कृष्णमोहन सोनी की रिपोर्ट: जिले में चलाये जा रहे पल्स पोलियो अभियान को सुचारू रूप से संचालित किये जाने को लेकर बुधवार को समाहरणालय सभागार
में डिस्ट्रिक टास्क फ़ोर्स, डिस्ट्रिक हेल्थ सोसाइटी की मासिक
समीक्षात्मक बैठक जिला पदाधिकारी शशिभूषण कुमार की अध्यक्षता में आयोजित की
गयी. इस बैठक में मुख्य रूप से सिविल सर्जन व जिले के विभिन्न क्षेत्रों के
स्वास्थ्य केन्द्रो, उप केन्द्रो व पोलियो अभियान से जुड़े कर्मियों ने
भाग लिया. मासिक बैठक में जिला पदाधिकारी ने जिले में
पोलियो अभियान को मजबूती से व सुचारू रूप से सभी केन्द्रो पर संचालित
किये जाने से संबंधित अधिकारियों, प्रतिनिधियों व कर्मियों से बात की. अभियान में किसी
भी प्रकार की कोई कमी न होने पाये जैसी कड़ी हिदायत देते हुए कई आवश्यक
निर्देश भी दिये। इस मौके पर मुख्य रूप से सिविल सर्जन भोला नाथ झा, डॉ
अशोक प्रसाद , कंचन कुमारी सहित, W.H.O. यूनिसेफ, एस. आर सी प्रतिनिधि व
अन्य अभियान कर्मियों ने भाग लिया।
जनवरी 15, 2015
जनवरी 14, 2015
बाहुबली का नया अवतार-------------
मुकेश कुमार सिंह की कलम से स्पेशल रिपोर्ट------- सी. बी. एस. ई की एक नयी पुस्तक जो आठवी क्लास की है और विषय है हिंदी.उसके एक अध्याय के लेखक है पूर्व सांसद आनंद मोहन.....पुस्तक का नाम है मधुरिका हिंदी पाठमाला....कभी दबंग,तो कभी बाहुबली और कभी रॉबिन हुड की संज्ञा.लेकिन अब एक नया अवतार.आनंद मोहन को अब एक लेखक के रूप में पुरे देश के बच्चे जानेंगे.उनकी लेखनी इस पुस्तक में है जिसका नाम है पर्वत पुरुषः दशरथ . ...फिलवक्त ये लेखक गोपालगंज के पूर्व जिलाधिकारी जी कृष्णैया की हत्या के आरोप में सहरसा के मंडल कारा में उम्र कैद की सजा काट रहे है.
सबसे पहले मै आपको इनका जरा परिचय करवा दू ..इनका जन्म 26 जनवरी 1956 में एक स्वतंत्रता सैनानी परिवार (सहरसा जिला के पंचगछिया स्थित) में हुआ .. शुरूआती दिनों में आनंद मोहन पहले के सहरसा जिला और अब सुपौल जिला के त्रिवेणीगंज प्रखंड स्थित अपने ननिहाल मानगंज गाँव में रहते थे.वहीँ पर वे जे.पी के सम्पूर्ण क्रांति में कूद पड़े और त्रिवेणीगंज में पुलिस फायरिंग का जमकर विरोध किया.इसमें कुछ उनके छात्र साथी भी पुलिस की गोली लगने से मारे गए.उन शहीद साथियों का इन्होनें शहीद स्मारक बनवाया.. इन सबके बीच इन्होनें अपने सम्पादन में " क्रान्ति दूत" नाम का एक साप्ताहिक अख़बार भी छापना शुरू किया.जब 1977 में जनता पार्टी की सरकार बनी और तत्कालीन प्रधानमंत्री मुरारजी देसाई का सहरसा आगमन हुआ तो सैद्धांतिक मतभेदों के कारण इन्होने,उन्हें काला झंडा दिखाया.बाद में चलकर त्रिवेणीगंज विधानसभा से चुनाव भी लड़े लेकिन पराजित हुए.
इस क्रम में इनपर कई अपराधिक मुक़दमे दर्ज हुए और इन्हें देखते ही गोली मारने का वारंट भी जारी हुआ.उसवक्त आनंद मोहन को लोग रोबिन हुड की छवि के रूप में जानने लगे थे.पुलिस इन्हें कुत्ते की तरह ढूंढ रही थी और ये छुपते फिर रहे थे.वर्ष 1983 में पूर्व मुख्यमंत्री सत्येन्द्र नारायण सिंह का आगमन सहरसा में हुआ और पूर्व से तय कार्यक्रम के मुताबिक़ दस लाख से अधिक भीड़ की मौजूदगी में आनंद मोहन ने उनके समक्ष आत्मसमर्पण किया..बाद में चलकर न्यायालय से ये बड़ी हुए.तब बी.पी सिंह की लहर का दौर था.1990 के विधानसभा चुनाव में तत्कालीन कॉंग्रेस के कद्दावर नेता लहटन चौधरी को सहरसा जिले के महिषी से रिकॉर्ड 63,000 मतों से पराजित कर आनंद मोहन ने अपनी पहली राजनीतिक उपस्थिति दमदार तरीके से दर्ज करायी.फिर इन्होने अपनी एक पार्टी बिहार पीपुल्स पार्टी के नाम से बनाई ..बाद में चलकर लालू यादव से नजदीकियां बढ़ी और राजद से गठबंधन हुआ और वे शिवहर से सांसद चुने गए.लगातार तीन वार शिवहर से वे सांसद रहे.1994 में इनके एक साथी मुजफ्फरपुर के नेता छोटन शुक्ला की हत्या हुई.उनकी अर्थी जुलूस में लालबत्ती गाड़ी को देख भीड़ बेकाबू हो गयी और उस पर टूट पड़ी.उसमे बैठे गोपालगंज के तत्कालीन जिलाधिकारी जी कृष्णैया की हत्या हो गयी.हत्या के आरोप में आनंद मोहन हाजीपुर से गिरफ्तार कर लिए गए निचली अदालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक मामला चला और पूर्व सांसद को उम्र कैद की सजा हो गयी.बीते कई वर्षों से आनंद मोहन सहरसा जेल में बंद हैं. अब जाकर सहरसा जेल के अंदर एक नए कवि और लेखक आनंद मोहन का जन्म हुआ. कैद में आजाद कलम, स्वाधीन कलम और काल कोठरी आदि इनकी चर्चित कृति में से है.
इनके इतिहास की कड़ी को थोड़ा और आगे बढ़ाएं तो इनकी शादी सहरसा जिले की जेम्हरा गाँव की रहने वाली लवली आनंद से 13 मार्च 1991 को हुयी. आनंद मोहन ने अपने राजनीतिक प्रभाव से अपनी पत्नी को दो बार विधायक और एक बार सांसद बनाया. आनंद मोहन को दो बेटे और एक बेटी है. आनंद मोहन ने देहरादून में अपना एक घर खरीदा, जहां उनके बच्चों की परवरिश हुयी. दून के मंहगे स्कूल से बच्चों ने तालीम ली. अभी बड़ा बेटा सिम्बॉसिस पुणे में इंडस्ट्रियल डिजाइनिंग का छात्र और बेटी लॉ की छत्रा है. आनंद मोहन के दादा राम बहादुर सिंह देश के चर्चित स्वतंत्रता सेनानियों में से एक थे. आजादी से पूर्व आनंद मोहन के घर महात्मा गांधी, राजेन्द्र प्रसाद, विनोबा भावे से लेकर जे.बी.कृपलानी तक का आना--जाना रहा. हालिया वर्षों की बात करें तो पूर्व प्रधानमन्त्री चंद्रशेखर और पूर्व उप राष्ट्रपति भैरो सिंह शेखावत तक आनंद मोहन के घर आ चुके हैं. बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव ने भी आनंद मोहन के घर जाकर अपनी हाजिरी लगाई है.
सहरसा के बुद्धिजीवी लोगों में इस बात की खुशी है की पाठ्यक्रम में इतने बड़े कवि और लेखकों के बीच आनंद मोहन को भी शामिल किया गया.आनंद मोहन के चाहने वालों में काफी ख़ुशी है.वे कहते हैं की आनंद मोहन जी ने अपनी लेखनी से साहित्कारों के बीच से एक दमदार उपस्थिति दर्ज की है.जिस ब्यक्ति के बिषय में विरोधियों ने बहुत तरह की बाते फैलाई और उनको हमेशा बाहुबली ही घोषित किया लेकिन गद्य एवं पद्य के माध्यम से जो उपस्थिति उन्होंने दर्ज की है और उनके लिखे हुए गद्य का सी.बी एस. ई में प्रविष्ट होना,उनके विरोधियों को करारा जवाब है. कहानी और कविता के माध्यम से आनंद मोहन जी ने जेल के भीतर अपने एक-एक पल को जिया है.
बुद्धिजीवी कहते हैं की जिस पाठ्यक्रम में इतने बड़े-बड़े साहित्कारों की रचनाओं का संग्रह किया गया है उसमे आनंद मोहन की गद्य रचना का आना बड़ी बात है.आनंद मोहन की गद्य रचना किस स्तर की होती है, ये इसका ही एक प्रमाण है ये बड़ी उत्कृष्ट खासियत है की आनद मोहन जी ने जेल की काल कोठरी में रहकर भी ऐसी रचना लिखी है. देश के जाने माने वयोवृद्ध पत्रकार यू.एन.मिश्रा भाव--विह्ववल हैं और आनंद मोहन की इस गद्द और पद्द यात्रा को श्रेष्टतम यात्रा करार रहे हैं. बड़े बेबाक लहजे में इनका कहना है की आनंद मोहन अब साहित्यिक इतिहास की धरोहर बन चुके हैं.ओमप्रकाश नारायण यादव,प्रियदर्शी पाठक,दिनेश प्रसाद सिंह,सुरेश सिंह और रमेश प्रसाद सिंह जैसे आनंद मोहन के समर्थक कोसी इलाके में घूम--घूमकर आनंद मोहन की इस बेहद खास छवि से लोगों का परिचय करा रहे हैं.इनलोगों का समवेत कहना है की आनंद मोहन के भीतर की संवेदना सदैव जागृत रही और साहित्य में इनका यह स्थापन,उसी का फलाफल है.
सहरसा जेल अधीक्षक अनिल पाण्डेय भी गदगद हैं की उनके काल में आनंद मोहन की रचना ऐसी जगह पर पहुंची है.इनके मुताबिक़ जेल के लिए यह काफी हर्ष का विषय है.
सहरसा टाईम्स ने एक मामले में सहरसा न्यायालय पहुंचे पूर्व सांसद आनंद मोहन से खास बातचीत की. आनंद मोहन ने खास बातचीत में कहा की जेल के भीतर उन्होनें निर्गुण में शगुन तलाशने की कोशिश की है. उन्होनें तल्ख तेवर में कहा की राजनीतिक साजिश के तहत मैं जेल में बंद हूँ.और जिनलोगों ने यह सोचा की आनंद मोहन को सजा कराकर अभिशाप के तौर उन्हें अभिशप्त कर दिया उस अभिशाप को मैंने वरदान में बदलने की कोशिश की है. उन्होनें कहा की उनके लिए काफी हर्ष का क्षण है और घर के लोगों से लेकर तमाम उनके समर्थक तक काफी खुश हैं. इनकी नजर में राजनीति पर जबतक साहित्य की छाँव रही राजनीति निर्मल रही. लेकिन आज राजनीति बेईमानी और गंदगी का ना केवल पर्याय बन चुकी है बल्कि राजनीति निष्ठुर हो गयी है.साहित्य के दायरे में आगे राजनीति जब आएगी तब से राजनीति पौरुष की होगी.
जनवरी 13, 2015
बिजली विभाग की लापरवाही
कृष्णमोहनसोनी की रिपोर्ट:- बिजली विभाग की लापरवाही से लगातार शहर में बिजली के कारण दुर्घटनाएं हुआ करती हैं.बावजूद इसके विभाग व्यवस्था को सुधारने के लिए कहीं से भी चिंतित नहीं है. इन दिनों शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों की गली और मोहल्ले के साथ--साथ सड़को के किनारे बिजली के खम्भे गाड़े जा रहे है तो कहीं बिजली की तार बदले जा रहे है.
बिजली विभाग की लापरवाही का एक बानगी भर आपको हम दिखाने जा रहे हैं. इस तस्वीर को देखिये, बिजली का ये खम्भा लोहे का है जो की कृष्णा नगर, डोमा लाल स्कूल वाले रोड में है. बिजली का ये खम्भा अपनी पूरी आयु जी चुका है फिर भी,यह अपनी क्षमता से ज्यादा वजन अपने ऊपर लिए हुए है.न जाने कब ये सड़क पे आ गिरे.जी हाँ!जिस दिन ये बिजली का खम्भा गिरा उस दिन बड़ी मुसीबत आ जाएगी. इस लिए आप ज़रा संभल कर इस रास्ते से चलें. सबसे दुःखद ये है की बिजली
विभाग के अधिकारी और स्थानीय जनप्रतिनिधि का इधर से आना--जाना होता है लेकिन किसी की नजर इस खम्भे पर नहीं जाती है.
जरा आप भी सोचिये, आप भी कभी अच्छे कामों के लिए अपना कदम बढ़ाये और संबंधित विभाग को इस तरह की सूचना जरूर दें,ताकि समय से पहले होने वाली किसी अनहोनी से बचा जा सके.
इस खतरनाक व जानलेवा व्यवस्था को जल्द से
जल्द चुस्त--दुरुस्त कर दें ताकि यहाँ किसी तरह की जानमाल की क्षति नहीं हो.जाहिर सी बात है की समय रहते अगर बिजली विभाग इस खम्भे को सही कर दे तो बड़ी घटना से,सहज ही बचा जा सकेगा.
इस तरह की सूचना आप हमें भी दे सकते है..... 94708 71451
जनवरी 12, 2015
नगर परिषद की यह कैसी व्यवस्था...........
कृष्णमोहनसोनी की रिपोर्ट:- सहरसा नगर परिषद् क्षेत्र के अन्तर्गत अधिकांश
वार्डों में दिए गए डस्टबीन कूड़े--कचड़े को रखने के लिए दिया गया है लेकिन
यहाँ डस्टबीन में कचड़े नही बल्कि कूड़े--कचड़े
में डस्टबीन रखा गया है.सभी मोहल्ले में कूड़े --कचड़े को रखने हेतु डस्टबीन दिया
गया है. नगर परिषद् द्धारा वार्डों की साफ सफाई को लेकर हर वार्ड में स्वीपर
भी दिया गया है ताकि वातावरण साफ--सुथरा स्वच्छ बना रहे. परन्तु कई वार्डो की हालत बदहाल है.लोगो को गली--मुहल्लों से होकर गुजरना मुस्किल हो गया है.
गौरतलब है की सहरसा नगर परिषद् की यह कैसी व्यवस्था है ,जहाँ न तो सड़को की सफाई होती है और न ही किसी वार्ड में स्वीपर नजर आता है.
गौरतलब है की सहरसा नगर परिषद् की यह कैसी व्यवस्था है ,जहाँ न तो सड़को की सफाई होती है और न ही किसी वार्ड में स्वीपर नजर आता है.
ऐसी परिस्थिति में डस्टबीन में कचड़ा नही बल्कि कचड़ा में डस्टबीन जरूर नजर आता है. सरकार ने इसके लिए लाखों रुपये खर्च कर
स्वछता अभियान भी चलाया है,मगर सहरसा नगर परिषद् के विभिन्न वार्डो में
दिए गए डस्टबीन या तो
गंदे नाली के पानी में पड़े हुए है या तो कचड़े की ढेर पर फेके हुए हैं.नगर
परिषद् ऐसी डस्टबीन व्यवस्था देकर मानो लोगों पर बड़ा उपकार किया हो.
यहाँ के अधिकांश वार्डो में ये नजारा देखने को
मिलता
है. इसके लिए न तो वार्ड पार्षद गंभीर हैं और न ही मुहल्ले वासी ही.वार्ड के
लोगों का कहना है की साफ़--सफाई के लिए स्वीपर वार्ड में सफाई करने कभी
आता ही नहीं है.बड़ा सवाल यह है की वार्ड पार्षद भी इस दिशा में कोई गंभीरता पूर्वक कदम नहीं उठाते हैं. नगर परिषद के
वार्ड संख्या २२/२३/२४/२५/२६/२७/ २८/ ही नहीं बल्कि अधिकांश वार्डों का हाल
यही है.
सबसे खतरनाक स्तिथि तो ऎसे वार्डों की है जहां बिजली के
ट्राँसफार्मर के नीचे नंगे तार के पास डस्टबीन रखा गया है. जहाँ लोग अपने--अपने घर के कूड़े--कचड़े को इस खतरनाक डस्टबीन में फेंकने के लिए अपने छोटे--छोटे बच्चे को भेज देते हैं.जिससे कभी भी
बिजली की करंट से कोई बड़ा हादसा हो सकता है.एक तरफ नगर परिषद् की उदासीनता
तो
दूसरी तरफ मुहल्लेवासियों की इस दिशा में कोई पहल न करना,एक बड़ी घटना को
आमंंत्रित करने जैसा है.हाल यही रहा तो एक दुःखद घटना को होने से कोई रोक नही
सकता है.जरूरत है समय रहते नगर परिषद् के आलाधिकारी इस दिशा में कोई ठोस कदम उठायें ताकि स्वच्छ और सुंदर व सुरक्षित व्यवस्था शहर वासियों को मिल
सके.
नवहट्टा के पूर्वी कोशी तटबंध के उत्तरी भाग में कोशी का कटाव जारी
कृष्णमोहन सोनी की रिपोर्ट:- कोशी नदी हर
वर्ष अपनी उग्र रूप धारण कर कई गाँवों को अपने आगोश में लेती है मगर
इस
बार पूर्वी कोशी नदी फिर एक बार नए तेवर में दिखने लगी है समय पूर्व ही
कोशी अपना करवट बदलने लगी है. जिससे कोशी तटबंध के अंदर व बाहर बसे लोगो
में हरकंप मचने लगा है. लोग अपने को असुरक्षित महसूस करने लगे है। मिली
जानकारी के मुताविक जिले के नवहट्टा प्रखंड के पूर्वी कोशी तटबंध के 78.60
किलो मीटर स्पर के उत्तरी भाग में कोशी का कटाव जारी हो गया है इस कटाव से
स्थानीय लोग बुरी तरह प्रभावित होने लगे है. कोशी के कटाव से किसानो की
जमीन व फसल नदी के तेज कटाव में विलीन हो रहा है.
इस बावत किसानो ने बताया की इस से कदली, रामपुर, हाटी आदि कई
गाँव बुरी तरह प्रभावित हो रहा है. स्थानीय किसान शमसुल, मोहम्मद आलम, पप्पू सिंह,
सुभाष,
रमेश कुमार आदि ने बताया की करीब 24 एकड़ में लगी फसल कोशी के कटाव से
बर्वाद हुआ है लोगों ने बताया की इस दिशा में जलसंसाधन विभाग उदासीन है।
विभाग को इसकी जानकारी है वाबजूद कोई निरोधात्मक कार्य नही हो रहा है
विभाग सिर्फ इतना जरूर कह रही है कि जलसंसाधन विभाग के कलेंडर में समय
सीमा बाढ़ व कटाव की जून माह से 10 अक्टूबर तक ही होती है। विभाग द्वारा
अब
तक कटाव निरोधी कार्य नही होने से जहाँ ग्रामीण व किसान हलकान है वही
उनकी फसल और जमीन को कोशी ने अपने आगोश में लेना शुरू कर दी. बहरहाल
पूर्वी कोशी तटबंध के 78.60
किलोमीटर स्पर के उत्तरी भाग पर समय पूर्व तेज कटाव जारी है और
जलसंसाधन विभाग उदासीन है.
जनवरी 11, 2015
एक दिवसीय सिरतुन्नबी -सह- कॉन्फ्रेन्स आयोजित
फिर गरजी बंदूक, पूर्व मुखिया गोपाल यादव की गोली मार कर हत्या
कृष्णमोहन सोनी की रिपोर्ट:- सहरसा में अपराधियों की फिर गरजी बंदूक.इलाके में अपराधियों के द्धारा खेली जा रही है खून की होली.पिछले दिनों पंचवटी चौक के एक व्यवसायी सुनील गुप्ता की हत्या को लेकर जिला मुख्यालय के लोगों ने लामबंद होकर सहरसा बंद कर विरोध जताया था इस दिशा में पुलिस कुछ
युवको को हिरासत में लेकर छानबीन में जुटी हुई थी. लेकिन अपराधियों ने फिर
से पुलिस को एक और चुनौती देते हुए उसे एक काम अलग से सौंप दिया है …………
![]() |
| मृतक पूर्व मुखिया गोपाल यादव |
सदर थाना क्षेत्र के पटुआहा में बीती रात अपराधियों के द्धारा पूर्व मुखिया गोपाल यादव की गोली मार कर हत्या कर दी गयी. मिली जानकारी के मुताबिक पूर्व मुखिया भोज खाकर
वापस अपने घर लौट रहे थे. इसी क्रम में घात लगाये अपराधियों ने उन्हें गोली मार
दी और आराम से भाग निकले.मृतक मुखिया की पत्नी सुनीता देवी ने बताया की उनके पति शाम चार बजे ही अपने चिमनी
पर गये थे.जहां से वे गांव के ही एक व्यक्ति के यहां भोज खाने चले गये थे.घर
लौटने के क्रम में अपराधियों ने महादेव स्थान के समीप गोली मार दी.स्थानीय लोगो की मदद से जख्मी गोपाल को सदर
अस्पताल पहुंचाया गया.लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.मृतक की पत्नी
ने बताया कि बीते दो जनवरी को भी गोपाल यादव पर जानलेवा हमला किया गया था. अपराधियों
ने मृतक मुखिया के शरीर में सात गोली मारी जिसमें
चार गोली पेट, दो गोली जांघ व एक गोली उनकी गर्दन में लगी थी. स्थानीय लोगों
ने बताया की इसके अलावा कई राउंड हवाई फायरिंग भी की गयी थी.
शहर में
अपराधियों द्धारा बदस्तूर जारी हत्या के खेल को लेकर शहरवासी दहशतजदा
है. अपराध की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस जहां कागजी तौर पर तफ्तीश में जुटी हुई
है वहीँ अपराधी शहर में लगातार बड़ी घटनाओं का अंजामदेकर उड़न छू हो रहे हैं.कहना लाजिमी है की इस इलाके की पुलिस पर अपराधी सौ फीसदी भारी हैं.
सदर अस्पताल की कुव्यवस्था आखिर कब तक
कृष्णमोहन सोनी की रिपोर्ट:- कोसी का पी.एम.सी.एच. कहा जाने वाला सहरसा का सदर
अस्पताल इनदिनों भगवान भरोसे चल रहा है. सरकार के स्वास्थ्य विभाग
भले हीं दावा करे,मगर अस्पताल के विभिन्न वार्डो में जाने के बाद वहाँ गंदगियों व बदबुओं से ठहर पाना मुश्किल भरा रहता है.अस्पताल के अंदर जहाँ गंदगियों का अम्बार रहता है वही बदबुओं से मरीज परेशान रहते हैं.सरकार
स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर करोड़ों रुपये खर्च करती है मगर सहरसा के सदर
अस्पताल में पूरी व्यवस्था बदहाल है.अस्पताल परिसर व वार्डो में मरीजों के
लिए शौचालय की व्यवस्था की गई है लेकिन कहीं कोई शौचालय ठीक नही है जिससे
मरीजों को काफी कठिनाइयों का सामना करना परता है. सदर अस्पताल के वार्डो
में शौचालय काफी जर्जर है.किसी में खिड़की तो किसी में गेट नहीं है आखिर मरीज शौच
के लिए जाएँ तो जाएँ कहाँ,यह एक बड़ी समस्या बनी हुई है.
सबसे ख़ास व \दुःखद बात यह है की महिला मरीजों के लिए बनाये गए शौचालय का भी हाल वही है. अपने लोकलाज को बचाने की खातिर महिला मरीजों को नाक और मुँह पर कपड़े रख कर और शर्म से सर को झुका लेना पड़ता है.जाहिर तौर पर इसका मुख्य कारण शौचालय के गेट व खिड़की टूटा हुआ होना है. इस दिशा में सहरसा स्वास्थ्य विभाग कोई ठोस पहल नहीं कर पा रहा है. अस्पताल आये कुछ महिला व पुरुष मरीजों के परिजनों ने अस्पताल की इस बदहाल व्यवस्था को देख विभागीय अधिकारियों को जिम्मेबार बताया.मरीज के परिजनों ने बताया की वे इलाज कराने मरीजों के साथ आये थे. मगर यहाँ तो मरीज के साथ आये अन्य लोग भी बीमार पड़ जाएंगे.परिजन सुकनी देवी,रमेश यादव,रणधीर सिंह,आशा देवी, रेणु देवी ,अनिल कुमार, आदि ने अस्पताल की बदहाल व्यवस्था, पर अपनी नाराजगी जताते हुए कहा की यह कोसी का पी.एम.सी.एच. सहरसा का सदर अस्पताल भगवान भरोसे है. काश!स्वास्थ्य विभाग इस कुव्यवस्था पर गंभीर हो तो व्यवस्था को ठीक किया जा सकता है और यहां आने वाले सभी मरीजों को कम से कम शौच जैसी बड़ी समस्या से निजात तो मिल ही जायेगी.
सबसे ख़ास व \दुःखद बात यह है की महिला मरीजों के लिए बनाये गए शौचालय का भी हाल वही है. अपने लोकलाज को बचाने की खातिर महिला मरीजों को नाक और मुँह पर कपड़े रख कर और शर्म से सर को झुका लेना पड़ता है.जाहिर तौर पर इसका मुख्य कारण शौचालय के गेट व खिड़की टूटा हुआ होना है. इस दिशा में सहरसा स्वास्थ्य विभाग कोई ठोस पहल नहीं कर पा रहा है. अस्पताल आये कुछ महिला व पुरुष मरीजों के परिजनों ने अस्पताल की इस बदहाल व्यवस्था को देख विभागीय अधिकारियों को जिम्मेबार बताया.मरीज के परिजनों ने बताया की वे इलाज कराने मरीजों के साथ आये थे. मगर यहाँ तो मरीज के साथ आये अन्य लोग भी बीमार पड़ जाएंगे.परिजन सुकनी देवी,रमेश यादव,रणधीर सिंह,आशा देवी, रेणु देवी ,अनिल कुमार, आदि ने अस्पताल की बदहाल व्यवस्था, पर अपनी नाराजगी जताते हुए कहा की यह कोसी का पी.एम.सी.एच. सहरसा का सदर अस्पताल भगवान भरोसे है. काश!स्वास्थ्य विभाग इस कुव्यवस्था पर गंभीर हो तो व्यवस्था को ठीक किया जा सकता है और यहां आने वाले सभी मरीजों को कम से कम शौच जैसी बड़ी समस्या से निजात तो मिल ही जायेगी.
जनवरी 10, 2015
कालाजार मरीजों से पटा शहर का सदर अस्पताल
कृष्ण मोहन सोनी की रिपोर्ट: सरकार ने कालाजार जैसे भयानक बीमारियो से निजात
दिलाने को लेकर कई कारगर योजनाये चला रखी है मगर अब तक इन बिमारियों पर अबतक
काबू नहीं पाया जा सका है. इसके लिए स्वास्थ्य विभाग को कड़े निर्देश भी
दिए गए है और इस भयानक बीमारियो के लिए एक से एक दवाओ की व्यवस्था भी की
गई है, मगर कालाजार की मरीजों की संख्या दिन प्रति दिन बढ़ती ही जा रही है. इन दिनों कालाजार मरीजों से सदर अस्पताल सहरसा पटा हुआ है. अस्पताल में
सहरसा जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आये कालाजार मरीज बेहतर इलाज को लेकर
पहुंचे है.
जिला मुख्यालय से सटे करीब ४.७७ किलो मीटर की दुरी पर बसा आरण
भेलवा गाँव निवासी अनिल यादव की ४० वर्षीय पत्नी रेणु देवी कला जार
रोग से ग्रसित है. जिसे सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया है. उसी तरह
सोनवर्षा कचहरी बिशनपुर निवासी कमल किशोर साह की पुत्री १६ वर्षीय स्वीटी
कुमारी ,सिमरीबख्तियारपुर तुर्की भटौनी गांव निवासी सत्तो सदा केपुत्र १८
वर्षीय विकास कुमार कहरा के रामेश्वर सादा के पुत्र, २४ वर्षीय अनिल सदा सत्तर कटैया, बरहशेर गंडोल मझोळ के निवासी अशोक साह की पुत्री ज्योति कुमारी, पटुआहा के केलु यादव की पत्नी बीणा देवी, बेलवारा बटखोरा टोला के रविन्द्र पासवान के पुत्र विनोद कुमार ,महिषी सहरवा घेमपुर के हरेराम सदा
के पुत्र विमलेश कुमार जैसे दर्जनो मरीज है जो कालाजार रोग से ग्रसित है. जिसे बेहतर इलाज हेतु सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया है. सहरसा का सदर अस्पताल जहाँ कालाजार रोगियों से पटा हुआ है। इस जानलेवा बीमारी से ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों
में हड़कंम मचा हुआ है.
जनवरी 09, 2015
विरोध का परचम-----
कृष्ण मोहन सोनी की रिपोर्ट: बीते सात जनवरी की रात में हुई व्यवसायी की हत्या के विरोध में आज ना केवल सहरसा बाजार पूरी तरह से बंद रहा बल्कि शहर के एक दर्जन से अधिक जगहों पर आंदोलनकारियों ने जाम लगाकर यातायात को भी पूरी तरह से बाधित कर दिया।दिनभर आम जीवन अस्त--व्यस्त रहा और लोग हलकान और परेशान रहे.इस आंदोलन में व्यवसायी संघ, एनडीए और सीपीआई मुख्य रूप से शामिल रहे लेकिन ख़ास बात यह थी की जदयू के बागी विधायक नीरज कुमार बबलू मुखर होकर आंदोलन को नेतृत्व दे रहे थे.नीरज कुमार बबलू खुद अपने समर्थकों के साथ मोटरसाईकिल से घूम--घूमकर विभिन्य बाजार की दुकानों को बंद करा रहे थे.इस मौके पर नीरज बबलू सहित अन्य नेताओं ने गिरती कानून व्यवस्था को लेकर जमकर अपनी भड़ास निकाली।
जदयू के बागी विधायक नीरज बबलू कैसे मोटरसाईकिल खुद से चलाते हुए काफिला में बाजार बंद करा रहे थे.शंकर चौक पर एनडीए के नेता--कार्यकर्ता के साथ--साथ व्यवसायी संघ के नेता और सीपीआई के नेता--कार्यकर्ता भी जमा हुए और वहाँ पर जमकर नारेबाजी की.फिर घूम--घूमकर इन्होने बाजार बंद कराया.एनडीए के साथ सीपीआई और जदयू के बागी विधायक नीरज बबलू को एक साथ देखने से कयास लगाया जा सकता है की कोसी इलाके में राजनीति की एक अलग धारा ही बह रही है.कोसी इलाके में बढ़ते अपराध और सात जनवरी को व्यवसायी सुनील कुमार की हत्या से आंदोलित लोगों का आक्रोश दिनभर सड़कों पर उबलता रहा.
इस मौके पाकर जदयू के बागी विधायक नीरज बबलू ने कहा की सहरसा में विधि व्यवस्था गिर गयी है. यहां प्रशासन नाम की कोई चीज नहीं है. इसलिए लगता है की हमलोगों को ही प्रशासन का काम सम्भालना होगा. समाज के लोग आज रोड पर उतरे हैं. शासन--प्रशासन या तो दुरुस्त हो जाए या फिर ये लोग सारा काम आमलोगों को सौंपकर यहां से चले चलें जाएँ. बिहार में जंगल राज पार्ट टू का आगाज हो चुका है और कोसी इलाके में जब से लोकसभा का रिजल्ट आया है तभी से अपराध में बढ़ोतरी शुरू हुयी है. बबलू का सीधा हमला मधेपुरा के राजद सांसद पप्पू यादव पर था. उन्होनें आमलोगों की राय बताते हुए पप्पू को कटघरे में खड़ा किया.
सहरसा के पूर्व बीजेपी विधायक संजीव कुमार झा का बयान:---
हद का बयान तो सहरसा के पूर्व बीजेपी विधायक संजीव कुमार झा ने दिया. इनका कहना था की जब से पप्पू सांसद बने हैं,तभी से अपराध बढ़ा है.जो अपराधी,अपराध छोड़कर ट्रैक्टर चलाने लगे थे,वे फिर से अपराध करने लगे हैं.इनकी मानें तो जिसका अपराध से जन्म हुआ हो और फिर वह सांसद बना हो तो वह अपराधी का सरगना है.तमाम अपराधी उसके साथ हैं.इसी तरह का कुछ तल्ख़ बयान वर्तमान बीजेपी विधायक आलोक रंजन ने भी दिया.
इस मौके पाकर जदयू के बागी विधायक नीरज बबलू ने कहा की सहरसा में विधि व्यवस्था गिर गयी है. यहां प्रशासन नाम की कोई चीज नहीं है. इसलिए लगता है की हमलोगों को ही प्रशासन का काम सम्भालना होगा. समाज के लोग आज रोड पर उतरे हैं. शासन--प्रशासन या तो दुरुस्त हो जाए या फिर ये लोग सारा काम आमलोगों को सौंपकर यहां से चले चलें जाएँ. बिहार में जंगल राज पार्ट टू का आगाज हो चुका है और कोसी इलाके में जब से लोकसभा का रिजल्ट आया है तभी से अपराध में बढ़ोतरी शुरू हुयी है. बबलू का सीधा हमला मधेपुरा के राजद सांसद पप्पू यादव पर था. उन्होनें आमलोगों की राय बताते हुए पप्पू को कटघरे में खड़ा किया. सहरसा के पूर्व बीजेपी विधायक संजीव कुमार झा का बयान:---
हद का बयान तो सहरसा के पूर्व बीजेपी विधायक संजीव कुमार झा ने दिया. इनका कहना था की जब से पप्पू सांसद बने हैं,तभी से अपराध बढ़ा है.जो अपराधी,अपराध छोड़कर ट्रैक्टर चलाने लगे थे,वे फिर से अपराध करने लगे हैं.इनकी मानें तो जिसका अपराध से जन्म हुआ हो और फिर वह सांसद बना हो तो वह अपराधी का सरगना है.तमाम अपराधी उसके साथ हैं.इसी तरह का कुछ तल्ख़ बयान वर्तमान बीजेपी विधायक आलोक रंजन ने भी दिया.
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