अगस्त 20, 2011

मैं भी अन्ना तू भी अन्ना पूरा सहरसा अन्ना

अन्ना तुझे सलाम




 
अन्नादोलन की लहर अब पूरे देश में है.देश का जर्रा--जर्रा अन्ना की इस क्रान्ति में शामिल है.इसी कड़ी में कल  सहरसा जेल के सभी 480 बंदी पूर्व सांसद आनंद मोहन के नेतृत्व में दो दिनों की भूख हड़ताल पर चले गए हैं.हद की इन्तहा तो यह है की इस अनशन में जेल अधीक्षक, जेलर,सुरक्षा जवान सहित जेल के सभी कर्मी भी शामिल हैं और वे भीं इन बंदियों के साथ दो दिनों के उपवास पर हैं.इस मौके पर बंदियों का कहना है की वे सभी भी अन्ना के देश हित की इस लड़ाई में शामिल हैं और इसी वजह से उन्होनें दो दिनों की भूख हड़ताल की है.

मैं भी अन्ना तू भी अन्ना,पूरे देश में बस अन्ना ही अन्ना.अन्ना की लहर सहरसा जेल में भी पहुँच चुकी है और जेल के सभी बंदियों ने खुद को अन्ना के इस आन्दोलन में शामिल करने की गरज से दो दिनों की भूख हड़ताल कर दी है.सहरसा जेल के सभी 480 बंदी पूर्व सांसद आनंद मोहन के नेतृत्व में आज से दो दिनों के लिए भूख हड़ताल पर हैं.बंदियों का कहना है की वे तो जेल में बन्द हैं लेकिन अन्ना की इस लड़ाई में खुद को शामिल करना चाहते हैं.उनका कहना है की अन्ना देश के लिए लड़ रहे हैं इसीलिए जेल के सभी बंदी अभी दो दिनों की भूख हड़ताल पर हैं.आगे जबतक अन्ना की लड़ाई चलेगी,वे अन्ना के साथ रहेंगे.


              जेल अधीक्षक का कहना है की पूर्व सांसद आनंद मोहन के नेतृत्व में जेल के सभी बंदियों ने उपवास की शुरुआत की है.इस उपवास में उनके साथ---साथ जेल के सभी अधिकारी,कर्मी और सुरक्षा जवान भी उपवास पर हैं.अन्ना की लहर इस जेल में भी है.



अन्ना की लहर में पूरा देश हिलोरें ले रहा है.इस आंधी को देखकर लगता है की अब इस देश का भला होने वाला है,देश के दिन बहुरने वाले हैं.अन्ना तुझे सलाम.

अगस्त 18, 2011

अन्ना को समर्थन फ्रेंड्स ऑफ आनंद मोहन

                 अन्ना की हुंकार
अन्ना को समर्थन फ्रेंड्स ऑफ आनंद मोहन का


कोसी क्षेत्र के कद्दावर और बिहार की राजनीति में ख़ासा दखल और दमखम रखने वाले पूर्व सांसद आनंद मोहन के समर्थक आज ना केवल अन्ना के समर्थन में रोड पर उतरे बल्कि मशाल जुलूस निकालकर अन्ना को मंजिल तक पहुंचाने का संकल्प भी लिया.... इससे हम अनुमान लगा सकते है की अन्ना के इंकलाब की गूंज हर वो राजनेता के कानो तक जा पहुची जो महज कुर्शी के लिए सोनिया जी  से हाथ MILAAEI थी.. अन्ना की जय हो की नारों से सहरसा का परिद्रिषा   
                                                                                   बदल  सा चूका है.......
          फ्रेंड्स ऑफ आनंद मोहन के बैनर तले सहरसा के गंगजला स्थित आनंद मोहन के आवास से सैंकड़ों की तायदाद में निकला आनंद मोहन के समर्थकों का काफिला शहर के तमाम मुख्य मार्गों से होता हुआ कुंवर सिंह चौक पहुंचा जहां इनलोगों ने कुंवर सिंह की प्रतिमा के सामने केंडल जलाकर अन्ना को मंजिल तक पहुंचाने का संकल्प लिया.बताते चलें की पूर्व सांसद आनंद मोहन गोपालगंज के तत्कालीन जिलाधिकारी जी कृष्णैया हत्याकांड में आजीवन कारावास के सजायाफ्ता हैं और पिछले चार साल से सहरसा जेल में बन्द हैं.अन्ना के समर्थन में उतरे उनके समर्थकों की हुंकार को देखकर ऐसा लगता है ...
सहरसा के कांग्रेसियों में कई फाड़ हो जायेंगे.ख़ास बात यह है की आनंद मोहन की पत्नी पूर्व सांसद लवली आनंद कॉंग्रेस नेत्री हैं और उनके पति के समर्थक कौंग्रेस पर हमले कर रहे हैं.आज के इस वाकये से कोसी क्षेत्र की राजनीति में भी भूचाल आने की संभावना है.आईये पूरे मुद्दे को लेकर आनंद मोहन के समर्थक क्या कहते हैं यह उन्हीं की जबानी सुनते हैं.

 

आनंद मोहन के समर्थकों के अन्ना के पक्ष में उतरने से अन्ना को कितना फायदा होगा यह तो बाद की बात है लेकिन इतना तो तय है की अन्ना के समर्थन में अब कॉंग्रेस के भीतर भी बगावत के सूर जरुर उठेंगे.कहते हैं की एक के आगे बढ़ने पर कारवां खुद ब खुद बनने लगता है........................

अन्ना ही ही अन्ना हुआ सहरसा


    अन्ना ही ही अन्ना हुआ सहरसा




स्वाधीनता दिवस के पावन और एतिहासिक मौके पर आज सहरसा के युवकों ने महात्मा गाँधी की प्रतिमा के सामने शपथ लेकर खुद को अन्ना हजारे की भ्रष्टाचार ख़त्म कराने की मुहीम में पूरी तरह से झोकने का एलान किया.सैकड़ों की तायदाद में युवकों का जत्था पहले दूरसंचार विभाग के कार्यालय के समीप अवस्थित महात्मा गाँधी की प्रतिमा के सामने पहुंचा जहां उन्होने बापू का नमन कर उन्हें सलामी दी फिर वहीँ पर शपथ लिए.यहाँ से युवाओं का कारवां निकला तो वह मुख्यालय के विभिन्य सड़कों से गुजरते हुए अन्ना के समर्थन में ना केवल जमकर नारेबाजी करता रहा बल्कि अन्ना के समर्थन में युवाओं सहित आमलोगों को भी अन्ना की मुहीम में शामिल होने का आह्वान भी करता रहा.कल से अन्ना दिल्ली में अनशन पर जा रहे और सहरसा में अन्ना की लहर फैल चुकी है.ऐसे में कहा जा सकता है की जिस तरह से अन्ना के समर्थन में देश उबलने लगा है यह कहीं से भी केंद्र  सरकार के लिए खासकर के कॉंग्रेस के लिए शुभ

                                                                       
   संकेत नहीं है.
भ्रष्टाचार के मुद्दे पर अब पूरा देश ना केवल ऊबल रहा है बल्कि इसको लेकर व्यापक तरीके से लामबंदी भी हो रही है.इसी कड़ी में आज सहरसा के युवाओं ने भ्रष्टाचार के विरोध में महात्मा गांधी की प्रतिमा के समक्ष शपथ लेकर ना केवल अन्ना हजारे के पक्ष में उतरने का एलान किया बल्कि जबतक अन्ना की लड़ाई मंजिल तक नहीं पहुँचती है तबतक जान देकर भी वे उनका और उनके मुहीम का साथ नहीं छोड़ेंगे का फरमान भी जारी किया.आप पहले यह नजारा देखिये.देखिये किस तरह यहाँ युवाओं का जत्था बापू की प्रतिमा के सामने शपथ ले रहा है.यहाँ शपथ लेकर युवाओं का यह सैलाब सड़कों पर  निकला जो मुख्यालय के विभिन्य सड़कों से गुजरते हुए घंटों अन्ना के समर्थन में गगनभेदी नारे लगाता रहा.आप खुद ही इस जोश से भरे युवाओं की लामबंदी को देखिये.स्वाधीनता के पावन अवसर पर युवाओं का यह शंखनाद भ्रष्टाचार को मिटाने के लिए एक नयी ऊष्मा  का संचार कर रहा है

युवाओं का यह सैलाब नए भारत की पटकथा लिखने का सन्देश दे रहा है.सहरसा में अन्ना के लिए यह लामबंदी अन्ना की मुहीम को कितना फायदा पहुंचा पाएगी यह तो आगे देखा जाएगा लेकिन अभी इतना तो कहा ही जा सकता है की भ्रष्टाचार अब और बर्दास्त करने के लिए लोग तैयार नहीं हैं.











दिल्ली में अन्ना की हुई गिरफ्तारी का विरोध सहरसा में




दिल्ली में अन्ना की हुई गिरफ्तारी का विरोध देश के कोने--कोने में हो रहा है.इसी कड़ी में अन्ना की इस गिरफ्तारी को लेकर सहरसा के लोग खासे आंदोलित होकर लामबंद हो रहे हैं.बीते काल दिनभर सहरसा में तेज बारिश होती रही और इस झमाझम बारिश में यहाँ के युवाओं ने विरोध जुलूस निकाला.अन्ना तुम मत घबराना के गगनभेदी नारों के साथ युवाओं की टोली शहर की मुख्य सड़कों से होते हुए गली-मुहल्ले होकर गुजरी जिसमें युवाओं ने केंद्र सरकार की तीखी भर्त्सना करते हुए लोगों से अन्ना के समर्थन में सड़कों पर उतरकर आन्दोलन करने का आह्वान किया.
     यह नजारा है सहरसा के कुंवर सिंह चौक का.शाम के चार बजने वाले हैं.तेज बारिश हो रही है लेकिन इस बारिश को धता बताते हुए युवाओं का जत्था यहाँ मोटरसाईकिल पर सवार होकर अन्ना की गिरफ्तारी के विरोध में नारेबाजी कर रहा है.युवाओं का काफिला सुबह से ही जिला मुख्यालय के विभिन्य मार्ग से गुजरते हुए गली--मुहल्लों तक घूम--घूमकर लोगों से अन्ना के पक्ष में सड़क पर उतरकर आन्दोलन करने की अपील करता रहा.इन आन्दोलनकारी युवाओं का कहना है की केंद्र में बैठी सरकार अंग्रेजी हुकूमत की याद ताजा कर रही है.अगर अन्ना को जल्द रिहा नहीं किया गया तो वे ऐसा आन्दोलन शुरू करेंगे जिसे केंद्र सरकार संभाल नहीं पाएगी. 
       अन्ना को लेकर पूरा देश खौल और ऊबल रहा है.अन्ना की गिरफ्तारी से अन्ना के आन्दोलन का दमन तो कतई संभव नहीं है हाँ,इससे अन्ना के मसूबे को और बल ही मिलेगा और जो लोग इस आन्दोलन से छूट रहे थे वे भी अब खुद को अन्ना के साथ शामिल कर लेंगे.बाबा रामदेव की तरह सरकार के लिए यह सौदा आसान नहीं होगा.बाबा रामदेव आध्यात्म के चोला में राजनीति के छद्दम से पछाड़ खा गए लेकिन अन्ना राजनीति और कूटनीति का हर दाँव जानते हैं.

जुलाई 15, 2011

फिर से हुआ राजधानी से सड़क मार्ग भंग




 
   सहरसा से एक ख़ास रिपोर्ट----------- 
विगत वर्ष 2010 के 11 सितम्बर को कोसी के कहर से बी.एन.मंडल डुमरी सेतु के क्षतिग्रस्त होने के बाद महीनों आवागमन ठप्प रहा. राज्य सरकार ने इस वर्ष बी.एन.मंडल डुमरी सेतु के  ठीक बगल में 17 करोड़ की लागत से स्टील ब्रिज बनाकर 10 जून को इस पर परिचालन शुरू करवाया.लेकिन कोसी के उफान के सामने 17 करोड़ की लागत से बना यह स्टील ब्रिज 17 दिन भी नहीं टिक सका और एक बार फिर आवागमन ठप्प हो गया है.इस स्टील ब्रिज पर परिचालन बन्द होने से कोसी प्रमंडल के तीन जिले सहरसा,मधेपुरा और सुपौल  के लाखों लोगों का राज्य मुख्यालय से सड़क संपर्क टूट गया है.क्षेत्र के लोगों में हाहाकार मचा है.आवागमन ठप्प होने से जहां क्षेत्र के लोगों के बहुतेरे आवश्यक काम प्रभावित हो रहे हैं वहीँ मंहगाई के आसमान छूने की आशंका से भी लोग दुबले हो रहे हैं.कोसी के कहर ने एक बार फिर इस इलाके के लोगों की जिन्दगी को मुसीबतों की ढेर पर लाकर छोड़ दिया है. 

17 करोड़ की लागत से बना डुमरी का स्टील ब्रिज कोसी के उफान के सामने नहीं टिक सका और इस पर आवागमन को ठप्प कर देना पड़ा.इस पुल के चार खम्भों के नीचे की मिट्टी खिसक गयी है.कोसी लगातार इन खम्भों पर क्रूरता से हमले कर रही है.इस ब्रिज के क्षतिग्रस्त होने से कोसी प्रमंडल के सहरसा,मधेपुरा और सुपौल जिले का राज्य मुख्यालय से सड़क संपर्क टूट गया है.चाहे बेहतर इलाज की बात हो या फिर कोई और आवश्यक काम अब लोगों को राज्य की राजधानी पटना जाने के लिए भारी दिक्कतों का सामना करना पर रहा है .अभी रेलमार्ग पर परिचालन जारी है लेकिन कोसी कुछ रेल पुलों पर भी हमले और कटाव कर रही है.अभी बारिश का लम्बा समय बांकी है.आगे कोसी उफनाई तो रेल परिचालन के ठप्प होने की भी आशंका है.जाहिर तौर पर सड़क मार्ग भंग होने से लोग खासे हलकान--परेशान हैं.बांकी सबकुछ कोसी के रहमोकरम पर टिका है. क्षेत्र के लोग काफी परेशान है.कहते हैं की 17 करोड़ का यह पुल 17 दिन भी नहीं चला.सब लुटने में लगे हैं,इसी वजह से इस पुल का यह हाल हुआ.लोग पैदल पुल को पार कर रहे हैं.दोनों छोर पर गाड़ियां फंसी रहती हैं.जहां यात्रा के लिए लोगों को अधिक भाड़े देने पर रहे हैं वहीँ मंहगाई भी बढ़ने लगी है.लोग पूरी तरह से हैरान--परेशान हैं.हम आपको दिखा रहे हैं स्टील ब्रिज के खम्भों पर किस तरह से कोसी हमला और कटाव कर रही है जिस वजह से परिचालन को बन्द करना पड़ा है.हम आपको बी.एन.मंडल का वह डुमरी सेतु भी दिखा रहे हैं जो विगत वर्ष से ही क्षतिग्रस्त होकर बेकार पड़ा हुआ है.इस पुल को दुरुस्त कराने की जगह ठीक इसके बगल में ही 17 करोड़ की लागत से स्टील ब्रिज का निर्माण कराया गया जो क्षतिग्रस्त हो चुका है.इस स्टील ब्रिज पर 10 जून 2011 को परिचालन शुरू हुआ और 8 जुलाई 2011 को इसपर परिचालन बन्द कर कर दिया गया.17 करोड़ बस यूँ ही पानी में बहा डाले गए.इससे बेहतर होता की पहले से क्षतिग्रस्त बी.पी.मंडल डुमरी सेतु को हो दुरुस्त कराने का प्रयास किया जाता.



हमने लोगों के सामने आई इस विकट समस्या को लेकर क्षेत्र के जदयू विधायक से बात की.इनका कहना है की 17 करोड़ की लागत से बना स्टील ब्रिज एक महीना चला.प्रयास किया गया था लेकिन पुल अधिक दिनों तक नहीं टिका.बी.पी.मंडल सेतु की तरह इस ब्रिज के पाए के नीचे से मिट्टी खिसक गयी है.अब यह ब्रिज डोलने लगा है और यह ज़मीन पर नहीं है.आगे यहाँ पर फोरलेन रोड का सेंक्सन हो गया है.फोरलेन का अलग से पुल बनेगा जिसका D.P.R भारत सरकार को भेज दिया गया है.जैसे ही स्वीकृति मिलेगी,बिहार सरकार बनाने में सक्षम है और वह बनाएगी.
 इस पुल के बाबत अधिकारी महोदय .कहते हैं की तत्कालीन व्यवस्था हुयी थी लेकिन नदी के बहाव और कटाव की वजह से परिचालन बन्द हो गया है.वाहनों को इस पार से उस पार करने के लिए नाव की व्यवस्था की जा रही है.और पहल उनके स्तर से संभव नहीं है.बांकी सबकुछ सरकार के स्तर की है और सरकार सोच रही है.समय आने पर सबकुछ होगा.

मुख्यमंत्री  जी ये सब क्या हो रहा है..... आख़िर आपके राज में भी जंगल राज आ ही गया .... आप इस स्टील ब्रिज को बनाने कि अनुमति ही नहीं देते.....  सत्रह करोड़ पानी में डूब गए...... अरे   इससे तो अच्छा होता कि इसे आप उपरवाले के भरोसे छोर  देते ताकि 17 करोड़ कोशी मैया कि भेट  तो ना  चद्ती......  शुसासन का राज हो या जंगल राज यंहा लोगों की समस्या जस की तस बनी हुई है मंत्री  जी अपने जेब गरम करने में लगे हबात करते है  फोरलेन की  सड़क और पुल के लिए D.P.R केंद्र सरकार को अभी भेजा गया है.यह काम पिछले वर्ष ही किया जा सकता था.सरकार को पिछले वर्ष क्षतिग्रस्त हुए बी.पी.मंडल सेतु को दुरुस्त करना चाहिए था लेकिन सरकार ने ठीक उसके बगल में स्टील ब्रिज बनाकर लोगों के हाथों में लॉलीपॉप थमा दिया जो कुछ ही दिनों में टाँय--टाँय फिस्स हो गया.एक बार फिर कोसी इलाके के लोगों को उनके हाल पर छोड़ दिया गया है.रब जाने यहाँ कोसी नदी पर कब पुल बनेगा और कब लोग इसपर गाड़ी दौडाना शुरू करेंगे

जून 29, 2011

जल-जमाव से फूटा गुस्सा

रिपोर्ट : 
              
  बारिश का मौसम इस इलाके में तरह--तरह की आफत लेकर आता है.सुबह से लगातार हो रही रही झमाझम बारिश की वजह से ना केवल शहर की मुख्य सड़कों पर भारी जल--जमाव हो गया है बल्कि लोगों के घरों में भी पानी घुस गया है.लोग त्राहिमाम कर रहे हैं.आज स्थानीय गांधी पथ के व्यवसायियों और स्थानीय लोगों का गुस्सा एक साथ फुट पड़ा. खासकर टूटी सड़क पर जल-जमाव की वजह से आक्रोशित लोगों ने आज गांधी पथ मुख्य मार्ग को जाम कर यातायात को पूरी तरह से बाधित कर दिया.लोगों का कहना था की जबतक प्रशासन के अधिकारी इस सड़क के निर्माण और जल-जमाव से मुक्ति का कोई लिखित आदेश नहीं देंगे तबतक जाम नहीं हटेगा.दिन के दस बजे से लगा जाम खबर भेजे जाने तक जारी है. 
--यह नजारा है सहरसा के मुख्य बाजार गांधी पथ का.देखिये यहाँ की सड़क पर किस तरह से पानी लगा हुआ है.पानी निकासी के लिए नाले की बेहतर व्यवस्था नहीं है.सड़क पहले से ही पूरी तरह से टूटी और जर्जर है.इलाके के लोगों को यूँ तो आमदिनों में भी इस सड़क पर दिक्कत होती है लेकिन यह सड़क बरसात के मौसम में और बड़ी मुसीबत बन जाती है.लोगों ने जल-जमाव से मुक्ति और इस सड़क के निर्माण के लिए गांधी पथ मुख्य मार्ग को जाम कर दिया है.जामकारियों का कहना है की पिछले चुनाव में उप-मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने भी इस सड़क के निर्माण की बात कही थी लेकिन सड़क का निर्माण आजतक नहीं हो सका.इस सड़क पर पिछले 40 वर्षों से कोई काम नहीं हुआ है.खासकर महिलाओं और स्कूल जाने वाली छात्राओं को काफी दिक्कतों का सामना करना पर रहा है.इस सड़क की वजह से लोगों का खाना--पीना सबकुछ मुहाल बना हुआ है.लोग स्थानीय भाजपा विधायक आलोक रंजन से खासे नाराज दिख रहे हैं और उनके विरुद्ध जमकर नारेबाजी कर रहे हैं.लोगों का आरोप है की विधायक इस सड़क से कभी नहीं गुजरते हैं तो उनको यहाँ के लोगों की तकलीफ का कैसे पता चलेगा.गुस्साए लोग साफ़ तौर पर कह रहे हैं जबतक प्रशासनिक अधिकारी यहाँ आकर लिखित आदेश या आश्वासन नहीं देंगे यह जाम नहीं हटेगा.
जाम के चार घंटे हो चुके हैं लेकिन अभीतक प्रशासन के किसी अधिकारी ने यहाँ आना मुनासिब नहीं समझा है.वैसे यहाँ पुराना मर्ज है जो आसानी से तुरत ठीक होने वाला नहीं है.फिलवक्त लोगों को अधिकारियों से मिलने वाले कोरे आश्वासनों से काम चलाना होगा.

जून 06, 2011

इससे कहीं ज्यादा अच्छा ब्रिटिश हकुमत

चन्दन सिंह
सहरसा
09334572522  

बाबा रामदेव का अहिंसात्मक सत्याग्रह और परेशान कला धन के माल्कि..... जी हा ये सिर्फ बाबा रामदेब का आन्दोलन नहीं है  अपितु इस देश में रहने वाले नागरिक के द्वारा कला धन को वापसी  के लिये किया गया अहिंसात्मक सत्याग्रह आन्दोलन है...... जिसे ना ते सत्ता पे विराजमान  चोर कांग्रेसी  अपने बूटो से रौंद सकता है और ना ही महिलाओ के साथ ओछ हरकते कर के दावा सकता है.....   अरे काले धन के आकाओ तुम जितना भी लढ़ या आँशु के गोले दगोगे ये आन्दोलन और अक्रातम होते जायेगा..... जिसे तुम क्या कोई भी इसे रोक नहीं पाएगा..... याद करो उस समय को जिस वक्त ये देश अंग्रेजो के जंजीरों से गुलाम था ...... हमने उस जंजीर को भी तोड़ा और हमें आजादी मिली...... लेकिन तुम्हारी औकात क्या है....... अरे अंग्रेज तो सीधे गोली मारती थी कोई महिलाओ की इज्जत के साथ खिलवार तो नहीं करती थी ...... लेकिन तुम तो इससे भी आगे निकले...... तुम तो महिलाओ के इज्जत के साथ खेलता  है..... तुम्हारे अंगरक्षक लड़कियो को सारे आम छेरता है.......   और तुम चुप - चाप टूक - टुकी लगाये मजा ले रहे हो.....  खैर ये तुम्हारी पहचान है......

सिब्बल  जी  ने बाबा को ठग, डोंगी और न जाने क्या - क्या  कहा कोई बात नहीं..... ये भी माना सही था...... लेकिन क्या 5 तारीख को जो घटना सरकार के द्वारा जो करवाई गई क्या वो... हमारे संविधान को शर्मसार नहीं किया..... ये पुलिश की बर्बरता सोनिया गाँधी के द्वारा प्रोजित थी.... ये पहले ही सोच लिया था क्या करना है..... क्या राम लीला मैदान मै सभी आतंकवादी , नक्सल (सरकार कि भाषा में ) या कोई माओवादी था...... जिसके साथ तुमने ऐसा क्या ......  सबसे ज्यादा सिब्बल जी को ही भाई काहे को परेशानी है.... ये तमाम काला धनो के आकाओ को ही इस सत्याग्रह से परेशानी है ...... 
राम लीला मैदान मै जो कुछ भी हुआ उसकी कल्पना मै क्या असंवेदनशील व्यक्ति भी नहीं कर सकता है.... अरे इस सरकार से तो कही अच्छा नक्सल का फ़रमान सही होता है ये किसी महिलाओ को तो अपने हवश का शिकार तो नहीं बनता है........   सोनिया जी तो खुद महिला थी क्या वो नहीं जानती की महिलाओ के साथ किस तरह का वर्ताव होना चाहिए...... खैर आपने अच्छा किया.......

दीपक चौरशिया जी (स्टार न्यूज़ )  आप तो 4 मई को सुबह  से लेके 3-4 बजे तक बाबा रामदेव का गुणगान कर रहे थे अचानक आपको किया हुआ..... जो आप बाबा के खिलाफ बोलने लगे..... आपने तो कहा था बाबा को मै बहुत करीब से और पहले से ही जनता हूँ ......क्या आप उनके इस अब्गतो से पहले वाकिफ़ थे ..... अगर थे तो आपने सुबह से ही बाबा का गुणगान कियो कर रहे थे ...... खैर आपकी मर्जी ......
लेकिन ताजुब की बात तो तब हुई जब आपके स्टार न्यूज़ पर मैंने लालू को खुश देखा.... बिहार विधान सभा चुनाव में हार से परस्त लालू को पहली बार चेहरे पर हँशी  तो कल दिखी .... और स्टार न्यूज़ ने काफी समय भी दिया...... जो कि लालू  सीधे - तोर से काला धन के वापसी के विरोध मै है..... जिसने 15 वर्षो तक बिहार को नास्तनाबुत  क्या ..... बिहार में जिसकी पहचान ख़त्म हुई ..... आप उस नेता को रास्ट्रीय चैनल पर उतना महत्व दिया वो भी जो चाहता है काला धन का मुद्दा समाप्त हो ...... दीपक जी  आप जैसे संवेदनशील पत्रकारों से ऐसा उम्मीद नहीं करता हु .....ये मुद्दा किसी बाबा से या किसे नेता से या किसी पार्टी से नहीं बल्कि पुरे राष्ट्रीय का मुद्दा है ......  इसमे हम सबो को साथ देना अति आवश्यक है.... तभी जाके हमारा भारत आर्थिक रूप से सपम्न हो पाएगा ..... ये बाबा रामदेब का सवाल नहीं है इस बाबा के जगह कोई आम आदमी भी रहेगा तो पूरा भारतवाशी उनका साथ देगी.....


*अपनी बात*

अपनी बात---थोड़ी भावनाओं की तासीर,थोड़ी दिल की रजामंदी और थोड़ी जिस्मानी धधक वाली मुहब्बत कई शाख पर बैठती है ।लेकिन रूहानी मुहब्बत ना केवल एक जगह काबिज और कायम रहती है बल्कि ताउम्र उसी इक शख्सियत के संग कुलाचें भरती है ।