दिसंबर 01, 2015

मधेशियों के समर्थन में “हम और फ्रेंड्स ऑफ आनन्द”

महासचिव राजन आनंद
सहरसा टाइम्स की रिपोर्ट:- पिछलें तीन महीनों से भारतीय मूल के मधेशी अपने मानवीय और लोकतांत्रिक आधिकारों को लेकर नेपाल में आन्दोलन कर रहे है. उन्हें प्रत्येक दिन बर्बरता पूर्वक कुचला जा रहा है. अब तक पचास से अधिक मधेशी और दो भारतीय नागरिक कि जाने जा चुकी है.लेकिन न तो नेपाल कि असंवेदनशील सरकार झुकने को तैयार है और भारत सरकार का रवैया भी हमेशा उपेक्षापूर्ण है. ऐसे में छात्र “हम और फ्रेंड्स ऑफ आनन्द” ने मधेशियों के समर्थन में उतरने का निर्णय लिया है. 
आगामी 2 दिसम्बर 2015 को अपराह्न् 2 बजे कुवंर सिंह चौक से समाहरणालय तक विरोध मार्च करते हुए प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौपेगे और दिन के दूसरें चरण में संध्या 04.30 बजे शंकर चौक पर कैंडिल जलाकर मधेशी शहीदों को श्रधांजलि अर्पित करेगें. इसकी जानकारी “हम” के महासचिव राजन आनंद ने दिया.  

नवंबर 30, 2015

साँई बाबा के उत्सव समारोह में निकाली गयी पालकी यात्रा, उमड़ा भक्तों का जनसैलाब

कृष्णमोहन सोनी और अजहर उद्दीन की रिपोर्ट :- हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी सहरसा शहर के साँई भक्तों व साँई चाकर  समिति के द्धारा 29 नवंबर 15 रविवार को स्थानीय सहरसा कालेज मैदान में उत्साह पूर्वक  बड़े धूम धाम से आरती, चतुर्थ वार्षिक पवित्र पालकी यात्रा एवं महाभंडारा तथा सांई भजन संध्या का भव्य आयोजन किया गया. पवित्र पालकी यात्रा एवं भंडारा तथा साँई भजन कीर्तन साँई की झाँकी भी निकाली गयी जिसमे प्रसिद्ध साँई भजन गायक पारस जैन शिर्डी एवं दिल्ली के कलाकारों द्धारा एक से एक भजन एवं रासलीला प्रस्तुति की गयी.
इस मौके पर सबसे पहले पालकी यात्रा में भाग लेने के लिए स्थानीय सहरसा कालेज मैदान में हजारों की संख्या में साँई भक्त महिला, पुरुष सहित बच्चों ने भी हिस्सा लिया. 
वहीं संध्या काल में बाहर से आये एक से एक कलाकारों द्धारा सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किया गया. 
वही उत्सव में भारी संख्यां में भक्तों ने भाग लेकर अपनी साँई संगीत भजनो से पंडाल में उपस्थित होकर  साँई  बाबा की तस्वीरों पर फूल चढ़ा कर साँई बाबा के भक्तिमय बहती गंगा में डुबकी लगाया. साँई चाकर समिति द्धारा आयोजित इस साँई उत्सव में सबसे पहले साँई बाबा की आरती की गयी उसके बाद पालकी यात्रा निकाली  गयी. 
पालकी यात्रा शहर के सहरसा कालेज मैदान से निकल कर पूरब बाजार होते हुए शहर के विभिन्न व मुख्य महावीर चौक, थाना चौक, शंकर चौक, दहलान चौक आदि क्षेत्रों से भ्रमण करते हुए पुनः स्थल पर पहुंचा.
पूजा स्थल पर आये भक्तजनो के लिए विशेष कर साँई उत्सव समारोह में आने वाले दूर- दूर के साँई भक्तों के लिए भी व्यवस्था की गयी जिसमे महिलाओं, पुरुषों के लिए अलग- अलग भव्य पंडाल में बनाये गए और उनके रहने के सुंदर सुरक्षित व्यवस्था, खाने हेतु भंडारा की व्यवस्था किया गया. 
इस अवसर पर समय समय पर भक्तजनो के लिए चाय कॉफी निःशुल्क दिए गए जिसे लोगो ने आनंद उठाया एवं पूजा आरती भजन संकीर्तन में भाग लेकर पुण्य के भागी भी बने.
इस साँई उत्सव समारोह में साँई बाबा तस्वीर एवं किताबों का भी  अलग- अलग अनेको स्टॉल लगाये गए. वहीं  सुरक्षा का पुख्ता इंतजाम भी  किया गया जिसमे महिलाओं के लिए महिला स्वयं सेवक और पुरुष भक्तजनो के लिए युवास्वयं सेवको को तैनात किया गया.
इस मौके पर साँई चाकर समिति के संयोजक विशाल कुमार बिट्टू ने बताया की यहाँ हर वर्ष इस तरह के आध्यात्मिक साँई उत्सव अब मनाया जाएगा. आज भी बड़े धूम धाम से मनाया जा रहा है और यहाँ आये सभी भक्तजनो के लिए विशेष व्यवस्था की गयी है. साँई बाबा के दरवार में भक्तजनों के लिए बाहर से कलाकारों को भी मंगाया गया है. भक्तिमय संगीत भजन का आनंद भक्तजन लेंगे इस कार्य कर्म में साँई चाकर समिति के अध्यक्ष् विमल कुमार,सचिव लाल प्रसाद साह,उमेश जायसवाल,अरुण सिंह बैजू सिंह बुक्की यादव, रमन वर्मा ,गौरव कुमार प्रेम कुमार राउत ,अमित सोनी , प्रभु सिंह ,कुणाल कुमार टिंकू ,मनीष कुमार गोबिंद सहित अन्य सदस्यों ने बढ़चढ़ कर कार्यक्रम को सफल बनाने में अपना अपना योगदान किया। 

नवंबर 27, 2015

साहित्य की घोर ह्रास से हमारी संस्कृति व सभ्यताएं भी सिमटती जा रही है......


कृष्ण मोहन सोनी की कलम से साहित्य पर एक छोटा सा प्रकाश, एक रिपोर्ट:- हर क्षेत्र में साहित्य का एक अपना अलग महत्व है. खास कर मानव जीवन  साहित्य से जुड़ाव होना अतिआवश्यक है. साहित्य मानव जीवन के हर सुख दुःख में एक सच्चे साथी व जीवन को जीने में बहुत ही कारगर अनमोल रत्न जैसी खुशियाँ भी देती है. 
साहित्य से इतर रहकर मनुष्य अपने जीवन को सही-सही जी नही सकते. कितनी भी कठिनाइयाँ हो और साहित्य सामने आ जाय तो हर कठिनाइयों को दूर कर जीवन संवार कर सुखमय जीया जा सकता है. मनोरंजन का क्षेत्र हो या समाज विकास या राजनीतिक पहलू देश की संप्रभुता की रक्षा या फिर देश की सांस्कृतिक सभ्यताएं व सौहार्द को ठोस और उसे अछुण्ण बनाये रखने में साहित्य का होना आवश्यक है नही तो जीवन कष्टमय ही नही बल्कि कई बहुमूल्य सोच व  दिशा के  साथ साथ हम मानव जीवन की महत्तता को खो देंगे और हमारी मानव जीवन की संम्पूर्ण कहानी भी जमींदोज हो जायेंगे.
 इसलिए हर मानव  जीवन को साहित्य के प्रति संवेदनशील और इनके हर रस में घुल जाने की जरूरत है ताकि हर क्षेत्र में साहित्य के बल पर आगे बढ़ा जा सके लेकिन वर्तमान में इन दिनों साहित्य की घोर ह्रास व अपेक्षित रहने की वजह से ही पुरे विश्व में एक बदलाव हो रहा है जो कहीं न कहीं विनाश का कारण: बनता जा रहा है. यही कारण है कि हर देश अस्थिरता व विभिन्न आपदाओं से जूझ रहा है और हमारी संस्कृति व सभ्यताएं भी सिमटती जा रही है..।  

नवंबर 26, 2015

घटना स्थल पर तीन दिनों के बाद पहुँची सहरसा पुलिस .......

कृष्ण मोहन सोनी की रिपोर्ट:- विगत तीन दिन पहले स्थानीय सराही वार्ड न० 5 में अपराधियों ने रामदेव मुखिया के घर पर हमला कर घर में लूटपाट की थी. गृह स्वामी रामदेव मुखिया व उनकी पत्नी चानो देवी को बुरी तरह मार पीट कर जेवरात लुट लिया. जख्मी का इलाज हेतु सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया था. इस बावत पीड़ित परिजनों ने घटना की सूचना स्थानीय सदर था ना पुलिस को दी, लेकिन दुर्भाग्य है कि तीन दिन बाद पुलिस घटना स्थल पर गयी और मामले को दर्ज की.
इस घटना में आरोपी अभ्युक्त गणेश मुखिया उनके पुत्र उज्वल मुखिया, अर्जुन मुखिया पिता योगेन्द्र मुखिया सहित अन्य अज्ञात के विरुद्ध दर्ज मामले में एक की भी गिरफ्तारी नही हो पायी है. जिससे पीड़ित परिवार दहशत में है। पहले घटना के अपराधी तो पुलिस के गिरफ्त में नहीं आते है लेकिन अपराधी फिर दूसरी घटना को अंजाम देने में सफल हो जाते है. इस तरह अपराध की लगातार घटना घट रही है पुलिस घटना के बाद मामले कि छानबीन में जुट जाती है. आखिर कब-तक  होती रहेगी छानबीन और शहरवासी सहते रहेंगे अपराधियों का अपराध. 

भाई – बहनों के अटूट प्रेम का पर्व सामा–चकेवा सम्पन्न......


कृष्णमोहन सोनी के साथ मो० अजहर उद्दीन की रिपोर्ट:- मिथिलांचल में प्रचलित और लोका आस्था भाई – बहनों के अटूट प्रेम कहानी पर्व सामा – चकेवा हर वर्ष कि भांति एस वर्ष भी शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े ही धूम-धाम से मनाया गया.यह पर्व हर वर्ष कार्तिक पूर्णिमा के मौके पर मिथिलांचल में मनायी जाती है.सामा-चकेवा एस पर्व को लेकर बहने पूर्व से ही मिट्टी कि रंग-बिरंगी मुर्तिया बनाती है. जिसमें सामा-चकेवा, चुगला, सतभैया, कचबचिया, सखारी, भबरा-भबरी, वृंदावन, खजन चिड़िया, आदि कि खुबसूरत प्रतिमा पारम्परिक तरीके से बना कर आधुनिक ढंग से सजा कर मनाई गयी. 
बहने इस पर्व पर अपने भाई कि दीर्घायु लम्बी उम्र कि कामना करते हुए.गीत-नाद के साथ पूर्णिमा के रात में हँसते-गाते गावं कि कुरखेत या नदी तालाब में जा कर सामा-चकेवा का विसर्जन किया.
बताया जाता है,कि इस पर्व में सामा-चकेवा सहित अन्य पंछियों कि आकृति को बांस के बने टोकरी में लेकर माथे पे रख गीत गाती घर से निकलती है और नदी तालाब या कुरखेत में जाकर पूजा अर्चना कर विसर्जन भी करती है. इस मौके पर महिलाएं एक जुट होकर अपने गीतों में अपने भाई के लिए गाम के जमींदार आहो बड़का भैया हो मोहे आठ दस पोखरी खून वाय दिहो, जैसी गीत गाती है. जिसमें भाई के प्रति अटूट प्रेम देखने को मिलता है. ये गीत ना केवल इतिहास कि जानकारी देती है, बल्कि भाई-बहनों कि अटूट प्रेम कहानी प्रतीत होती है.
बताया जाता है, कि भगवान कृष्ण कि बेटी सामा अपने प्रेमी से गंधर्व विवाह कि थी.जिसकी शिकायत चुगला दूारा भगवान कृष्ण को के जाने बाद भगवान कृष्ण ने सामा को श्राफ दिया और मैना बना दिया जो वृन्दावन कि जंगल में भटक रही थी.सामा के भाई दूारा अपनी बहन एवं बहनोई का मिलन कराने के लिए अनजल त्याग दिया मजबूरन भगवान विष्णु ने सामा को पुनः मनुष्य योनी में लाया जहाँ सामा अपने पति के साथ खुश रहने लगी और अपने भाई चारू वक्र लम्बी आयु के लिए पूजा करने लगी तब से ये परम्परा हमलोगों के बीच सामा-चकेवा त्यौहार के रूप मानाया जाता है.         

अपराधी ने कनीय अभियंता को जख्मी कर घर में कि लूटपाट......

कृष्णमोहन सोनी की रिपोर्ट :- फिर एक बार अपराधियों द्धारा किये गए अपराध की घटना से सहरसा शहर वासियों में दहशत फैल गयी है इन दिनों लगातार अपराधी  घटना को अंजाम दे रहा है  इस दिशा में सहरसा पुलिस अपराध पर अंकुश लगा पाने में अक्ष्म सावित हो रही है.अपराधियों के मंसूबे इतने बुलंद है की अपराधी खुलेआम अपराध को अंजाम दे रहा है.
बीती रात अपराधियों ने जिले के कहरा प्रखण्ड में पदस्थापित मनरेगा के योजना एवं विकास विभाग के कनीय अभियंता आशिष कुमार के सराही वार्ड न० 5 जगदम्बा चौक के निकट उनके आवास पर हमला कर घर में लूटपाट की. 
अपराधियों ने अभियंता आशिष कुमार व उनके वृद्ध पिता राम नारायण मालाकार सहित किरायेदार विरेन्द्र राम को बुरी तरह मारपीट कर जख्मी कर दिया. घर से जेवरात व नगदी 12 हजार लूट ले गया. सभी जख्मियों की हालत गंभीर है जिसे सदर अस्पताल में इलाज हेतु भर्ती  कराया गया है. इस बावत पीड़ित ने बताया कि मामले की जानकारी पुलिस को दी गयी जिसमे चंदन, कुंदन, योगेन्द्र साह व अज्ञात के विरुद्ध मामला दर्ज कराया गया. घटना के बारे में बताया कि घटना पूर्व में भी सभी आरोपी धमकी दिया था मारपीट किया तो उसके विरुद्ध थाना में एफ.आई.आर. दर्ज हुई थी जिसमे समझौता करने का दबाव में नही आने से अपराधी घटना को अंजाम दिया. 

नवंबर 25, 2015

कोसी में जमीनी विवाद में खेली जाती है खून की होली ......

फ़ाइल् फोटो 
मो० अज़हर उद्दीन की रिपोर्ट :- सहरसा टाईम्स ने आप सभी के बीच समाज से जुड़े हर समस्यां की खबर दिखायी है, चाहे वह पुलिस की चरमराती व्यवस्था हो या सरकारी योजनाओं का बंदर बाँट लेकिन आज सहरसा टाईम्स कोशी की सबसे बड़ी समस्यां लेकर आप सभी के बीच दस्तक दी है. ये बड़ी समस्यां इतनी भयानक रूप ले चुकी है कि जिससे कोशी की धरती प्रत्येक दिन लाल रंगो के रंग में रंग जाती है. ये विवाद "भूमि विवाद"  के नाम से कोशीवाशियों के बीच दहशत फैला चुकी है. 
गौरतलब ये विवाद का फैलाव कोशी के साथ - साथ पूरे बिहार को अपने कब्जे में ले चुकी है. आगे अहम बात ये है.की भूमि विवाद का फैलाव इतनी तेजी क्यों और कैसे हो रहा है. इस विषय बिन्दू पर चर्चा करने की जरूरत है जहाँ तक मेरा सोच है वो ये है कि............
(1) जमीनों की खरीद बिक्री करने के लिए बढ़ते जा रहे है,दलाल ।  
(2) सर्वे विभाग कर्मचारी के दुआरा माल गुजारी  रशीद काटने में सावधानी नहीं बरतना । 
(3) बिना किसी प्रमाण के जमीन सम्बंधित रशीद काट देना । 
(4) जमीनी विवाद मामले के निपटारे में विभाग दिख रहा है,सुस्त । 
फ़ाइल् फोटो 
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अमूमन इन सभी बिन्दुओं पर विभाग को काफी संजीदगी से जल्द प्रकाश डालना होगा कोशी  ये इलाका जमीनी विवाद में जो नई इबारत लिख रहा है. दलालों और दबंगों की प्रभाव से आम जनता को खूब परेशानी के साथ - साथ अपना खून भी बहाना पड़ता  है. दबंग व्यक्ति के दुआरा कमजोर वर्ग के लोगों के जमीन को ताकत के बल पे कब्जा करना अब यहाँ दबंगो की परम्परा बन गयी है.--अगर कोशी इलाके से इस खुनी खेल को बन्द करना है,तो दलाल और दबंगो को चिन्हित कर लगाम लगाने की जरूरत है.तभी ये खून का खेल थम पायेगा और लोगों को उसका वाजिब हक मिल पायेगा । 

नवंबर 24, 2015

आरोपी गब्बर मल्लिक का आत्म समर्पण............

सहरसा टाइम्स की रिपोर्ट:-  शनिवार की रात मछली मार्केट में वर्चस्व को लेकर हुई गोलीबारी मामले के मुख्य आरोपी गब्बर मल्लिक ने आज सहरसा के पुलिस अधीक्षक के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया. आज तक मछली बाजार में विधि व्यवस्था को लेकर पुलिस बलों व पुलिस अधिकारी तैनात रहे. शहर के डीबी रोड स्थित मछली बाजार में राजा होटल पर गोलीबारी हुई थी. गोलीबारी में मो. फैयाज को पेट व हाथ में गोली लगी थी.
जब पुलिस को सफलता नहीं मिल रही थी तो पुलिस अधीक्षक ने गिरफ्तारी को लेकर न्यायालय से कुर्की जब्ती आदेस प्राप्त कर लगातार गब्बर के घर पर छापेमारी कर रही थी. कुर्की जब्ती और पुलिस की बढती दाविस के कारण गब्बर मल्लिक ने पुलिस अधीक्षक के सामने आज आत्मसमर्पण कर दिया.  

डा0 भूपेंद्र देव कोसी सम्मान से सम्मानित किये गए डा० देव शंकर नवीन................

कृष्णमोहनसोनी की रिपोर्ट:-  सहरसा जिले के सत्तर कटैया प्रखंड क्षेत्र के मिडिल स्कुल बिहरा के प्रांगण में कवि सम्मेलन आयोजित किये गए. इस मौके पर एक से एक साहित्यकारों,कवियों व बुद्धिजीवियों सहित ग्रामीणो ने भाग लिया. यह सम्मेलन वर्तमान परिवेश में जहां साहित्य की महत्ता को मानव जीवन में अति आवश्यकता महशुश कराया वही साहित्य की ह्रास होने की दिशा में देश की संस्कृति व सभ्यताओं पर खतरा के साथ साथ पुरे विश्व की अस्थिरता को भी सामने लाकर लोगो के लिए एक प्रश्न भी छोड़ गया. सम्मेलन में आये साहित्यकारों व कवियों की एक से एक रचना, कवि पाठ से दर्शक भाव विभोर रहे वही अपने समाज की व राजनितिक कुरीतियाँ से भी अवगत हुए. इस सम्मेलन में  डा० भूपेंद्र देव के नाम पर स्थापित  डीबीडी फाउंडेशन बेगुसराय, नई दिल्ली सहरसा द्धारा प्रख्यात साहित्यकार भाषाविद डॉक्टर देव शंकर नवीन को प्रथम डा0 भूपेंद्र देव कोसी सम्मान से सम्मानित करते हुए प्रतीक चिंन्ह प्रशष्टि पत्र एवं 11 हजार रुपये से नवाजे गये. 
फोटो साभार www.maithilijindabaad.com
यह सम्मान डॉ देव की 25 वीं पुण्य तिथि के अवसर पर शुरू किये गए जो हर वर्ष 22 नवंबर को फाउंडेशन की ओर से दिया जाता है. इस बावत साहित्यकार मुक्तेश्वर मुकेश ने कहा की डॉ देव जी डी कॉलेज बेगुसराय में अंग्रेजी के आजीवन प्राध्यापक थे जो सहरसा जिले के बिहरा गावं निवासी थे. वे 22 नवंबर वर्ष 1990 को दुनियां से अलविदा हुए इस सम्मान समारोह कवि सम्मेलन में बेगुसराय, खगड़िया एवं सहरसा सहित अन्य जगहों से आये  प्रसिद्ध कवियों साहित्यकारों में  मुख्य अतिथि प्रदीप बिहारी साहित्य एकादमी सम्मान प्राप्त कवि राजबल्ल्भ राठौड़, दिलीप सिन्हा, महेंद्र बंधु, सुमन शेखर, कैलाश झा किंकर कि कविता  मास्टर केय मस्टरवा कहबो,बेटा पढ़तो कहियो नेय, अइतो जइतो ईस्कुल लेकिन आगू बढतो कहियो नेय श्रोताओं को खूब जमा वही मुक्तेश्वर मुकेश की एक से बढ़कर एक कविता एक क्ष्णिकाएँ हृदय को वेधति रही चकाचोंध चमक देखता हूँ,चमक की रोज खनक देखता हूँ, दिन रात उखड़ती साँसो में दर्द की गहरी झलक देखता हूँ जैसे कविता से एक साहित्य की महत्ता को यादगार छोड़ दिया.
इस मौके पर डॉ देव के भाई बलराम देव भी मौजूद थे जिनके हाथों से सम्मान प्रदान किया गया वही शायर समा मौसम और सलाउद्दीन खां सम्सी की गजलें कर्ण प्रिय मीठी आवाज में सुनकर श्रोता बाग बाग हो उठे. इस मौके पर शेखर सावंत अध्यक्ष् जनेश्वर मेहता ने अतिथियों को धन्यवाद् ञापन किया. 

नवंबर 23, 2015

सहरसा पुलिस को गब्बर की तलाश ..........

सहरसा टाइम्स की रिपोर्ट:-  सहरसा में अपराधिक घटना और पुलिस की कार्यशैली से जग जाहिर है. बीते शनिवार को मछली मार्केट में होटल मालिक की हत्या करने के दृष्टी से बदमाशो ने ताबरतोर फाईरिंग कर फिर से लोगो को जीना हराम कर दिया है. इस घटना की कड़ी में होटल मालिक मो० एहसान ने तो भागकर किसी तरह जान बचा ली लेकिन अपराधी के गोली का शिकार मासूम मो० फैयाज हो गया. फैयाज का बेहतर इलाज निजी नर्सिंग होम में किया जा रहा है जहाँ उसकी हालत समान्य बताई जा रही है.
गौरतलब है कि सहरसा पुलिस परिजन के बयान पर गाँधी पथ के गब्बर मल्लिक सहित बौआ मल्लिक, पट्टू मल्लिक, कल्लू, आदित्य के अलावा कई अज्ञात पर प्राथमिकी दर्ज कराई है. सहरसा पुलिस गब्बर की तलाश में जुट चुकी है अब देखना होगा की सहरसा के गब्बर को पकड़ने में पुलिस की क्या भूमिका होती है. 

*अपनी बात*

अपनी बात---थोड़ी भावनाओं की तासीर,थोड़ी दिल की रजामंदी और थोड़ी जिस्मानी धधक वाली मुहब्बत कई शाख पर बैठती है ।लेकिन रूहानी मुहब्बत ना केवल एक जगह काबिज और कायम रहती है बल्कि ताउम्र उसी इक शख्सियत के संग कुलाचें भरती है ।