मार्च 15, 2016

पंचायत चुनाव का जलवा.. जीत से पहले - जीत का जश्न......

मुकेश कुमार सिंह की रिपोर्ट : नौ चरण में होने वाले पंचायत चुनाव का जलवा देखते ही बन रहा है। एक तरफ जहां विभिन्य पदों के प्रत्यासी गाड़ियों के काफिलें में आ रहे हैं तो वहीँ दूसरी तरफ जीत से पहले ही थोक में ना केवल माले पहन रहे हैं बल्कि अबीर और गुलाल भी लगा--उड़ा रहे हैं। इस चुनावी मौसम में माला और अबीर बेचने वाले की भी बल्ले--बल्ले हैं और वे कह रहे हैं की लगता है की इसबार की बिक्री से उनके परिवार का पेट निश्चित रूप से साल--डेढ़ साल तक आसानी चल जाएगा।
सहरसा में 10 प्रखंड,151 पंचायत और 2 नगर पंचायत है जिसमें मुखिया,जिला परिषद,पंचायत समिति और वार्ड सदस्य को लेकर चुनाव हो रहे हैं।चुनाव नौ चरण में हो रहे हैं। हम आपको कहरा प्रखंड का नजारा दिखा रहे हैं जहां गाड़ियों के काफिले के साथ प्रत्यासी अपना नामांकन करने पहुँच रहे हैं।
ये हैं सीमा कुमारी।सितानाबाद क्षेत्र से ये मुखिया प्रत्यासी हैं।राजनीति के समर में पहली बार ये उतरी हैं और कह रही हैं की अपने क्षेत्र की गंदगी को साफ़ करने और विकास की दरिया बहाने के लिए वे मुखिया बनना चाहती हैं। पति अमित कुमार भी इनके हैं। इनका कहना है की वे अपनी पत्नी को इसलिए मुखिया बनाना चाहते हैं की गरीबों के साथ न्याय हो सके। गरीबों का हक़ मुखिया से लेकर बिचौलिए और बाबू--हाकिम खा जाते हैं।वे चाहते हैं की विकास की रौशनी घर--घर पहुंचे और सरकारी योजनाओं के लाभ से कोई भी महरूम ना रहे।    
अब यह ख़ास नजारा देखिये।विभिन्य पदों के प्रत्यासियों के अलावे उनके समर्थकों के लिए यहां माला और अबीर का भी ख़ास इंतजाम है। समर्थक अपने प्रत्यासी को नामांकन के समय ही ना केवल माला से लाद रहे हैं बल्कि जमकर अबीर और गुलाल भी उड़ा रहे हैं।  जीत से पहले ही एक तरह के जीत का जश्न यहां पर मनाया जा रहा है।माला और अबीर बेचने वाले कह रहे हैं की माला और अबीर की बम्पर बिक्री हो रही है। लग रहा है की इसबार की कमाई से वे साल--डेढ़ साल अपने परिवार की गाड़ी आसानी से खींच लेंगे। 
अब इस चुनावी समर में जीत का सेहरा किस--किस के सर बंधेगा,फिलवक्त कयास लगाना बेमानी है।लेकिन इस नामांकन के बहाने कुछ लोगों की जरूर चल निकली है।इस नामांकन के मेले में माला और अबीर बेचकर इन मामूली फुटकर दुकानदारों को लग रहा है की घर--परिवार के कई सपने को वे एक साथ पुरे कर डालेंगे।रब इनके अरमानों को पूरा करने में अपनी मेहरबानी की खूब बरसात करे। 

मार्च 14, 2016

नकली स्टाम्प का खुलासा ........

मुकेश कुमार सिंह की रिपोर्ट :- आज शाम पुलिस और प्रशासन को एक बड़ी कामयाबी हाथ लगी ।अधिकारियों ने गुप्त सूचना के आधार पर जिला समाहरणालय के दक्षिणी छोड़ पर स्थित कुछ गुमटियों में छापामारी की जहां लाखों के नकली शपथ पत्र स्टाम्प बरामद किये गए ।इस कामयाबी के साथ--साथ पुलिस ने एक वकील सहित तीन को इस काले कारोबार को चलाने के आरोप में गिरफ्तार भी किया है ।पुलिस गिरफ्त में आये इन तीनों से सघन पूछताछ कर रही है 
जिला समाहरणालय के दक्षिणी छोड़ और एसडीओ कार्यालय के ठीक बगल में एसडीओ जहांगीर आलम और एसडीपीओ सुबोध विश्वास ने संयुक्त रूप से विभिन्य गुमटियों में छापामारी कर रहे थे।
खासकर पंचायत चुनाव में विभिन्य पदों के लिए नामांकन करने वाले प्रत्यासियों को जो शपथ पत्र स्टाम्प दिए जाते हैं,उसी नकली स्टाम्प का खुलासा हुआ है । वैसे बताते चलें की सभी तरह के शपथ पत्र में इसी स्टाम्प की जरुरत पड़ती है ।वैसे अभी मौसम पंचायत चुनाव का है,इसलिए बड़ी मात्रा में इन नकली शपथ पत्र स्टाम्प को उसी मद में खपाया जा रहा था ।लाखों के नकली स्टाम्प के साथ तीन लोग गिरफ्तार किये गए हैं जिसमें एक वकील भी शामिल हैं । 
इनलोगों से सघन पूछताछ की जा रही है ।गिरफ्तार लोगों से पूछताछ में मिली जानकारी पर सदर थाना के भेड़धरी गाँव में पुलिस की छापामारी में नकली स्टाम्प छापने वाली मशीन,कम्प्यूटर,प्रिंटर मशीन सहित कई अन्य उपकरण बरामद हुए हैं ।सबसे अहम जानकारी यह मिल रही है की वहाँ सात लाख रूपये भी बरामद किये गए हैं।कुछ और लोगों की गिरफ्तारी की भी सूचना मिल रही है।वैसे छापामारी लगातार जारी है और कयास यह लगाया जा रहा है की पुलिस और प्रशासन की कामयाबी का ग्राफ अभी और बड़ा होगा ।

मार्च 10, 2016

रूपये दो, फिर होगा ईलाज ... इसी क्रम में जच्चा---बच्चा दोनों की हो गयी मौत

मुकेश कुमार सिंह की कलम से :- रूपये दो फिर होगा ईलाज ।बिना रूपये के यहां नामुमकिन है ईलाज ।रूपये नहीं हैं तो आपके मरीज की चली जायेगी जान ।यह कोई फ़िल्मी डायलॉग नहीं बल्कि कोसी इलाके के  पीएमसीएच कहे जाने वाले सदर अस्पताल की हकीकत है ।बीती देर रात एक गर्भवती महिला का ईलाज ठीक से इसलिए नहीं हुआ,क्योंकि उसके परिजनों ने दस हजार रूपये नहीं दिए ।ईलाज के अभाव में आज सुबह जच्चा---बच्चा दोनों की मौत हो गयी ।घटना से आहत परिजनों ने अस्पताल में जमकर हंगामा किया ।
देखिये अस्पताल का मंजर ।मेले की शक्ल में यहां भीड़ मौजूद है ।नवहट्टा के रहने वाले चन्दन दास की पत्नी गायत्री देवी और उसके पेट में पल रहा बच्चा दोनों काल के गाल में समा चुके हैं ।चन्दन अपनी पत्नी को बीती रात दो बजे डिलेवरी के लिए सदर अस्पताल लेकर आये ।लेकिन मौके पर मौजूद नर्स और महिला चिकित्सक ने उससे दस हजार रूपये मांगे ।लेकिन तत्काल चन्दन के पास इतने रूपये नहीं थी ।रूपये नहीं होने की वजह से चन्दन की पत्नी के ईलाज की जगह दुत्कार और फटकार मिलती रही ।नतीजतन आज सुबह बच्चा--जच्चा दोनों की मौत हो गयी। 
सदर अस्पताल में हंगामे की खबर सुनकर सदर थाना के एसएचओ संजय सिंह दल--बल के साथ अस्पताल पहुंचे और सख्ती दिखाते हुए मामले को शांत करा लिया ।मृतका को एम्बुलेंस से नवहट्टा भेजने की तैयारी आनन्---फानन में कर ली गयी ।लेकिन सहरसा टाईम्स के कड़े हस्तक्षेप के बाद पुलिस अधिकारी ने इस मामले में पीड़ित के आवेदन के आधार पर जांच और कार्रवाई की बात की है।इधर सिविल सर्जन डॉक्टर अशोक कुमार सिंह ने भी जांच कर कठोर कार्रवाई का भरोसा दिलाया है ।
सदर अस्पताल में पैसे के दम पर ईलाज का यह कोई पहला वाकया नहीं है ।सहरसा टाईम्स के हस्तक्षेप से आज से पहले भी कई अस्पताल कर्मी निलंबित किये जा चुके हैं ।वैसे सबसे अहम् बात यह है की सदर अस्पताल में आखिर गरीब अपनी जान कबतक यूँ ही और बेजा गंवाते रहेंगे ।जाहिर तौर पर पहले से मुफलिसी और फटेहाली की मार झेल रहे इन गरीबों को सरकारी अस्पताल में भी भगवान् की जगह यमराज से सामना होता है ।सिस्टम आखिर कब ईमानदारी से इन गरीबों के लिए खड़ा होगा ।आजादी से लेकर आजतक गरीबों की सियासी चिंता और उनकी अल्फाजी वकालत खूब हुयी है।लेकिन ये गरीब आजतक ना केवल ठगे गए हैं बल्कि बेहतर कल की उम्मीद पाले इस दुनिया को अलविदा भी कहते रहे हैं।



एक शख्स को मारी गोली ......


सहरसा टाम्स की रिपोर्ट :-  बीती रात करीब नौ बजे मोटरसाईकिल सवार दो अज्ञात अपराधियों ने अनिल गिरी नाम के शख्स को गोली मार दी ।घटना सदर थाना के गांधीपथ की है। गंभीर स्थिति में जख्मी को एक निजी नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया है जहां डॉक्टर उसकी जिंदगी को फिलवक्त खतरे में बता रहे हैं।
सदर एसडीपीओ सुबोध विश्वास
सूर्य अस्पताल के डायरेक्टर डॉक्टर विजय शंकर ने कहा की इंटरनल ब्लड निकल रहा है, जिसे रोकने के लिए ऑपरेशन किया जा रहा है। गोली पेट में फांसी हुयी है। पुलिस अधिकारी का कहना है की अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए सदर इंस्पेक्टर के नेतृत्व में छापामारी की जा रही है ।
वैसे घटना के कारण का ना तो पता चल सका है और ना ही अपराधियों को ही चिन्हित किया जा सका है ।अहम बात यह रही है की हमलावर जिस मोटर साईकिल से आकर घटना को अंजाम दिया था, वह मौक़ा ए वारदात पर ही छूट गयी। घटनास्थल और निजी नर्सिंग होम दोनों जगह जिले के पुलिस कप्तान अश्वनी कुमार खुद पहुंचे और कमान संभाल ली। 
एसपी के निर्देश पर सदर एसडीपीओ सुबोध विश्वास लगातार खुद से इस घटना के पटाक्षेप में जुटे हुए हैं।  

मार्च 02, 2016

कानून का राज स्थापित करें.... लवली आनंद, पूर्व सांसद

नए पुलिस अधीक्षक के  साथ पूर्व सांसद लवली आनंद 
सहरसा टाईम्स की रिपोर्ट :- सहरसा की बिगड़ती कानून व्यवस्था को लेकर पुर्व सांसद लवली आनंद ने बितेदिन सहरसा के नव पदस्थापित पुलिस कप्तान अश्वनी कुमार से मिल कर कहा कि कोशी प्रमंडल का मुख्यालय सहरसा में आज के समय में अपराधियों और उग्रवादियों का सुरक्षित अभयारण बन गया है. आज के समय मे हत्या, अपहरण, रंगदारी, बलात्कार, अवैध कब्ज़ा, चोरी, डकैती रोजमर्रा की बात हो गई है. पुर्व सांसद श्रीमति आनंद ने ये भी कहा कि पैसे के बल पर आज अपराधी खुले आम घूम रहे है और निर्दोष सलाखों के पीछे भेजे जा रहे है. 
उन्होंने नये पुलिस अधीक्षक को कहा की सहरसा की हालात ऐसा पहले कभी था. उन्होंने नव पदस्थापित पुलिस कप्तान को बधाई देते हुए सांकेतिक शब्दों में ये भी इशारा कर दिया की किसी पूर्वाग्रह या पैरवी से दूर रहते हुए कानुन का राज बनाए रखने का शसक्त प्रयास करें. ऐसा करने से मौजुदा स्थिति को बदलने में समय नहीं लगेगा। पुर्व सांसद के साथ राजन आनंद, युवा प्रदेश महासचिव (हम), सोनू कुमार सिंह, मुकुल सिंह, अनिल कुशवाहा, राजीव कुमार सहित फ्रेंड्स ऑफ़ आनंद के अन्य कार्यकर्ता मौजूद थे.

मार्च 01, 2016

अब हथियार की नोंक पर होगा मरीजों का ईलाज

मुकेश कुमार सिंह की कलम से-----सहरसा देश का पहला ऐसा जिला होगा जहां के डॉक्टर्स एक साथ हथियार की लायसेंस लेने की जिद पर अड़े हैं ।हद तो यह है की बेहतर सुरक्षा इंतजाम और हथियार के लायसेंस के लिए ये सभी डॉक्टर्स बीते 22 फ़रवरी से लगातार पांच दिनों तक हड़ताल पर भी थे।बताना लाजिमी है की इस हड़ताल के दौरान कोसी प्रमंडल के मरीज त्राहिमाम करते रहे।यह दीगर बात है की डॉक्टर्स की सुरक्षा एक अहम् मुद्दा है।लेकिन बड़ा सवाल यह है की कोसी इलाके में क्या आगे मरीजों का इलाज हथियारों की नोंक पर होगा ।क्या खौफ और संगिनियों के साये में होगा मरीजों का इलाज। पांच दिनों के सरकारी और गैर सरकारी डॉक्टर की हड़ताल ने कोसी इलाके में त्राहिमाम मचा दिया था।मरीज बिना इलाज के चीख--पुकार मचाये हुए थे।

हड़ताल के दौरान सभी नर्सिंग होम में अलीगढ़ के ताले लटक रहे थे।कोसी का पीएमसीएच कहा जाने वाला सदर अस्पताल बुरी तरह से प्रभावित था।हर तरफ मरीज परेशान हाल और बस ऊपर वाले की नियामत के भरोसे थे।सहरसा के डॉक्टर्स के समर्थन में सुपौल के सभी डॉक्टर्स और मधेपुरा और पूर्णिया के आंशिक रूप से डॉक्टर्स भई हड़ताल पर थे।आईएमए के बैनर तले यह हड़ताल चल रही थी।इन डॉक्टर्स को राज्य मुख्यालय संघ का आशीर्वाद भी प्राप्त था।जाहिर तौर पर ये डॉक्टर्स अपनी सुरक्षा की मांग को लेकर हड़ताल पर थे।लेकिन अब इन डॉक्टर्स का भरोसा पुलिस और प्रशासन पर से पूरी तरह से उठ गया है।इनकी मांग है की एक साथ सभी डॉक्टर्स को हथियार के लायसेंस दिए जाएँ,जिससे वे अपनी सुरक्षा खुद कर सकें ।
हमारी जानकारी के मुताबिक़ पुराने और नए दो सौ से 
ज्यादे डॉक्टर्स ने हथियार लाइसेंस के लिए आवेदन दिए हैं ।धरती  के भगवान् अब हथियार के दम पर लोगों की जान बचाने की कसम उठा चुके हैं ।हड़ताल के आखिरी दिन 26 फ़रवरी को कोसी रेंज के नवोदित डीआईजी चंद्रिका प्रसाद और सहरसा के  डीएम विनोद सिंह गुंजियाल से डॉक्टर्स का एक प्रमंडलीय प्रतिनिधि मंडल मिला ।अधिकारियों के साथ हुयी वार्ता और हथियार लायसेंस की जिद को लेकर पूरी चर्चा और अधिकारियों के ठोस भरोसे के बाद यह हड़ताल खत्म हो सकी। 
देश के इस चौंकाने वाले वाकये की हथियार का लायसेंस दो,तब करेंगे मरीजों का इलाज को लेकर सहरसा टाईम्स ने सहरसा के डीएम विनोद सिंह गुंजियाल से एक्सक्लूसिव बातचीत की ।डीएम ने बड़े साफ़ लहजे में कहा की लायसेंस देने की एक विधि सम्मत प्रक्रिया होती है ।किसी को भी हथियार के लायसेंस देने से पहले यह जानना भी जरुरी है की उन्हें किसी ने धमकी दी है या फिर उनकी जान को खतरा है ।यानि बिना प्रक्रिया के हथियार का लायसेंस नहीं दिया जा सकता है ।वैसे वे डॉक्टर्स की मांग पर कानून सम्मत विचार कर रहे हैं।

फ़रवरी 25, 2016

पति ने अपने सामने पत्नी का कराया रेप.......

मुकेश कुमार सिंह की रिपोर्ट :- एक तो रेप की किसी भी घटना की जानकारी से ही ना केवल रूह थर्रा उठती है
बल्कि पोर--पोर रोने भी लगता है । लेकिन जब यह पता चले की किसी पति ने ही अपनी पत्नी का रेप करवाया हो, वह भी ना केवल अपनी आँखों के सामने बल्कि अपने किसी सगे रिस्तेदार से, तो सोचिये इस दर्द की कैसी इंतहा होगी । 
जी हाँ ! यह सनसनीखेज और सीने को चाक करने वाली घटना सहरसा के सदर थाना के झपड़ा टोले में घटी है जहां एक पति ने अपनी पत्नी को पहले तो घर से दूर बुलाया, फिर अपनी आँखों के सामने उसका रेप करवाया । यही नहीं, इस दौरान उसने पीड़िता की जमकर पिटाई भी की । पीड़िता न्याय के लिए महिला थाना पहुंची जहां एफआईआर दर्ज करते हुए पीड़िता को मेडिकल के लिए भेजा गया है ।
जिसने सात जन्मों तक साथ रहने और सुरक्षा के नाम पर सात फेरे लिए थे,उसी ने दरिंदगी की सारी दीवारें गिरा दी । देखिये इस अबला को । इसके जिश्म, अस्मत और इसकी आत्मा तक को इसके पति ने अपनी आँखों के सामने रौंदवाया है । इसके पति बबलू शर्मा ने कल रात इसको अपनी बहन के घर खाना खाने के नाम पर ले गया । लेकिन घर पर बहन नहीं थी । बबलू के जीजा मनोज शर्मा घर पर थे । पहले मांस और शराब का दौर चला और उसके बाद बबलू शर्मा के सामने ही उसके जीजा मनोज शर्मा इस अभागी के जिश्म को नोंचता रहा, अस्मत को चाक करता रहा । इस वारदात के दौरान बबलू ने इस अभागी को बेल्ट से जमकर पीटा भी ।
आरती सिंह, एसएचओ, महिला थाना

अस्मत लुटाई इस अबला के बयान पर महिला थाना में मामला दर्ज कर अनुसंधान शुरू कर दिया गया है ।पीड़िता को जहां मेडिकल के लिए सदर अस्पताल भेजा गया है वहीं बहुरूपिया पति और बलात्कारी जीजा दोनों फरार हैं । महिला पुलिस की अधिकारी आरती सिंह, एसएचओ, महिला थाना कार्रवाई की बात कर रही हैं ।

क्या एक पति इतना जालिम भी हो सकता है,सुनकर यकीं करना मुश्किल है ।लेकिन इस कलयुगी पति ने यह जघन्य अपराध किया है । आगे पुलिस कैसी कार्रवाई करती है और पीड़िता को कितना न्याय दिलाती है,यह देखना बेहद जरुरी है ।

बच्ची को लगी गोली, स्थिति नाजुक ............


सहरसा टाईम्स  की रिपोर्ट:-  अज्ञात अपराधियों के द्वारा की गयी गोलीबारी में आज अहले सुबह महादलित परिवार की एक मासूम बच्ची को गर्दन में गोली लग गयी जिसे आनन्---फानन में सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया । महादलित परिवार की महज डेढ़ साल की नन्ही कुमारी जिसने अभी दुनिया में आकर ककहरा भी नहीं सीखा था, देखिये अपनी माँ की गोद में किस तरह से बेहोश पड़ी हुयी है । उसकी गर्दन में गोली लगी थी,जिसे डॉक्टर ने निकाल दिया है ।माँ पूजा कुमारी बता रही है की सुबह में वह अपनी बेटी के साथ सोई हुयी थी की अचानक ऊपर से एक गोली सनसनाती हुयी उसकी बेटी की गर्दन में आ लगी । बच्ची की गर्दन से गोली निकाल दी गयी है लेकिन उसकी स्थिति नाजुक बनी हुयी है ।घटना को लेकर मिली जानकारी के मुताबिक़ यह घटना पुरानी जमीनी विवाद को लेकर घटी है ।वैसे हद तो यह की गोली घर के ऊपरी चदरे को छेदती हुयी भीतर आई ।घटना सदर थाना के डीबी रोड की है ।फिलहाल पुलिस मामले की तफ्तीश में जुट चुकी है ।
आखिर गोली कहाँ से,किसने और किस नीयत से चलाई, फिलवक्त एक पहेली की तरह है ।लेकिन इस घटना ने इतना तो बता दिया है की अपराधियों  के सामने पुलिस ने पूरी तरह से अपने घुटने टेक दिए हैं ।गोली किसने चलाई उसने नहीं देखा ।घर के लोगों के साथ वह अपनी खून से लथपथ जख्मी बेटी को लेकर तुरंत सदर अस्पताल भागी ।
इधर मोहल्ले के लोगों का कहना है की बीते तीस वर्षों से जख्मी बच्ची के दादा रतन राम से अशोक तिवारी और शंकर तिवारी का जमीनी विवाद है ।इनलोगों ने कई बार रतन राम को जान से मारने की धमकी भी दी थी ।इनलोगों की मानें तो तिवारी परिवार ने ही इस घटना को अंजाम दिया है ।हमलावर रतन राम और उसके बेटे ललित राम को मारना चाहते थे लेकिन गोली मासूम बच्ची को लगी ।
सदर अस्पताल में लोग सदर थानाध्यक्ष संजय कुमार सिंह के सामने ही उनपर कई तरह के गंभीर और शर्मनाक आरोप लगा रहे थे ।लोग रहे हैं की थानाध्यक्ष बिना पैसे लिए एक भी केश दर्ज नहीं करते हैं।यही नहीं जमीन माफियाओं और शातिर अपराधियों से उनकी सांठगांठ है।इनके समय में अपराध का ग्राफ काफी बढ़ा है। लोगों ने तो यहां तक कहा की इनके रहने से आमलोग बेहद डरे--सहमे हैं।  
इधर घटना को लेकर सदर थानाध्यक्ष संजय कुमार सिंह ने कहा की उन्हें इस घटना को लेकर अस्पताल से गयी ओडी स्लिप से जानकारी मिली ।बच्ची को गोली लगी है और जख्मी के माता--पिता के बयान पर काण्ड अंकित कर अनुसंधान किया जाएगा । वैसे घटना में शामिल लोग किसी भी सूरत में बख्शे नहीं जाएंगे । थानाध्यक्ष जख्मी के घर पहुंचकर जांच में जुट चुके हैं ।गोली कहाँ से कैसे चली,इसको भी उन्होनें देखा ।हम अपने दर्शकों को भी गोली वाली जगह से लेकर तमाम एक्सक्लूसिव तस्वीर दिखा रहे हैं ।
मामले की वजह आखिर जो भी हो और घटना को अंजाम देने वाले शातिर से शातिर क्यों ना हो,बड़ा सवाल तो यह है की आखिर इस मासूम ने किसका क्या बिगाड़ा था ।इस घटना से पुरे इलाके में सनसनी और पुलिस के खिलाफ बेहद आक्रोश है ।जाहिर तौर पर इस मामले में बड़े अधिकारियों को हस्तक्षेप करते हुए दूध का दूध और पानी का पानी करना चाहिए ।

परीक्षा में दो मुन्ना भाई गिरफ्त में आये

सहरसा टाईम्स की रिपोर्ट :- इंटर परीक्षा के दौरान आज पॉलिटेक्निक कॉलेज परीक्षा केंद्र पर दूसरे की जगह पर परीक्षा दे रहे दो मुन्ना भाई दबोचे गए । इन दोनों के अलावे कदाचार के आरोप में कुल नौ परीक्षार्थी आज परीक्षा से निष्काषित किये गए ।

फ़रवरी 24, 2016

डॉक्टरों की हड़ताल का साईड इफेक्ट, मरीज के परिजन कर रहे हैं त्राहिमाम


मुकेश कुमार सिंह की कलम से :- आईएमए के बैनर तले जिले भर के डॉक्टरों की शुरू हुयी अनिश्चितकालीन हड़ताल का आज तीसरा दिन है हांलांकि इस हड़ताल का साईड इफेक्ट पहले दिन से ही दिखना शुरू हो गया था। इलाज के अभाव में 22 फ़रवरी की शाम में जहां एक मासूम बच्चे की मौत सदर अस्पताल में हो गयी थी वहीं सदर अस्पताल के आपातकालीन में भर्ती मरीज और इनडोर के मरीज भी त्राहिमाम कर रहे थे । सबसे पहले हम यह बताते चलें की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम, डॉक्टरों से रंगदारी मांगने वाले अपराधियों की शीघ्रता से गिरफ्तारी और सभी डॉक्टरों को हथियार का अविलम्ब लाइसेंस मिले इसके लिए डॉक्टरों ने हड़ताल की है । 
हड़ताल के पहले दिन ही मधेपुरा जिले के मानपुर तरही टोला के रहने वाले सुभाष पासवान के तीनों बच्चे एक साथ बीमार हुए। डायरिया की शिकायत थी । इलाज के लिए पहले ये सुपौल सदर अस्पताल गए लेकिन वहाँ से इन्हें सहरसा के एक निजी क्लीनिक भेजा गया। लेकिन डॉक्टर की हड़ताल की वजह से इन्हें क्लीनिक में जगह नहीं मिली। ये कई क्लीनिक गए लेकिन हर जगह इन्हें फटकार और दुत्कार मिली। थक--हारकर ये सदर अस्पताल आये लेकिन यहां भी डॉक्टर हड़ताल पर थे । इस हड़ताल की आग और इलाज के अभाव में अस्पताल में इनका एक बच्चा दुनिया को अलविदा कह गया ।
इस हड़ताल का व्यापक असर है।आपको बताएं की अस्पताल के आपातकालीन कक्ष में भर्ती अन्य मरीजों को भी सहरसा से बाहर भेजने का प्रयास किया जा रहा है ।मरीज के परिजन त्राहिमाम कर रहे हैं और कह रहे हैं की हड़ताल की वजह से उनके मरीज के पास ना तो डॉक्टर आ रहे हैं और ना ही नर्स आ रही है ।

एक महिला सिपाही वीना देवी कह रही हैं की वह एक रेप पीड़िता नाबालिग का मेडिकल करवाने आई थी लेकिन हड़ताल की वजह से बच्ची का मेडिकल नहीं हो सका और वे यूँ ही वापिस लौट रही हैं ।
अब जब डॉक्टर हड़ताल पर हों तो क्या करेंगे सिविल सर्जन साहब डॉक्टर अशोक कुमार सिंह। बेचारे खुद मरीज का इलाज करने का देखिये किस तरह से रस्म निभा रहे हैं ।
डॉक्टर को अत्याधुनिक हथियार रखने का जूनून सवार हुआ है ।ये खुद से अपनी सुरक्षा लायसेंसी हथियार के दम से करेंगे ।यानि अब मरीजों का इलाज हथियार की नोंक पर होगा।  डॉक्टर की सुरक्षा निहायत जरुरी है लेकिन हथियार के लायसेंस के लिए अनिश्चितकालीन हड़ताल पर डॉक्टरों का इस तरह से चले जाना निश्चित रूप से उनके धरती के भगवान् की छवि को पूरी तरह से खत्म कर डालेगा ।
हड़ताल के तीसरे दिन सरकारी और गैर सरकारी डॉक्टरों की हड़ताल की वजह से निजी नर्सिंग होम से लेकर सदर अस्पताल तक में मरीज और उनके परिजन त्राहिमाम करते दिखे ।एक तरफ जहां निजी नर्सिंग होम से मरीज भागने की जुगत कर रहे हैं वहीं सदर अस्पताल में भी मरीज बेहद हलकान और परेशान हैं ।जाहिर तौर पर डॉक्टरों के इस अनिश्चितकालीन हड़ताल का खामियाजा हर तबके के लोग भुगत रहे हैं ।
सहरसा में करीब दो दर्जन बड़े नर्सिंग होम हैं लेकिन बीते तीन दिनों से सभी में ताले जड़े हुए हैं ।आलम यह है की नर्सिंग होम में पहले से भर्ती मरीज जिनका आज ऑपरेशन होने वाला था,उस मरीज को हड़ताल की वजह से पटना रेफर कर दिया गया है । 
जो मरीज बाहर से इलाज के लिए आ रहे हैं,वे बिना इलाज कराये ही वापिस हो रहे हैं ।हद तो इस बात की है की परिजन मरीज को ऑटो पर लादकर इस नर्सिंग होम से उस नर्सिंग होम का सफ़र तय कर रहे हैं लेकिन उस मरीज का कहीं भी इलाज नहीं हो रहा है ।इसके अलावे नर्सिंग होम की खाली कुर्सियां इस बात की अलग से तकसीद कर रही हैं  की हड़ताल का व्यापक असर है ।
इधर कोसी के पीएमसीएच कहे जाने वाले सदर अस्पताल की स्थिति तो और भी खराब है ।बताते चलें की कोसी इलाके में गरीबी,बेकारी, भुखमरी और बिमारी कुलाचें भरती हैं ।ऐसे में खासकर के गरीब मरीज पूरी तरह से सरकारी अस्पताल के भरोसे होते हैं ।लेकिन बेमियादी हड़ताल की वजह से सदर अस्पताल के आपातकालीन कक्ष से लेकर इनडोर में भर्ती मरीज त्राहिमाम कर रहे हैं ।
आपातकालीन कक्ष से लेकर इनडोर का बेहद बुरा हाल है ।आपातकालीन कक्ष में एक महिला के पेट में पत्थर है जिसका ऑपरेशन होना बेहद जरुरी है लेकिन उसका ऑपरेशन हड़ताल की वजह से नहीं हो रहा है ।इनडोर में कल से कोई डॉक्टर मरीज को देखने नहीं गए हैं ।यानि सदर अस्पताल का मंजर बेहद जानलेवा है ।अगर किसी मरीज की जान यहाँ बच जाए तो समझिये अल्लाह मेहरबान है ।
हमने सदर अस्पताल के इस बदतर हालात को लेकर आपातकालीन कक्ष में मधेपुरा से बुलाकर तैनात किये गए डॉक्टर से खास बातचीत की ।डॉक्टर ने खुले सफे से कहा की अस्पताल की व्यवस्था पूरी तरह से चरमराई हुयी है ।मरीज परेशान हैं ।वे अपनी तरफ से बेहतर कोशिश कर रहे हैं लेकिन हड़ताल ने अस्पताल को पूरी तरह से बदहाल कर दिया है ।
सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम,डॉक्टरों से रंगदारी मांगने वाले अपराधियों की गिरफ्तारी और सभी डॉक्टरों को हथियार का लायसेंस मिले की जिद पर अड़े ये डॉक्टर बेमियादी हड़ताल पर हैं ।अब सरकार और स्थानीय प्रशासन इन डॉक्टरों को कौन सी जड़ी पिलाकर हड़ताल खत्म कराने की पहल करेगा,आगे यह देखना बेहद जरुरी है ।फिलवक्त मरीज त्राहिमाम करने के साथ--साथ धरती के भगवान् को जीभर के कोस रहे हैं ।बड़ा सवाल यह है की आने वाले दिनों में क्या ये डॉक्टर हथियार की नोंक पर मरीजों का इलाज करेंगे ।

*अपनी बात*

अपनी बात---थोड़ी भावनाओं की तासीर,थोड़ी दिल की रजामंदी और थोड़ी जिस्मानी धधक वाली मुहब्बत कई शाख पर बैठती है ।लेकिन रूहानी मुहब्बत ना केवल एक जगह काबिज और कायम रहती है बल्कि ताउम्र उसी इक शख्सियत के संग कुलाचें भरती है ।