ह्त्या के
तीन सप्ताह हैं गुजरने वाले लेकिन पुलिस पानी पर डंडा मारने में है जुटी
हुयी......
सहरसा टाईम्स विशेष रिपोर्ट: बिहार में पुलिस के ढुलमुल और अलमस्त रवैये के
वाकये अब आम बात हो गयी है.ताजा वाकया सहरसा पुलिस से जुड़ा है जो अपने
बिगडैल कार्यशैली को लेकर विगत कई वषों से खासा बदनाम रही है.सहरसा पुलिस
के बदमिजाज रवैये से तंग आकर एक परिवार ने
इंसाफ के लिए अब जान देने की धमकी तक दे दी है.मामला सहरसा जिला मुख्यालय
का है जहाँ
हत्या के करीब तीन सप्ताह के बाद भी एक मासूम की ह्त्या का मुजरिम ना केवल
पुलिस की पकड़ से बाहर है बल्कि पुलिस की जांच भी शिथिल और मरियल है.
सबसे पहले चलिए उस घर में जिसने अपने घर के इकलौते चिराग को
खोया है.इस घर का जर्रा--जर्रा आसूओं से तर और मातम में डूबा हुआ है.इस
रोती--बिलखती माँ को देखिये इनकी तो दुनिया ही उजर गयी.इनका
इकलौता बेटा अब इस दुनिया में नहीं है.बीते 20 जुलाई की शाम को इस घर के
इकलौते चिराग रिशुराज की ह्त्या जिला सह कमिशनरी मुख्यालय में डीआईजी,एस.पी
ऑफिस से महज आधा किलोमीटर की
दुरी पर कर दी गयी थी,लेकिन हत्या के करीब तीन सप्ताह बीतने को हैं लेकिन
पुलिस अब तक ना तो वारदात में इस्तेमाल हथियार को बरामद कर पाई है और ना ही
दो नामजद
अभियुक्तों में से एक को गिरफ्तार ही कर पाई है.पुलिस की इस लापरवाही से
तंग
आकर पीड़ित परिवार ने अब जान देने की धमकी दी है वो भी सहरसा एस.पी ऑफिस के
सामने. मृतक बच्चे के पिता दीपक मिश्रा के जीवन का लक्ष्य खत्म हो चुका है.घर का दीपक ही बुझ गया है.
इधर मामले के लगभग तीन सप्ताह हो चले हैं और पुलिस अगले एक हफ्ते के
भीतर छानबीन मुकम्मिल कर लेने की बात कर रही है.इस काण्ड की जांच की
जिम्मेवारी एक खास अधिकारी दिलीप मिश्रा,A.S.P को सौंपी गयी है जो अभीतक जांच को दो कदम भी आगे
नहीं ले जा पाए हैं लेकिन आदतन दावों की बौछार वे जरुर कर रहे हैं.
पुलिस ने मामले में नामजद दो आरोपियों में से एक को
गिरफ्तार
किया है जो मृतक का फेसबुक पर बना दोस्त लक्की सिंह है.लेकिन मृतक
के पिता ने लक्की के पिता मुरारी सिंह जो पहले से अपराधिक चरित्र का रहा
है उसे भी नामजद आरोपी बनाया है.मुरारी सिंह अभीतक फरार है और पुलिस के
आलाधिकारी अजीत कुमार सत्यार्थी,एस.पी लक्की सिंह को लेकर यह कह रहे हैं की लक्की सिंह ने अपना अपराध
भी कबूल कर लिया है.उसपर धारा 302 के तहत मुकदमा चलेगा. अब इस मामले के असली पेंच की तरफ चलिए.आत्मसमर्पण के बाद पुलिस की
गिरफ्त में आया आरोपी लक्की सिंह नाबालिक है और पुलिस की
हिरासत में वो एक विधायक नीरज कुमार बबलू जो की सुपौल जिले के छातापुर के
जदयू विधायक हैं की कोशिशों
के बाद आया था लेकिन पुलिस इसके लिए भी अपना पीठ थपथपा रही है.लेकिन
इस मामले का दूसरा आरोपी जो उस आरोपी बच्चे का पिता है वो पुलिस की पकड़ से
अभीतक बाहर है.ऐसे में पुलिस की जांच पर सवाल उठाना लाजिमी है की पहला आखिर
घटना के करीब तीन सप्ताह गुजर जाने के बाद भी पुलिस ह्त्या में
इस्तेमाल किये गए हथियार को अभीतक बरामद क्यों नहीं कर पाई.दूसरा इतने
दिनों के बाद भी आखिर किन कारणों से पुलिस दुसरे आरोपी को गिरफ़्तार नहीं कर
पायी.तीसरा अगर मासूम कातिल विधायक की पहल पर सरेंडर हुआ तो क्या पिता के
सरेंडर या गिरफ़्तारी
नहीं होने के पीछे खेल कुछ और तो नहीं …
प्राथमिकी में दर्ज रिपोर्ट के मुताबिक बच्चों के बीच कुछ
दिनों पहले हुई लडाई का यह नतीजा था.मृतक बच्चे को कई बार
धमकी भी दी गयी थी लेकिन पुलिस ने इस पहलू पर पर भी अभी तक जाँच नहीं की
है और हत्या का कारण भी अभीतक साफ नहीं हुआ है.पीड़ित परिवार पुलिस पर जिस
तरह से मामले को रफा
-दफा करने का आरोप लगा रहे हैं इसके पीछे भी दम है.पुलिस की पहुँच से फरार
आरोपी का अपराधिक रिकॉर्ड रहा है और गैर लाइसेंसी हथियार रखने के जुर्म
में उसे पहले गिरफ्तार भी किया जा चुका है.इधर मृतक नाबालिक बच्चे की कहानी
तो
और भी हैरान करने वाली है और ये कहानी बयां होती है उसके फेसबुक एकाउंट
से.फेसबुक पर उसने पिछले माह जुलाई में दो रिवाल्वर की एक तस्वीर पोस्ट
की थी जिसमे लिखा था …. THIS IS MY GUN ..सवाल बड़ा है की दशवीं कक्षा में
पढने वाले रिशु राज को हथियार प्रेम कैसे और क्यों हुआ.सूत्रों से मिली
जानकारी के मुताबिक़ इंटरमिडीएट में पढने वाले मासूम हत्यारे लक्की सिंह से
रिशु राज की दोस्ती फेसबुक के माध्यम से हुयी थी.रिशु राज का घर स्थानीय
रहमान चौक पर है जबकि लक्की का घर उसके घर से महज कुछ दुरी पर ही तिरंगा
चौक पर.वैसे यह बताना भी जरुरी है की मृतक के पिता दीपक मिश्रा का भी
पुराना इतिहास बेहतर नहीं रहा है.
पुलिस की जांच में अभीतक जो तस्वीर निकल कर आई है उसके
मुताबिक़ हथियार देखने--दिखाने में गोली चल गयी जिसमें रिशुराज मारा
गया.लेकिन आखिर वह हथियार कहाँ गया जिससे गोली चली.इस मामले में कई पहलू
हैं जिसपर पुलिस को गौर करना चाहिए.कहीं इस ह्त्या के पीछे कोई रंजिश तो
नहीं.इस ह्त्या के पीछे कहीं कोई लड़की वजह तो नहीं.किसी तरह का
लेन--देन,नशा प्रेम या फिर कोई और कारण तो नहीं.लेकिन पुलिस इन बिन्दुओं पर
जांच करने से परहेज करती दिख रही रही है.
इस खबर में हम आपको घटना की रात यानि 20 जुलाई की रात
की की जानकारी भी देना चाह रहे हैं.घटना की शाम घटनास्थल से पेंथर जवान
अरुण सिंह ने गोली लगने से घायल हुए रिशुराज को मोटरसाईकिल पर
लादकर सदर अस्पताल लाया था.इनकी वर्दी खून से लथ--पथ थी.सदर अस्पताल में
घायल रिशुराज के इलाज को लेकर सहरसा के भाजपा विधायक आलोक रंजन ने अपने
समर्थकों के साथ मिलकर जमकर बबाल भी किया था.विधायक ने मौके पर मौजूद
डॉक्टर
एस.के.आजाद को ना केवल जमकर फटकार लगाई थी बल्कि उनको धकियाते हुए
एम्बुलेंस पर भी चढ़वाया था.रिशुराज को बेहतर इलाज के लिए PMCH रेफर किया
गया था लेकिन रास्ते में ही सुपौल के समीप उसकी मौत हो गयी थी.
बहरहाल अब आगे यह देखना काफी दिलचस्प होगा की पुलिस कितने दिनों में मामले के दुसरे मुख्य आरोपी मुरारी सिंह की गिरफ़्तारी करती है और ह्त्या में इस्तेमाल हथियार कब बरामद होता है.यही नहीं पुलिस की जांच बस खेल--खेल में हुयी ह्त्या का मामला बनकर खत्म हो जाता है या फिर ह्त्या के पीछे के कुछ अन्य रहस्यों पर से भी पर्दा उठता है.इस पुरे मामले में पुलिस की जांच आखिर जहां पर भी खत्म हो लेकिन हम फेसबुक की दोस्ती मंहगी पड़ सकती है इसका एलान करते हैं. सहरसा टाईम्स कम उम्र के नौनिहालों से लेकर हर उम्र के लोगों लोगों को खबरदार करता है की फेसबुक की दोस्ती जानलेवा और बड़ी तबाही वाली साबित हो सकती है.फेसबुक पर दोस्ती करें लेकिन ज़रा संभल के.
बहरहाल अब आगे यह देखना काफी दिलचस्प होगा की पुलिस कितने दिनों में मामले के दुसरे मुख्य आरोपी मुरारी सिंह की गिरफ़्तारी करती है और ह्त्या में इस्तेमाल हथियार कब बरामद होता है.यही नहीं पुलिस की जांच बस खेल--खेल में हुयी ह्त्या का मामला बनकर खत्म हो जाता है या फिर ह्त्या के पीछे के कुछ अन्य रहस्यों पर से भी पर्दा उठता है.इस पुरे मामले में पुलिस की जांच आखिर जहां पर भी खत्म हो लेकिन हम फेसबुक की दोस्ती मंहगी पड़ सकती है इसका एलान करते हैं. सहरसा टाईम्स कम उम्र के नौनिहालों से लेकर हर उम्र के लोगों लोगों को खबरदार करता है की फेसबुक की दोस्ती जानलेवा और बड़ी तबाही वाली साबित हो सकती है.फेसबुक पर दोस्ती करें लेकिन ज़रा संभल के.
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