अगस्त 06, 2016

सच उकेरने की फितरत है हमारी

सच उकेरने की फितरत है हमारी........

हम टारगेट नहीं करते किसी को ........
गलत करने वाले,पायजामें में रहें,......
नहीं तो नाड़े के खुलने तक हमारी जंग जारी रहेगी........
मौत से डर नहीं,बेशर्म सिस्टम से दिल जलता है ........

मुकेश कुमार सिंह की दो टूक-----
पुलिसिया सिस्टम की जरूरत इसलिए पड़ी की सामाजिक नियम--कायदे,रीति--रिवाज और रिवायत को जंग ना लगे और मानव अपने स्वभाव से किसी नियम को ना तोड़े ।मानव की स्वच्छंदता से किसी को आहत ना होना पड़े ।जब किसी के सम्मान और अधिकार का हनन हो रहा हो तो कानून उसके लिए कवच का काम करे ।पुलिस की असल भूमिका महज अपराध नियंत्रण भर नहीं है ।सामाजिक संतुलन कैसे काबिज रह सके,इसमें भी पुलिस की अहम् भूमिका है ।पहले की पुलिस शपथ को लक्ष्य मानते थी लेकिन अबकी पुलिस के लिए शपथ एक रश्म भर है ।पहले फरियादी और आरोपी दोनों को अलग--अलग सुना जाता था और न्याय का तराजू कांपता नहीं था ।अभी के समय में पुलिस अधिकारी का अनुसंधान से लेकर ज्यादातर काम रसूखदार,नेता,पैसे वाले,दबंग और पैरवी--पहुँच वाले लोग अपने कहे से करवाते हैं । पहले की पुलिस फर्ज निभाती थी और आज की पुलिस नौकरी कर रही है ।
तीन अगस्त को सहरसा सदर थाना में जो हुआ,वह कहीं से भी जायज नहीं है ।एक पीड़ित के साथ फजीहत के साथ दुर्व्यवहार,पुरे पुलिस सिस्टम को कटघरे में खड़ा करता है ।इस मामले के नायक थानेदार संजय सिंह का निलंबन या फिर उन्हें थानेदारी से हटा देना पर्याप्त कार्रवाई नहीं है । बड़ा सवाल यह है की क्या जब दूसरा थानेदार आएगा,तो,वह ऐसी घटना की पुनरावृति नहीं करेगा,इसकी गारंटी कौन लेगा ?सरकार की मंसा साफ़ है की थाना आने में किसी को हिचक ना हो और पीड़ित की पीड़ा को पुलिस अधिकारी ससम्मान सुनें ।दोस्ताना व्यवहार का माहौल थाने में हो ।लेकिन अमूमन ऐसा नहीं होता है ।एक थानेदार का वीडियो कैद हुआ और वह सोसल मीडिया में वायरल हो गया ।लेकिन सच यह है की संजय सिंह से भी ज्यादा सनकी और बिगड़ैल कई पुलिस अधिकारी ऐसे हैं जिनकी आमलोगों के बीच दहशत कायम है लेकिन उनके कुकर्म कैमरे में कैद नहीं हो पा रहे हैं ।जो पकड़ा गया चोर,वर्ना साधू ।संजय सिंह के मामले में यही हुआ है ।
थानेदार की काली करतूत को हमने जायज तरीके से खूब हवा दी,ताकि थानेदार को अपनी गलती का अहसास और अपने कृत्य पर उन्हें अफ़सोस हो । लेकिन अहंकार और दम्भ इंसान को कभी अच्छा सोचने नहीं देता है ।सच स्वीकारना सबके बस की बात भी नहीं है ।इस मामले में भी सच बिल्कुल आईने की तरह साफ़ है लेकिन जांच और सफाई देने का खेल परवान पर है ।
इस काले और बदसूरत खेल का जो भी फलाफल आये लेकिन मुझे डराने और धमकाने की कोशिश हुयी,जो कायरता को मुखर स्पंदन दे रहा है ।मुझे जान से मारने की धमकी दी गयी लेकिन मैंने अभीतक शासन--प्रशसन कहीं भी इसकी शिकायत नहीं की है ।ऐसी धमकी मुझे जिंदगी में कई बार मिल चुकी है और मैं जस का तस मौजूं हूँ ।जिन्हें गिर--गिर कर दिन में सौ बार मरने की आदत है,उन्हें मौत से डर लगता होगा ।मुझे तो एक बार मरना है और हम जमाने से मौत का सिद्दत से इन्तजार कर रहे हैं ।
""थानेदार के खिलाफ मैं कुछ ना लिखूं,नहीं तो मुझे जान से हाथ धोना पड़ सकता है""।यही धमकी मुझे दी गयी थी ।लेकिन मैं कल दिनभर इस मसले पर गंभीर मंथन करता रहा की,मेरे सम्बन्ध किसी भी अधिकारी से महज एक सीमा तक और सिर्फ मधुर रहे हैं ।इस थानेदार से कभी--कभार ही सही लेकिन अच्छी और शालीनता से ही बात हुयी है ।आखिर इस थानेदार के नाम पर धमकी दी गयी है ।""कहीं यह गहरी साजिश तो नहीं""कहीं कुछ और बड़े अधिकारियों ने मिलकर तो यह कारनामा नहीं किया है ?कई सवाल मेरे मन में उमड़--घुमड़ रहे हैं ।आखिर किराए के वे किसके गुर्गे थे,जिसे मैंने पहले कभी नहीं देखा था ।
खैर,ना मैं डरा हुआ हूँ और ना ही सहमा हुआ हूँ ।मैं अपनी मर्जी की करता रहूंगा,चाहे अंजाम जो भी हो ।
इस मामले में,मेरी समझ से थानेदार को सामने आकर अपनी गलती स्वीकार करते हुए अपने विराट व्यक्तित्व का सखनन करना चाहिए ।भूल और गलती किसी से भी हो सकती है लेकिन उसका सुधार अचूक औषधि है ।वैसे इस मामले में बड़े अधिकारी की कार्रवाई जैसी भी हो लेकिन थानेदार का व्यवहार पूरी तरह से गलत था,इसको हम लगातार कहते रहेंगे ।
रही बात हमें जान से मारने की धमकी मिलने की,तो हमें ना तो कोई सरकारी अनुसंधान की दरकार है और ना ही सरकारी सुरक्षा की ।हम आम  जनता के हक़--हकूक के लिए आवाज उठाते थे और आगे भी बेहद मजबूती से उठाते रहेंगे ।अगर जनता के दिल में हम रहते हैं,तो,जनता खुद हमारी हिफाजत करेगी ।वैसे ""जिंदगी तो बेवफा है,एक दिन ठुकराएगी,मौत महबूबा है,अपने साथ लेकर जायेगी '"।

■ बिहार अबतक ■


■ पटना -जन अधिकार पार्टी (लो) का राजभवन मार्च आज ।शराबबंदी कानून और दलित उत्‍पीड़न के मुद्दे पर मार्च ।12.30 बजे गर्दनीबाग से निकलेगा मार्च ।

■ पटना - एनडीए का महाधरना आज ।लोजपा सांसद चिराग पासवान होंगे शामिल ।

■ बांका- भूमि विवाद में उपमुखिया के घर का घेराव ।मारपीट,एक घायल ।बेलहर पीएचसी में भर्ती ।तरैया पंचायत की घटना ।

■ बेगूसराय- ट्रक की टक्कर युवक घायल ।निजी अस्पताल में ईलाज के दौरान हुई मौत ।बखरी के कुम्हार चौक पर हुआ हादसा ।

■ कैमूर- *एसपी ने चांद थानाध्यक्ष को किया निलंबित ।पुलिस मुख्यालय के आदेश पर किया निलंबित ।शराब बनाने के उपकरण मिलने पर हुयी कार्रवाई ।*

■ वैशाली-महनार PHC में प्रसव के दौरान नवजात की मौत ।परिजनों ने किया हंगामा ।डॉक्टर पर लापरवाही का आरोप ।

■ पटना- नौकरी दिलाने के नाम पर 9 लोगों से लिये 5-5 लाख रुपये ।ठगों ने सभी को फर्जी नियुक्ति पत्र भी बांटा ।आलमगंज थाने में केस दर्ज ।

■ कटिहार- स्पर्श अग्रवाल अपहरण कांड में पुलिस ने दो लोगों को किया गिरफ्तार  

अगस्त 05, 2016

लोकतंत्र के चौथा स्तम्भ को जान से मारने की धमकी


गुर्गों से मिल रही धमकी, कलम को बारूद से चुप करने की कोशिश

जान की सलामती चाहते हो,तो खामोश रहो.......

हम जबतक रहेंग ज़िंदा,सच को करेंगे बेपर्दा.....
मौत से नहीं डरता,गलीज दुनिया वालों की फितरत पर आती है शर्म.......
मुकेश कुमार सिंह की दो टूक---- 
 तीन अगस्त को बिहार के सहरसा सदर थाने में थानेदार संजय सिंह ने फ़िल्मी स्टाईल में जमकर जीवंत अभिनय किया । मारपीट की घटना में गंभीर रूप से जख्मी हुए सुशील भगत नाम के पीड़ित और उनके परिजनों के साथ मिस्टर थानेदार ने ना केवल थोक में गाली--गलौज की बल्कि पीड़ित सुशील भगत को धक्के मारकर थाने से बाहर भी कर दिया । हमने इस घटना को आम लोगों के अधिकार के साथ हो रहे खिलवाड़ के तौर पर लिया और इस घटना की पुनरावृति फिर किसी थाने में ना हो, इसके लिए सोसल मीडिया पर मुहीम छेड़ दी। हमने अपने आलेख के माध्यम से इस सनकी थानेदार पर बड़े अधिकारी ससमय न्याय सम्मत कार्रवाई करें, इसकी पुरजोर कोशिश की। इस थानेदार पर कार्रवाई हो इसको लेकर सोसल मीडिया पर छिड़े जंग में कई राजनीतिक दल भी शामिल हो गए। 
सत्ताधारी राजद ने भी थानेदार को तुरंत हटाओ के लिए मुहीम छेड़ दी ।अब मामला मीडिया की पहल के साथ--साथ सियासी रंग में भी रंग चुका है । ऐसे में थानेदार को ना उगलते बन रहा है और ना ही निगलते बन रहा है । हद तो इस बात की भी है की हमारे मीडिया के कुछ बंधू श्रीमान थानेदार के विशेष सलाहकार भी हैं ।बाहर की तमाम हलचल को ऐसे पत्रकार बंधू खबरीलाल की तरह समेटकर थानेदार के पास परोसते हैं। खैर, इन बातों से हमें कोई लेना--देना नहीं । आज पत्रकारिता में ऐसे लोग आ रहे हैं जिन्हें अधिकारियों से परिचय और धन उगाही का शौक है । आमजन के हित और जन सरोकार के मुद्दों से उन्हें कोई लेना--देना नहीं है । हमें याद है की एक समय जब घर का बेटा बिगड़ैल की श्रेणी में आ जाता था, तो उसके पिता कहते थे ""नालायक तू कुछ भी नहीं कर सकता । कम से कम लॉ की डिग्री तो ले ले ""। बाद में कचहरी में दो पैसे कमा लेगा । अब उस श्रेणी से भी जो नीचे उतरे हुए हैं, जिन्हें कहीं कोई रोजगार नहीं मिला, वे पत्रकारिता की तरफ आ गए हैं ।मैनेजमेंट को वसूली मास्टर की जरूरत होती है । उन्हें ठोके--बजाये पत्रकार की जरुरत ना के बराबर होती है ।
विषयांतर ना हो,इसलिए वापिस विषय पर आ रहा हूँ । मुझे ""जान से मारने की धमकी"" मिल रही है ।
बीती शाम मुझे कई अपरिचित चेहरे मिले जिन्होनें मुझसे कहा की अच्छा लिखने का यह मतलब नहीं की आप कुछ भी लिखें। अच्छा लिखना कभी--कभी नुकसान भी करता है। सदर थानेदार भले आदमी हैं। आप उनके पीछे क्यों पड़े हैं। अगर कुछ चाहिए तो बोलिये....साहेब दानवीर है, वे आपको खुश कर देंगे। लेकिन आप अपना रवैया बदलिये । मैं अकेला था और वे संख्यां में थे । मैंने उन्हें इतना जरूर कह दिया की मौत एक दिन आनी ही है और मैं वर्षों से मौत का इन्तजार कर रहा हूँ । मैं अपनी जिद की जिंदगी जीता रहा हूँ और रास्ते भी खुद से बनाता और उसपर चलता भी हूँ । मुझे किसी बात का कोई भी डर नहीं है। 
वैसे हम अपने पाठकों को बताते चलें की अपने पत्रकारिता जीवन में जब में यूपी में था, तो उस समय भी पत्रकारिता में नयी ईबारत लिखता था । वह पत्रकारिता का ऐसा दौर था, जब जिसकी कलम में धार थी, उन्हें देश का सच्चा नायक समझा जाता था । लेकिन अब नए जमाने में नयी सोच के साथ पत्रकारिता ने अपना स्वरूप ही बदल लिया है । सच कहता हूँ जब से बिहार वापिस आया हूँ, एक अजीब सी घुटन महसूसता रहा हूँ । 
मुझे जो एक तरह से खुली धमकी मिली है, इसकी जानकारी मैं राज्यपाल, सूबे के मुखिया नीतीश कुमार, राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद, डीजीपी सहित राज्य मुख्यालय के अन्य अधिकारी, देश की खुफिया एजेंसी और गृह मंत्री राजनाथ सिंह को देने जा रहा हूँ ।
इसी कड़ी में बताना बेहद जरुरी है की वर्ष 2009 में तत्कालीन सहरसा डीएम आर लक्ष्मणन, 2011 में डीएम देवराज देव और 2014 में डीएम शशि भूषण कुमार ने मेरे खिलाफ जमकर षड्यंत्र किया लेकिन मेरे ईमान की ताकत के सामने उनकी एक ना चली । यही नहीं कोसी रेंज के तत्कालीन डीआईजी परेश सक्सेना ने कुछ पत्रकार बंधुओं के सहयोग से 16 पन्नों में मेरे खिलाफ माननीय सहरसा न्यायालय में एक वाद भी दायर कर दिया । लेकिन कहते हैं की सच परेशान होता है लेकिन कभी पराजित नहीं होता है । परेश सक्सेना को उस मामले में मुंहकी खानी पड़ी ।
अब मेरा खुला चैलेंज भ्रष्टाचारियों के खिलाफ की उन्हें जो भी षड्यंत्र करना है,वे कर लें लेकिन मैं सच का सिपहसालार हूँ और ताउम्र सच मुझमें कुलाचें भरेगा ।मैं मरकर भी अपने रास्ते नहीं बदलूंगा ।बारूद के धुएँ को हम इल्म की ताकत से खामोश कर देंगे ।जिन्हें जो करना हैं करें ।हम तो बस अपनी मर्जी की ही करेंगे ।

अगस्त 04, 2016

पुलिस के बड़े अधिकारियों की भी लगनी चाहिए बाट .....


किसी मामले को हल्के में लेने की परम्परा को बदलिये साहेब 
थानेदार की दादागिरी की एक अखबार ने उधेड़ी बखिया 
बांकी कई जिम्मेवार अखबार थानेदार से रिश्ता निभाते दिखे 
मुकेश कुमार सिंह की दो टूक----
हमें सच कहने से कभी गुरेज नहीं रहा है ।कई बड़ी नौकरी के पोहपाश में ना फंसते हुए हमने पत्रकारिता की राह चुनी ।लेकिन इस पेशे के दलदल को जब हमने करीब से देखा,तो,बड़ी घिन्न आई लेकिन एकला चलो की तर्ज पर हम आजतक सफ़र तय करते रहे ।
खैर, आज का मसला है एक थानेदार की गुंडई पर क्या कर रहे हैं आला अधिकारी और इस मामले में अखबार और खबरिया चैनल कैसे अपनी भूमिका निभा रहा है । अखबार की भीड़ में एक अखबार प्रभात खबर ने दिलेरी से सच को उकेरा है। बांकी अखबारों नें रश्म अदायगी या फिर कोरम पूरा करना भी जरुरी नहीं समझा ।जहांतक खबरिया चैनल का सवाल है तो यह खबर किसी रिजिनल चैनल में दहकते अंदाज में नहीं दिखी ।नेशनल चैनल आजतक में यह खबर जरूर दिखी। लेकिन हद तो इस बात की है की इतना बड़ा अपराध एक थानेदार कर गया और आवाज उठाने वाले लोग बर्फ की तरह ठंढे पड़ गए। इस मामले में सोसल मीडिया ने अपनी महती भूमिका निभायी। 
सोसल मीडिया के माध्यम से ही यह कुकाण्ड राज्य मुख्यालय के अधिकारियों के संज्ञान में गया। यही नहीं इस मामले की भनक सूबे के मुखिया नीतीश बाबू को भी लग गयी है। लेकिन सहरसा के पुलिस अधीक्षक इस काण्ड को लेकर ज्यादे संजीदा नहीं दिख रहे हैं। 
थानेदार पर क्या कार्रवाई करेंगे की जगह उनका जबाब है की दो पक्षों के बीच मारपीट का मामला है और दोनों पक्षों का केश दर्ज होगा और फिर अनुसंधान बाद कार्रवाई होगी। अरे साहेब ये तो ठीक है लेकिन आप अपने फ़िल्मी थानेदार का क्या करेंगे ? क्या थाने में पीड़ित के साथ सम्मान से बात करने का तरीका कहीं बदल तो नहीं गया ? क्या फरियादी को गाली और धक्के खाने के नियम बनाये गए हैं ? एसपी साहब भौतिकवादी चकाचौंध से बाहर निकालिये और न्याय का चश्मा पहनिए । जनता को आपसे बहुत उम्मीद है ।अगर आप इस थानेदार पर कार्रवाई में देरी करेंगे,तो,सहरसा की जनता सड़क पर उतरेगी । आंदोलन,धरने और प्रदर्शन होंगे जिससे आपकी भी फजीहत होगी ।वैसे आपके निचले अधिकारी एसडीपीओ सुबोध विश्वास ने अपनी जांच में स्वीकार किया है की पीड़ित के साथ दुर्व्यवहार हुआ है ।
कुमार आशीष, प्रभात खबर 
एसपी साहेब, पुलिस अधिकारी अपने कर्तव्य को लेकर कितने संजीदा और गंभीर हैं, इस सच को जनता जानती है । हिम्मत करके एक बड़ी कार्रवाई कीजिये,जनता समझेगी की किसी बड़े अधिकारी ने गंगा स्नान किया है ।
इस थानेदार प्रकरण में प्रभात खबर अखबार और समाचार लिखने वाले संवाददाता कुमार आशीष बधाई के पात्र हैं ।चमचई और दलाल अपसंस्कृति पर आशीष ने करारा तमाचा जड़ा है ।वैसे इस आलेख के जरिये हम बताना चाहते की सोसल मीडिया पर यह मसला तबतक आग उगलता रहेगा,जबतक न्याय सम्मत कार्रवाई नहीं हो जाती है ।

थानेदार के रूप में कसाई है ये, इसे थाना से हटाओ सरकार

पीड़ितों की करता है पिटाई और कई रास्ते से करता है धन उगाही .........
मुकेश कुमार सिंह की दो टूक----बीते तीन अगस्त को मारपीट के मामले में जख्मी हुए सुशील भगत को न्याय दिलाने और पीड़ित के बयान पर मामला दर्ज कर अनुसंधान करने की जगह सदर थानाध्यक्ष संजय सिंह ने पीड़ित की ना केवल गालियों से खिदमत की बल्कि धक्के मारकर उन्हें थाने से बाहर भी कर दिया। थानेदार की काली करतूत के वायरल होने के बाद भी जब इस दादा किस्म के दबंग थानेदार पर बड़े अधिकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं की तो, विभिन्य राजनीतिक दल ने इस मामले में आज से हस्तक्षेप करना शुरू कर दिया है। सबसे पहले राजद के जिलाध्यक्ष जफ़र आलम और वरिष्ठ राजद नेता रंजीत यादव के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने एसपी अश्वनी कुमार से मुलाक़ात कर संजय सिंह पर अविलम्ब कार्रवाई की मांग की ।लेकिन एसपी साहब ने कहा की इस मामले में जांच चल रही है । जांच रिपोर्ट आने के बाद ही वे कुछ कर सकेंगे । हद की इंतहा है की थानेदार किस तरह से पीड़ित के साथ दुर्व्यवहार कर रहे हैं, उसका विजुअल्स मौजूद है लेकिन एसपी साहब जांच करवा रहे हैं ।
राजद जिलाध्यक्ष जफ़र आलम ने कड़े लहजे में कहा की अगर 24 घंटे के अंदर इस थानेदार पर कार्रवाई नहीं हुयी तो इस मामले को वे माननीय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद तक ले जाएंगे और इस थानेदार पर कार्रवाई करवा कर रहेंगे ।
बात इतने पर ही खत्म नहीं हुयी । जन अधिकार पार्टी ने थानेदार पर शीघ्रता से बड़ी कार्रवाई हो, इसके लिए आज शाम में थाना चौक को जामकर थानेदार का पुतला दहन किया । इस दौ
रान पार्टी कार्यकर्ताओं ने थानेदार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की ।
धीरे--धीरे यह थानेदार प्रकरण अब सियासी रंग पकड़ने लगा है । एक तरफ जहां यह लग रहा है की इस बार इस आतातायी थानेदार का विकेट गिरकर रहेगा और बड़ी कार्रवाई होकर रहेगी, तो दूसरी तरफ कयास यह भी लगाया जा रहा है की बड़े अधिकारियों तक मोटा नजराना पहुंचाकर यह जीवट थानेदार फिर से बच निकलेगा ।
संसय बरकरार है की आखिर इस थानेदार का क्या होगा ?साक्ष्य रहते हुए इस थानेदार पर कार्रवाई में आखिर देरी क्यों हो रही है ?आखिर बड़े अधिकारी इस थानेदार पर कार्रवाई करने से डर क्यों रहे हैं ? कहते हैं की समरथ के नहीं कछु दोष गोसाईं....पैसा,रसूख,पैरवी और प्रभाव के सामने में अक्सर न्याय घुटने टेक देता है ।कहीं इस मामले में भी सभी कुछ टांय--टांय फिस्स ना हो जाए....

बिहार की ख़बरें*

◆ सासाराम- डेहरी के पतपुरा में जमीन विवाद में गला दबाकर एक व्यक्ति की हत्या ।
◆ हाजीपुर-पेट्रोल पंप से 3.5 लाख की लूट ।लूट के दौरान फोड़े 4 बम ।2 जिंदा बम बरामद ।एक पेट्रोल पंप कर्मी घायल ।महुआ के मगरू चौक पर वारदात ।
◆ भोजपुर- विषाक्त दूध पीने से 3 बच्चों की हालत बिगड़ी ।ईलाज के लिए सदर अस्पताल में भर्ती ।दोबहा ओपी के कडरा गांव का मामला ।
◆ औरंगाबाद-बस-ट्रक की टक्कर । बस सवार 10 यात्री घायल ।सदर अस्पताल में सभी घायल यात्री भर्ती बारूण के टेंगड़ा गांव के पास हुआ हादसा ।

🌅 शुभ प्रभातम् 🌅 🌺 आज का पंचांग 🌺

🌅 शुभ प्रभातम् 🌅
🌺 आज का पंचांग 🌺
दिनांक-   04 अगस्त 2016
दिन - गुरुवार
संवत्सर नाम - सौम्य
विक्रम संवत- 2073
शक संवत -1938
अयन - दक्षिणायन
गोल - उत्तर
ऋतु - वर्षा
मास - श्रावण
पक्ष -  शुक्ल पक्ष
तिथि-  द्वितीया
नक्षत्र - मघा
योग - वरीयान
करण- वालव
दिशा शूल- दक्षिण दिशा में
🌺🌻धर्मसम्राट स्वामी करपात्रि जयन्ती🌻🌺
🌹🌻सांस्कृतिक कोश🌻🌹
सबसे पहले मंदिर शब्द का वर्णन शतपथ ब्राह्मण में मिलता है ।
🌚  राहुकाल-  दिन के  01:30 से 03:00 बजे तक ।
     🌹🌺सुविचार 🌺🌹
   मुख को साफ रखने हेतु जितना कुल्ला करना आवश्यक है उतना ही वाणी संयम व खाद्य संयम भी है ।
            🙏सर्वे भवन्तु सुखिन:🙏

सहरसा SDPO का "दारोगा राज की नंगी तस्वीर, ये थानेदार है या गुंडा" ख़बर पर बयान


सहरसा टाईम्स के रिपोर्ट : सहरसा सदर थानाध्यक्ष संजय सिंह के द्वारा एक पीड़ित के साथ दुर्व्यवहार मामले में एसडीपीओ सुबोध विश्वास ने शुरू की जांच ।कहा की पीड़ित के साथ दुर्व्यवहार कहीं से भी जायज नहीं ।जांच के बाद थानाध्यक्ष पर होगी उचित कार्रवाई ।

अगस्त 03, 2016

*बिहार अबतक*

★ हाजीपुर-ट्रक से कुचल कर बच्ची की मौत ।पटेढ़ी बेलसर थाना क्षेत्र की घटना ।
◆ मुंगेर- भारी मात्रा में अवैध हथियार बरामद ।हथियार बनाने का सामान भी बरामद ।10 गिरफ्तार ।रामनगर के पाटम में हुई पुलिस की कार्रवाई ।
◆ *बक्सर-सिकरौल थाना प्रभारी निलंबित ।एसपी ने थाना प्रभारी पर की कार्रवाई ।ग्रामीण डॉक्टर हत्या मामले में लापरवाही का आरोप ।*
★ पटना- विधानसभा पोर्टिकों में बीजेपी का प्रदर्शन ।सदन की कार्यवाही शुरू होने के पहले तिरंगे के साथ प्रदर्शन ।
♀ भोजपुर- टैंकर और पार्सल वैन की टक्कर ।एक की मौत । उदवंतनगर के कसाप गांव की घटना ।
★ पटना- DM संजय कुमार अग्रवाल ने आंगन मोबाइल एप किया लॉन्च ।
★ दानापुर-साकेत निर्माण विभाग के गोदाम में लगी आग ।मौके पर पहुंची दमकल की गाड़ियां ।खगौल के घनश्याम स्कूल के पास की घटना ।
♂ प चंपारण-नशाखुरानी गिरोह के शिकार हुए 4 रेल यात्री ।गोरखपुर- नरकटियागंज ट्रेन में मिले चारों बेहोश यात्री ।
♀ हाजीपुर- इंटर टॉपर्स घोटाला मामले में SIT ने आरोपी राहुल राज को किया गिरफ्तार ।चांदपुरा थाना इलाके से हुई गिरफ्तारी ।
● वैशाली- ट्रक से कुचलकर लड़की की मौत ।बेलसर ओपी के साईं पेट्रोल पम्प के पास हुआ हादसा ।
■ हाजीपुर- ट्रक और ऑटो की टक्कर ।मौके पर ऑटो ड्राइवर की मौत ।औद्योगिक थाना के चौरसिया चौक पर हुआ हादसा ।

*अपनी बात*

अपनी बात---थोड़ी भावनाओं की तासीर,थोड़ी दिल की रजामंदी और थोड़ी जिस्मानी धधक वाली मुहब्बत कई शाख पर बैठती है ।लेकिन रूहानी मुहब्बत ना केवल एक जगह काबिज और कायम रहती है बल्कि ताउम्र उसी इक शख्सियत के संग कुलाचें भरती है ।