.
आखिरकार जिला प्रशासन की लीपा--पोती की कलाई खुल ही गयी और सच सामने आ ही गया.जिला प्रशासन को इस घटना को ना केवल नजीर बनाना चाहिए बल्कि इससे सीख लेते हुए अपनी कार्यशैली इसतरह से दुरुस्त करना चाहिए,जिससे फिर कोई नाथो इस तरह से भूख से तड़प--तड़प कर आगे ना मरे.सहरसा टाईम्स ने इस मामले में अपने सामाजिक दायित्व का निर्वहन बाखूबी किया है.

सितंबर 27, 2013

सीपीआई का हल्ला बोल

सहरसा टाईम्स:  भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के नेतृत्व में विभिन्य जनसमस्याओं को लेकर जिला समाहरणालय पर विशाल प्रदर्शन किया गया. सहरसा रेलवे स्टेशन से हजारों की तायदाद में निकला गरीब--गुरबों का यह कारवां शहर के मुख्य मार्गों से होता हुआ जिला समाहरणालय पहुंचा जहां पहले तो ये आंदोलित कार्यकर्ता समाहरणालय के मुख्य द्वार को तोड़ते हुए अन्दर प्रवेश किये फिर जिलाधिकारी के कक्ष के सामने जमकर हंगामा और नारेबाजी की.जिलाधिकारी के कक्ष के बाहर इनलोगों ने जमकर बबाल काटे फिर धरने पर बैठ गए.इनलोगों को शासन--प्रशासन के काफी शिकायतें हैं.सहरसा में ओवरब्रिज के निर्माण,जिले में जर्जर सड़कें,जल--निकासी की समस्या,भूमिहीनों को पर्चा और जमीन पर स्वामित्व,बिजली की नियमित आपूर्ति और गलत बिजली बिल में सुधार,विभिन्य योजनाओं में मची लूट पर लगाम सहित चौबीस सूत्री मांगों का ज्ञापन जिलाधिकारी यह अल्टीमेटम के साथ सौंपा गया की जल्द इन मांगों पर उचित कारवाई नहीं हुयी तो समाहरणालय को पूरी तरह से नष्ट कर दिया जाएगा. बाद में समाहरणालय के बाहर ये सभी कार्यकर्ता धरने की शक्ल में बैठ गए जहां वक्ताओं ने भाषण दिए.
इस हंगामे और हुजूम का जिला प्रशासन पर क्या असर होगा यह तो आगे देखा जाएगा लेकिन अभी इतनी बड़ी संख्यां में लोगों ने आकर यह जरुर जता दिया है की जनता सुकून से नहीं है और आगे वह शासन---प्रशासन की चूलें हिला कर रख सकती है.

सितंबर 24, 2013

भूख से बुजुर्ग की मौत


मुकेश कुमार सिंह : सरकारी योजनाओं में लगे घुन्न ने आज एक बुजुर्ग की ईहलीला खत्म कर दी.बीते चार--पांच महीने से सरकारी राशन नहीं मिलने की वजह से घर का चुल्हा खामोश था.कमजोर देह को गरीबी और मुफलिसी ने इस कदर अपनी आगोश में ले लिया की आखिरकार उसकी उखड़ी साँसे भी उसका साथ छोड़ गयी.एक बुजुर्ग आज भूख से तड़प--तड़प कर इस दुनिया को ना केवल अलविदा कह गया बल्कि सियासतदां को आंकड़ों की बाजीगरी और सत्ता की कुर्सी बचाने के दाँव--पेंच के खेल को भी बेआबरू कर गया.घर में महीनों से सरकारी दाना नहीं था और भूख कबतक यूँ ही जीने की मोहलत देती.
बैजनाथपुर गाँव में भूख से दम तोड़े यह हैं पचपन वर्षीय नाथो स्वर्णकार.बेजान लाश जमीन पर पड़ी है.एक मामूली सा घर था जिसमें बेटा और पुतोहू के साथ यह बुजुर्ग रहने को तयशुदा थे.बीते चार महीने से घर में अनाज नहीं था.बेटा मंदबुद्धि का है जो अपनी पत्नी के साथ अपनी ससुराल में था.घर का चुल्हा पूरी तरह से खामोश था.बगल के लोग और पंचायत के मुखिया की दया से बीते चार महीने के दौरान कभी--कभी कुछ खाने के लिए इस बुजुर्ग को जरुर मिला लेकिन खुदगर्जी से भरी इस दुनिया में कब तक कोई इन्हें भोजन कराता रहता.कमजोर शारीर को समय पर खाना मिलना बंद हुआ तो वह और कमजोर होता चला गया और आज वह घडी आ गयी जब इस बुजुर्ग ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया.गाँव के लोगों ने कुछ दिन पहले मृतक की पुतोहू को खबर दी थी,वह आई लेकिन घर में अनाज नहीं था.वह फिर लौटकर अपने मायके गयी और आज दस किलो चावल लेकर आई.लेकिन उसके आने से पहले ही नाथो हमेशा के लिए गहरी नींद में सो चुके थे.अब उन्हें किसी तरह के अनाज की जरुरत नहीं रही थी.
भूख से मौत हुयी है यह बात पंचायत के मुखिया पंकज कुमार चीख--चीख कर कह रहे हैं. मुखिया जी यह भी कह रहे हैं की पिछले तीन माह से इस पंचायत में किसी को अनाज नहीं मिला है.मुखिया जी यह भी कह रहे हैं की यह बात जब उन्होनें जिलाधिकारी से कही की इस बुजुर्ग की मौत भूख से हुयी है तो जिलाधिकारी शशि भूषण कुमार ने उनसे कहा की अगर भूख से मौत हुयी है तो आप जेल जायेंगे.मुखिया जी ने पूरी तरह से खुलकर कहा की बुजुर्ग की मौत की वजह भूख है.सहरसा टाईम्स की पुरजोर दखल के बाद जिलाधिकारी शशि भूषण कुमार ने घटनास्थल पर सी.ओ और अन्य अधिकारियों को जांच के लिए भेजा.और यह भी हमारी दखल का ही नतीजा था की मृतक का अब पोस्टमार्टम कराया जा रहा है जिससे यह पता चले की मौत की आखिर वजह क्या थी.
एक बुजुर्ग असमय काल के गाल में समा गया.महीनों से जिस बुजुर्ग देह को दाना ना मिला हो उसकी मौत की वजह को लेकर आरोप--प्रत्यारोप का दौर शुरू है.घर में अनाज एक दाना भी नहीं था जो एक कड़वी सच्चाई है. हमारी  दखल के बाद जिला प्रशासन अब मौत की वजह खंगालने में जुटा है.अगर जिला प्रशासन को थोड़ी सी भी शर्म और हया है तो वह अभी भी जागे और गरीबों तक समय से राशन--किरासन पहुंचे इसके लिए ईमानदार पहल करे.वैसे आप इसे तय मानिए की इस मामले में भी सभी कुछ ठन्डे बस्ते में जाकर दम तोड़ देगा.इस मामले में बड़ा सच है की इन्साफ से मुतल्लिक कहीं कुछ होने वाला नहीं है.यूँ गरीबों को लेकर कुछ समय तक हो--हंगामे के बाद ख़ामोशी का पुराना चलन है.

सितंबर 22, 2013

बीजेपी की विश्वासघात रैली

कल स्थानीय पटेल मैदान में बीजेपी की विश्वासघात रैली जो अपने तय समय दिन के बारह बजे की जगह दिन के दो बजे शुरू हुयी।इस रैली में हजारों की संख्यां में पहुंची महिलायें,पुरुष और बुजुर्ग--बच्चों की भीड़ को मंचासीन नेताओं ने तूफानी अंदाज में संबोधित किया।इस रैली को पूर्व उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी,बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष मंगल पांडे,पूर्व मंत्री गिरिराज सिंह,पूर्व मंत्री जनार्दन सिंह सिग्रीवाल,सांसद रामाधार सिंह सहित प्रदेश के कई अन्य नेताओं के अलावे क्षेत्रीय नेताओं ने भी संबोधित किया।सभी के भाषण में नीतीश को लेकर विष--वाण भरे थे.समवेत स्वर में वक्ताओं ने बड़े साफ़ लहजे में कहा की नितीश विश्वासघाती हैं और उन्होनें बड़ा पाप किया है.आने वाले चुनावों में उन्हें उनके कर्मों की सजा मिलकर रहेगी।वक्ताओं ने नरेंद्र मोदी को आज देश की बड़ी जरुरत बताते हुए कहा की नरेंद्र मोदी की हवा नहीं बह रही है बल्कि नरेद्र मोदी के नाम की सुनामी आई है जिसमें सबके सब उड़ जायेंगे।नरेंद्र मोदी को प्रधानमन्त्री बनने से कोई भी नहीं रोक सकेगा।
इस रैली में शामिल होने से पूर्व ही हमने जिला मुख्यालय स्थित परिसदन में बीजेपी के फायर ब्रांड नेता गिरिराज सिंह से खास बातचीत की।बातचीत में आज गिरिराज पहले से कहीं ज्यादा तल्ख़ और आक्रामक दिखे।गिरिराज ने नीतीश कुमार पर हमला करते हुए कहा की आने वाले समय में नीतीश कुमार जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव को जॉर्ज फर्नांडिस की तरह पार्टी से निकाल फेंकेंगे।गिरिराज ने खुलकर कहा की अगर शरद चाहें तो भाजपा उन्हें अपना सकती है लेकिन नीतीश अब किसी भी सूरत में बर्दास्त नहीं।गिरिराज ने शरद को भीष्म पितामह की भूमिका से बाहर निकलने की नसीहत भी दी।गिरिराज ने चारा मामले में नैतिक रूप से नीतीश कुमार को ना केवल इस्तीफा देने को कहा बल्कि आने वाले दिनों में नीतीश और लालू दोनों को चारा घोटाले में जेल जाने की बात भी कही।गिरिराज ने सहरसा टाईम्स से आगे कहा की नीतीश निरंकुश और मतान्ध हाथी हो गए हैं जनता महावत की शक्ल में आकर आगे उन्हें जबाब देगी।शरद ने नीतीश  पर तीखा हमला करते हुए कहा की नरेंद्र मोदी की कृत्रिम हवा नहीं बल्कि उनके नामं का तूफ़ान आया है जिसमें सब के सब उड़ जायेंगे।विभिन्य दंगे मामले में नीतीश के बयान पर भी गिरिराज जमकर बरसे।
मीडियाकर्मियों के साथ दुर्व्यवहार
इस रैली के दौरान सब से अहम् और दुखद बात यह रही की सुशील मोदी ने मीडियाकर्मियों के साथ दुर्व्यवहार किया और मीडियाकर्मियों को मंच से ना केवल उतर जाने को कहा बल्कि यह भी कहा की उन्हें फोटो खिंचवाने का शौक नहीं है,विजुअल मीडिया वाले चाहें तो उनके फोटो को ना चलायें।इस बात से नाराज मीडियाकर्मी मोदी के भाषण का सभास्थल से निकलने लगे लेकिन बीच में प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष मंगल पांडे ने मंच से नीचे मीडियाकर्मियों से मांफी मांगी।हांलांकि छोटे मोदी का मीडिया के प्रति यह तेवर कहीं से माफ़ी के काबिल नहीं है,इसलिए मीडियाकर्मियों ने मोदी के भाषण का पूरी तरह से बहिष्कार कर दिया।
कुल मिलाकर यह एक सफल रैली मानी जा सकती है लेकिन गिरिराज के तल्ख़ बयान और सुशील मोदी के मीडियाकर्मियों के साथ अनुचित व्यवहार ने इस रैली के रंग में निश्चित तौर भंग डाल दिया।यही वजह हुयी की मोदी के व्यवहार से आहत विजुअल मीडियाकर्मियों ने मोदी के भाषण का पूरी तरह से बहिष्कार कर दिया।

सितंबर 12, 2013

महिलाओं का बिजली के लिए संग्राम


रिपोर्ट सहरसा टाईम्स: आज बिजली के लिए जिला समाहरणालय के मुख्य द्वार से लेकर उसके परिसर में महिलाओं का घंटों संग्राम चलता रहा.जिले के मेनहा गाँव की महिलाओं का गुस्सा ना केवल सांतवें आसमान पर था बल्कि वह फुटकर समाहरणालय परिसर के चारों ओर पसरा हुआ भी था.आप यह जानकार हैरान हो जायेंगे की ट्रान्सफार्मर महीनों से जला हुआ है और बिना बिजली जलाए ही इनलोगों को बिजली का बिल मिल रहा है.हद बात तो यह है की बहुत ऐसे लोग भी हैं जिन्होनें पुलिस के डर से बिना बिजली जलाए ही बिजली बिल का भुगतान भी कर दिया है.
खासकर के महादलित परिवार की महिलाओं के हाथ में आज कमान थी.महिलाओं ने जिला समाहरणालय और डी.एम कार्यालय में घंटों बबाल काटने के दौरान मौके पर मौजूद एक पुलिस जवान के साथ ना केवल धक्का--मुक्की की बल्कि जवान की रायफल भी छीनने की कोशिश की.इनलोगों ने दोपहर बाद अपने कार्यालय पहुंचे डी.एम का भी घेराव किया. 
विशेष कवरेज के साथ मुकेश सिंह
आज जनता दरबार के दिन भी हाकिम शाही अंदाज में दोपहर के बाद पहुंचे.महिलायें उनके आने के बाद भी हंगामा करती रही लेकिन साहेब आखिर साहेब ठहरे सो तुरंत इन महिलाओं को सुनना मुनासिब नहीं समझा.हमने भी चाहा की डी.एम शशि भूषण कुमार से पूछें की आखिर इन पीड़ितों को लेकर वे कितना गंभीर हैं और इस मामले का क्या समाधान निकाल रहे हैं लेकिन उन्होनें अपने अर्दली से हम तक खबर पहुंचवा दी की अभी वे किसी से नहीं मिलेंगे.हमने कुछ निचले अधिकारी से भी जबाब--तलब करना चाहा लेकिन सारे के सारे अधिकारी डी.एम के कक्ष में ही बने रहे.थक--हारकर दिन के करीब साढ़े तीन बजे वहाँ से हम चल पड़े.  
बिजली को लेकर आये दिन सहरसा में बबाल होता है जिससे विधि--व्यवस्था पटरी से उतर जाती है.लोग हो--हंगामे से लेकर सड़क जामकर यातायात को घंटों बाधित भी कर देते हैं.लेकिन हद की इन्तहा देखिये की लापरवाह और बेशर्म बिजली विभाग की कारगुजारियों पर जिला प्रशासन भी कहीं से गंभीर नहीं दिख रहा है.आखिर में हम इतना जरुर कहेंगे की इस जिले के आलाधिकारियों को बड़ी घटना--दुर्घटना से पहले जागने की आदत नहीं है.उनके लिए ऐसे मंजर महज एक आम बात भर है.

*अपनी बात*

अपनी बात---थोड़ी भावनाओं की तासीर,थोड़ी दिल की रजामंदी और थोड़ी जिस्मानी धधक वाली मुहब्बत कई शाख पर बैठती है ।लेकिन रूहानी मुहब्बत ना केवल एक जगह काबिज और कायम रहती है बल्कि ताउम्र उसी इक शख्सियत के संग कुलाचें भरती है ।